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सोना महंगा क्यों हुआ? ये हैं 3 प्रमुख कारण… घरेलू और वैश्विक बाजार में सोने की चाल?

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सोना महंगा क्यों हुआ? ये हैं 3 प्रमुख कारण… घरेलू और वैश्विक बाजार में सोने की चाल?

भारत समेत पूरी दुनिया में इस वक्त सोने की कीमतों में ऐतिहासिक उछाल देखा जा रहा है। घरेलू बाजार से लेकर इंटरनेशनल मार्केट तक, गोल्ड की चमक इस समय अपने चरम पर है। एमसीएक्स पर 24 कैरेट सोना 1,05,000 रुपये के पार चला गया है, वहीं ग्लोबल मार्केट में इसका भाव 3500 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच चुका है- जो अब तक का सर्वाधिक स्तर है।

घरेलू और वैश्विक बाजार में सोने की चाल: MCX (भारत): 3 अक्टूबर डिलीवरी वाला सोना ₹1,05,937/10 ग्राम के हाई पर पहुंच गया। IBJA (इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन): ₹1,04,493/10 ग्राम तक दर्ज हुआ भाव। अंतरराष्ट्रीय बाजार: गोल्ड की कीमत $3,500/ounce, जो एक ऑल-टाइम हाई है।

सोना महंगा क्यों हुआ? ये हैं 3 प्रमुख कारण:

अमेरिकी टैरिफ और वैश्विक आर्थिक तनाव: अमेरिका और अन्य देशों के बीच चल रहे टैरिफ युद्धों ने बाजार में अनिश्चितता फैला दी है। निवेशकों ने शेयर या करेंसी के बजाय गोल्ड को ‘सुरक्षित ठिकाना’ मानना शुरू कर दिया है।

फेडरल रिजर्व की ब्याज दर में कटौती की संभावना: ब्याज दरों में संभावित गिरावट से डॉलर कमजोर हुआ है, जिससे गोल्ड की मांग बढ़ी है।

भारतीय रुपया लगातार कमजोर: डॉलर के मुकाबले रुपया गिरने से भारत में इम्पोर्टेड गोल्ड महंगा हो गया है, जिसका सीधा असर रिटेल मार्केट पर पड़ा है।

क्या निवेश करना है सही समय?वित्तीय सलाहकारों की राय है कि चूंकि सोना अपने शिखर पर पहुंच चुका है, इसलिए इस वक्त भारी-भरकम खरीदारी से बचना चाहिए। बेहतर होगा कि निवेशक छोटे-छोटे हिस्सों में Gold ETFs, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड्स (SGB) जैसे विकल्प चुनें।

विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं? जतीन त्रिवेदी, वाइस प्रेसिडेंट (कमोडिटी एंड करेंसी, एलकेपी सिक्योरिटीज) के अनुसार: टैरिफ तनाव और रुपये की गिरावट जैसे कारक फिलहाल सोने को और महंगा बनाए रख सकते हैं। निकट भविष्य में गोल्ड ₹1,00,000 से ₹1,05,000 के दायरे में बना रह सकता है।

“टैरिफ के बीच भी भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत, पीएम मोदी ने कहा जल्द बनेगा तीसरी बड़ी इकोनॉमी”

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“टैरिफ के बीच भी भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत, पीएम मोदी ने कहा जल्द बनेगा तीसरी बड़ी इकोनॉमी”

भारत ने साल 2025 की पहली तिमाही में 7.8% की आर्थिक बढ़त हासिल की है, जो दुनिया में चल रही आर्थिक मंदी और कई चुनौतियों के बावजूद बहुत बड़ी सफलता मानी जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम के दौरान इस बढ़त को देश की ताकत बताया और कहा कि जब कई बड़े देश आर्थिक मुश्किलों से जूझ रहे हैं, तब भारत ने अपने दम पर अच्छा प्रदर्शन किया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह सफलता तब और भी खास है जब भारत को दूसरे देशों के “आर्थिक स्वार्थ” से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। उनका मतलब उन फैसलों से था जो कुछ देशों ने सिर्फ अपने फायदे के लिए लिए हैं, जैसे कि अमेरिका ने भारत से आने वाले सामान पर भारी टैक्स (टैरिफ) लगा दिए हैं। इससे भारत के व्यापार पर असर पड़ा है, लेकिन फिर भी देश ने अच्छा प्रदर्शन किया है।अमेरिका का भारी टैरिफ और व्यापार तनाव हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से आने वाले सामान पर 50% तक का भारी टैक्स (टैरिफ) लगा दिया है, जो भारत और ब्राजील पर सबसे ज्यादा है। इसके बाद 27 अगस्त से एक और 25% का टैक्स लगाया गया है, जो खास तौर पर भारत के रूस से तेल खरीदने पर निशाना साधता है। अमेरिका का कहना है कि रूस से तेल खरीदकर भारत यूक्रेन युद्ध में रूस की मदद कर रहा है। इन फैसलों की वजह से भारत और अमेरिका के बीच व्यापार को लेकर तनाव बढ़ गया है।

भारत की बड़ी योजनाएं क्या हैं? प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अगर भारत इसी रफ्तार से आगे बढ़ता रहा, तो जल्द ही यह दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। उन्होंने समझाया कि पहले के समय में दुनिया की ताकत तेल पर टिकी थी, लेकिन आज के दौर में असली ताकत एक छोटी सी चिप में है, जो तकनीक से जुड़ी होती है और दुनिया की तरक्की को तेज करती है। इसलिए भारत सेमीकॉन इंडिया जैसे कार्यक्रमों के ज़रिए तकनीकी क्षेत्र में आगे बढ़ने पर ज़ोर दे रहा है।

भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती के कारण भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के पीछे कई कारण हैं। देश में लोगों की खरीदारी बढ़ी है, जिससे कारोबार अच्छा चल रहा है। सरकार ने कई अच्छे कदम उठाए हैं, जिससे पैसे लगाना आसान हुआ है। डिजिटल इंडिया और नई तकनीक ने भी मदद की है। भारत ने अपने सामान को विदेशों में बेचने के लिए नए बाजार ढूंढ़े हैं और खेती और फैक्ट्री के कामों में भी सुधार किया है। इन सब वजहों से भारत ने मुश्किल हालात में भी अच्छा विकास किया है।

वैश्विक परिदृश्य में भारत की स्थिति कैसी है? दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएं कोरोना महामारी, युद्ध और व्यापार विवादों के कारण कमजोर हुई हैं। अमेरिका-चीन के बीच बढ़ते तनाव और रूस-यूक्रेन युद्ध ने वैश्विक बाजार को प्रभावित किया है। ऐसे में भारत का स्थिर और तेज़ विकास देश की आर्थिक साख को मजबूत करता है।

हेल्थ सेक्टर पर बड़ा झटका – विदेशी दवाओं पर संभावित 200% तक के टैरिफ, केवल भारत जैसे देशों को आर्थिक संकट…

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हेल्थ सेक्टर पर बड़ा झटका – विदेशी दवाओं पर संभावित 200% तक के टैरिफ, केवल भारत जैसे देशों को आर्थिक संकट…

अमेरिका में हेल्थ सेक्टर को एक बड़े झटके का सामना करना पड़ सकता है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से विदेशी दवाओं पर संभावित 200% तक के टैरिफ की योजना सामने आई है, जिससे न केवल भारत जैसे देशों को आर्थिक झटका लग सकता है।

अमेरिका में विदेशी टैक्स जितना ऊंचा, दवाएं उतनी महंगी-और इसका सबसे बड़ा असर पड़ेगा अमेरिकियों की जेब पर। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर यह फैसला लागू हुआ, तो दवाइयों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी और सप्लाई में रुकावट देखने को मिल सकती है।

ट्रंप की नीति: टैक्स लगाओ, जनता परेशान हो पहले तो विदेश से आई दवाओं पर 200% तक का टैक्स लगाने की बात चल रही थी-यानि साधारण दवाई का दो से तीन गुना महंगा हो जाना निश्चित है। हाल ही में यूरोप के साथ एक ट्रेड समझौते के तहत, अमेरिका ने यूरोपीय दवाओं एवं सामानों पर 15% टैक्स लगाया है। ट्रंप ने कई फार्मा कंपनियों से कहकर ‘अमेरिका को सबसे सस्ती दवा दें’ की अपील भी की है। लेकिन क्रूर पेल- ये टैक्स -सीधे आम नागरिकों को भारी पड़ेगा।

तीन असर: कीमतों में झटका  – ING हेल्थ इकॉनॉमिक्स के अनुसार, केवल 25% टैक्स से भी दवाओं की क़ीमतें 10-14% तक बढ़ सकती हैं।

इंश्योरेंस महंगा –  दवाओं की क़ीमतें बढ़ने से स्वास्थ्य इंश्योरेंस की लागत भी बढ़ने लगती है। लॉजिस्टिक और सप्लाई संकट – विदेश से आने वाली दवाइयों में कटौती से वितरण ढांचा बाधित हो सकता है, जिससे “दवा की कमी” जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।

ट्रंप का सच: क्या यह सस्ता करना था? उनका वादा था कि वह अमेरिका में दवाओं को सस्ता करेंगे। लेकिन इस भारी-भरकम टैक्स नीति से उल्टा ही नतीजा निकलेगा। आईबीएफसी ने सुझाव दिया है कि अगर यह टैक्स 2026 बाद लागू होता है, तो तक़रीबन 2027-28 में वास्तविक असर दिखने लगेगा, क्योंकि कंपनियां पहले से स्टॉक कर सकती हैं। वहीं अमेरिकी कंपनियों को लाभ की चाबी ही दी जा रही है-लेकिन क्या आम जनता की बीमारी और तंगी का कोई हल निकालेगा?

CG: ‘महानदी जल विवाद’ छत्तीसगढ़ और ओडिशा के अधिकारियों की नई दिल्ली में बैठक, दोनों राज्यों ने मिलकर समस्या का समाधान निकालने पर सहमति जताई…

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CG: ‘महानदी जल विवाद’ छत्तीसगढ़ और ओडिशा के अधिकारियों की नई दिल्ली में बैठक, दोनों राज्यों ने मिलकर समस्या का समाधान निकालने पर सहमति जताई…

महानदी जल विवाद सुलझाने के लिए छत्तीसगढ़ और ओडिशा के अधिकारियों की नई दिल्ली में बैठक हुई. दोनों राज्यों ने मिलकर समस्या का समाधान निकालने पर सहमति जताई.

भारत की एक प्रमुख नदी, महानदी, जो छत्तीसगढ़ से निकलकर ओडिशा होकर बंगाल की खाड़ी तक जाती है, लंबे समय से विवाद का कारण बनी हुई है. इस लंबे विवाद को बातचीत से हल करने के लिए 30 अगस्त 2025 को नई दिल्ली में एक अहम बैठक हुई.

इसमें छत्तीसगढ़ और ओडिशा के मुख्य सचिवों और जल संसाधन विभाग के सचिवों ने हिस्सा लिया. बैठक में दोनों राज्यों ने माना कि यह समस्या बहुत पुरानी और कठिन है, लेकिन लोगों और दोनों राज्यों के भले के लिए इसका समाधान मिल-बैठकर निकालना ही होगा.

बैठक में यह भी तय हुआ कि सितंबर 2025 से दोनों राज्यों की तकनीकी समितियां, जिनमें इंजीनियर और विशेषज्ञ होंगे, हर हफ़्ते बैठक करेंगी. ये समितियां मुख्य मुद्दों को पहचानेंगी और उनका हल निकालने की कोशिश करेंगी. साथ ही, वे यह भी देखेंगी कि कैसे दोनों राज्यों के बीच बेहतर तालमेल बनाया जा सकता है.

दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री भी कर सकते हैं मुलाकात

अक्टूबर 2025 में दोनों राज्यों के मुख्य सचिव एक और बैठक करेंगे. इसमें जल संसाधन सचिव भी शामिल होंगे. अगर सब कुछ ठीक रहा, तो दिसंबर तक दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री भी मुलाकत कर सकते हैं और आगे की दिशा तय करेंगे. अंत में दोनों राज्यों ने यह वादा किया कि वे ईमानदारी और खुले मन से बातचीत करेंगे, ताकि महानदी जल विवाद का हल ऐसा निकले जो सबके लिए लाभकारी हो.

पूरे देश के लिए होगी मिसाल’

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह पहल सफल रही, तो यह न सिर्फ ओडिशा और छत्तीसगढ़ के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक मिसाल होगी कि बड़े और पुराने विवाद भी आपसी बातचीत और सहयोग से सुलझाए जा सकते हैं.

CG: एनएचएम के हड़ताली कर्मचारियों के लिए डेडलाइन तय, सरकार ने विरोध प्रदर्शन में शामिल कर्मचारियों को बर्खास्तगी की चेतावनी जारी …

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CG: एनएचएम के हड़ताली कर्मचारियों के लिए डेडलाइन तय, सरकार ने विरोध प्रदर्शन में शामिल कर्मचारियों को बर्खास्तगी की चेतावनी जारी …

NHM Employees Dismissal Order: छत्तीसगढ़ में एनएचएम कर्मचारियों का लगातार विरोध प्रदर्शन चल रहा है। बिलासपुर में एनएचएम कर्मियों की हड़ताल 14वें दिन भी जारी रही। कर्मियों ने एक अनोखे तरीके से अपना विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने उपमुख्यमंत्री अरुण साव, स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल और वित्त मंत्री ओपी चौधरी का मुखौटा पहनकर ‘क्या हुआ तेरा वादा’ गाना बजाया।

इस बीच सरकार ने एनएचएम के हड़ताली कर्मचारियों के लिए डेडलाइन तय कर दी है। सरकार ने विरोध प्रदर्शन में शामिल कर्मचारियों को बर्खास्तगी की चेतावनी जारी करते हुए आज शाम तक काम पर लौटने को कहा है। इससे पहले कल एनएचएम संघ के अध्यक्ष दिलीप मिरी को ज्वाइंट हेल्थ डाइरेक्टर की तरफ से नोटिस जारी किया गया था।

‘काम पर लौटे अन्यथा…”

NHM Employees Dismissal Order: इस बीच नेशनल हेल्थ मिशन के संयुक्त संचालक की तरफ से एनएचएम के इस पूरे आंदोलन की अगुवाई कर रहे संघ के अध्यक्ष दिलीप मिरि को अल्टीमेटम भेजा गया है। इस नोटिस में उन्हें 24 घंटे के भीतर कार्यस्थल पर लौटें के निर्देश दिए गए है।

नोटिस में उल्लेख है कि, “मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से प्राप्त जानकारी अनुसार छत्तीसगढ़ प्रदेश एन. एच. एम. कर्मचारी संघ के अहह्वान पर आप दिनांक 18 अगस्त 2025 से अपनी 10 सूत्रीय मांगो को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। संघ के मांगों के संदर्भ में दिनांक 13.08.2025 को राज्य स्वास्थ्य समिति की कार्यकारिणी समिति की बैठक के माध्यम से सक्षम स्तर पर निर्णय लिया जा चुका है तथा उक्त निर्णय के तारतम्य में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कार्यालय छत्तीसगढ़ द्वारा आवश्यक निर्देश भी प्रभारित किये जा चुके है।”

नोटिस में आगे लिखा गया है कि, “जिला स्तर पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के द्वारा आपको हड़ताल से अपने कर्तव्य पर उपस्थित होने हेतु नोटिस जारी किये गये हैं जिसमें समयावधि में उपस्थित नहीं होने की दशा में नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्यवाही की जायेगी जिसके अंतर्गत सेवा से पृथक किया जा सकता है, जिसके जिम्मेदार आप स्वयं होंगे। किन्तु आपके द्वारा आज दिनांक तक उपस्थिति नहीं दी गई है, जो कि लोकहित के विरूद्ध एवं पूर्णतः अनुचित है।”

संयुक्त संचालक की तरफ से आखिर में यह कहा गया है कि, “अतः आपको निर्देशित किया जाता है कि इस अंतिम पत्र जारी होने के 24 घंटे के भीतर अपने कार्यस्थल पर उपस्थित होना सुनिश्चित करें अन्यथा आपके विरूद्ध संविदा शर्तो अनुरूप सेवा समाप्ति की कार्यवाही की जावेगी।”

जंतर-मंतर पर होगा प्रदर्शन” दूसरी तरफ सरकार के इस चेतावनी से एनएचएम संघ भड़क गया है। बर्खास्तगी का अल्टीमेटम दिए जाने के बाद हड़ताली एनएचएम कर्मियों ने सरकार के आदेश की प्रतियां जलने की बात कही है ,.उन्होंने कहा है कि, वे इस धमकी से डरने वाले नहीं। वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे। संघ ने कहा है कि, राज्य में बात नहीं सुनी गई तो जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया जाएगा।

सांसद बृजमोहन अग्रवाल का मिला साथ” बात करें राजधानी रायपुर में जारी एनएचएम कर्मियों के आंदोलन की तो यहाँ हड़ताली कर्मचारियों ने रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल से भेंट कर खुद के साथ न्याय की मांग की है। उन्होंने सांसद को अपनी सभी मांगो से भी अवगत कराया है। सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा है कि, एनएचएम कर्मचारियों की जायज़ मांगों का हर स्तर पर समर्थन होगा। उन्होंने इस मामले पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और प्रदेश के मुखिया विष्णुदेव साय से चर्चा की बात कही है। सोमवार को हड़ताली कर्मचारियों ने रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल से भेंट कर खुद के साथ न्याय की मांग की है। उन्होंने सांसद को अपनी सभी मांगो से भी अवगत कराया है। सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा है कि, एनएचएम कर्मचारियों की जायज़ मांगों का हर स्तर पर समर्थन होगा। उन्होंने इस मामले पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और प्रदेश के मुखिया विष्णुदेव साय से चर्चा की बात कही है।

पूर्व स्वास्थ्य मंत्री का बड़ा खुलासा, बताई अपनी हार की वजह” इससे अलग प्रदेश के पूर्व डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव महासमुंद में जारी एनएचएम कर्मियों के हड़ताल में शामिल हुए। उन्होंने सरकार से कर्मचारियों की मांग पूरी करने की मांग की। इस दौरान उन्होंने बड़ा खुलासा भी किया। टीएस सिंहदेव ने बताया कि, उनकी सरकार ने एनएचएम कर्मियों से किया वादा पूरा नहीं किया था, यही वजह है कि, उन्हें चुनाव में हार मिली और सरकार भी चली गई। सिंहदेव ने कहा कि, जो सरकारें जनता काम नहीं करती, वो हारती है। हम लोग भी हारे, क्योंकि हम मांग पूरी नहीं कर पाए।

”छत्तीसगढ़ में CBSE के छात्रों के लिए खुशखबरी! विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ, दूसरे राज्यों का नहीं लगाना पड़ेगा चक्कर”

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”छत्तीसगढ़ में CBSE के छात्रों के लिए खुशखबरी! विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ, दूसरे राज्यों का नहीं लगाना पड़ेगा चक्कर”

छत्तीसगढ़ के सीबीएसई के छात्रों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। अब छात्रों को अपना काम कराने के लिए दूसरे राज्य का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। राजधानी में ही काम हो जाएगा।
रायपुर में CBSE के क्षेत्रीय कार्यालय की शुरुआत हो गई है। अब छात्रों को अंकसूची में सुधार के लिए ओडिशा नहीं जाना पड़ेगा। स्कूलों को भी मान्यता के लिए दूसरे राज्य नहीं जाना पड़ेगा। यह नया कार्यालय रिंग रोड स्थित उद्योग भवन टॉवर में 22 अगस्त से शुरू हो जाएगा। छत्तीसगढ़ के सभी CBSE स्कूल अब रायपुर के क्षेत्रीय कार्यालय के अंतर्गत आएंगे।
”बीजेपी नेता बृजमोहन अग्रवाल ने ट्वीट कर यह जानकारी दी है। उन्होंने लिखा है कि छत्तीसगढ़ की शिक्षा व्यवस्था के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि! एक बार फिर जनता की सेवा के लिए किए गए प्रयासों का सुखद परिणाम सामने आया है।”
विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ” अग्रवाल ने लिखा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के सहयोग से आज छत्तीसगढ़ के विद्यार्थियों की बड़ी मांग पूरी हुई है। रायपुर में CBSE का क्षेत्रीय कार्यालय प्रारंभ हो गया है। अब CBSE से संबंधित कार्यों के लिए छत्तीसगढ़ के विद्यार्थियों और स्कूल संचालकों को भुवनेश्वर की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। मंत्री ने आगे लिखा कि यह कदम राज्य के लाखों विद्यार्थियों और सैकड़ों स्कूलों को त्वरित सुविधा और राहत प्रदान करेगा तथा छत्तीसगढ़ की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा और गति देगा। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को हृदय से धन्यवाद दिया है।
दूसरे राज्यों का नहीं लगाना पड़ेगा चक्कर” निजी स्कूल संघ के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने बताया कि छत्तीसगढ़ में 600 से ज्यादा CBSE स्कूल हैं। इनमें 6 लाख से ज्यादा छात्र पढ़ते हैं। अब इन सभी को राहत मिलेगी। CBSE के नए कार्यालय खुलने से छात्रों, अभिभावकों और स्कूलों को बहुत फायदा होगा। उन्हें अपने काम करवाने के लिए दूसरे राज्यों में नहीं जाना पड़ेगा। इससे समय और पैसे दोनों की बचत होगी। साथ ही, काम भी जल्दी हो जाएगा।

CG: साय सरकार की नीतियों से बेहतर हो रही स्वास्थ्य व्यवस्था ..

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CG: साय सरकार की नीतियों से बेहतर हो रही स्वास्थ्य व्यवस्था ..

Vishnu ka Sushasan: वर्ष 2000 में जब छत्तीसगढ़ राज्य का गठन हुआ, तब यहां की स्वास्थ्य सेवाएं अत्यंत सीमित और अव्यवस्थित थीं। सुदूर वनांचलों, आदिवासी बहुल क्षेत्रों और ग्रामीण अंचलों में प्राथमिक उपचार तक उपलब्ध नहीं था। डॉक्टरों की भारी कमी, दवाइयों की अनुपलब्धता और बुनियादी स्वास्थ्य संरचना का अभाव बड़ी चुनौती बनकर सामने था। छत्तीसगढ़ जब नवजात था तब वो बीमारियों से घिरा हुआ था। राज्य में मातृ मृत्यु की दर काफी ज्यादा थी। संस्थागत प्रसव न के बराबर था। बस्तर में जितनी मौतें नक्सली मुठभेड़ में नहीं होती थी उससे कहीं ज्यादा मौतें मलेरिया से हो जाती थीं, लेकिन अब परिस्थितियां बदल गई है। लोगों के स्वास्थ्य की चिंता करते हुए साय सरकार प्रदेश के लोगों क कई योजनाएं संचालित कर रही है, जिससे बस्तर से सरगुजा तक के लोगों में एक नई खुशहाली दिख रही है

”ग्रामीण इलाकों में सुदृढ़ हुई स्वास्थ्य व्यवस्थ”

स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ सबसे दूरस्थ क्षेत्रों में रह रहे लोगों को भी मिले, इस बात पर फोकस करने वाली साय सरकार ने प्रदेश की स्वास्थ्य सुविधा और अधिक बेहतर करने के लिए कई अहम फैसले लिए हैं। विष्णुदेव साय का लक्ष्य है कि “हर नागरिक को 5 किलोमीटर के दायरे में स्वास्थ्य सुविधा”। साय सरकार ने प्रदेश में कई इलाकों में आवश्यकता को देखते हुए प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना की है। राज्य निर्माण के समय प्रदेश में लगभग 700 PHC हुआ करता था, जो 2025 में बढ़कर 2500 से ज़्यादा हो गया है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या में खासी बढ़ोतरी हुई है। CHC की संख्या 300 से अधिक हो गई है। गांव-गांव में उप-स्वास्थ्य केन्द्र आरंभ किए जा रहे हैं।

छत्तीसगढ़ सरकार ने बनाई ये योजना:  साय सरकार अपने नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कई योजनाएं बनाई है। शहीद वीर नारायण सिंह आयुष्मान स्वास्थ्य योजना और मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना से नागरिक स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। सरकार ने इन योजनाओं को आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) में समन्वित कर सोने में सुहागा वाली कहावत को चरितार्थ किया है। इस एकीकृत व्यवस्था से अधिकतम लाभार्थियों को नगद रहित इलाज की सुविधा मिल रही है। इसी का परिणाम है कि छत्तीसगढ़ ने आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) के सफल क्रियान्वयन में उल्लेखनीय प्रगति किया है। देश भर में उपचार प्रदान करने के मामलों में चौथा स्थान प्राप्त किया है। यह सफलता राज्य सरकार की समावेशी और सुलभ स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। अब तक 78 लाख से अधिक लाभार्थी सार्वजनिक और निजी अस्पतालों में निःशुल्क इलाज का लाभ उठा चुके हैं। सार्वजनिक अस्पतालों में उपचार की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जो सरकार के स्वास्थ्य ढांचे में जनता के बढ़ते विश्वास का संकेत है।

चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में विस्तार” पिछले 25 वर्षों में राज्य सरकार और केंद्र सरकार की साझेदारी से स्वास्थ्य संस्थाओं के नेटवर्क में भारी विस्तार हुआ है। पहले केवल रायपुर में एक मेडिकल कॉलेज था, अब 10 से अधिक मेडिकल कॉलेज कार्यरत हैं, जिनमें रायगढ़, राजनांदगांव, अंबिकापुर, जगदलपुर, कोरबा जैसे क्षेत्र शामिल हैं। वर्ष 2012 में स्थापित हुआ एम्स जो आज राज्य का प्रमुख टर्शियरी हेल्थकेयर सेंटर बन चुका है। स्वास्थ्य सेवाओं का आधार सिर्फ डॉक्टर नहीं बल्कि नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ भी होते हैं। राज्य गठन के समय नर्सिंग कॉलेज गिने-चुने थे मगर आज छत्तीसगढ़ की साय सरकार में 60 से अधिक नर्सिंग कॉलेज कार्यरत हैं। नर्सिंग सीटों में 4 गुना वृद्धि हुई। राज्य में पैरामेडिकल कॉलेज और ANM/GNM ट्रेनिंग सेंटर खोले गए हैं। साय सरकार ने अपने इसी बजट में 12 नवीन शासकीय नर्सिंग कॉलेज (बलरामपुर, दंतेवाड़ा, जांजगीर-चांपा, बीजापुर, कुरूद, जशपुर, नवा रायपुर, बैकुण्ठपुर, पुसौर, कांकेर, कोरबा और महासमुंद) में स्थापित करने का निर्णय लिया है और इसके लिए 34 करोड़ का प्रावधान रखा गया है। इसी बजट में एक साथ 6 नए शासकीय फिजियोथैरेपी कॉलेज (बिलासपुर, दुर्ग, जगदलपुर, जशपुर, रायगढ और मनेन्द्रगढ़) में स्थापित करने का निर्णय लिया है। इस योजना के क्रियान्वयन के लिए 6 करोड़ का बजटीय प्रावधान रखा गया है।

मातृ-शिशु मृत्यु दर में आई उल्लेखनीय कमी” छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार में हर ब्लॉक स्तर पर प्रसूति गृह और नवजात शिशु वार्ड की व्यवस्था बनाई जा रही है, इससे पहले राज्य निर्माण के काल में प्रसव के समय महिलाओं को 40-50 किमी दूर जाना पड़ता था। राज्य की जननी सुरक्षा योजना और जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम से लाखों महिलाएँ लाभान्वित हो रही हैं। प्रदेश की साय सरकार में मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में 50% से अधिक की कमी आई है। पोषण योजनाओं के साथ स्वास्थ्य सेवाओं का तालमेल बिठाया गया जिसका लाभ प्रदेश भर में दिखाई दे रहा है। ई-संजीवनी, टेलीमेडिसिन, ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और दवा वितरण जैसे डिजिटल नवाचारों से खासकर दूरदराज के क्षेत्रों में विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं सुलभ हुई हैं। इससे मृत्यु दर में कमी और इलाज की गुणवत्ता में सुधार देखने को मिला है। राज्य की अनूठी मितानिन योजना, जो कि महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के माध्यम से समुदाय से स्वास्थ्य सेवाओं को जोड़ती है, आज एक मॉडल कार्यक्रम के रूप में देशभर में मान्यता प्राप्त कर चुकी है।

नक्सल और आदिवासी इलाकों में बढ़ी स्वास्थ्य सुविधाएं” मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सुशासन और स्वास्थ्य योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से न केवल सामान्य क्षेत्रों में, बल्कि नक्सल प्रभावित जिलों में भी स्वास्थ्य सुविधाएं लोगों की पहुंच में आ रही हैं। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिल रहा है। राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS), राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन अभियान और मलेरिया मुक्त अभियान जैसे कार्यक्रमों ने इस क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को नया आयाम दिया है। 1 जनवरी 2024 से 16 जून 2025 तक बस्तर संभाग में कुल 130 स्वास्थ्य संस्थाओं को क्वालिटी सर्टिफिकेशन प्राप्त हुआ है। इनमें 1 जिला अस्पताल, 16 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 113 उप स्वास्थ्य केंद्र शामिल हैं। इसके अलावा, 65 अन्य संस्थाओं का सर्टिफिकेशन कार्य प्रक्रियाधीन है। विशेष रूप से नक्सल प्रभावित जिलों—कांकेर (8), बीजापुर (2), सुकमा (3) और दंतेवाड़ा (1) में 14 संस्थानों को गुणवत्ता प्रमाणपत्र प्रदान किया गया है, जो क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार का प्रमाण है।

छत्तीसगढ़ में मानसून फिर हुआ मेहरबान, अगले 3 दिनों तक अलर्ट जारी, भारी बारिश का अलर्ट जारी ..

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छत्तीसगढ़ में मानसून फिर हुआ मेहरबान, अगले 3 दिनों तक अलर्ट जारी, भारी बारिश का अलर्ट जारी ..

मौसम विभाग ने जिन जिलों में येलो अलर्ट जारी किया है उनमें सुकमा, बीजापुर, दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा, बस्तर, नारायणपुर, कोंडागांव, कांकेर, धमतरी, बालोद, राजनांदगांव, गरियाबंद, महासमुंद, रायपुर, बलौदा बाजार, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, बिलासपुर, कोरबा, जशपुर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, दुर्ग, बेमेतरा, कबीरधाम, मुंगेली, सरगुजा, सूरजपुर, कोरिया और बलरामपुर जिले शामिल हैं। बता दें की पिछले 24 घंटों में राज्य के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। कहीं-कहीं शाम के समय अचानक मौसम बदला और तेज़ बारिश हुई।
जानकारी के अनुसार दुर्ग में सबसे अधिक अधिकतम तापमान जबकि पेंड्रा रोड में न्यूनतम तापमान दर्ज किया गया। मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले 2-3 दिनों तक राज्य के विभिन्न हिस्सों में लगातार बारिश हो सकती है। रायपुर और बिलासपुर जैसे क्षेत्रों में कभी तेज़ बारिश तो कभी उमस और गर्मी लोगों को परेशान कर सकती है। किसानों और ग्रामीण इलाकों के लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है खासकर बिजली गिरने की आशंका को देखते हुए।

“Voter Adhikar Yatra का पटना में हुआ समापन, राहुल-तेजस्वी गरजे, कहा- हम ‘वोट चोरी’ नहीं होने देंगे”

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“Voter Adhikar Yatra का पटना में हुआ समापन, राहुल-तेजस्वी गरजे, कहा- हम ‘वोट चोरी’ नहीं होने देंगे”

राहुल गांधी की मतदाता अधिकार यात्रा का सोमवार(1 सितंबर) को समापन हो गया। अपने अंतिम चरण में यात्रा पटना पहुंची जहां पर कांग्रेस सांसद और लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और राजद नेता तेजस्वी यादव यात्रा के साथ महागठबंधन के कई बड़े नेता शामिल हुए।

RJD नेता तेजस्वी यादव ने कहा, ‘ये पूरी यात्रा बहुत ही ऐतिहासिक रही है। पूरा पटना भर चुका है… आम आवाम जाग चुकी है जो अब इन बेइमानों को गद्दी से और सत्ता से हटाएगी। जो लोग लोकतंत्र की हत्या करना चाहते हैं। उन्हें मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।’

‘आपको डुप्लीकेट मुख्यमंत्री चाहिए चाहिए या ओरिजनल’ राजद नेता तेजस्वी यादव ने ‘मतदाता अधिकार यात्रा’ को संबोधित करते हुए कहा, ‘हमने जो कहा वही काम ये(NDA) ‘नकलची’ सरकार कर रही है। ये सरकार नकल तो कर सकती है लेकिन विजन और नई सोच नहीं ला सकती है… इसलिए आप लोगों को तय करना है कि आपको डुप्लीकेट मुख्यमंत्री चाहिए या ओरिजनल मुख्यमंत्री चाहिए।’

गड़बड़ करने वालों को मुंहतोड़ जवाब देना है- तेजस्वी राजद नेता तेजस्वी यादव ने कहा, ‘बिहार में जो सरकार चल रही है, यह डबल इंजन की सरकार है, जिसका एक इंजन अपराध और दूसरा भ्रष्टाचार में लगा हुआ है आप लोगों को अपने मताधिकार की रक्षा करनी है बड़ी चालाकी से फर्जी मतदाताओं का नाम भी जोड़ा जा रहा है। बिहार में गड़बड़ करने वाले लोगों को हमें मुंहतोड़ जवाब देना है।’

चुनाव आयोग और भाजपा ने मिलकर वोट चोरी की– राहुल वहीं कांग्रेस सांसद और लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने ‘मतदाता अधिकार यात्रा’ को संबोधित करते हुए कहा, “महाराष्ट्र में NCP, कांग्रेस और शिवसेना से चुनाव को चोरी किया गया था… तकरीबन 1 करोड़ नए मतदाता को लोकसभा चुनाव के बाद मतदाता सूची में जोड़े जाते हैं। हमारे गठबंधन को जितने मत लोकसभा चुनाव में मिले उतने ही विधानसभा में मिले लेकिन सारे के सारे नए मत भाजपा के खाते में गए… क्यों? क्योंकि चुनाव आयोग और भाजपा ने मिलकर वोट चोरी की… बिहार के युवाओं से मैं कहना चाहता हूं कि वोट चोरी का मतलब अधिकारों, आरक्षण, रोजगार, शिक्षा, लोकतंत्र और युवाओं के भविष्य की चोरी।”

‘चीन-अमेरिका में भी लोग बोल रहे हैं, वोट चोर गद्दी छोड़’ कांग्रेस सांसद और लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा, “बिहार में एक नया नारा चला है ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ जो लोगों को बहुत पसंद आ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन यात्रा पर उन्होंने आगे कहा, “चीन और अमेरिका में भी लोग बोल रहे हैं, वोट चोर गद्दी छोड़।”

हम ‘वोट चोरी’ नहीं होने देंगे- राहुल गांधी जिन ताकतों ने महात्मा गांधी जी की हत्या की, वही ताकतें अब संविधान की हत्या करने की कोशिश कर रही हैं। हम इन्हें संविधान की हत्या करने नहीं देंगे, चाहे कुछ भी हो जाए। बिहार एक क्रांतिकारी प्रदेश है। इसने पूरे देश को संदेश दिया है- हम ‘वोट चोरी’ नहीं होने देंगे।

 

”उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए NDA ने बनाया खास प्लान”

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”उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए NDA ने बनाया खास प्लान”

उपराष्ट्रपति चुनाव में अपने सौ प्रतिशत मतदान के लिए एनडीए ने कमर कस ली है. एनडीए अपने सभी 425 सांसदों की शत प्रतिशत मौजूदगी सुनिश्चित करेगा. इसके लिए केंद्रीय मंत्रियों और सांसदों की ड्यूटी लगाई गई है.

हर राज्य में एक मंत्री और एक सांसद की तैनाती होगी. वे यह सुनिश्चित करेंगे कि उस राज्य के एनडीए के सभी सांसद नौ सितंबर को दिल्ली में उपराष्ट्रपति के चुनाव में वोट डालें. इसके लिए छह सितंबर से आठ सितंबर तक सभी एनडीए सांसदों की वर्कशॉप भी आयोजित की जा रही है.

आठ सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एनडीए के सभी सांसदों को डिनर भी दे रहे हैं. इसके अलावा आठ सितंबर को ही दिल्ली में कई संसदीय समितियों की बैठक रखी गई है, ताकि संबंधित सांसद मौजूद रहें.

ग़ौरतलब है कि संसदीय समितियों की बैठकों के लिए सांसदों को टीए डीए मिलता है और हवाई किराया भी मिलता है. वहीं वर्कशॉप में सांसदों को वोट डालने की ट्रेनिंग दी जाएगी.

उपराष्ट्रपति चुनाव में गुप्त मतदान होता है और व्हिप लागू नहीं होता. ऐसे में क्रॉस वोटिंग का खतरा रहता है. एनडीए यह सुनिश्चित करना चाहता है कि उसके सभी सांसदों का सटीक मतदान हो और एक भी वोट निरस्त न हो.

इसके लिए सांसदों को ट्रेनिंग में बताया जाएगा कि कैसे उन्हें अपना पेन नहीं ले जाना है. जो पेन चुनाव अधिकारी दें, उसी से मतपत्र पर अपनी पसंद लिखनी है. इसके अलावा मतपत्र को कैसे फ़ोल्ड करना है ताकि स्याही इधर-उधर न लगे और वोट निरस्त न हो. एनडीए की कोशिश है कि उसके उम्मीदवार सी पी राधाकृष्णन की बड़े अंतर से जीत हो.

वैसे अभी एनडीए के पास जीत के लिए ज़रूरी 391 से 34 वोट ज़्यादा यानी 425 वोट हैं. वायएसआरसीपी ने एनडीए को समर्थन देने का ऐलान किया है. उसके लोकसभा में चार और राज्य सभा में सात सांसद हैं. इसी तरह एनडीए को बीजेडी और बीआरएस के समर्थन का भी भरोसा है.

बीजेडी के पास राज्य सभा में सात सांसद हैं. हालांकि पीएम मोदी ने नवीन पटनायक को फ़ोन किया था, लेकिन बीजेडी का कहना है कि ऐन वक्त पर फ़ैसला किया जाएगा. बीआरएस के राज्य सभा में चार सांसद हैं. इंडिया गठबंधन ने तेलुगु उम्मीदवार के नाम पर बीआरएस से समर्थन मांगा है.

आज की स्थिति में एनडीए के पास क़रीब 55% वोट है. उसकी कोशिश यह आंकड़ा 60% के पार ले जाने की है. पिछले राज्य सभा चुनाव में एनडीए उम्मीदवार जगदीप धनखड़ को 528 वोट मिले थे और उन्होंने विपक्ष की उम्मीदवार मार्गरेट अल्ला को 346 वोट से हराया था. धनखड़ को क़रीब 74.4% वोट मिले थे जो उपराष्ट्रपति चुनावों के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी जीत में से एक है.

हालांकि एनडीए के लिए इस प्रदर्शन को दोहराना मुश्किल होगा. क्योंकि इस बार विपक्ष की स्थिति पहले की तुलना में बेहतर है.