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योजनाओं और सुविधाओं के क्रियान्वयन में और ज्यादा गति व पारदर्शिता के साथ करें परिणाममूलक कार्य – श्री अरुण साव

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उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने मंत्रालय में आयोजित मैराथन बैठक में विभागीय योजनाओं का सक्रियता से क्रियान्वयन कर नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने, निर्माण कार्यों की गति बढ़ाने तथा स्वच्छता एवं सौंदर्यीकरण के कार्यों को प्रभावी तरीके से धरातल पर उतारने के निर्देश दिए। उन्होंने बैठक में 25 से अधिक योजनाओं की प्रगति की समीक्षा कर अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सचिव डॉ. बसवराजु एस. और संचालक श्री आर. एक्का भी बैठक में शामिल हुए।

उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने बैठक में अधिकारियों से कहा कि शहरों को स्वच्छ, सुंदर और नागरिक सुविधाओं से परिपूर्ण बनाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं। बीते डेढ़ वर्षों में नगरीय प्रशासन विभाग ने कई नवाचार किए हैं, जिससे शहरी सेवाओं में व्यापक सुधार आया है। विभागीय योजनाओं और सुविधाओं के क्रियान्वयन में और ज्यादा गति तथा पारदर्शिता के साथ परिणाममूलक कार्य करने की जरूरत है। उन्होंने योजनाओं को समयबद्ध और प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया, जिससे कि शहरों के विकास को नई दिशा दी जा सके।

उप मुख्यमंत्री श्री साव ने राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) द्वारा संचालित ई-गवर्नेंस और मोर संगवारी योजना की समीक्षा करते हुए इनकी प्रक्रियाओं में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने निदान-1100 योजना के विस्तार के साथ ही नए आरएफपी की प्रक्रिया को शीघ्र अंतिम रूप देने को कहा। उन्होंने अमृत मिशन के तहत बस्तर और सरायपाली के लिए तैयार किए गए डीपीआर का जल्दी परीक्षण कर प्राथमिकता से स्वीकृत करने को कहा।

65 लाख उपभोक्ताओं को बड़ी राहत, जुलाई में कम आएगा बिजली बिल, मिलेगी छूट

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प्रदेशभर के 65 लाख बिजली उपभोक्ताओं को इस महीने के बिजली बिल में राहत मिलेगी। उपभोक्ताओं के बिजली बिल में लगने वाला ईंधन और विद्युत क्रय समायोजन अधिभार (एफपीपीएएस) इस बार भी कम रहा।

प्रदेशभर के 65 लाख बिजली उपभोक्ताओं को इस महीने के बिजली बिल में राहत मिलेगी। उपभोक्ताओं के बिजली बिल में लगने वाला ईंधन और विद्युत क्रय समायोजन अधिभार (एफपीपीएएस) इस बार भी कम रहा। लगातार दूसरे महीने इसकी दर में कमी आई है। जून महीने के बिल में उपभोक्ताओं ने जितना बिल भरा होगा, उसमें ऊर्जा प्रभार में 1.44 प्रतिशत की छूट मिलेगी। यानी वे उस अनुपात में कम बिल अदा करेंगे।

डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के प्रबंध निदेशक भीम सिंह कंवर ने बताया कि यह छूट कम्प्यूटराइज्ड स्वगणना प्रणाली से बिल में घटा दिया जाएगा, जिसे अधिभार कॉलम में अंकित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पॉवर कंपनी के बेहतर प्रबंधन और संयंत्रों के उत्पादन में संतुलन से यह अधिभार कम हुआ है। इससे हर उपभोक्ता के बिल में कुछ राशि घटी हुई दिखाई देगी।

सुबह स्टालिन के साथ टहलते नजर आए, शाम होते-होते ओ. पन्नीरसेल्वम ने NDA से तोड़ा नाता

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तमिलनाडु की सियासत में इन दिनों एक नई हलचल दिख रही है. मुख्यमंत्री एमके स्टालिनi]k, ने अचानक पूर्व मुख्यमंत्री ओ. पन्नीरसेल्वम (OPS) से उनके घर पर मुलाकात की. इस मुलाकात में डिप्टी सीएम और स्टालिन के बेटे उदयनिधि स्टालिन भी मौजूद थे. यह एक साधारण शिष्टाचार भेंट नहीं थी. 2026 विधानसभा चुनाव से पहले तमिल राजनीति के समीकरणों में बड़ा बदलाव आ रहा है. OPS हाल ही में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए से अलग हो चुके हैं. वजह? प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की उनकी मांग को ठुकरा दिया गया, जब पीएम तमिलनाडु दौरे पर थे. इस अपमान के बाद OPS गुट पूरी तरह एनडीए से किनारा कर गया.

पन्नीरसेल्वम के करीबी और वरिष्ठ नेता पनरुट्टी रामचंद्रन ने बाकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस फैसले का ऐलान किया. उन्होंने साफ कहा, ‘अब से हमारी समिति एनडीए का हिस्सा नहीं रहेगी.’ उनके साथ OPS और अन्य प्रमुख नेता मौजूद थे. उन्होंने यह भी कहा कि OPS पूरे राज्य का दौरा करेंगे और भविष्य में गठबंधन पर फैसला हालात के अनुसार लेंगे.
क्यों नाराज हैं पन्नीरसेल्वम?
यह घटनाक्रम ऐसे समय पर हुआ है जब OPS ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया है. उन्होंने समग्र शिक्षा अभियान के तहत तमिलनाडु को 2,151 करोड़ रुपये की राशि रोकने के लिए केंद्र को जिम्मेदार ठहराया. OPS का आरोप है कि राज्य सरकार के तीन भाषा फॉर्मूले को न मानने पर केंद्र ने फंड रोक दिया, जो न सिर्फ RTE एक्ट का उल्लंघन है, बल्कि संघीय ढांचे के खिलाफ भी है. उन्होंने कहा कि इस वजह से 25% छात्रों का निजी स्कूलों में दाखिला खतरे में पड़ गया है.
OPS की ये नाराजगी अब बीजेपी से एक खुला टकराव बन गई है. उन्होंने 2024 लोकसभा चुनाव में एनडीए के बैनर तले निर्दलीय चुनाव लड़ा था, लेकिन हार का सामना करना पड़ा. सूत्रों की मानें तो वे काफी समय से बीजेपी में मिल रहे ‘अनादर’ से खिन्न थे. एक निष्कासित AIADMK नेता ने नाम न छापने की शर्त पर हिंदुस्तान टाइम्स को बताया, ‘हमने पिछले साल ही उन्हें कहा था कि बीजेपी से दूर रहिए.’

सबसे दिलचस्प बात ये रही कि जब उनसे पीएम मोदी से मुलाकात न होने को लेकर सवाल हुआ, तो बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष नैनार नागेन्द्रन ने जवाब दिया, ‘अगर मुझे पता होता कि वो मिलना चाहते हैं, तो मैं जरूर मुलाकात करवाता.’ लेकिन OPS के करीबियों की मानें तो उन्हें जानबूझकर नजरअंदाज किया गया.
क्या करेंगे पन्नीरसेल्वम?

अब OPS के लिए यह नई सियासी पारी की शुरुआत हो सकती है. उन्होंने खुद को न केवल बीजेपी से अलग किया है, बल्कि इस बात के संकेत भी दे दिए हैं कि अगला चुनाव वे नई साझेदारी या शायद अकेले लड़ सकते हैं. और स्टालिन की मुलाकात? वह शायद यही जताना चाहते हैं कि तमिल राजनीति में अब पुराने दुश्मन भी साझेदार बन सकते हैं, अगर फायदा दोनों को हो.

रोहिंग्या मुसलमान कौन हैं? ‘शरणार्थी या घुसपैठिए?’ पहचान पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को रोहिंग्या मुसलमानों से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान एक अहम सवाल खड़ा किया, क्या ये लोग भारत में शरणार्थी हैं या अवैध घुसपैठिए? जस्टिस सूर्यकांत, दीपांकर दत्ता और एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने साफ किया कि सबसे पहले रोहिंग्याओं की कानूनी पहचान तय करना जरूरी है. अगर वे शरणार्थी हैं, तो उनके अधिकार और संरक्षण भी तय होंगे. लेकिन अगर वे अवैध तरीके से भारत में दाखिल हुए हैं, तो उनकी वापसी यानी डिपोर्टेशन को लेकर केंद्र का फैसला सही है या नहीं. इस पर सुप्रीम कोर्ट बाद में विचार करेगा.

कोर्ट ने पूछे अहम सवाल
क्या रोहिंग्याओं को शरणार्थी घोषित किया जा सकता है? अगर हां, तो उन्हें कौन-कौन से अधिकार मिलने चाहिए? अगर वे अवैध घुसपैठिए हैं, तो क्या उन्हें भारत से वापस भेजना उचित है? जो रोहिंग्या हिरासत में नहीं हैं और रिफ्यूजी कैंपों में रह रहे हैं, क्या उन्हें पीने का पानी, शिक्षा, और साफ-सफाई जैसी सुविधाएं मिल रही हैं
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने ये भी पूछा कि इतने सारे केस एक साथ क्यों लाए गए? याचिकाकर्ताओं के वकील ने बताया कि सभी मामलों में मुद्दे काफी हद तक आपस में जुड़े हुए हैं. एक मुख्य मुद्दा रोहिंग्याओं की अनिश्चितकालीन हिरासत को लेकर भी है.
केसों को तीन भागों में बांटा गया

कोर्ट ने साफ किया कि अब से इन केसों को तीन हिस्सों में सुना जाएगा. पहला, जो सीधे तौर पर रोहिंग्याओं से जुड़े हैं. दूसरा, जो उनसे संबंधित नहीं हैं और तीसरा, वो मामले जो अलग विषय के हैं लेकिन रोहिंग्याओं से जुड़े हुए हैं. सुप्रीम कोर्ट अब इन सभी मामलों की सुनवाई हर बुधवार को अलग-अलग करेगा.

उपराष्ट्रपति चुनाव में कौन-कौन वोट डालेगा….लिस्ट हो गई तैयार, अब चुनाव आयोग के नोटिफिकेशन का इंतजार+

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भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने उपराष्ट्रपति चुनाव 2025 के लिए निर्वाचक मंडल की सूची तैयार कर ली है. आयोग ने गुरुवार को एक प्रेस नोट जारी कर यह जानकारी दी. भारत निर्वाचन आयोग ने प्रेस नोट में बताया कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत निर्वाचन आयोग को उपराष्ट्रपति के चुनाव की जिम्मेदारी सौंपी गई है. संविधान के अनुच्छेद 66(1) के अनुसार, उपराष्ट्रपति का चुनाव एक निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है, जिसमें राज्यसभा के निर्वाचित और मनोनीत सदस्यों के साथ-साथ लोकसभा के निर्वाचित सदस्य शामिल होते हैं.

ईसीआई के मुताबिक, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव नियम, 1974 के नियम 40 के अनुपालन में, आयोग ने निर्वाचक मंडल की सूची तैयार की है, जिसमें सभी सदस्यों के नवीनतम पते भी शामिल हैं. यह सूची राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के आधार पर वर्णमाला क्रम में व्यवस्थित की गई है.
भारत निर्वाचन आयोग में सहायक निदेशक अपूर्व कुमार सिंह ने बताया कि यह सूची अधिसूचना की तारीख से भारत निर्वाचन आयोग में स्थापित एक काउंटर पर खरीद के लिए उपलब्ध होगी. अधिसूचना की घोषणा जल्द होने की संभावना है.
उल्लेखनीय है कि जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने उपराष्ट्रपति पद के चुनाव की तैयारी तेज कर दी है. हाल ही में आयोग ने उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए रिटर्निंग अधिकारी और सहायक रिटर्निंग अधिकारी की नियुक्ति की थी.
ईसीआई ने बयान में बताया था कि पिछले उपराष्ट्रपति निर्वाचन के दौरान लोकसभा के महासचिव को रिटर्निंग अधिकारी नियुक्त किया गया था. इसलिए, निर्वाचन आयोग ने विधि और न्याय मंत्रालय से परामर्श करके तथा राज्यसभा के उपसभापति की सहमति से राज्यसभा के महासचिव को आगामी उपराष्ट्रपति निर्वाचन, 2025 के लिए रिटर्निंग अधिकारी नियुक्त किया है.

इसके अलावा, राज्यसभा सचिवालय की संयुक्त सचिव गरिमा जैन और राज्यसभा सचिवालय के निदेशक विजय कुमार को उपराष्ट्रपति निर्वाचन, 2025 के दौरान सहायक रिटर्निंग अधिकारी के तौर पर नियुक्त किया है.
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भारत तो छोड़िए…..94 देशों पर फूटा डोनाल्ड ट्रंप का टैरिफ बम, कब से लागू, देखें पूरी लिस्ट

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिर से कई देशों पर टैरिफ का ऐलान किया है. अमेरिका ने 10 से 41 प्रतिशत तक रेसिप्रोकल टैरिफ या फिर जवाबी टैरिफ लगाया है. 68 छोटे बड़े और 27 यूरोपीयन यूनियन देशों पर टैरिफ लगाया गया है. ट्रंप ने गुरुवार को इस आदेश पर हस्ताक्षर करते हुए कहा कि ये टैरिफ इन देशों पर 7 अगस्त से लागू हो जाएगी. ट्रंप ने बताया कि ये कदम उनकी व्यापार रणनीति और अमेरिका के हित को देखते हुए लगाया गया है. हालांकि, यह वैश्विक अर्थव्यवस्था और कई दशकों से बने अमेरिकी गठबंधनों के लिए एक चुनौती साबित हो सकता है. चलिए जानते हैं ट्रंप का ये टैरिफ बम किन-किन देशों पर गिरा है.
व्हाइट हाउस के की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, इन शुल्क में कोई बदलाव नहीं की जाएगी. इससे से 68 देशों के साथ-साथ 27 यूरोपीय संघ (यानी कि कुल 95 देश) प्रभावित होंगे. ट्रंप के आदेश में जिन देशों को विशेष रूप से लिस्टिंग नहीं की गई है, उन पर 10% की डिफ़ॉल्ट टैरिफ दर लागू होगी. व्हाइट हाउस की ओर से टैरिफ के बारे में एक अन्य और काफी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई. जारी बयान में बताया गया कि ट्रंप द्वारा जारी नए टैरिफ 7 अगस्त से लागू की जाएगी. मगर, अमेरिका आने वाले जो समान 7 अगस्त को अमेरिका के लिए जहाज से रवाना हो गया हो और जिनके अक्टूबर तक पहुंचने की संभावना है तो उन पर टैरिफ नहीं लगेगा.

मेक्सिको पर ट्रंप मेहरबान
वहीं, ट्रंप मेक्सिको के साथ नरमी बरत रहे हैं. ट्रंप ने कहा कि वह मेक्सिको के साथ व्यापार वार्ता को 90 दिनों के लिए और बढ़ाएंगे. हालांकि, जैसे-जैसे टैरिफ की सीमा नजदीक आ रहा है, ज्यादातर देश अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं. हालांकि, कुछ व्यापारिक समझौते पहले ही हो चुके हैं, लेकिन उनका विवरण अभी भी अस्पष्ट हैं.
पाकिस्तान पर 19 प्रतिशत की टैरिफ
अमेरिका ने पहले ही भारत पर 25 प्रतिशत का टैरिफ और अलग से फाइन लगाने का फैसला किया है. मगर, ट्रंप ने गुरुवार को कई देशों पर नए टैरिफ लागू करने वाले आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं. इसमें पाकिस्तान पर 19%, बांग्लादेश और वियतनाम पर 20%, दक्षिण अफ्रीका पर 30%, और स्विट्जरलैंड पर सबसे अधिक 39% टैरिफ लगाया गया है. इनके अलावा, अफ्रिकी और यूरोपियन देशों पर भी टैरिफ बम फूटा है. चलिए नीचे देखते हैं पूरी लिस्ट-
देश टैरिफ
भारत 25%
अफ़गानिस्तान 15%
अल्जीरिया 30%
अंगोला 15%
बांग्लादेश20%

हिमाचल में फिर हादसा, 150 फीट खाई में गिरी निजी बस, महिला की मौत, 9 सवारियां घायल

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हिमाचल प्रदेश में लगातार बस हादसे हो रहे हैं. अब मंडी जिले के गोहर उपमंडल के तुना के पास चानणी नाला में गुरुवार शाम को निजी बस के अंनियत्रित होकर खाई में गिर गई. हादसे में कुल 9 लोग घायल हुए हैं. वहीं, एक महिला की मौत हो गई. घटना के बाद मौके पर चीखपुकार मच गई और स्थानीय लोगों ने घायलों को खाई से निकाला. फिलहाल, मंडी पुलिस हादसे की जांच कर रही है.
जानकारी के अनुसार, निजी बस जाहल से मंडी की ओर आ रही थी और शाम साढ़े पांच बजे के करीब यह बस जैसे ही तुना के पास चानणी नाला पहुंची तो अनियंत्रित होकर 150 फीट खाई में जा गिरी. बस में कुल 10 यात्री सवार थे, जिनमें 2 पुरुष व 8 महिलाएं शामिल थीं. दुर्घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे और घायलों को खाई से बाहर निकालने में मदद की.
हादसे में गंभीर रूप से घायल 46 वर्षीय निर्मला देवी पत्नी किशोरी लाल निवासी नौण ने गोहर में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया है. वहीं 22 वर्षीय अमन पुत्र रविंद्र कुमार निवासी नलेड़, 54 वर्षीय बुधी देवी पत्नी लालमन निवासी तरोरे, 21 वषीर्य मीना पत्नी दुर्गादास निवासी नौण, 28 वर्षीय मीरा देवी पत्नी शेर सिंह निवासी तरोरे, 43 वर्षीय चंद्रा देवी निवासी नौण, 35 वर्षीय भामा देवी पत्नी परमदेव निवासी नौण, 20 वषीर्य सपना पत्नी सुरेश कुमार निवासी शाला, 42 वर्षीय भारती शर्मा पत्नी निवासी तरोरे और 40 वर्षीय प्रकाश पुत्र रूपलाल निवासी शेगली इस हादसे में घायल हुए हैं. एसपी मंडी साक्षी वर्मा ने घटना की पुष्टि की है. उन्होंने बताया कि मृतक महिला के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है . घटना के पीछे क्या कारण रहे इसकी जांच जारी है.
108 एंबुलेंस के माध्यम से चार घायलों को प्राथमिक उपचार के लिए गोहर में अस्पताल भर्ती कराया गया है, जहां से 5 घायलों की नाजुक हालात को देखते हुए उन्हें बेहतर उपचार के लिए नेरचौक मेडिकल अस्पताल रेफ़र किया गया है. गोहर थाना की टीम ने मौके पर पहुंचकर घटना की आगामी छानबीन शुरू कर दी है.
मंडी में लगातार हो रहे हादसे
गौरतलब है मंडी जिले में बीत दो माह में चार बस हादसे हुए हैं. हाल ही में सरकारघाट में एचआरटीसी की एक बस मसेरन के तारंगला में हादसे का शिकार हो गई थी, जिसमें 8 लोगों की मौत और 21 लोग घायल हुए थे.

कश्मीर से केवड़िया… उमर अब्दुल्ला को साबरमती रिवरफ्रंट पर दौड़ते देख क्या बोले PM मोदी

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जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला गुजरात दौरे पर हैं. उन्होंने अहमदाबाद के साबरमती रिवरफ्रंट की तारीफ की. इस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि उनकी यह यात्रा एकता का महत्वपूर्ण संदेश देती है.
प्रधानमंत्री मोदी ने सीएम उमर अब्दुल्ला के सोशल मीडिया पोस्ट को रिपोस्ट करते हुए कहा कि कश्मीर से केवड़िया. उमर अब्दुल्ला को साबरमती रिवरफ्रंट पर दौड़ते और स्टैच्यू ऑफ यूनिटी देखने जाते देखकर बहुत अच्छा लगा. उनकी यह यात्रा एकता का एक महत्वपूर्ण संदेश देती है और हमारे साथी भारतीयों को भारत के विभिन्न हिस्सों की यात्रा करने के लिए प्रेरित करेगी.
इससे पहले जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि एक पर्यटन कार्यक्रम के लिए अहमदाबाद में रहते हुए मैंने यहां होने का फायदा उठाते हुए प्रसिद्ध साबरमती रिवरफ्रंट सैरगाह पर सुबह की दौड़ लगाई. यह उन सबसे खूबसूरत जगहों में से एक है, जहां मैं दौड़ पाया हूं और इतने सारे अन्य पैदल यात्रियों व धावकों के साथ इसे साझा करना मेरे लिए खुशी की बात थी. मैं अद्भुत अटल फुट ब्रिज के पास से भी दौड़कर गुजरने में कामयाब रहा.
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को देखकर कहा, “मैंने सोचा नहीं था कि यह प्रतिमा इतनी भव्य होगी. इसे देखकर ही समझा जा सकता है कि यह किस सोच और भाव से बनाई गई है. सरदार वल्लभभाई पटेल, जिन्हें हम ‘आयरन मैन ऑफ इंडिया’ के नाम से जानते हैं, उनके लिए यह सच्ची श्रद्धांजलि है. यह ‘नए भारत’ की एक बड़ी पहचान है.”

OPINION: ‘डेड इकॉनमी’, ट्रंप की चाल और राहुल गांधी का ताल, क्‍या इतना भी नहीं समझते क‍ि देश की बात पर अड़ जाना जरूरी है

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत की अर्थव्यवस्था को ‘डेड इकॉनमी’ कहा तो कांग्रेस नेता राहुल गांधी को इसमें पीएम मोदी को खलनायक साबित करने का मौका दिख गया. उन्‍हें तुरंत इसे लपक लिया और कह बैठे- ‘ट्रंप सच बोल रहे हैं.” सवाल ये नहीं है कि ट्रंप ने क्या कहा, बल्कि ये है कि क्या विपक्ष के नेता ये भूल गए हैं क‍ि बात जब देश पर हो तो अड़ जाना जरूरी है. कभी जवाहर लाल नेहरू ने कहा था क‍ि ‘नागरिक होना केवल अधिकारों का दावा नहीं, बल्कि देश की सेवा में समर्पण का सबूत भी है, यही वह मनोवृत्ति है जो समझाती है कि क्यों देश के हित पर अड़ना न सिर्फ जरूरी, बल्कि नैतिक आवश्यकता भी है.’ ये बात समझनी चाह‍िए.

इंड‍ियन इकॉनमी के ज‍िंदा होने का सबूत
कोविड के बाद जब दुनिया की ज्यादातर अर्थव्यवस्थाएं धीमी पड़ी हैं. इसी ट्रंप का अमेर‍िका बेहाल है. अमीर देशों में महंगाई चरम पर है. तब भारत न सिर्फ संभला हुआ है, बल्कि तेजी से उभरा भी है. आईएमएफ और वर्ल्‍ड बैंक भारत की विकास दर के अनुमानों को बार-बार ऊपर कर रहे हैं, तो आख‍िर ट्रंप वाली सच्चाई कहां है?
आईएमएफ ने दो द‍िन पहले ही भारत की विकास दर को 6.2 फीसदी से बढ़ाकर 6.4 फीसदी कर दिया है. रिजर्व बैंक ने भी इसे 6.4 फीसदी माना है. ये किसी ‘डेड इकॉनमी’ की तस्वीर नहीं है. जबक‍ि ओईसीडी के अनुसार, अमेरिका की आर्थिक वृद्धि दर इस साल घटकर 1.6 फीसदी रह जाएगी, जो पिछले साल 2.8 फीसदी थी.
भारत आज दुन‍िया में चौथे नंबर की इकॉनमी है. उसने जर्मनी को पीछे छोड़ द‍िया है. रिकॉर्ड टैक्स कलेक्शन कर रहा है जून 2025 में 1.88 लाख करोड़ का जीएसटी कलेक्‍ट हुआ. मैन्युफैक्चरिंग और एक्‍सपोर्ट में नई ऊंचाइयों को छू रहा है. चीन से इन्‍वेस्‍टमेंट निकलकर भारत आ रहा है.
एप्‍पल-टेस्‍ला जैसी अमेर‍िकी कंपन‍ियां भारत में भारी इन्‍वेस्‍टमेंट कर रही हैं. ट्रंप की धमक‍ियों के बावजूद वे भारत में मोटा पैसा लगाने के ल‍िए तैयार हैं. और राहुल गांधी भी ये जानते होंगे क‍ि व्‍यापारी वहीं जाता है, जहां उसे संभावनाएं नजर आती हैं. कारोबार नजर आता है. यह इंडियन इकोनॉमी के ज‍िंदा होने का सबूत है.
ट्रंप की बयानबाजी को हम उनकी ज‍ियोपॉल‍िट‍िक स्‍ट्रैटजी का हिस्सा मान सकते हैं पर राहुल गांधी जैसे जिम्मेदार नेता जब विदेशी आलोचनाओं पर ताली बजाते हैं, तो सवाल उठता है कि क्या उनका झुकाव सत्ता की राजनीति से ऊपर देश की प्रतिष्ठा को बचाने का है? सबूत गवाह हैं क‍ि इंडियन इकॉनमी न सिर्फ जिंदा है, बल्कि दौड़ रही है और अगर यही रफ्तार रही, तो अगला दशक ‘इंडिया का दशक’ बन सकता है. दुनिया जानती है, आंकड़े गवाही देते हैं, बस कुछ लोगों को दिखना बंद हो गया है.

अडानी समूह के इस कारोबार में 7 फीसदी गिरावट, मार्केट कैप गिरकर 52320 करोड़ पहुंचा, निवेशकों पर क्‍या होगा असर

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गौतम अडानी की रियल एस्टेट कारोबार की संपत्तियां जून, 2025 तक सालाना आधार पर 7 फीसदी घटकर 52,320 करोड़ रुपये रह गई हैं. इससे वह इस क्षेत्र के सबसे धनी लोगों की सूची में तीसरे स्थान पर आ गए. एक रिपोर्ट में गुरुवार को यह जानकारी दी गई. हुरुन रिसर्च और ग्रोहे के अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया कि अडानी अगले पांच वर्ष में रियल एस्टेट क्षेत्र के सबसे धनी व्यक्ति बन सकते हैं. वह वित्तीय राजधानी मुंबई में धारावी और मोतीलाल नगर पुनर्विकास जैसी परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं.
इस रिपोर्ट के मुताबिक, डीएलएफ के मालिक राजीव सिंह 1.27 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति के साथ ग्रोहे-हुरुन इंडिया रियल एस्टेट की 150 लोगों की सूची में शीर्ष पर हैं. उनके बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता एवं महाराष्ट्र के मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा 92,340 करोड़ रुपये की संपत्ति के साथ दूसरे स्थान पर हैं. डीएलएफ के सिंह की संपत्ति पिछले वित्‍तवर्ष के दौरान 3 प्रतिशत बढ़ी, जबकि लोढ़ा की संपत्ति में मात्र 1 प्रतिशत का उछाल आया है.

5 साल में अडानी होंगे सबसे आगे
हुरुन इंडिया के मुख्य शोधकर्ता एवं संस्थापक अनस रहमान जुनैद ने कहा कि गौतम अडानी बहुत महत्वाकांक्षी हैं. उनकी महत्वाकांक्षा अगले पांच वर्ष में डीएलएफ से आगे निकलकर शीर्ष पर पहुंचने की है. भारत में ग्रोहे की प्रमुख प्रिया रुस्तोगी ने भी इस बात पर सहमति जताई. रहमान ने कहा कि अडानी रियल्टी पूरी तरह से अडानी परिवार के स्वामित्व में है. यह पहले से ही सबसे मूल्यवान गैर-सूचीबद्ध रियल एस्टेट कंपनी है. शोधकर्ता पूरे क्षेत्र में संपत्ति का आकलन करने के लिए वैज्ञानिक तरीके का इस्तेमाल करते हैं.
कौन सी सबसे नई और पुरानी कंपनी
दीपक पारेख के नेतृत्व वाली श्लॉस बेंगलूर 13,600 करोड़ रुपये के मूल्यांकन के साथ सूची में सबसे युवा कंपनी है. इसने छह वर्ष के भीतर यह मूल्यांकन हासिल किया है. साल 1871 में स्थापित पेनिनसुला लैंड 1,000 करोड़ रुपये के मूल्यांकन के साथ सबसे पुरानी कंपनी है. इस सूची में शामिल 150 कंपनियों में से केवल 33 का नेतृत्व पेशेवर मुख्य कार्यपालक अधिकारी कर रहे हैं. केवल चार कंपनियां ऐसी हैं जिनका नेतृत्व महिलाएं कर रही हैं.

कितना बड़ा है रियल एस्‍टेट कारोबार
भारत का रियल एस्‍टेट बिजनेस दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाला सेक्‍टर है. साल 2024 तक जहां इसके 482 अरब डॉलर रहने का अनुमान था, वहीं 2025 में यह बढ़कर 660 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है. साल 2030 तक यह सेक्‍टर 1 ट्रिलियन डॉलर के मार्केट कैप को पार कर जाएगा तो 2033 तक इसके 1,184 अरब डॉलर तक पहुंचने का पूरा अनुमान है.