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“ऑस्ट्रेलिया ने ईरान से तोड़े राजनयिक संबंध, ईरानी राजदूत को किया निष्कासित”

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“ऑस्ट्रेलिया ने ईरान से तोड़े राजनयिक संबंध, ईरानी राजदूत को किया निष्कासित”

ऑस्ट्रेलिया और ईरान के बीच रिश्तों में दरार बढ़ती नजर आ रही है. एक रिपोर्ट के मुताबिक ऑस्ट्रेलिया ने ईरान से अपने राजनयिक संबंध तोड़ दिए हैं. उसने ईरान के राजदूत को भी देश से निकाल दिया है.

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड को आतंकी संगठन घोषित कर दिया है. ऑस्ट्रेलिया की सुरक्षा खुफिया संगठन (ASIO) ने ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स को देश में हुए दो अटैक के लिए जिम्मेदार माना है.

दरअसल ऑस्ट्रेलिया ने ईरान पर यहूदी विरोधी हमले करने का आरोप लगाया है. सिडनी में पिछले साल 20 अक्तूबर को लुईस कॉन्टिनेंटल किचन और 6 दिसंबर को मेलबर्न में अदास इजरायल सिनेगॉग पर अटैक हुआ था. दावा किया गया है कि इन हमलों में ईरानी सरकार का हाथ था. ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री अल्बनीज ने इन हमलों को सामाजिक एकता को कमजोर करने वाला बताया है. उनका कहना है कि ऑस्ट्रेलिया में मतभेद पैदा करने की कोशिश हो रही है.

ईरानी राजदूत को ऑस्ट्रेलिया छोड़ने के लिए दिया गया सात दिन का वक्त सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक अल्बानीज ने बताया कि ईरानी राजदूत अहमद सादेघी और तीन अन्य राजनयिक कर्मचारियों को देश छोड़ने के लिए सात दिन का समय दिया गया है. दूसरे विश्व युद्ध के बाद यह पहली बार है जब ऑस्ट्रेलिया ने किसी विदेशी राजदूत को देश से निकाला है.

ऑस्ट्रेलिया में हुए हमलों को लेकर क्या बोले ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री अल्बनीज ने खुफिया एजेंसी का हवाला देते हुए कहा, ”ASIO (ऑस्ट्रेलियाई सुरक्षा खुफिया संगठन) पर्याप्त विश्वसनीय खुफिया जानकारी के आधार पर एक बेहद परेशान करने वाले निष्कर्ष पर पहुंचा है. इनमें से कम से कम दो हमलों का निर्देश ईरान सरकार ने दिया था. ईरान ने इसे छिपाने की कोशिश की है, लेकिन ASIO का आंकलन है कि हमलों के पीछे ईरान का ही हाथ था.” बता दें कि ऑस्ट्रेलिया ने ईरान की राजधानी तेहरान में अपने दूतावास का संचालना फिलहाल बंद कर दिया है.

“Saurabh Bharadwaj ED Raid: सौरभ भारद्वाज के घर ED की रेड पर संजय सिंह का बड़ा दावा, ‘BJP की नीति है AAP के…'”

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“Saurabh Bharadwaj ED Raid: सौरभ भारद्वाज के घर ED की रेड पर संजय सिंह का बड़ा दावा, ‘BJP की नीति है AAP के…'”

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार (26 अगस्त) सुबह आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज के घर समेत दिल्ली NCR में 13 ठिकानों पर छापेमारी कर रही है. इस कार्रवाई को लेकर आम आदमी पार्टी ने केंद्र सरकार पर बड़ा आरोप लगाया है.

राज्यसभा सांसद और AAP नेता संजय सिंह ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जो मामला बनाया गया है, वो पूरी तरह से निराधार झूठा और बे बुनियाद है.

AAP नेताओं को निशाना बना रही BJP- संजय सिंह उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें उन्होंने कहा, “जिस अवधि का यह मामला है, उस दौरान सौरभ भारद्वाज मंत्री भी नहीं थे. कल से पूरे देश में पीएम मोदी की डिग्री को लेकर चर्चा हो रही है, इसलिए ध्यान भटकाने के लिए यह रेड की गई है.’

उन्होंने आगे कहा कि बीजेपी की नीति बन चुकी है कि AAP नेताओं को झूठे मामलों में फंसाकर जेल में डाला जाए.

पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन का भी जिक्र संजय सिंह ने कहा कि बीजेपी ने पहले भी हमारे नेताओं को फंसाने की कोशिश की. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, ‘सत्येंद्र जैन को तीन साल तक जेल में रखा गया, लेकिन अंत में सीबीआई और ईडी को कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट देनी पड़ी. इससे साफ है कि AAP नेताओं के खिलाफ सभी केस झूठे हैं.’

पार्टी का आरोप है कि केंद्र सरकार राजनीतिक बदले की भावना से कार्रवाई कर रही है. फिलहाल ईडी की छापेमारी जारी है और विस्तृत जानकारी का इंतजार है.

जानकारी के अनुसार, एजेंसी यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत कर रही है. यह मामला पिछली AAP सरकार के दौरान स्वास्थ्य अवसंरचना परियोजनाओं में कथित अनियमितताओं से जुड़ा बताया जा रहा है.

ईडी की टीम ने आज सुबह दिल्ली-एनसीआर के अलग-अलग हिस्सों में दबिश दी. सूत्रों के मुताबिक, यह छापेमारी भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) द्वारा दर्ज एक पुराने केस से जुड़ी है, जिसमें आरोप है कि अस्पतालों के निर्माण में घोटाला हुआ. ईडी के अनुसार, इस मामले में संदिग्ध लेन-देन और कंपनियों के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका है.

“आज दिल्ली जाएंगे CM नीतीश कुमार, चुनावी साल में BJP आलाकमान से हो सकती है मुलाकात”

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“आज दिल्ली जाएंगे CM नीतीश कुमार, चुनावी साल में BJP आलाकमान से हो सकती है मुलाकात”

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज (मंगलवार) शाम दिल्ली के लिए रवाना होंगे. शाम की फ्लाइट से उन्हें जाना है. बताया जा रहा है कि अचानक ही दिल्ली जाने का ये कार्यक्रम बना है. बिहार में इस साल चुनाव होना है ऐसे में राजनीतिक लिहाज से उनका दिल्ली दौरा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

सियासी हलचल तेज हो गई है. दिल्ली में दो दिन रह सकते हैं सीएम बिहार में अक्टूबर-नवंबर में विधानसभा चुनाव होना है. खबर है कि नीतीश कुमार दिल्ली में दो दिनों तक रह सकते हैं. यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर एनडीए का विधानसभावार कार्यकर्ता सम्मेलन चल रहा है.

क्या कुछ हो सकता है कार्यक्रम? नीतीश कुमार दिल्ली में बीजेपी आलाकमान से आगामी विधानसभा चुनाव पर चर्चा के लिए मुलाकात कर सकते हैं. मुलाकात होती है तो सीट शेयरिंग, चुनावी रणनीति आदि पर मंथन हो सकता है. उप राष्ट्रपति चुनाव पर भी बीजेपी शीर्ष नेतृत्व से वार्ता हो सकती है. नौ सितंबर को उप राष्ट्रपति के लिए चुनाव है. सीपी राधाकृष्णन एनडीए के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार हैं. उनसे भी नीतीश कुमार की मुलाकात संभव है. नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए बिहार में चुनाव लड़ेगा. वही सीएम चेहरा हैं यह स्पष्ट किया जा चुका है.

बता दें कि इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर तमाम दल तैयारियों में जोरशोर से जुटे हैं. एक तरफ बिहार में वोटर लिस्ट पुनरीक्षण अभियान (SIR) के खिलाफ में राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की वोटर अधिकार यात्रा चल रही है तो दूसरी तरफ एनडीए का विधानसभा वार सम्मेलन चल रहा है. चुनावी वर्ष में अब तक छह बार पीएम मोदी बिहार आ चुके हैं. उनका अगला दौरा सितंबर में हो सकता है जब वो पटना मेट्रो का उद्घाटन करेंगे.

“धराली आपदा के बाद सीमांत गांवों में गहराया संकट, रसोई गैस से लेकर जरूरी रसद पहुंचाना भी मुश्किल”

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“धराली आपदा के बाद सीमांत गांवों में गहराया संकट, रसोई गैस से लेकर जरूरी रसद पहुंचाना भी मुश्किल”

उत्तरकाशी के धराली में आई आपदा के बाद अब सीमांत इलाकों में बसे लगभग 8 गांवों में अब राशन गैस की परेशानी मंडराने लगी है. यहां तक रसद पहुंचाना मुश्किल होता जा रहा है, गंगोत्री हाईवे अभी तक वाहनों के लिए खोला नहीं है ऐसे में इन गांवों तक जरूरी सामान भी नहीं पहुंच पा रहे हैं जिससे लोगों को परेशानियां बढ़ गई हैं.

धराली के खीर गंगा और तेलगाड में आई बाढ़ के लगभग 20 दिन बाद यहां के सीमांत क्षेत्रों सुक्की, धराली, मुखबा, हर्षिल, जसपुर, पुराली, झाला और बगोरी गांव के ग्रामीणों की दिक्कतें कम होने का ना नहीं ले रही है. खीर गंगा और तेलगाड का बढ़ता पानी और उफान अभी लोगों को डरा रहा है.

सीमांत के कई गांवों से संपर्क कटा बीते रविवार रात को तेलगाड के उफान ने हर्षिल के लोगों को डरा दिया. इसके बढ़ते जल प्रवाह से लोग सुरक्षित स्थानों पर चले गए थे. वहीं अभी तक गंगोत्री हाईवे बड़े वाहनों के लिए नहीं खुलने के कारण सीमांत गांवों के लोगों के सामने रसद सामग्री का संकट भी गहराने लगा है.

जिला प्रशासन की ओर से लगातार लोगों का राहत सामग्री पहुंचाने की कोशिशें की जा रही है. प्रशासन ने हाल ही में सीमांत गांवों में रसद वितरण तो करवाया लेकिन, इतना रसद बड़े परिवार के लिए लंबे समय तक चलाना मुश्किल है और मार्ग न खुलने से लोग अपने लिए राशन का इंतजाम भी नहीं कर पा रहे हैं.

इन इलाकों में बिजली आपूर्ति भी प्रभावित दूसरी तरफ आपदाग्रस्त धराली, हर्षिल सहित छह गांव में रविवार रात से बिजली आपूर्ति ठप पड़ी है. जिससे ग्रामीण आपदा की इस घड़ी में डर के साये में रात काटने को मजबूर हैं. सोमवार सुबह से आपदा प्रभावित क्षेत्र गांवों में संचार सेवा भी ठप हो गई.

संचार सेवा बाधित होने से आपदा प्रभावित अपने नाते-रिश्तेदारों से संपर्क नहीं कर पा रहे थे अब प्रशासन ने बिजली और संचार सेवाएं शुरू करने की पहल की है. इस बीच ख़राब मौसम लगातार यहां के लोगों के लिए चुनौती बना हुआ है. लगातार हो रही बारिश से नदी नाले उफान पर है और लगातार भू स्खलन से कई सड़कें बंद हो गई हैं, जिन्हें खोलने का काम किया जा रहा है.

“यूएस के हाई टैरिफ से पहले भारतीय रुपया हुआ पस्त, जानें आज डॉलर के मुकाबले कितना टूटा”

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“यूएस के हाई टैरिफ से पहले भारतीय रुपया हुआ पस्त, जानें आज डॉलर के मुकाबले कितना टूटा”

यूएस के हाई टैरिफ से पहले भारतीय रुपया पस्त हो गया है और डॉलर के मुकाबले गिरावट दर्ज कर रहा है. अमेरिकी टैरिफ 27 अगस्त से लागू होने वाला है, जिसके बाद भारतीय सामानों पर कुल 50 प्रतिशत शुल्क लग जाएगा.

वाशिंगटन की तरफ से नोटिस जारी होने के बाद से ही भारतीय करेंसी दबाव में आ गई है. दबाव में रुपया हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को बाजार खुलते ही डॉलर के मुकाबले रुपये में 22 पैसे की कमजोरी आई और यह 87.88 पर पहुंच गया. विदेशी मुद्रा कारोबारियों (Forex Traders) का कहना है कि बुधवार से लागू होने वाले 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ के चलते आयातकों की तरफ से डॉलर की मांग बढ़ गई है, जिससे रुपये पर और दबाव बना है.

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार (Interbank Foreign Exchange Market) में रुपये की शुरुआत 87.74 पर हुई, जो तुरंत फिसलकर 87.78 पर आ गया. यह पिछले कारोबारी दिन के मुकाबले 22 पैसे की गिरावट दर्शाता है. सोमवार को भी रुपया 4 पैसे टूटकर 87.56 पर बंद हुआ था.

रुपये में क्यों गिरावट? इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स 0.05 प्रतिशत घटकर 98.38 पर आ गया. हाई टैरिफ का असर शेयर बाजार पर भी साफ दिखा. बीएसई पर 30 अंकों वाला सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में ही 546.87 अंक गिरकर 81,089.04 पर पहुंच गया. इसके बाद करीब 660 अंक तक नीचे चला गया. जबकि, एनसई पर निफ्टी 50 भी 179.05 अंक टूटकर 24,788.70 पर आ गया. साथ ही, सभी स्टॉक्स लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रेंट क्रूड 0.41 प्रतिशत की गिरावट के साथ 68.52 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. उधर, शेयर बाजार के आंकड़े बताते हैं कि विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) सोमवार को बिकवाली के मूड में रहे और उन्होंने 2,466.24 करोड़ रुपये के शेयर बेचे.

खाता न बही, जो भाजपा कहे वो ही सही… UBT नेता का तंज

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उद्धव ठाकरे गुट के नेता आनंद दुबे ने भाजपा पर बड़ा निशाना साधा. आनंद दुबे ने कहा, एक ऐड आता था. वाह हुजूर ताज बोलिए. वैसे अब भाजपाई बोलते हैं कि वाह हुजूर भाजपा बोलिए ना खाता ना बही, जो भाजपा कहे वही सही. बिल्कुल जेल से सरकार नहीं चलनी चाहिए लेकिन पूरी सरकार को जेल में डाल देना चाहिए. ये जो कॉन्सेप्ट लेकर भाजपा आ रही है, हम इसका स्वागत करते हैं. अभी आपने एडीआर के कुछ आंकड़े दिखाए जिसमें 39% दागी सांसद भाजपा के हैं. कुछ राज्यों का आपने जिक्र किया जिसमें आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और महाराष्ट्र के दागी विधायक हैं.

भारत की विदेश नीति अचानक चीन पर क्‍यों हो गई शिफ्ट? US ट्रेड डील का क्‍या? पीयूष गोयल ने दिया एक-एक सवाल का जवाब

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अमेरिका के राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने के बाद अचानक भारत और चीन के रिश्‍तों में तेजी से सुधार होना शुरू हो गया. चीनी विदेश मंत्री वांग यी भारत के दौरे पर आ गए. पीएम मोदी भी महीने के अंत में एससीओ समिट में हिस्‍सा लेने के लिए चीन जा रहे हैं. क्‍या यह सब एक संयोग है या फिर ट्रंप के टैरिफ का असर. इसपर वाणिज्‍य मंत्री पीयूष गोयल की तरफ से स्‍पष्‍ट जवाब दिया गया. उन्‍होंने कहा कि भारत की नीति किसी दबाव या मजबूरी से तय नहीं होती बल्कि राष्ट्रीय हित और दीर्घकालिक रणनीति के आधार पर बनती है.

चीन के साथ धीरे-धीरे अंगेजमेंट बढ़ा
गोयल ने ईटी वर्ल्‍ड लीडर फॉरम में अपनी बात रखते हुए साफ कहा कि चीन के साथ रिश्तों में जो हालिया सुधार दिख रहा है, उसका अमेरिका-भारत ट्रेड डील से कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने कहा, “यह शिफ्ट मौजूदा परिस्थितियों से जुड़ा नहीं है. असली समस्या गलवान घटना के बाद शुरू हुई थी, जब सीमा से जुड़े अहम समझौते टूटे. हमने तब से धीरे-धीरे री-एंगेज करना शुरू किया और वह किसी भी अमेरिकी डील से लिंक्ड नहीं है.”
अमेरिका पर दबाव के लिए चीन से बातचीत नहीं
पीयूष गोयल ने कहा कि भारत का रुख साफ है. वह चीन से जुड़ाव को सिर्फ सीमाई और रणनीतिक संतुलन के लिहाज से देख रहे हैं, न कि अमेरिका के दबाव या व्यापारिक वार्ता के कारण. वहीं, अमेरिका से व्यापार समझौते पर बात करते हुए गोयल ने भरोसा जताया कि दोनों देशों के बीच रिश्ते मजबूत हैं और भविष्य में डील को लेकर सकारात्मक माहौल बनेगा. उन्होंने कहा, “भारत-अमेरिका संबंध बेहद महत्वपूर्ण हैं. हम खुले दिमाग और सकारात्मक दृष्टिकोण से बातचीत कर रहे हैं. उद्योग जगत भी इस रिश्ते को अहम मानता है.
भारत की बुनियाद मजबूत
गोयल ने यह भी बताया कि भारत की आर्थिक बुनियाद बेहद मजबूत है और यही वजह है कि देश दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना हुआ है. उन्होंने कहा, “भारत में असीमित संभावनाएं हैं. हमारी अर्थव्यवस्था में मजबूती और लचीलापन है. दुनिया का हर निवेशक भारत को लेकर आशावान है.”

भारत पर 25 फीसदी टैरिफ… ट्रंप प्रशासन ने जारी कर दिया नोटिफिकेशन, रूस पर दबाव के लिए अमेरिका की चाल

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अमेरिका ने भारत से आयात पर 25% अतिरिक्त टैरिफ की औपचारिक घोषणा की है. इस ऐलान के बाद कुल टैरिफ 50% हो जाएगा. यह नया शुल्क 27 अगस्त 2025 को सुबह 12:01 बजे (अमेरिकी समय) से लागू होगा. अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने बताया कि यह कदम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 6 अगस्त के कार्यकारी आदेश 14329 को लागू करता है. ट्रंप ने इस महीने की शुरुआत में भारत के रूस से तेल खरीदने के कारण टैरिफ को 25% से बढ़ाकर 50% करने की योजना बनाई थी.

सोमवार को जारी आधिकारिक नोटिस में इसकी पुष्टि की गई. व्हाइट हाउस का कहना है कि यह कदम रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर दबाव बनाने के लिए है, ताकि रूस की तेल आय कम हो और यूक्रेन युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत शुरू हो. ट्रंप प्रशासन का कहना है कि भारत रूस से तेल खरीदकर यूक्रेन युद्ध में रूस की मदद कर रहा है. ट्रंप ने इसे ‘पुतिन की युद्ध मशीन को ईंधन देना’ बताया है. इसके जवाब में अमेरिका ने भारत और ब्राजील को सबसे ऊंचे टैरिफ ब्रैकेट में रखा है.

टैरिफ से भारत खुश नहीं

भारत ने इन ‘द्वितीयक टैरिफ’ को अनुचित बताया और अपनी तेल खरीद नीति को राष्ट्रीय हित में सही ठहराया. विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘भारत की ऊर्जा नीति 1.4 अरब लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई गई है.’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोहराया कि भारत अपने किसानों और छोटे उद्यमियों के हितों की रक्षा करेगा. यह टैरिफ भारत के टेक्सटाइल, रत्न-आभूषण, मछली और इंजीनियरिंग उत्पादों जैसे निर्यातों को प्रभावित कर सकता है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को अहमदाबाद की एक विशाल जनसभा में अमेरिका की ओर से भारतीय वस्तुओं पर 50% शुल्क लगाने से पहले कहा कि उनकी सरकार किसानों, पशुपालकों और छोटे उद्यमियों के हितों से कभी समझौता नहीं करेगी. मोदी ने कहा, ‘हम पर दबाव बढ़ सकता है, लेकिन हम उसे सह लेंगे. आपके हितों को कोई नुकसान नहीं होने देंगे.’
उन्होंने महात्मा गांधी के स्वदेशी मंत्र का जिक्र करते हुए छोटे व्यवसायियों और किसानों को भरोसा दिलाया कि उनकी सरकार हर हाल में उनके साथ खड़ी है. ट्रंप प्रशासन ने 27 अगस्त से भारतीय सामान पर 50% शुल्क लगाने का ऐलान किया है. इसके बीच मोदी ने स्वदेशी वस्तुओं के व्यापक उपयोग पर जोर दिया और व्यापारियों से अपील की कि वे अपने प्रतिष्ठानों पर बड़े बोर्ड लगाएं, जिस पर लिखा हो- ‘यहां केवल स्वदेशी सामान बिकता है.’

आप नेता सौरभ भारद्वाज के घर सुबह-सुबह रेड, क्या है वह कांड जिस पर ED ने लिया एक्शन

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दिल्ली में आम आदमी पार्टी के नेता और पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज के घर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सुबह-सुबह छापेमारी की है. जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई हॉस्पिटल निर्माण घोटाले से जुड़ी जांच के तहत की जा रही है. सुबह से ही ईडी की टीम उनके आवास पर मौजूद है और तलाशी की कार्रवाई चल रही है. प्राप्त जानकारी के मुताबिक, ED अधिकारी मंगलवार सुबह से ही 13 लोकेशन पर सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं.

बताया जा रहा है कि यह मामला उन अस्पताल परियोजनाओं से जुड़ा है, जिनमें बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और वित्तीय गबन के आरोप लगे हैं. दरअसल, भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) ने सबसे पहले इस घोटाले की ओर इशारा किया था. एसीबी की जांच में सामने आया था कि साल 2018-19 में दिल्ली में करीब 5,500 करोड़ रुपये की लागत से 24 अस्पताल परियोजनाओं को मंजूरी दी गई थी. इनमें 11 ग्रीनफ़ील्ड और 13 ब्राउनफ़ील्ड प्रोजेक्ट शामिल थे. लेकिन इन परियोजनाओं में बेवजह देरी हुई और लागत भी कई गुना बढ़ गई, जिससे वित्तीय गबन का संदेह और गहरा हो गया.

क्या है पूरा मामला?

ये अस्पताल निर्माण घोटाला करीब 5,590 करोड़ का है. साल 2018-19 में दिल्ली सरकार ने 24 अस्पतालों के निर्माण के लिए 5,590 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी थी. इसके तहत 6 महीने में ICU अस्पताल बनना था, लेकिन 3 साल बाद भी काम अधूरा रहा. इनमें से कई प्रोजेक्ट्स में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं.
  • प्रोजेक्ट्स को 6 महीने में पूरा करना था, लेकिन 3 साल बाद भी अधिकांश काम अधूरा.
    800 करोड़ खर्च होने के बावजूद केवल 50% काम पूरा हुआ.
  • LNJP अस्पताल की लागत 488 करोड़ से बढ़कर 1,135 करोड़ रुपये हो गई, जबकि इसके काम कोई ठोस प्रगति भी नहीं दिखी.
  • कई स्थानों पर बिना मंजूरी के निर्माण कार्य शुरू किए गए और ठेकेदारों की भूमिका संदिग्ध पाई गई.
  • हॉस्पिटल इन्फॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम (HIMS) 2016 से पेंडिंग है, जिसे जानबूझकर टालने का आरोप है.

एसीबी की ओर से दर्ज इस मामले को अब ईडी ने टेकओवर कर लिया है. ईडी की जांच का फोकस अस्पताल निर्माण के दौरान हुए पैसों के हेरफेर और उससे जुड़े राजनीतिक व प्रशासनिक स्तर पर हुई कथित मिलीभगत पर है. इस घोटाले में पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन और मौजूदा मंत्री सौरभ भारद्वाज का नाम सामने आया है. दोनों के खिलाफ मामला दर्ज कर ईडी ने जांच तेज कर दी है.

अमेरिका से टैरिफ वार के बीच रूस से एक और तोहफा, इस साल जमकर मनेगी दिवाली

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अमेरिका से जारी टैरिफ वार के बीच भारत के लिए रूस एक तरह से ढाल बनकर सामने आया है. हथियारों से लेकर सस्ते तेल तक… वह कई चीजें भारत को दिल खोलकर देने को तैयार है जिससे कि डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ हमले के असर को बेअसर किया जा सके. इस बीच एक शानदार रिपोर्ट आई है. इससे हर जरूरतमंद भारतीय के घर में खुशी आ सकती है. दरअसल, पिछले तीन साल से यूक्रेन के साथ जंग में उलझे रूस भारी लेबर संकट से जूझ रहा है. इस संकट को दूर करने के लिए रूस अब अपनी पारंपरिक श्रम आपूर्ति, यानी पूर्व सोवियत गणराज्यों से आगे बढ़कर एशियाई देशों की ओर रुख कर रहा है. इस दिशा में भारत एक प्रमुख साझेदार के रूप में उभर रहा है. रूस में भारत के राजदूत विनय कुमार ने हाल ही में रूसी समाचार एजेंसी TASS को बताया कि रूसी कंपनियां विशेष रूप से मशीनरी और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में भारतीय कामगारों को नियुक्त करने में गहरी रुचि दिखा रही हैं. दूसरी तरफ भारत में बड़ी संख्या में युवाओं को अच्छी नौकरी की जरूरत है. लेकिन, उन्हें अच्छे अवसर नहीं मिलते हैं. ऐसे में रूस में रोजगार के नए दरवाजे खुलने से भारतीय परिवारों में खुशहाली आएगी.

यह कदम रूस की अर्थव्यवस्था को स्थिर करने और श्रम की कमी को पूरा करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण प्रयास है. रूस में भारतीय कामगारों की बढ़ती संख्या पिछले कुछ वर्षों में रूस में भारतीय कामगारों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. थिंक टैंक ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) के अनुसार रूसी सरकार के आंकड़ों से पता चलता है कि 2021 में जहां केवल 5,480 भारतीयों को रूस में वर्क परमिट जारी किए गए थे, वहीं 2024 में यह संख्या बढ़कर 36,208 हो गई. यह आंकड़ा रूस की श्रम आवश्यकताओं और भारतीय कामगारों की बढ़ती मांग को स्पष्ट करता है. विनय कुमार ने बताया कि रूस में भारतीय कामगार मुख्य रूप से निर्माण और कपड़ा क्षेत्रों में कार्यरत हैं, लेकिन अब मशीनरी और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे उच्च-कौशल वाले क्षेत्रों में भी उनकी मांग बढ़ रही है.
उन्होंने कहा कि रूस में जनशक्ति की आवश्यकता है और भारत के पास कुशल जनशक्ति उपलब्ध है. वर्तमान में रूसी नियमों और कोटा प्रणाली के तहत कंपनियां भारतीयों को नियुक्त कर रही हैं. हालांकि, भारतीय कामगारों की बढ़ती संख्या ने दूतावास और वाणिज्य दूतावासों पर भी दबाव बढ़ाया है. राजदूत ने बताया कि पासपोर्ट नवीनीकरण, बच्चों के जन्म प्रमाणपत्र, पासपोर्ट के नुकसान जैसे कांसुलर सेवाओं की मांग में वृद्धि हुई है. इस चुनौती से निपटने के लिए भारत ने येकातेरिनबर्ग में एक नया वाणिज्य दूतावास खोलने की योजना बनाई है. बीते जुलाई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी रूस यात्रा के दौरान मॉस्को में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए येकातेरिनबर्ग और कज़ान में दो नए वाणिज्य दूतावास खोलने की घोषणा की थी, ताकि यात्रा और व्यापार को बढ़ावा दिया जा सके.
रूस में कामगारों की कमी का प्रमुख कारण यूक्रेन के साथ चल रहा युद्ध है, जिसने रूसी अर्थव्यवस्था और जनशक्ति को प्रभावित किया है. युद्ध के कारण रूसी सशस्त्र बलों और रक्षा उद्योगों में भारी भर्ती की गई है, जिसके चलते निजी कंपनियों में कामगारों की कमी हो गई है. इसके अलावा रूस की जनसांख्यिकीय गिरावट और प्रवास-विरोधी नीतियों ने इस संकट को और गहरा किया है. फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूसी सैन्य कार्रवाई शुरू होने के बाद से लाखों रूसी नागरिक देश छोड़कर चले गए हैं. इस कारण भी श्रम बाजार में और कमी आई. 2024 में रूसी कारखानों ने 47,000 विदेशी कामगारों को नियुक्त किया, जो सरकार द्वारा निर्धारित 40,500 के कोटे से 16 प्रतिशत अधिक है. ये कामगार मुख्य रूप से चीन, भारत, तुर्की, सर्बिया और अन्य वीजा-आवश्यकता वाले देशों से आए हैं. रूसी श्रम मंत्रालय के अनुसार 2025 के लिए भारतीय कामगारों के लिए अधिकतम 71,817 वर्क परमिट का कोटा निर्धारित किया गया है.
रूस की कई कंपनियां भारतीय कामगारों को नियुक्त करने के लिए सक्रिय कदम उठा रही हैं. उदाहरण के लिए मॉस्को स्थित डेवलपर समोल्योट ग्रुप ने मार्च में भारतीय निर्माण कामगारों को नियुक्त करने के लिए एक पायलट कार्यक्रम शुरू किया था. हालांकि, इस कार्यक्रम को भाषा और सांस्कृतिक में अंतर के कारण पूरी सफलता नहीं मिली. फिर भी रिटेल दिग्गज X5 ग्रुप और ऑनलाइन मार्केट प्लेस ओजोन जैसी कंपनियों ने हाल के वर्षों में भारतीय कामगारों को नियुक्त किया है. रूस में वेल्डर, कंक्रीट वर्कर, फिनिशर और खाद्य व कृषि कर्मचारियों जैसे व्यवसायों में विदेशी कामगारों की मांग बढ़ रही है. भर्ती एजेंसी इंट्रुड के प्रबंध निदेशक दिमित्री लापशिनोव के अनुसार ये क्षेत्र विशेष रूप से श्रम की कमी से जूझ रहे हैं.

रूस का एशियाई देशों की ओर रुख

रूस अब केवल भारत ही नहीं बल्कि म्यांमार, श्रीलंका और उत्तर कोरिया जैसे अन्य एशियाई देशों से भी कामगार लाने की योजना बना रहा है. उरल्स चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के प्रमुख आंद्रेई बेसेडिन ने हाल ही में दावा किया था कि 2025 के अंत तक रूस में 10 लाख भारतीय कामगार आ सकते हैं. हालांकि, रूसी श्रम मंत्रालय ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि यह सटीक नहीं है और विदेशी कामगारों की भर्ती कोटा प्रणाली के तहत ही होगी.

भारत-रूस संबंधों को बढ़ावा

भारतीय कामगारों की बढ़ती मांग न केवल रूस की श्रम आवश्यकताओं को पूरा कर रही है, बल्कि भारत और रूस के बीच आर्थिक और राजनयिक संबंधों को भी मजबूत कर रही है. प्रधानमंत्री मोदी की हाल की रूस यात्रा और नए वाणिज्य दूतावासों की स्थापना जैसे कदम दोनों देशों के बीच व्यापार और लोगों के आवागमन को बढ़ाने की दिशा में महत्त्वपूर्ण हैं.