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विश्व पर्यावरण दिवस: रायपुर के प्राचीन तालाब तेलीबांधा – मरीन ड्राइव में बनी मानव श्रृंखला…

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विश्व पर्यावरण दिवस:  रायपुर के प्राचीन तालाब तेलीबांधामरीन ड्राइव में बनी मानव श्रृंखला हुआ गौरवशाली और सफल आयोजन……

प्रकृति प्रेमियों नेसौंदर्यीकरण की आड़ नेचर से खिलवाड़ और अनावश्यक निर्माण तत्काल बंद करने सहित’

 नवा रायपुर और सभी शहरी क्षेत्र में अर्बन फॉरेस्ट डेवलपमेंट की उठायी पुरजोर मांग’

छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा की अपील पर विश्व पर्यावरण दिवस पर जन जागरूकता बढ़ाने छत्तीसगढ़ तर्कशील परिषद्, अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति,  ग्रीन आर्मी अमलीडीह चेप्टर तथा ब्रेक थ्रो सोसायटी, अन्य सामाजिक शैक्षणिक संस्थाओं ने आगे आकर  रायपुर के  प्राचीन संरक्षित तालाब तेलीबांधा – मरीन ड्राइव पर  मानव श्रृंखला का निर्माण किया।

इस अवसर पर जंगल बचाने , पानी बचाने, हवा बचाने और जमीन तथा जिंदगी बचाने का संदेश दिया गया।

उल्लेखनीय है कि यह कार्यक्रम संयुक्त राष्ट्र संघ के 1972 में स्टॉकहोम सम्मेलन द्वारा लिए संकल्प के बाद हर वर्ष एक नई थीम के साथ मनाया जाता है।
इस वर्ष विश्व *पर्यावरण दिवस* *2026 की थीम  – *”प्रकृति से* प्रेरित- बेहतर* *जलवायु और  बेहतर भविष्य के* लिए” – इस थीम आधार पर आयोजित किया गया।

इस सफल मानव श्रृंखला के लिए  समाज के विभिन्न वर्गों के गणमान्य नागरिक, प्रशासनिक अधिकारियों, डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षाविद तथा पर्यावरण प्रेमियों  और जागरूक नागरिकों ने उत्साह पूर्वक हिस्सेदारी की।

कार्यक्रम की शुरुआत छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा के पर्यावरण गीत “पेड़ हैं सांसे ,पेड़ हैं जीवन”  के सामूहिक गायन से हुई।

इसके पश्चात उपस्थित नागरिकों ने पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता के संवर्धन तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।  विभागीय जांच आयुक्त दिलीप वासनिकर, नेहा वासनिकर, रायपुर संभाग के पूर्व कमिश्नर कर्मवीर महादेव कावरे,छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा के अध्यक्ष विश्वास मेश्राम, वरिष्ठ सदस्य एवं पर्यावरणविद उमा प्रकाश ओझा,  जैविक खेती के विशेषज्ञ लक्ष्मीकांत अग्रवाल, कृषि वैज्ञानिक अश्वनी बंजारा, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ स्नेहलता हुमने, रंगकर्मी रतन गोंडाने, अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के डाॅ. दिनेश मिश्र, ग्रीन आर्मी के अमिताभ दुबे, तर्कशील परिषद् के डॉ रमेश सुखदेवे,  विज्ञान सभा के बेनीराम गायकवाड़, सामाजिक कार्यकर्ता महेंद्र बागड़े, लेखक डॉ संजीव खुदशाह, तर्कशील मिथुन बंजारे  सहित सैकड़ो जागृत नागरिक उपस्थित रहे।

पूर्व कमिश्नर रायपुर संभाग  कर्मवीर महादेव कावरे द्वारा अपने सारगर्भित उदबोधन में अपने दक्षिण अफ्रीका अध्ययन यात्रा के दौरान केप टाउन का उदाहरण देते हुए बताया गया कि किस तरह वहां पर भूगर्भीय जल का विकराल संकट खड़ा हो गया है। आज पानी की कमी की वजह से कल का गुलजार  केपटाउन शहर उजड़ गया है। वहां के निवासी, व्यापारी और उद्योग धंधे दूसरी जगहों पर बसने के लिए मजबूर हो गए हैं। उन्होंने रायपुर में आयोजित इस कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि पर्यावरण बचाने छोटे छोटे कदम भी आगे चलकर बहुत बड़ा परिणाम देते हैं। उन्होंने रायपुर शहर के भू- जल स्तर को सुधारने के लिए और बढ़ते तापमान को कम करने के लिए योजनाबद्ध कार्य करने का सुझाव दिया।

विभागीय जांच आयुक्त दिलीप वासनीकर द्वारा भिलाई दुर्ग के अपने कार्यकाल में तालाबों के संरक्षण के कार्यों की याद दिलाई और कहा कि सामूहिक प्रयासों से हम जल जंगल जमीन और हवा बचाने का बड़ा काम कर सकते हैं।

छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा के अध्यक्ष विश्वास मेश्राम ने फ्यूचर ऑफ़ इंडिया अभियान के तहत आजादी के सौ साल होने पर 2047 तक भारत को विज्ञान और प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भर बनाने में आम जनता की पहल को बहुत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने क्लाइमेट चेंज के कारण कृषि पर पड़ने वाले खतरनाक प्रभावों को कम करने के लिए सरकार और आम जनता दोनों की भूमिका रेखांकित की।

अंध श्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ दिनेश मिश्र ने पर्यावरण संरक्षण के लिए बड़ी संख्या में आम लोगों की भागीदारी की जरूरत बताई।

विज्ञान सभा की रायपुर इकाई की सचिव और इस पूरे मानव श्रृंखला की संयोजिका डॉ अंजू मेश्राम ने बढ़ती गर्मी और हीट वेव को कम करने के उपायों पर प्रकाश डालते हुए रायपुर शहर को गर्मी में भी ठंडा रखने के लिए चरणबद्ध कार्ययोजना की रूपरेखा बताई।

ग्रीन आर्मी छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष अमिताभ दुबे ने प्रदेश में ग्रीन आर्मी द्वारा किए जा रहे कामों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हर पर्यावरण दिवस के दिन ग्रीन आर्मी के प्रत्येक सदस्य को पर्यावरण संरक्षण के लिए एक निश्चित कार्य सौंपा जाता है।

विज्ञान सभा के वरिष्ठ सदस्य अधीर भगवनानी ने सभी नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों के किनारे बनाई जा रही कंक्रीट की नालियों में, पानी के रिचार्ज के लिए छोटे छोटे छिद्र छोड़ने की मांग की ताकि इन छिद्रों से पानी रिसकर भूजल के स्तर को ऊपर उठा सकें।

डी एम ए इंडिया चैनल के संपादक डॉ संजीव ख़ुदशाह ने तालाबों की घटती संख्या पर चिंता जाहिर की।

विज्ञान सभा के वरिष्ठ सदस्य और पर्यावरण कार्यकर्ता उमा प्रकाश ओझा ने रायपुर से नवा रायपुर शिफ्ट हो रहे दफ्तरों और सरकारी कालोनियों के आसपास की सभी जगहों पर कमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनाने के बजाय वहां की जमीनों पर संरक्षित अर्बन फॉरेस्ट लगाने का सुझाव दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन अर्बन फॉरेस्ट में केवल जंगल हो और अन्य सभी तरह की शहरी गतिविधियां पूरी तरह प्रतिबंधित हो।

वक्ताओं ने प्रकृति संरक्षण, वनों की कटाई पर रोक, छत्तीसगढ़ के परंपरागत वृक्षों – नीम, महुआ,  कौहा अर्जुन, बेल, आम, इमली, बरगद ,पीपल गश्ती , गुलर, साल, साजा बीजा, सागौन, खम्हार, धावड़ा आदि देशी वृक्षारोपण को बढ़ावा देने, तालाबों एवं नदियों के संरक्षण तथा प्रदूषण कम करने के प्रभावी उपायों पर विचार व्यक्त किए।

उपस्थित जनों ने इस बात पर चिंता जताई कि सौंदर्यीकरण के नाम पर अनेक स्थानों पर अनावश्यक निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने ऐसे क्षेत्रों में अधिक से अधिक वृक्षारोपण कर अर्बन फॉरेस्ट – शहरी वन -विकसित करने की पुरजोर मांग की, जिससे शहरों में हरित क्षेत्र बढ़े और पर्यावरण संतुलन बना रहे।

इस अवसर पर रंगकर्मी रतन गोंडाने ने भूमि गीत गाकर संदेश दिया कि ये भूमि हमें आने वाली पीढ़ियों को और अधिक सुंदर बनाकर सौंपने के लिए हमारे पुरखों से कर्ज में मिली है। यह हमें विलासिता के लिए, इसकी धन संपदा को लूटने के लिए नहीं मिली है बल्कि इसके सुंदर नदी नालों, झीलों, जंगलों, पहाड़ों को बचाकर आने वाली पीढ़ियों को सौंपने के लिए मिली है। हम सबकी यह सामूहिक जिम्मेदारी है कि हम प्रकृति को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों का विरोध करें और अभी तक की ज्ञात हमारी आकाशगंगा के इस एकमात्र नीले हरे ग्रह में जीवन को बचाने में योगदान दें।

पर्यावरण दिवस पर आयोजित इस जागरूकता कार्यक्रम के आखिर में सभी लोगों ने मानव श्रृंखला बनाकर तेलीबांधा तालाब का एक पूरा चक्कर लगाया।  

छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा के अध्यक्ष विश्वास मेश्राम द्वारा आकाशवाणी रायपुर, जिला प्रशासन रायपुर और सम्मिलित संगठनों,  ब्रेकथ्रू साइंस सोसाइटी, छत्तीसगढ़ तर्कशील परिषद्, अंध श्रद्धा निर्मूलन समिति, ग्रीन आर्मी अमलीडीह रायपुर सहित विज्ञान सभा के साथियों को धन्यवाद देते हुए कार्यक्रम को विराम दिया गया।

ईरान और यूएस के बीच चल रहे युद्ध की वजह से भारत की अर्थव्यवस्था, जीडीपी (GDP) में 7.7 प्रतिशत की वृद्धि…

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भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर पिछले काफी समय से लोग काफी चिंतित थे. अब जो आंकड़े सामने आए हैं वो हैरान कर देने वाले हैं, जिसमें पिछले वित्त की अपेक्षा इस वित्त वर्ष की GDP बढ़ी है.

ईरान और यूएस के बीच चल रहे युद्ध की वजह से भारत की अर्थव्यवस्था लगातार डगमगा रही थी. इसी बीच अब खबरें हैं कि वित्त वर्ष 2025-26 में इसकी रफ्तार मजबूत होकर बढ़ी है. सरकार के द्वारा बताए गए शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, देश की वास्तविक जीडीपी (GDP) में 7.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो पिछले वित्त वर्ष की अपेक्षा 7.1% की दर ज्यादा है.

ये डाटा मिनिस्ट्री ऑफ स्टेटिक्स एंड प्रोग्राम इम्प्लिमेंटेशन (MoSPI) ने शुक्रवार को ही जारी किए हैं. इन आंकड़ों के अनुसार जनवरी- मार्च 2026 की तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था 7.8% की दर से बढ़ी है. इससे पता चलता है कि वित्त वर्ष के आखिरी तीन महीनों में भी आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी रहीं.

भारत की GDP में ये बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब दुनियाभर में अर्थव्यवस्था हिली हुई है, भू-राजनीतिक तनाव और क्रूड ऑइल की कीमतें बढ़ी हुई हैं, जिससे लगातार चुनौतियां भी सामने आ रही है.

स्थिर (2022-23) कीमतों के आधार पर मापी गई वास्तविक जीडीपी (Real GDP) वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 323.12 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो एक साल पहले यानी वित्तवर्ष 2025 में 299.89 लाख करोड़ रुपये थी. वहीं नॉमिनल जीडीपी जिसमें महंगाई का असर भी शामिल होता है, वित्तवर्ष 2026 में 8.9% बढ़कर 346.36 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई. पिछले वित्त वर्ष में ये 318.07 लाख करोड़ रुपये थी.

सरकार के मुताबिक ये अनुमान कई महत्वपूर्ण आर्थिक संकेतकों के आधार पर तैयार किए गए हैं. इनमें औद्योगिक उत्पादन, जीएसटी कलेक्शन, कंपनियों के रिजल्ट्स, वाहन बिक्री, माल ढुलाई, टेलीकॉम सेवाओं का उपयोग, बैंकिंग गतिविधियां, टैक्स संग्रह और व्यापार से जुड़े आंकड़े शामिल हैं.

मंत्रालय ने क्या कहा?
MoSPI मंत्रालय ने बताया कि नए अनुमान तैयार करते समय वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) के ताजा आंकड़ों के साथ-साथ पहले की तिमाहियों के संशोधित आंकड़ों को भी शामिल किया गया है. मंत्रालय ने ये भी कहा कि भविष्य में जारी होने वाले जीडीपी आंकड़ों में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) और थोक मूल्य सूचकांक (WPI) की नई सीरीज का इस्तेमाल किया जाएगा, जिसका आधार वर्ष 2022-23 होगा.

इसके अलावा, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी अप्रैल- जून 2026 के जीडीपी आंकड़े 31 अगस्त 2026 को जारी किए जाएंगे.

गौतम अडानी ने रच दिया इतिहास, साल 2026 में हर रोज की इतनी कमाई जान उड़ जाएंगे होश….

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गौतम अडानी की संपत्ति में इस साल जनवरी से लेकर 4 जून तक लगभग 30.7 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई है, जबकि मुकेश अंबानी को इस साल अब तक 21.9 अरब डॉलर का नुकसान हो चुका है.

साल 2026 दिग्गज कारोबारी गौतम अडानी के लिए काफी मुनाफा देने वाला रहा, जबकि मुकेश अंबानी के लिए नुकसान देने वाला रहा. ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स की एक ताजा रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि इस साल गौतम अडानी ने हर रोज औसतन 1897 करोड़ की कमाई की है. वहीं, मुकेश अंबानी ने रोजाना औसतन 1352 करोड़ रुपये गंवाए हैं.

अडानी बने एशिया में सबसे अमीर

रोजाना इतनी जबरदस्त बड़ी रकम की कमाई के बलबूते गौतम अडानी एक बार फिर मुकेश अंबानी को पछाड़ते हुए एशिया के सबसे अमीर आदमी बन गए हैं. ब्लूमबर्ग इंडेक्स में दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों की लिस्ट में वह अभी 19वें नंबर पर हैं, जबकि मुकेश अंबानी उनसे एक पायदान नीचे खिसककर 20वें नंबर पर आ गए हैं.

कमाई का क्या रहा जरिया

हाल ही में जून 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, Adani Portfolio का EBITDA (ऑपरेटिंग प्रॉफिट) ऑल-टाइम हाई 94834 करोड़ पर पहुंच गया. अडानी ग्रुप ने इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रीन एनर्जी सेक्टर पर फोकस किया. इनमें अडानी समूह का सालाना निवेश 1.53 लाख करोड़ रुपये रहा, जो किसी भी भारतीय कंपनी के मुकाबले सबसे ज्यादा है. इसके चलते निवेशकों का भरोसा उनके शेयरों पर लगातार बना हुआ है और मार्केट कैप में तेजी से इजाफा हो रहा है.

अंबानी को क्यों हुआ नुकसान?

मुकेश अंबानी की कमाई का एक बड़ा हिस्सा रिलायंस इंडस्ट्रीज से आता है, जो दुनिया के सबसे बड़े ऑयल रीफाइनिंग कॉम्प्लेस को चलाती है. मिडिल ईस्ट के बढ़ते तनाव से अंबानी समूह के इस कारोबार को चोट पहुंची है. इस वजह से विदेशी निवेशक भी रिलायंस जैसी बड़ी और निफ्टी-वेटेज वाली कंपनी से पैसा निकालकर दूसरे शेयर बाजारों का रुख कर रहे हैं, जिससे शेयरों में तेज गिरावट आ रही है.

अगर किसी तिमाही में रिलायंस के पेट्रोकेमिकल्स, तेल या रिटेल सेक्टर का प्रदर्शन बाजार की उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहता, तो शेयरों की कीमत में एक ही दिन में 2-3% तक की गिरावट आ जाती है. चूंकि, रिलायंस का मार्केट कैप बहुत बड़ा है इसलिए महज  2% की गिरावट भी अंबानी की नेटवर्थ को हजारों करोड़ रुपये कम करती है.

Rajya sabha Elections 2026: अन्नामलाई को इस्तीफा देने से रोकने के लिए BJP ने किस राज्यसभा सीट से दिया था ऑफर? अब किसके पाले में गई उम्मीदवारी…..

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भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने गुरुवार (4 जून, 2026) को द्विवार्षिक राज्यसभा चुनाव के लिए अपने 11 उम्मीदवारों के नाम की पहली लिस्ट जारी कर दी है.

भारतीय जनता पार्टी (BJP) की तमिलनाडु इकाई के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रह चुके के. अन्नामलाई ने शुक्रवार (5 जून, 2026) को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है, जिसे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने स्वीकार भी कर लिया है. अन्नामलाई का इस्तीफा तमिलनाडु की राजनीति में एक बहुत बड़ा घटनाक्रम है और भाजपा के लिए एक झटके के तौर पर भी देखा जा रहा है, लेकिन इस बीच एक रिपोर्ट सामने आई है जिसमें यह कहा जा रहा है कि भाजपा ने पूर्व IPS अधिकारी के.

अन्नामलाई को आगामी राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारी का ऑफर भी दिया था, जिसे उन्होंने इनकार कर दिया था. हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक रूप से कोई जानकारी सामने नहीं आई है.

भाजपा के उम्मीदवारों की लिस्ट से अन्नामलाई बाहर

सूत्रों के हवाले से हिंदुस्तान ने रिपोर्ट किया है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अन्नामलाई को राज्यसभा में लाने का ऑफर दिया था, लेकिन जब उन्होंने उम्मीदवारी से इनकार कर दिया, तब पार्टी ने गुरुवार (4 जून, 2026) को राज्यसभा चुनाव के लिए अपने 11 उम्मीदवारों के नाम की पहली लिस्ट जारी कर दी.

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, आंध्र प्रदेश की चार सीटों पर राज्यसभा चुनाव होने वाले हैं. जिनमें से एक सीट पर भाजपा ने के. अन्नामलाई को उतारने की पेशकश की थी, लेकिन अब भाजपा ने उस एक सीट पर से भी अपना दावा छोड़ दिया है. भाजपा की तरफ से जारी किए गए 11 प्रत्याशियों की लिस्ट में अन्नामलाई का नाम शामिल नहीं किया गया.

अन्नामलाई की जगह किसे मिली राज्यसभा की सीट?

रिपोर्ट के मुताबिक, आंध्र प्रदेश की चार राज्यसभा सीटों पर उम्मीदवारों के चयन के लिए गुरुवार (4 जून, 2026) को एनडीए के गठबंधन पार्टियों के बीच गंभीर बैठक चली, जिसमें राज्य के मुख्यमंत्री और तेलुगु देशम पार्टी (TDP) प्रमुख एन. चंद्रबाबू नायडू और उपमुख्यमंत्री और जन सेना प्रमुख पवन कल्याण भी शामिल रहे. बैठक में पहले तय किया गया था कि राज्य की चार में दो सीटें टीडीपी के हिस्से में जाएगी.

इसके साथ ही एक सीट भाजपा और एक जेएसपी को मिलने वाली थी, लेकिन अन्नामलाई के इस्तीफे से समीकरण बदल गए. भाजपा ने उस एक सीट पर से भी अपना दावा खत्म कर दिया और वह राज्यसभा सीट तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के खाते में चली गई है.

Mamata Banerjee” TMC पार्टी से और अधिक विधायकों के पाला बदलने को रोकने के प्रयास…

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Mamata Banerjee TMC: ममता बनर्जी ने पिछले दो दिनों में हावड़ा, मुर्शिदाबाद के कई विधायकों से बात की है, जिनमें से कई को ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी खेमे की बैठकों में भाग लेते देखा गया था.

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने पार्टी के 28 साल के इतिहास में पहली बार हुए विभाजन के बाद पार्टी से और अधिक विधायकों के पाला बदलने को रोकने के प्रयास शुरू कर दिए हैं. वह व्यक्तिगत रूप से बागी विधायकों से संपर्क साध रही हैं, जबकि वरिष्ठ नेता अन्य विधायकों को एकजुट रखने के लिए काम कर रहे हैं. पार्टी सूत्रों ने बताया कि ममता बनर्जी ने पिछले दो दिनों में हावड़ा, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर के कई विधायकों से बात की है, जिनमें से कई को ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी खेमे की बैठकों में भाग लेते देखा गया था.

तृणमूल के 58 विधायकों ने पार्टी विधायक दल पर नियंत्रण कर लिया और निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता चुना. पार्टी को एकजुट रखने के प्रयास ऐसे समय में किए जा रहे हैं, जब तृणमूल की संस्थापक खुद को एक ऐसी असहज स्थिति में पाती हैं, जहां उन्हें उन नेताओं को बनाए रखने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, जिन्हें उन्होंने कभी खुद चुना था और राजनीतिक रूप से मजबूत किया था.

तृणमूल के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘ममता बनर्जी विधायकों से व्यक्तिगत रूप से बात कर रही हैं और उनसे शुक्रवार (5 जून 2026) को कालीघाट में होने वाली बैठक में शामिल होने का अनुरोध कर रही हैं. प्रयास यह है कि संवाद के रास्ते खुले रहें और सुलह की संभावना तलाशी जाए.’ सूत्रों के अनुसार, पार्टी सांसदों की टूट की आशंका के चलते इस मोर्चे पर भी प्रयास किए जा रहे हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक तृणमूल के दो भरोसेमंद सांसदों- एक लोकसभा से और एक राज्यसभा से को पार्टी के सहयोगियों से संपर्क करने और उन्हें ऋतब्रत बनर्जी खेमे द्वारा बनाई जा रही नई तृणमूल के लिए संगठन को न छोड़ने के लिए राजी करने का काम सौंपा गया है. यह पहल तृणमूल कांग्रेस के शेष नेतृत्व के भीतर बढ़ती चिंता को दर्शाती है कि यदि बागी विधायकों के विद्रोह को जल्द ही नियंत्रित नहीं किया गया तो यह सांसदों और स्थानीय निकाय सदस्यों को भी अपने खेमे में जोड़ सकते हैं.

‘भारत के साथ सैन्य संघर्ष में हस्तक्षेप के लिए पाकिस्तान ट्रंप का सदा आभारी रहेगा’, बोले PAK पीएम शहबाज शरीफ…

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शहबाज शरीफ ने कहा कि पहलगाम हमले के बाद आतंकी ठिकानों पर भारत की एयर स्ट्राइक के बाद शुरू हुए संघर्ष पर ट्रंप ने समय रहते और निर्णायक हस्तक्षेप किया, जिसकी वजह से वह थमा.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा है कि भारत के साथ सैन्य संघर्ष को खत्म कराने में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समय पर हस्तक्षेप के लिए पाकिस्तान सदा आभारी रहेगा. अमेरिकी स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के अवसर पर गुरुवार (4 जून, 2026) को अमेरिकी दूतावास द्वारा आयोजित एक स्वागत समारोह में शहबाज ने पाकिस्तान-अमेरिका संबंधों को लगभग आठ दशकों से जारी सच्चा और खास रिश्ता बताया.

पिछले साल जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिनों तक चले सैन्य संघर्ष का जिक्र करते हुए शहबाज शरीफ ने कहा कि ट्रंप के हस्तक्षेप ने संघर्ष समाप्त करने में अहम भूमिका निभाई.

उन्होंने दावा किया, ‘पिछले साल पहलगाम हमले के बाद आतंकी ठिकानों पर भारत की एयर स्ट्राइक के बाद शुरू हुए संघर्ष पर ट्रंप ने समय रहते और निर्णायक हस्तक्षेप किया जिसके कारण 10 मई, 2025 को पाकिस्तान और भारत के बीच सैन्य संघर्ष थमा.’ शहबाज ने कहा, ‘दक्षिण एशिया में शांति बहाल करने और लाखों लोगों की जान बचाने के लिए हम राष्ट्रपति ट्रंप के सदा आभारी रहेंगे. इस संदर्भ में उन्हें हमेशा शांतिप्रिय व्यक्ति के रूप में याद किया जाएगा.’

पहलगाम हमले के बाद भारत ने पिछले साल सात मई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया था जिसका निशाना पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ढांचे थे. ट्रंप ने बार-बार दावा किया है कि उन्होंने सैन्य संघर्ष के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच शांति स्थापित करने में मदद की. हालांकि, भारत लगातार यह कहता रहा है कि समझौता दोनों देशों के बीच सीधे तौर पर हुआ था और उसने तीसरे पक्ष की मध्यस्थता के दावों को खारिज कर दिया है.

शहबाज ने ट्रंप की अद्वितीय नेतृत्व शैली की भी प्रशंसा करते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने वॉशिंगटन की अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों और अपने हितों की रक्षा में ऊर्जा और दृढ़ संकल्प का संचार किया है. प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके साहसी और दूरदर्शी नेतृत्व में अमेरिका शांति, प्रगति और समृद्धि को आगे बढ़ाते हुए विश्वास और गतिशीलता को प्रेरित करता रहता है.

द्विपक्षीय संबंधों के इतिहास को याद करते हुए शहबाज शरीफ ने उल्लेख किया कि 1947 में पाकिस्तान के निर्माण के बाद उसे मान्यता देने वाले पहले देशों में अमेरिका भी शामिल था. उन्होंने सुरक्षा, व्यापार, निवेश, कृषि, विज्ञान, शिक्षा, स्वास्थ्य और ऊर्जा क्षेत्रों में सहयोग पर भी प्रकाश डाला.

उन्होंने कहा, ‘हमारा रिश्ता सच्चा और खास है, जो लगभग आठ दशकों से चला आ रहा है और इसमें न सिर्फ सुरक्षा और आतंकवाद-विरोधी गतिविधियों में सहयोग शामिल है, बल्कि व्यापार, निवेश, कृषि, विज्ञान, शिक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा और जन-जन आदान-प्रदान में भी समान रूप से सहयोग शामिल है.’

क्षेत्रीय कूटनीति पर शहबाज ने दावा किया कि पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच संपर्क स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और उन्होंने शांति प्रयासों में योगदान के लिए सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को धन्यवाद दिया.

PM मोदी ने सूरत में L&T प्लांट में जोरावर टैंक का लिया जायजा…

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हजीरा (सूरत) में L&T प्लांट में जोरावर टैंक का जायजा लिया. ये भारतीय सेना के लिए सबसे नया टैंक है, जो अगले साल मिलेगा. साल 2019 में पीएम मोदी ने इसी प्लांट में दक्षिण कोरिया की मदद से बनी K-9 तोप में राइड की थी.

डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (DRDO) ने प्राईवेट कंपनी L&T के साथ मिलकर लाइट टैंक ‘जोरावर’ तैयार किया है. 2024 में इसका प्रोटो-वर्जन दुनिया के सामने आया था. ऐसे में जोरावर के फिलहाल ट्रायल चल रहे हैं. डीआरडीओ के मुताबिक, अगले साल यानी 2027 तक भारतीय सेना को पूर्वी लद्दाख में तैनात करने ले लिए ये टैंक मिल जाएगा. ऐसे में सूरत के करीब हजीरा में इसका प्रोडक्शन तेजी से चल रहा है.

डीआरडीओ के मुताबिक, जोरावर टैंक मात्र 25 टन का है, जो भारत के मौजूदा टैंक से मात्र आधा है. जोरावर टैंक में एंटी एयरक्राफ्ट गन के साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तकनीक सहित ड्रोन टेक्नोलॉजी से भी लैस होगा. ये एक ‘एम्फीबियस’ प्लेटफॉर्म होगा जो नदी-नालों को आसानी से पार कर सकेगा.

भारतीय सेना ने लाइट टैंक का नाम 19वीं सदी के डोगरा मिलिट्री जनरल जोरावर सिंह के नाम पर दिया है जिन्होंने तिब्बत में जाकर चीनी सेना को पटखनी दी थी.

डीआरडीओ के मुताबिक, अब जोरावर टैंक के गर्मियों और सर्दियों के ट्रायल चल रहे हैं. साथ ही रेगिस्तान और लद्दाख जैसे हाई ऑल्टिट्यूड क्षेत्र में परीक्षण कराए जा रहे हैं. इसके बाद रक्षा मंत्रालय और सेना अधिग्रहण (खरीदने) की प्रक्रिया शुरू करेगी. शुरुआत में भारतीय सेना ने 59 लाइट टैंक का ऑर्डर देने का प्लान तैयार किया है. हालांकि, सेना को कुल 354 लाइट टैंक की जरूरत होगी.

भारतीय सेना ने लाइट टैंक का नाम 19वीं सदी के डोगरा मिलिट्री जनरल जोरावर सिंह के नाम पर दिया है, जिन्होंने तिब्बत में जाकर चीनी सेना को पटखनी दी थी और भारत का परचम लहराया था.

UP News: योगी सरकार के अधिकारी को पड़ी हाईकोर्ट से फटकार तो अखिलेश यादव ने ली चुटकी….

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कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसे व्यवहार पर ध्यान नहीं दिया गया तो इससे संवैधानिक अदालतों के आदेश बेअसर हो जाएंगे और मनमानी करने वाले प्रशासनिक अधिकारी उन्हें नजर अंदाज कर सकेंगे.

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के एक वरिष्ठ भारतीय प्रशासनिक सेवा यानी IAS अधिकारी को कड़ी फटकार लगाई है. कोर्ट ने कहा कि उन्होंने अदालत की शक्ति को कमतर दिखाने का जानबूझकर सुनियोजित प्रयास किया. अब इस मामले पर समाजवादी पार्टी के मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया सामने आई है. अखिलेश ने कहा कि वो तो खट्टे फल हैं, दोष तो उस वृक्ष की जड़ में है जिसके साये में वो कार्यरत हैं.

सपा चीफ अखिलेश यादव ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा-“सुना है कि मुख्यमंत्री जी के अति प्रिय अधिकारी के अनुपयुक्त प्रशासनिक व्यवहार को माननीय इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा दंडित किया गया है, और भविष्य में उनको किसी दायित्व दिये जाने के लिए उनकी योग्यता पर शंका प्रकट की गयी है और उनके दुर्व्यवहार का मामला ‘कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग’ को भेज दिया गया है, साथ ही कैबिनेट की अपॉइंटमेंट कमेटी को भी.”

पूर्व सीएम ने आगे लिखा-“दरअसल वो तो खट्टे फल हैं, दोष तो उस वृक्ष की जड़ में है जिसके साये में वो कार्यरत हैं. लोक सेवक जब अपने को लोक शासक समझने लगता है तो उसका अहंकार न्यायालय तक की अवमानना करने लगता है. वैसे क्यों न ऐसा किया जाए कि जिस तरह टीचर्स को अपनी योग्यता पुनः साबित करने के लिए फिर से परीक्षा पास करने के लिए कहा जा रहा है, वैसा ही नियम प्रशासनिक अधिकारियों पर भी लागू हो, जिससे समय-समय पर उनकी योग्यता की जाँच हो सके. हम शिक्षकों से पूछ रहे हैं: हमने कुछ गलत कहा क्या?”

इलाहाबाद हाई कोर्ट यूपी के एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी पर राज्य में पुलिस सुधार और जांच से जुड़े सुरक्षा उपायों पर कोर्ट के पहले के निर्देशों को लागू करने से रोकने की कोशिश करने का आरोप लगाए. कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसे व्यवहार पर ध्यान नहीं दिया गया तो इससे संवैधानिक अदालतों के आदेश बेअसर हो जाएंगे और मनमानी करने वाले प्रशासनिक अधिकारी उन्हें नजर अंदाज कर सकेंगे.

Rahul Gandhi Congress: 6 जून से दिल्ली में मचेगा सियासी घमासान! दलित-मुस्लिम गठबंधन के लिए कांग्रेस का सबसे बड़ा दांव…

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दिल्ली सम्मेलन में तैयार रोडमैप को पार्टी नेतृत्व के सामने रखा जाएगा. इसके बाद यूपी, पंजाब, उत्तराखंड और मणिपुर जैसे चुनावी राज्यों में इसी तरह के सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे.

पांच राज्यों के आगामी विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस ने अपनी चुनावी रणनीति को नया आकार देना शुरू कर दिया है. पार्टी अब दलित, आदिवासी, अल्पसंख्यक, ओबीसी और आर्थिक रूप से कमजोर सवर्ण वर्गों को एक साझा मंच पर लाने की व्यापक सामाजिक और राजनीतिक कवायद में जुट गई है. इसकी शुरुआत दलित और अल्पसंख्यक समुदायों को एकजुट करने के अभियान से होने जा रही है.

सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग और अल्पसंख्यक विभाग ने मिलकर राष्ट्रीय स्तर पर एक नई सोशल इंजीनियरिंग रणनीति तैयार की है. पार्टी का मानना है कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में इन समुदायों के बीच साझा मुद्दों और चुनौतियों को आधार बनाकर एक मजबूत सामाजिक गठबंधन खड़ा किया जा सकता है.

कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के राष्ट्रीय चेयरपर्सन राजेंद्र पाल गौतम ने एबीपी न्यूज से बातचीत में बताया कि पार्टी एक राष्ट्रीय अधिवेशन आयोजित करने जा रही है, जिसमें दलित और अल्पसंख्यक समुदायों के साथ गरीब पिछड़े और आर्थिक रूप से कमजोर सवर्ण वर्ग के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाएगा. इसके बाद दलित, आदिवासी, अल्पसंख्यक, ओबीसी और गरीब सवर्ण समुदायों का एक बड़ा राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करने की योजना है, जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी समेत पार्टी के शीर्ष नेता शामिल होंगे.

6 जून से अभियान की शुरुआत

सूत्रों के अनुसार इस अभियान की औपचारिक शुरुआत 6 जून को दिल्ली में होने वाले संयुक्त सम्मेलन से होगी. सम्मेलन में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के अलावा सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी, कलाकार और सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे. बैठक में दोनों समुदायों से जुड़े सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक मुद्दों पर चर्चा कर एक विस्तृत रोडमैप तैयार किया जाएगा.

दिल्ली सम्मेलन में तैयार रोडमैप को पार्टी नेतृत्व के समक्ष रखा जाएगा. इसके बाद उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर जैसे चुनावी राज्यों में इसी तरह के सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे.

35-40 फीसदी वोट बैंक पर नजर

जिन राज्यों में चुनाव होने हैं, वहां दलित और अल्पसंख्यक आबादी मिलकर लगभग 35 से 40 प्रतिशत तक प्रभाव रखती है. पार्टी को उम्मीद है कि यदि इन वर्गों को एक साझा राजनीतिक मंच पर लाया गया तो इसका सीधा चुनावी फायदा मिल सकता है. सूत्रों का कहना है कि भविष्य में इस सामाजिक गठबंधन में अति पिछड़े वर्ग, व्यापक ओबीसी समाज और आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को भी जोड़ने की योजना है.

संविधान बचाओअभियान की सफलता से उत्साहित कांग्रेस

कांग्रेस नेताओं का मानना है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी के ‘संविधान बचाओ’ अभियान को दलित समाज से व्यापक समर्थन मिला था, जिसका असर पार्टी के प्रदर्शन में भी दिखाई दिया. अब कांग्रेस उसी राजनीतिक संदेश को आगे बढ़ाते हुए सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व के मुद्दों को केंद्र में रखने की तैयारी कर रही है.

राहुल गांधी ने हाल में अल्पसंख्यक नेताओं के साथ हुई बैठकों में यह भी कहा है कि किसी भी समुदाय के साथ होने वाले अन्याय के मुद्दों को स्पष्टता के साथ उठाया जाना चाहिए और नेताओं को इन विषयों पर खुलकर अपनी बात रखनी चाहिए.

राज्यसभा: मोदी सरकार में होगा बड़ा फेरबदल?

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राज्यसभा उम्मीदवारों की घोषणा, नए प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति और मंत्रालयों की समीक्षा के बाद मोदी कैबिनेट में बड़े फेरबदल की अटकलें तेज हो गई हैं.

बीजेपी के संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर हालिया घटनाक्रमों ने केंद्रीय मंत्रिमंडल में होने वाले फेरबदल और विस्तार की अटकलों को तेज कर दिया है. पार्टी ने केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कुरियन को राज्यसभा के लिए फिर से उम्मीदवार नहीं बनाया है, जबकि दोनों का राज्यसभा कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो रहा है. इसके अलावा प्रधानमंत्री पिछले दिनों प्रधानमंत्री सभी विभागों के कामों की समीक्षा करके उनके कामों की रिपोर्ट तैयार कर चुके हैं.

बीजेपी ने कल 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है. लिस्ट में केंद्रीय मंत्री रवनीत बिट्टू और जॉर्ज कुरियन का नाम शामिल नहीं है. रवनीत बिट्टू राजस्थान और जॉर्ज कुरियन मध्यप्रदेश से राज्यसभा सांसद हैं. ऐसे में उनकी राज्यसभा की सदस्यता 21 जून को समाप्त हो जाएगी. कयास यही लगाए जा रहे हैं रवनीत बिट्टू को पंजाब चुनाव में जिम्मेदारी देकर भेजा जाएगा.

भाजपा में नए प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति
इसके साथ साथ भाजपा ने संगठनात्मक स्तर पर भी महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं. केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जबकि केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली भाजपा की कमान सौंपी गई है. दोनों नेताओं को संगठन की जिम्मेदारी मिलने के बाद यह चर्चा भी तेज हो गई है कि केंद्र सरकार में उनकी भूमिकाओं को लेकर आगे क्या फैसला लिया जाएगा. आगामी दिनों में यूपी में चुनाव भी होने हैं.

चुनावी रणनीति के तहत संगठनात्मक बदलाव
पार्टी सूत्रों का मानना है कि भाजपा आगामी विधानसभा चुनावों, संगठनात्मक पुनर्गठन और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए सरकार और संगठन में व्यापक बदलावों पर विचार कर रही है. राज्यसभा नामांकन, नए प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति और कुछ मंत्रियों की बदलती भूमिकाओं को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. अगले साल यूपी , पंजाब समेत सात राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं ऐसे में उनको मंत्रिमंडल विस्तार और संगठन में अधिक प्रतिनिधित्व दिए जाने की भी चर्चा है.

मंत्रियों के प्रदर्शन की समीक्षा का असर
प्रधानमंत्री कार्यालय ने सभी विभागों से उनके काम का ब्यौरा भी मांगा था, उसके बाद मंत्री परिषद की बैठक में सभी विभागों के कामों की समीक्षा भी की गई थी. विभागों की समीक्षा के दौरान उनको रेटिंग्स भी दिए गए थे. जिन विभागों का काम आकांक्षा के अनुरूप नहीं रहा है वो भी मंत्रीमंडल विस्तार में एक महत्वपूर्ण फैक्टर होने वाला है.