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पंजाब में बीजेपी अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने विधानसभा चुनावों को लेकर बड़ा ऐलान…

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पंजाब में भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर बड़ा ऐलान कर दिया है. केवल सिंह ढिल्लों ने बताया कि पार्टी ने इसकी पूरी तैयारियां कर ली हैं. केवल ढिल्लों ने हाल ही में राज्य के कई जिलों का दौरा किया था. जिसमें उन्होंने कहा कि जनता ने बीजेपी को समर्थन देने का भरोसा दिया है.

केवल सिंह ढिल्लों ने डॉ. भीमराव आंबेडकर से जुड़े पंच तीर्थ स्थलों की यात्रा के लिए तीन बसों को रवाना किया. इस यात्रा के जरिए श्रद्धालुओं को ऐसे ऐतिहासिक स्थलों पर ले जाया जाएगा जो स्थल प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में बनाए गए हैं. यह यात्रा 14 से 21 जून तक चलेगी. लोगों को इन स्थलों के महत्व के बारे में जागरूक करने के प्रयास किए गए हैं.

आम आदमी पार्टी पर साधा निशाना

बीजेपी नेता केवल सिंह ढिल्लों ने बीते रविवार (14 जून) को आम आदमी पार्टी पर भी जमकर निशाना साधा है. उन्होंने कहा, “राज्य की जनता ने आम आदमी पार्टी को खारिज कर दिया, इसलिए अब पंजाब में उनकी बात नहीं बनने वाली है.” इस मौके पर ढिल्लों ने आप नेता अश्वनी कुमार को भारतीय जनता पार्टी ज्वाइन करवाई.

इन पांच तीर्थस्थलों की यात्रा करेंगे श्रद्धालु

श्रद्धालुओं द्वारा महू जन्मभूमि के दर्शन कराए जाएंगे. सभी दीक्षाभूमि नागपुर, महापरिनिर्वाण स्थल दिल्ली, चैत्यभूमि मुंबई और वर्चुअल शिक्षा भूमि दिल्ली (लंदन) भी शामिल है. बता दें कि यह सभी तीर्थस्थल आंबेडकर के जीवन संघर्ष और सामाजिक न्याय से जुड़े हुए हैं. बीजेपी सरकार द्वारा इन स्मारकों को 2000 करोड़ रुपये खर्च कर विकसित किया है.

इस यात्रा का उद्देश्य बाबा साहेब का संदेश समाज के हर तबके तक पहुंचाने का है. इस ऐतेहासिक यात्रा में 150 के करीब श्रद्धालु हिस्सा ले रहे हैं. इस जत्थे का नेतृत्व बीजेपी अनुसूचित जाति मोर्चा पंजाब के प्रदेश अध्यक्ष एसआर लद्धड़ करेंगे. लद्धड़ ने इस यात्रा के उद्देश्य की जानकारी दी है.

महंगाई में तेजी, मई में 9.68% पर पहुंची थोक महंगाई दर, ईंधन की बढ़ी हुई कीमत…

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देश में थोक महंगाई में तेजी देखी जा रही है, जो मई के महीने में बढ़कर 9.68% हो गई. वहीं, अप्रैल में थोक महंगाई दर 8.26% थी. ईंधन की बढ़ी हुई कीमत इसकी सबसे बड़ी वजह रही.

देश में थोक महंगाई मई 2026 में बढ़कर 9.68 प्रतिशत पर आ गई, जो अप्रैल 2026 में 8.26 प्रतिशत थी. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने सोमवार को यह आंकड़े जारी किए – खास बात यह है कि इस बार मंत्रालय ने पुराने आधार वर्ष 2011-12 की जगह नए आधार वर्ष 2022-23 के आधार पर WPI जारी किया है.

ईंधन सबसे बड़ा झटका

थोक महंगाई में सबसे ज्यादा उछाल ईंधन और बिजली क्षेत्र में आई. मई 2026 में फ्यूल एंड पावर की महंगाई 30.33 प्रतिशत रही जो अप्रैल में 24.89 प्रतिशत थी. मिनरल ऑयल यानी पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें 49.82 प्रतिशत उछलीं. कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की महंगाई 61.51 प्रतिशत रही. पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण वैश्विक तेल बाजार में उथलपुथल इसकी मुख्य वजह मानी जा रही है.

प्राथमिक वस्तुएं और मैन्युफैक्चरिंग

प्राइमरी आर्टिकल्स यानी खेती और खनन से जुड़ी चीजों की महंगाई मई में 4.99 प्रतिशत रही, जो अप्रैल में 3.78 प्रतिशत थी. नॉन-फूड आर्टिकल्स 9.49 प्रतिशत महंगे हुए. मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की महंगाई 7.48 प्रतिशत रही, जो अप्रैल के 6.68 प्रतिशत से अधिक है. केमिकल्स, बेसिक मेटल्स और टेक्सटाइल में उल्लेखनीय तेजी देखी गई.

खाने-पीने की चीजें

WPI फूड इंडेक्स की महंगाई मई 2026 में 4.49 प्रतिशत रही, जो अप्रैल में 3.11 प्रतिशत थी. खाद्य तेल, अंडे-मांस-मछली और खाद्य उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी इसकी वजह रही. हालांकि दालें, आलू और प्याज की कीमतें साल भर पहले के मुकाबले अभी भी कम हैं.

नई WPI सीरीज आज से लागू

सरकार ने आज से WPI का आधार वर्ष 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया है. नई सीरीज में वस्तुओं की संख्या 697 से बढ़ाकर 957 की गई है. साथ ही आज से Output Producer Price Index और Service Producer Price Index भी जारी किए गए हैं. सेवा क्षेत्र में बैंकिंग, बीमा, टेलीकॉम, रेलवे और एयर पैसेंजर सेवाएं शामिल की गई हैं. अगली WPI रिपोर्ट जून 2026 के लिए 14 जुलाई को आएगी.

राम मंदिर के दान में कथित हेराफेरी का मामला, सुप्रीम कोर्ट से संज्ञान लेने की मांग…

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याचिकाकर्ता ने बताया है कि राम मंदिर के दान के पैसों में भारी वित्तीय हेराफेरी और भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं. कुछ पूर्व कर्मचारियों और संदिग्धों के पास आय से अधिक संपत्ति की बातें भी सामने आई हैं.

अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के दान की कथित चोरी पर सुप्रीम कोर्ट से स्वतः संज्ञान लेने की मांग की गई है. एक वकील ने चीफ जस्टिस को पत्र याचिका भेजकर इसे करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय बताते हुए निष्पक्ष जांच का अनुरोध किया है. अनूप अवस्थी नाम के वकील ने कहा है कि लोगों का भरोसा बनाए रखने के लिए कोर्ट की निगरानी में जांच करवाना जरूरी है.

पत्र में कहा गया है कि यह मंदिर 2020 में आए सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के चलते बने ट्रस्ट के तहत संचालित है. 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा करोड़ों भारतीयों के लिए एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक क्षण था. अब वहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु हर दिन पहुंच रहे हैं. श्रद्धालुओं की तरफ से मंदिर के दानपात्र में दिया जाने वाला दान कोई वित्तीय लेन-देन नहीं है. यह भगवान के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा, समर्पण और विश्वास का प्रतीक है.

अनूप अवस्थी ने बताया है कि राम मंदिर के दान के पैसों में भारी वित्तीय हेराफेरी और भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं. कुछ पूर्व कर्मचारियों और संदिग्धों के पास आय से अधिक संपत्ति की बातें भी सामने आई हैं. उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर 3 सदस्यीय एसआईटी का गठन किया है, लेकिन अभी तक इस मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है.

इस चिट्ठी में कहा गया है कि इतने अहम मामले में सिर्फ प्रशासनिक जांच काफी नहीं है. लोगों को डर है कि समय के साथ इस मामले को दबा दिया जाएगा. देवता को समर्पित संपत्ति की चोरी कोई साधारण आपराधिक मामला नहीं है. चूंकि यह ट्रस्ट खुद सुप्रीम कोर्ट के आदेश से बना है, इसलिए इसकी पारदर्शिता बनाए रखना उसका संवैधानिक दायित्व है.

याचिकाकर्ता ने मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट इस कथित हेराफेरी की जांच सीबीआई या किसी दूसरी स्वतंत्र एजेंसी से करवाए. जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए कोर्ट उसकी निगरानी करे. याचिकाकर्ता ने यह मांग भी की है कि मंदिर में दान के संग्रह और खर्च के सभी पहलुओं की गहन जांच हो. भविष्य में दान में मिलने वाले पैसों और संपत्तियों की सुरक्षा के लिए कोर्ट की निगरानी वाली कोई व्यवस्था बनाई जाए.

मानसून की रफ्तार पर क्यों लगा ब्रेक! 28 फीसदी कम बारिश, झुलसा रही गर्मी, जान लीजिए क्या है वजह…

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जून के दूसरे सप्ताह तक देशभर में बारिश का जो दौर तेज होना चाहिए था, वह फिलहाल धीमा पड़ता दिखाई दे रहा है. आईएमडी के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 4 जून से 14 जून के बीच देश में सामान्य से 28 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है. यही वजह है कि मौसम वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ गई है और किसान भी आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं.

आईएमडी के अनुसार, इस अवधि में देश में औसतन 47.7 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन वास्तविक वर्षा केवल 34.3 मिमी दर्ज की गई. आंकड़े साफ संकेत दे रहे हैं कि मानसून की रफ्तार फिलहाल कमजोर पड़ गई है और इसका असर देश के बड़े हिस्से में दिखाई दे रहा है.

कारण है जेट स्ट्रीम

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि समस्या नमी की कमी नहीं है. असली कारण ऊपरी वायुमंडल में बन रही एक असामान्य स्थिति है, जिसने मानसून की सामान्य प्रक्रिया को प्रभावित कर दिया है.

इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में पश्चिमी जेट स्ट्रीम है. यह ऊपरी वायुमंडल में बहने वाली तेज गति की वायु धारा होती है. इस बार यह सामान्य स्थिति से अधिक दक्षिण की ओर खिसक गई है. इसके कारण ऊपरी स्तर की पूर्वी जेट वायु धारा दब गई है, जो भारतीय मानसून को गति देने में अहम भूमिका निभाती है.

नतीजा यह हुआ कि बंगाल की खाड़ी में बनने वाली मौसम प्रणालियां देश के अंदरूनी हिस्सों तक प्रभावी ढंग से आगे नहीं बढ़ पा रही हैं. बारिश लाने वाले सिस्टम या तो कमजोर पड़ रहे हैं या फिर सीमित क्षेत्रों तक सिमटकर रह जा रहे हैं. इससे नमी का वितरण प्रभावित हो रहा है और कई राज्यों में अपेक्षित बारिश नहीं हो पा रही है.

यहां आकर 5 दिनों से थम गया है मानसून
मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून पिछले पांच दिनों से कोंकण के हरने और मध्य महाराष्ट्र के सोलापुर क्षेत्र से आगे नहीं बढ़ पाया है. आमतौर पर जून के मध्य तक मानसून राज्य के बड़े हिस्से को कवर कर लेता है, लेकिन इस बार इसकी रफ्तार रुक गई है.

हालांकि मौसम विभाग ने 18 जून के बाद हालात में बदलाव की संभावना जताई है पूर्वानुमान के मुताबिक 18 जून से 2 जुलाई के बीच महाराष्ट्र के कई हिस्सों में मानसून दोबारा सक्रिय हो सकता है और आगे बढ़ने की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है इससे राज्य के उन क्षेत्रों को राहत मिल सकती है, जहां किसान बारिश का इंतजार कर रहे हैं.

अगले 4-5 दिनों में मानसून को मिल सकती है नई ताकत

मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान में उम्मीद की किरण भी दिखाई दे रही है. विभाग का कहना है कि अगले 4 से 5 दिनों के दौरान दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बन रही हैं.

इन परिस्थितियों के चलते महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड, बिहार और दक्षिण छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में मानसून आगे बढ़ सकता है. यदि यह अनुमान सही साबित होता है तो देश के बड़े हिस्से में बारिश की गतिविधियां तेज हो सकती हैं और मौजूदा वर्षा घाटा कुछ हद तक कम हो सकता है.

पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

जहां देश के कई हिस्से बारिश की कमी से जूझ रहे हैं, वहीं पूर्वोत्तर भारत और पूर्वी हिमालयी क्षेत्र में भारी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है. मौसम विभाग ने अगले 6 से 7 दिनों के दौरान उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है.

इस तरह एक ओर देश का बड़ा हिस्सा मानसून की धीमी रफ्तार से परेशान है, तो दूसरी ओर पूर्वोत्तर राज्यों में बारिश अपनी पूरी ताकत दिखा रही है.  मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि 18 से 20 जून के बीच बनने वाली नई मौसम परिस्थितियां ही तय करेंगी कि मानसून देशभर में अपनी खोई हुई रफ्तार कितनी जल्दी वापस हासिल कर पाता है.

ईरान-अमेरिका समझौते पर कांग्रेस की पहली प्रतिक्रिया…

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कांग्रेस महासचिव जयराम नरेश ने अमेरिका और ईरान के बीच 19 जून को जिनेवा में प्रस्तावित शांति समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि यह पश्चिम एशिया में शत्रुता खत्म करने की दिशा में सकारात्मक कदम है. हालांकि उन्होंने कहा कि समझौते की पूरी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं हुई है, लेकिन उम्मीद है कि अमेरिका, ईरान और इजरायल सभी इसका पालन करेंगे और यह आगे स्थायी शांति का रास्ता खोलेगा.

होर्मुज स्ट्रेट खुलने से भारत को मिलेगी राहत

जयराम नरेश ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट के बिना किसी प्रतिबंध के दोबारा खुलने से भारत को निश्चित रूप से बड़ी राहत मिलेगी. हालांकि उन्होंने चेताया कि इससे देश की अर्थव्यवस्था की मौजूदा संरचनात्मक समस्याएं खत्म नहीं होंगी, क्योंकि ये संकट पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने से पहले से ही मौजूद हैं.

अर्थव्यवस्था की चुनौतियां गिनाईं

उन्होंने कहा कि रुपया लंबे समय से दबाव में है और डॉलर की मांग-आपूर्ति के बीच अंतर लगातार बढ़ रहा है. साथ ही निजी निवेश की रफ्तार कई वर्षों से धीमी बनी हुई है, जो आर्थिक विकास को प्रभावित कर रही है.

तीन कारणों को बताया जिम्मेदार” जयराम नरेश ने मांग में कमी के लिए तीन प्रमुख कारण गिनाए-

पिछले एक दशक में वास्तविक मजदूरी में ठहराव.

चीन से आयात की डंपिंग रोकने में सरकार की विफलता, जिससे रिकॉर्ड व्यापार घाटा और MSME क्षेत्र पर दबाव बढ़ा.

टैक्स और जांच एजेंसियों को मिली अत्यधिक शक्तियों के कारण निवेश का माहौल खराब होना.

पाकिस्तान और विदेश नीति पर भी उठाए सवाल

कांग्रेस नेता ने कहा कि 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के बाद अलग-थलग पड़ा पाकिस्तान अब फिर से क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर प्रभाव हासिल करता दिख रहा है. उन्होंने इसे भारत की विदेश नीति के लिए गंभीर चुनौती बताया और कहा कि चीन के साथ पाकिस्तान की बढ़ती रणनीतिक साझेदारी चिंता का विषय है.

मोदी सरकार पर साधा निशाना

जयराम नरेश ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजरायल के प्रति संतुलित नीति नहीं अपनाई है. उन्होंने कहा कि भारत के राष्ट्रीय हित और लंबे समय से चली आ रही विदेश नीति की परंपरा संतुलित दृष्टिकोण की मांग करती है, लेकिन सरकार इस दिशा में अपेक्षित कदम नहीं उठा पाई है.

अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौते की ये हैं 14 बड़ी शर्तें…

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अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी संघर्ष को खत्म करने के लिए शांति समझौते पर सहमति बन गई है.16 जून (रविवार) को यूएस-ईरान के बीच पीस डील साइन होगी.

अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर जारी सस्पेंस आखिरकार खत्म हो चुका है. डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार (14 जून) को पीस डील का ऐलान किया. 16 जून (रविवार) को यूएस-ईरान के बीच डील साइन होगी, इसमें अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबफ शामिल होंगे. समझौते की शर्तों की डिटेल भी सामने आई है.

अमेरिका-ईरान डील के 3 चरण होंगे
1. MoU की घोषणा (14 जून) – सभी फ्रंट पर युद्ध तुरंत रूक जाएगा. ईरान पर लगा नेवल ब्लॉकेड खत्म होगा. ट्रंप के मुताबिक, होर्मुज खुलेगा.

  1. MoU साइन होने के 30 दिन में क्या-क्या होगा (19 जून)

    होर्मुज पूरी तरह खुलेगा. ईरान को फ्रीज किए गए कुल 24 बिलियन डॉलर में से 12 बिलियन डॉलर मिलेंगे.

  2. 60 दिन में क्या होगा?

    परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा होगी. ईरान को बाकी 12 बिलियन डॉलर मिल जाएंगे.

ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी ने यूएस-ईरान के बीच 14 सूत्रीय MoU की जानकारी प्रकाशित की है. इसमें 60 दिनों की बातचीत के दौरान ईरान की 24 अरब डॉलर की फ्रीज की गई संपत्तियों को रिलीज करने की मांग शामिल है. आइए जानते हैं

यूएस-ईरान पीस डील समझौते की शर्तें

1- लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों को तत्काल और स्थायी रूप से समाप्त किया जाएगा.
2-  60 दिनों की बातचीत के दौरान ईरान की 24 अरब डॉलर की फ्रीज की गई संपत्तियों को जारी किया जाएगा. इसमें से आधा पैसा बातचीत शुरू होने से पहले ही जारी हो जाएगा.
3 -ईरान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा और इस्लामी गणराज्य की संप्रभुता का सम्मान होगा.
4 – अमेरिका 30 दिन के भीतर ईरान के आसपास से सेना को वापस बुलाएगा.
5 –  ईरानी व्यवस्था के तहत होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने की अनुमति मिलेगी. नौसैनिक नाकाबंदी को हटाया जाएगा.
6 –  ईरान को अपने परमाण हथियार न बनाने के वादे पर कायम रहना होगा.
7 –  अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए ईरान के पुनर्निर्माण के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर की योजनाएं पेश करने की शर्त भी शामिल है.
8 –  ईरान तेल, पेट्रोकेमिकल उत्पादों और संबंधित निर्यातों पर लगे प्रतिबंधों को निलंबित करने का प्रस्ताव है. जिससे तेहरान को इससे होने वाली आय पर पूरा अधिकार मिल सके.
9 –   चर्चा केवल एनरिच्ड यूरेनियम के भविष्य, संवर्धन, प्रतिबंधों में राहत और आर्थिक पुनर्निर्माण तक ही सीमित रहेगी.
10- ईरान के मिसाइल कार्यक्रम और सहयोगी सशस्त्र समूहों को दिए जा रहे समर्थन को एजेंडा से बाहर रखा जाएगा.
11. शांति समझौते पर बातचीत के दौरान अमेरिका क्षेत्र में अतिरिक्त सेना की तैनाती नहीं करेगा और न ही नए प्रतिबंध लगाएगा.
12.  समझौते को पूरा करने के लिए एक मॉनिटरिंग सिस्टम बनाया जाएगा, इससे इसके कार्यान्वयन पर नजर रखी जाएगी.
13. फाइनल हुए समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव से मंजूरी दी जाएगी.
14. ईरान को अपने वित्तीय संसाधनों का इस्तेमाल करने की छूट मिलेगी.

ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी की ओर से समझौते की इन शर्तों की पुष्टि अभी तक ईरान या अमेरिका की ओर से नहीं की गई है. दोंनों पक्षों के औपचारिक वार्ता की ओर बढ़ने के साथ इसमें बदलाव हो सकता है.

ट्रंप ने किया शांति समझौते का ऐलान

यूएस प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार (15 जून) को अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते का ऐलान किया. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया  ट्रुथ पर पोस्ट कर लिखा, यह महान समझौता पूरे क्षेत्र में शांति और सुरक्षा लाएगा. समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरीके से खुल जाएगा. इससे क्षेत्र और दुनिया के लिए दोनों ओर से तेल की सप्लाई फिर से शुरू हो जाएगी!’

शांति समझौते पर क्या बोला ईरान?

ईरान ने इस शांति समझौते को MoU नाम दिया है. ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल की ओर से जारी किए गए बयान में कहा गया, ‘ईरान ने अमेरिका-इजरायल पर जीत हासिल कर ली है. तेहरान के लोगों के समर्थन और सेना के अथक प्रयासों के चलते कई महीनों की कठिन और लंबी बातचीत के बाद 14 जून की शाम को ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच शांति समझौते को अंतिम रूप दिया गया है.’

19 जून को शांति समझौते पर होंगे हस्ताक्षर

शांति समझौते पर शुक्रवार  (19 जून) को जेनेवा में हस्ताक्षर होंगे. ईरान से गालिबाफ और अब्बास अराघची और अमेरिकी की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस शामिल होंगे. समझौते के तहत, लेबनान सहित सभी मोर्चों पर युद्ध और सैन्य अभियान तत्काल और स्थायी रूप से समाप्त हो जाएंगे. इसके अलावा, ईरान के खिलाफ नौसैनिक नाकाबंदी तत्काल और पूरी तरह से हटा ली जाएगी.

दिल्ली में बादल छाए रहने के साथ आंधी-तूफान आने और बिजली चकमने के साथ हल्की से मध्यम बारिश…

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मौसम विभाग ने दिल्ली में बादल छाए रहने के साथ आंधी-तूफान आने और बिजली चकमने के साथ हल्की से मध्यम बारिश का पूर्वानुमान जताया है. हालांकि, न्यूनतम तापमान सामान्य से ज्यादा रहेगा.

दिल्ली के कुछ हिस्सों में सोमवार (15 जून) की सुबह हल्की बारिश हुई और मौसम कार्यालय ने आंधी-तूफान आने और बिजली चमकने के संबंध में ‘रेड’ और ‘ऑरेंज’ अलर्ट जारी किया है. पालम में 1.3 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि आयानगर में 0.6 मिलीमीटर बारिश हुई. लोधी रोड पर हल्की बूंदाबांदी हुई. राष्ट्रीय राजधानी के कई हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य से अधिक रहा.

भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार दिल्ली के प्रमुख मौसम केंद्र सफदरजंग वेधशाला में न्यूनतम तापमान 28.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 0.7 डिग्री अधिक है. पालम में न्यूनतम तापमान 25.4 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि लोधी रोड और रिज स्टेशन पर क्रमशः 26 और 25.5 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ. आयानगर में न्यूनतम तापमान 26.6 डिग्री सेल्सियस रहा.

हल्की से मध्यम बारिश की संभावना

मौसम विभाग के अनुसार दक्षिण-पूर्वी, पूर्वी, मध्य, उत्तर-पूर्वी, दक्षिणी, दक्षिण-पश्चिमी, पश्चिमी, उत्तर-पश्चिमी और उत्तरी दिल्ली, नयी दिल्ली तथा शाहदरा के कुछ हिस्सों में मेघ गर्जन व 60-70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने तथा हल्की से मध्यम बारिश की प्रबल संभावना है.

39 डिग्री तक रह सकता है अधिकतम तापमान 

मौसम कार्यालय ने दिन में सामान्यत: बादल छाए रहने के साथ आंधी-तूफान आने और बिजली चकमने तथा हल्की से मध्यम बारिश का पूर्वानुमान जताया है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार सुबह दिल्ली में औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 135 दर्ज किया गया जो ‘मध्यम’ श्रेणी में आता है. मौसम विभाग के अनुसार अधिकतम तापमान लगभग 39 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है.

Noida International Airport: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर कमर्शियल ऑपरेशन शुरू…

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जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर कमर्शियल ऑपरेशन शुरू हो गया है. इंडिगो ने पहली कमर्शियल सर्विस शुरू की है और आकासा एयर 16 जून से इसमें शामिल होने वाली है.

जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से 15 जुलाई (आज) को कमर्शियल फ्लाइट ऑपरेशन की ऐतिहासिक शुरुआत हो गई. पहले दिन इंडिगो (Indigo) ने लखनऊ के लिए अपनी पहली उड़ान भरी. इस स्पेशल फ्लाइट में 172 किसान (जिनमें 20 महिलाएं भी शामिल हैं) सवार हुए. ये वे किसान रहे, जिनकी जमीन एयरपोर्ट प्रोजेक्ट के लिए ली गई थी.

जेवर के विधायक धीरेंद्र सिंह के साथ ये किसान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने लखनऊ पहुंचे और उनका आभार जताया. कुल मिलाकर नोएडा से लखनऊ के लिए पहली फ्लाइट (6E-2278) संचालित की गई, जो आगे बेंगलुरु के लिए उड़ान भरी. इंडिगो का प्लान आगे आने वाले समय में धीरे-धीरे इस एयरपोर्ट को 16 से ज्यादा शहरों से कनेक्ट करने का है, जिनमें हैदराबाद, अमृतसर, चंडीगढ़, जयपुर, श्रीनगर और पंतनगर शामिल हैं.

अकासा एयर का शेड्यूल

अकासा एयर 16 जून, मंगलवार से दिल्ली-एनसीआर के इस नए गेटवे से बेंगलुरु और नवी मुंबई के लिए अपनी रोजाना सीधी उड़ानें शुरू करेगी. एयरलाइन के आने से नेशनल कैपिटल रीजन और दो बड़े बिजनेस सेंटर्स के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होने की उम्मीद है.

इंडिगो का पूरा शेड्यूल 

रूट फ्लाइट नंबर कब से हो रही शुरुआत? कबकब चलेगी?
लखनऊ-नोएडा 6E 2278 15 जून उद्घाटन के मौके पर
नोएडा-बेंगलुरु 6E 2278 15 जून उद्घाटन के मौके पर
हैदराबाद-नोएडा 6E 2490 15 जून रोजाना
नोएडा-अमृतसर 6E 2490 15 जून रोजाना
अमृतसर-नोएडा 6E 2491 15 जून रोजाना
नोएडा-हैदराबाद 6E 2491 15 जून रोजाना
बेंगलुरु-नोएडा 6E 2455 16 जून रोजाना
नोएडा-जम्मू 6E 2455 16 जून रोजाना
जम्मू-नोएडा 6E 2456 16 जून रोजाना
नोएडा-बेंगलुरु 6E 2456 16 जून रोजाना
नवी मुंबई-नोएडा 6E 2729 1 जुलाई रोजाना
नोएडा-श्रीनगर 6E 2729 1 जुलाई रोजाना
श्रीनगर-नोएडा 6E 2726 1 जुलाई रोजाना
नोएडा-नवी मुंबई 6E 2726 1 जुलाई रोजाना
नोएडा-जोधपुर 6E 7675 1 जुलाई रोजाना
नोएडा-धर्मशाला 6E 7671 1 जुलाई रोजाना
नोएडा-भोपाल 6E 7653 1 जुलाई रोजाना
नोएडा-देहरादून 6E 7644 1 जुलाई रोजाना
नोएडा-बरेली 6E 7626 1 जुलाई सोम/बुध/शुक्र/ रवि
नोएडा-किसनगढ़ 6E 7626 1 जुलाई मंगल/गुरु/शनिवार
नोएडा-लखनऊ कई सारी 1 जुलाई रोजाना
नोएडा-जयपुर कई सारी 1 जुलाई रोजाना
नोएडा-पटनानगर कई सारी 1 जुलाई रोजाना
नोएडा-चंडीगढ़ कई सारी 1 जुलाई रोजाना

अकासा एयर का शेड्यूल

रूट  फ्लाइट नंबर प्रस्थान का समय आगमन कब से होगी शुरुआत
बेंगलुरु-नोएडा QP 1575 16:25 19:15 16 जून
नोएडा-बेंगलुरु QP 1576 19:55 23:00 16 जून
नवी मुंबई-नोएडा QP 2017 07:25 09:35 16 जून
नोएडा-नवी मुंबई QP 2018 10:15 12:30 16 जून

इसके क्या होंगे फायदे

  • नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुरू होने से दिल्ली एयरपोर्ट (IGI) के ट्रैफिक से निजात मिलेगी. सुरक्षा चेकिंग और एयरपोर्ट पर लगने वाले वाले लंबे जाम से राहत मिलेगी.
  • जेवर, यमुना एक्सप्रेसवे, ग्रेटर नोएडा और नोएडा के आसपास जमीन और फ्लैट्स के दाम तेजी से बढ़ जाएंगे. इससे रियल एस्टेट सेक्टर में तेजी आएगी.
  • रोजगार के लाखों नए अवसर खुलेंगे. ट्रांसपोर्ट और डिलीवरी सेक्टर में रोजगार के मौके बढ़ेंगे. साथ ही एविएश, ग्राउंड हैंडलिंग, हॉस्पिटैलिटी, रीटेल और सिक्योरिटी सेक्टर में लाखों युवाओं को नौकरियां मिलेंगी.
  • इससे कनेक्टविटी आसान होगी और उद्योग व निवेश के कई नए रास्ते भी खुलेंगे.

अमेरिका-ईरान के बीच डील, भारत को भी इसका फायदा मिलेगा…

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पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में अमेरिका-ईरान के बीच डील हो गई है. दुनिया के बाकी देशों के साथ भारत को भी इसका फायदा मिलेगा, लेकिन कुछ चीजों में सिर्फ भारत को ही बड़ा फायदा होने वाला है.

महीनों के संघर्ष के बाद अब आखिरकार अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता हो गया है. पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में हुई डील की पुष्टि डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ दोनों ने कर दी है. इस समझौते से भारत को सबसे बड़ा फायदा मिलने जा रहा है. ट्रंप ने ऐलान किया है कि होर्मुज स्ट्रेट दोबारा खोला जाएगा और अमेरिका बंदरगाहों पर लगाई गई नौसैनिक नाकेबंदी हटाएगा.

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने बयान में कहा, ‘ईरान के साथ डील पूरी हो चुकी है. मैं होर्मुज को टोल फ्री खोलने और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को तुरंत हटाने की अनुमति देता हूं. दुनिया के जहाज अब फिर चल सकते हैं. तेल बहने दीजिए.’ बता दें कि होर्मुज से दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल और एलएनजी की सप्लाई होती है. जंग के दौरान जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई थी.

दरअसल भारत अपनी जरूरत का करीब 80 से 85 फीसदी कच्चा तेल दुनिया के कई देशों से खरीदता है, लेकिन इसमें मिडिल ईस्ट (खाड़ी क्षेत्र) की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समझौता लागू होता है और ईरानी तेल फिर से बाजार में आता है तो ब्रेंट क्रूड की कीमतों में बड़ी गिरावट आ सकती है. इसका सीधा असर दुनिया के बाकी देशों के साथ-साथ भारत पर पड़ेगा.

भारत में पेट्रोल और डीजल के दामों पर दबाव कम होगा. महंगाई को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी. इसके अलावा भारत का तेल आयात बिल घटेगा. इतना ही नहीं बल्कि देशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम होगा, जिससे रुपये को भी मजबूती मिलेगी.

रिपोर्ट के मुताबिक ड्राफ्ट में ईरान के तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों में अस्थायी छूट मिलेगी. साथ ही 25 अरब डॉलर की फ्रीज ईरानी संपत्तियां जारी करने पर भी सहमति बनी है. बता दें कि भारत पहले ईरान से बड़ी मात्रा में सस्ता तेल खरीदता था, लेकिन अमेरिकी बैन के चलते व्यापार लगभग ठप हो गया था. सबसे खास बात ये है कि ईरान से तेल का व्यापार डॉलर की जगह रुपये में होता था, जिससे भारत को ये तेल बाकी देशों के मुकाबले काफी सस्ता पड़ता था. प्रतिबंध हटने पर भारत फिर से ईरानी क्रूड खरीद सकता है.

अमेरिका-ईरान डील का दूसरा बड़ा असर भारत के रणनीतिक चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट पर पड़ सकता है. ईरान के चाबहार बंदरगाह में भारत ने भारी निवेश किया है. यह प्रोजेक्ट भारत को सीधा अफगानिस्तान और मिडिल ईस्ट तक पहुंच देता है. अमेरिका और ईरान के रिश्तों में नरमी आने से चाबहार पर अमेरिकी दबाव कम हो सकता है. इससे भारत को पोर्ट के विस्तार, नए निवेश और व्यापार बढ़ाने में आसानी होगी. इसके अलावा इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) में भी तेजी की संभावना है.

 

अमेरिका और ईरान के बीच पीस डील का भारत ने किया स्वागत…

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”अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौता का भारत ने स्वागत किया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा”

, क्या बोले पीएम मोदी?

‘मैं पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष को समाप्त करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते का स्वागत करता हूं. इस संघर्ष ने विश्व भर में गंभीर आर्थिक व्यवधान उत्पन्न किया है और कई देशों में जानमाल का नुकसान हुआ है.’

‘भारत को आशा है कि इस समझौते के कार्यान्वयन से क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करने और नौवहन एवं व्यापार की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी. हम बाकी मुद्दों पर विचार-विमर्श के माध्यम से एक स्थायी अंतिम समझौते तक पहुंचने की आशा करते हैं.’