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युद्धविराम की चर्चाओं के बीच ही इजरायल ने गाजा पर किया सबसे बड़ा हमला

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इजरायल ने शनिवार को गाजा पर हमला किया है और इसमें बताया जा रहा है कि 81 फिलिस्‍तीनी नागरिकों की मौत हो गई है. हमास के स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से इसकी पुष्टि की गई है. हमास ने कहा है शनिवार को दोपहर तक 24 घंटों में गाजा में इजरायली हमलों में कम से कम 81 फिलिस्तीनी मारे गए और 400 से ज्‍यादा लोग घायल हैं. गाजा शहर में एक स्टेडियम के पास हुए हमले बच्चों समेत कम से कम 11 लोगों की मौत हो गई है. अल-शिफा अस्पताल के कर्मचारियों की तरफ से इस बारे में न्‍यूज एजेंसी रॉयटर्स से पुष्टि की गई है. यह वह स्टेडियम है जहां पर लोगों को टेंट में रखा गया था.

इजरायल सेना को नहीं जानकारी
इजरायल की सेना की तरफ से जो बयान दिया गया है उसके अनुसार हमले में किसी के घायल होने की कोई जानकारी नहीं है. इजरायल का कहना है कि बस एक संदिग्ध को इसमें नुकसान हुआ है जो उसकी सेनाओं के लिए खतरा बन गया था. गाजा के दक्षिणी शहर खान यूनिस के पास मुवासी में एक टेंट कैंप पर इजरायली हमले में तीन बच्चे और उनके माता-पिता की मौत हो गई. रिश्तेदारों का कहना है कि बच्‍चों को सोते समय मारा गया है. न्‍यूज एजेंसी एपी ने बच्‍चों की दादी सुआद अबू तेइमा के हवाले से कहा कि इन बच्चों ने उनके साथ क्या किया? उनका क्या दोष है?

सरकारी राशन दुकान से नहीं मिला राशन, तीन माह से इंतजार कर रहे हितग्राही; तीन घंटे तक चला प्रदर्शन

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मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में राशन की कालाबाजारी और राशन नहीं मिलने की लगातार समस्या कम नहीं हो रही है. रविवार को शहर के वार्ड क्रमांक 21 में रहने वाले लोगों ने भी 3 महीने से राशन नहीं मिलने के आरोप के चलते राशन की दुकान के बाहर प्रदर्शन किया. इन लोगों का कहना था कि वह 3 महीने से लगातार सरकारी राशन का इंतजार कर रहे हैं.

लेकिन उन्हें राशन नहीं दिया जा रहा. इन नाराज लोगों ने अपने राशन के थैलों पर राशन कार्ड रखते हुए विरोध प्रदर्शन किया. इस बीच प्रदर्शन को देख सरकारी राशन की दुकान का सेल्समेन पहुंचा और उसने कहा कि मेरे पास राशन तोलने के लिए कांटा नहीं है. इस वजह से राशन नहीं दिया जा रहा है.

यह मामला प्रशासन के पास पहुंचा लेकिन रविवार होने के चलते कोई प्रशासनिक अधिकारी की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है बताना जरूरी है कि वर्षा काल को मध्य नजर रखते हुए प्रशासन ने सरकारी राशन की दुकानों से 3 महीने का एक साथ राशन वितरित करने के निर्देश जारी किए हैं.यही वजह है कि पिछले 3 महीने से राशन नहीं मिलने के चलते गरीब तबका परेशान है.

हर महीने की 10 तारीख तक बट जाता था राशन
राशन की दुकानों पर जमा हुए नाराज लोगों का कहना था कि जब हर महीने 10 तारीख तक सरकारी दुकानों पर राशन वितरित कर दिया जाता था, तो फिर 29 जून हो जाने के बावजूद भी मई जून और जुलाई का राशन हमें क्यों वितरित नहीं किया गया. हमें राशन की दुकानों पर रोज नई तारीखों का ऐलान करके बता दिया जाता है. लेकिन रोज जब राशन लेने लाइन में लगते हैं, तो राशन नहीं दिया जाता. यही वजह है कि इन लोगों का आज रविवार को गुस्सा फूट पड़ा और इन्होंने सरकारी राशन की दुकान पर जमा होकर एक साथ विरोध प्रदर्शन करते हुए अपनी तकलीफ बयां कर दी.

लोगों का आरोप राशन की दुकान पर लटका रहता है ताला
अपने महीने भर के चूल्हा जलाने के साथ कई ऐसे परिवार है जिन्हें सरकारी राशन बहुत बड़ा सहारा है बावजूद इसके लोगों का कहना है कि जब भी हम सरकारी दुकान पर राशन लेने के लिए आते हैं तो यहां ताला लटका हुआ मिलता है ऐसे में उन गरीब लोगों की परेशानी काफी ज्यादा बढ़ गई है जो इस अनाज पर निर्भर है

क्या बोले जिम्मेदार
आशुतोष मिश्रा (जिला खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी शिवपुरी) कहते हैं कि सरकार के पास हमारे पास कोई अनाज की कमी नहीं है. भरपूर अनाज है. व्यवस्थाओं के चलते जो शिकायत आई है. उसमें जो दोषी होगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जहां तक कालाबाजारी की बात है. ऐसी कोई बात हम स्वीकार नहीं करते. हम अनाज की व्यवस्था से वितरण के लिए वचनबद्ध है और जल्द ही लोगों को अनाज वितरित किया जाएगा.

मिल गया सोनम का वो बैग, जिसकी शिलांग पुलिस को शिद्दत से थी तलाश, जानें- क्या मिला इस में

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इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी की हनीमून के दौरान मेघालय की पहाड़ियों में स्थित ट्रेकिंग प्लेस पर की गई हत्या के मामले में रविवार को शिलॉन्ग एसआईटी को बड़ी सफलता हाथ लगी. दरअसल, एसआईटी ने मृतक राजा रघुवंशी की पत्नी सोनम रघुवंशी का वो बैग बरामद कर लिया है, जिसमें ज्वेलरी और लैपटॉप था.

दोपहर 3:00 बजे एसआईटी की टीम रतलाम के औद्योगिक थाना पहुंची. जहां लोकल पुलिस की मदद से सिलोम जेम्स के ससुराल मंगल मूर्ति कॉलोनी पहुंची, जहां 56 नंबर मकान पर ताला लगा हुआ था. ताला खोलकर आरोपी सिलोम जेम्स, उसकी पत्नी, साली, एसआईटी सहित और रतलाम पुलिस अंदर दाखिल हुई. इसके बाद सिलोम जेम्स की निशानदेही पर घर के किचन में छुपाकर रखे गए बैग को पुलिस ने बरामद किया. इस बैग के अंदर पुलिस को लैपटॉप और गहने मिले हैं.

बैग में रखे सामान का बनाया पंचनामा
बैग मिलने के साथ ही एसआईटी ने बैग में रखे सामान का पंचनामा तैयार किया. बताया जाता है कि बैग में लैपटॉप और ज्वेलरी मिली. जिस वक्त ये बैग बरामद किया गया. उस वक्त एसआईटी के साथ सिलोम जेम्स की पत्नी और साली भी मौजूद थी. हालांकि, जब्त सामान के बारे में शिलांग पुलिस ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया. आपको बता दें कि सिलोम जेम्स वही प्रॉपर्टी ब्रोकर है, जिसने हत्याकांड के आरोपी विशाल को फ्लैट किराए पर दिलवाया था. जहां राज और सोनम ने फरारी के दिन गुजारे थे.

किसी को ऐसी मां न देना, ये तो अपने ही कलेजे के टुकड़े को मरने के लिए तालाब में फेंक दिया

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टीकमगढ़ जिले में एक मां ने अपने 25 दिन की नवजात शिशु को तालाब में मरने के लिए फेंक दिया. मगर जैसे ही इस मां ने अपने बच्चे को मरने तालाब में फेंका , तभी ललन रैकवार नाम का शख्स देवदूत बनकर पहुंच गया और पानी में डूब रहे बच्चे को बचाकर उसने नया जीवन दान दिया.

टीकमगढ़ जिले के बम्होरीकला गांव की रहने बाली मिथला लोधी की शादी दिसम्बर 2024 में बकस्वाहा में हुई थी. लेकिन, शादी के छह माह बाद ही उसने एक स्वस्थ बेटे को जन्म दिया. बताया जाता है कि यह महिला अपने मायके आई थी. यहीं पर बच्चे का जन्म हुआ. इसके बाद महिला अपनी मां के साथ बच्चे को लेकर टीकमगढ आई और मां बेटी ने इस बच्चे को तालाब में मरने के लिए फेक कर भाग गई.

आरोपी महिला को पुलिस ने लिया हिरासत में
हालांकि, जब ये मां-बेची बच्चे को तालाब में फेंक रही थी, तो वहां मौजूद ललन रैकवार की नजर उस पर पड़ गई. इसके बाद रैकवार ने फौरन पानी में कूद कर बच्चे को बचा लिया. इसके बाद उसने पुलिस को सूचना दी. पुलिस ने घटनास्थल पर जाकर आरोपी मां और उसकी मां को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है. ससुराल वालों के ताने से तंग आकर उठाया कदम
बच्चे को जिला अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है, जहां उसका इलाज जारी है. बच्चा अभी स्वस्थ है. इस बच्चे का इलाज चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉक्टर पीएल विश्वकर्मा की देखरेख में की जा रही है. वहीं, पुलिस का कहना रहा कलयुगी मां की उम्र कम दिखाई पड़ रही है, जिसको लेकर उसके आधार कार्ड और अंक सूची की जांच की जा रही है. बच्चे का इलाज गहन शिशु चिकित्सा वार्ड में चल रहा है. आरोपी की मां ने बताया कि ससुराल वालों के तानों से परेशान होकर मिथिला ने इस बच्चे को मरने के लिए तालाब में फेंका था.

धान के कटोरे को कौन कर रहा छलनी? पानी में भीग रही उपज; गड़बड़ी पर अब चुप्पी क्यों

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छत्तीसगढ़ जिसे धान का कटोरा कहा जाता है. उस कटोरे छलनी करने की कोशिश की जा रही है.इन दिनों धान पानी में भीगकर अंकुरित हो रहा है और जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ सफाई दे रहे हैं. खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 की धान खरीदी को छह महीने गुजर चुके हैं. लेकिन अब तक धान खरीदी केंद्रों में रखे धानों का विपणन केंद्र के गोदामों में नहीं हो पाया. नतीजा धान खरीदी केंद्रों में पड़ा धान सड़ रहा है. अंकुरित हो रहा है. गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के तीन प्रमुख धान खरीदी केंद्रों में अब भी 814.80 क्विंटल धान जमीन पर पड़ा भीग रहा है.

लापरवाही का खामियाजा उठाना पड़ रहा
छत्तीसगढ़ की राजनीति में धान खरीदी केंद्र बिंदु है. किसानों से एक-एक दाना खरीदने का दावा करने वाली सरकारें समर्थन मूल्य बढ़ाकर वाहवाही तो लूट लेती है. पर उस धान का सही रखरखाव और समय पर उठाव सुनिश्चित करने में नाकाम साबित हो रही हैं. इस लापरवाही का खामियाजा उठाना पड़ रहा है. सहकारी समितियों, केंद्र प्रबंधकों और अंततः आम उपभोक्ताओं को, जिनका टैक्स इस पूरे तंत्र को चला रहा है.

तिरपाल रोज बदला जा रहा है, फिर भी धान भीग रहा

जैसे-जैसे मानसून ने रफ्तार पकड़ी है, वैसे-वैसे धान की बोरियां तिरपाल से ढंकने, पलटने, सुखाने की कोशिशें नाकाफी साबित हो रही हैं. मरवाही ब्लॉक के मरवाही केंद्र में 528.40 क्विंटल, तेंदूमुड़ा में 286 क्विंटल और सिवनी में 40 किलो धान अभी तक उठाव की प्रतीक्षा में है. अब उसमें अंकुरण (जर्मिनेशन) शुरू हो चुका है, जिससे उसका खाद्य उपयोग लगभग असंभव हो जाएगा. मरवाही खरीदी केंद्र में काम कर रहे मजदूरों ने बताया कि बोरियों में छलिया लग चुकी है, तिरपाल रोज बदला जा रहा है, फिर भी धान भीग रहा है.

वहीं, धान केंद्र में चौकीदार और प्रभारी जगदीश कश्यप ने कहा कि “अब धान को बचाने के प्रयास विफल हो रहे हैं. चौकीदार को 24 घंटे रखना पड़ रहा है और लगातार बारिश के कारण सारी कोशिशें बेअसर हो रही हैं.”

इस पूरे मामले पर जिला विपणन अधिकारी रमेश लहरें ने सॉफ्टवेयर की गड़बड़ी को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने NDTV से कहा, “तकनीकी समस्या दूर होते ही धान का उठाव शुरू हो जाएगा. तब तक समितियों को रखरखाव की जिम्मेदारी निभानी होगी.”

परंतु बड़ा सवाल यह है कि जब सरकार खरीदी के समय हर प्रक्रिया डिजिटल करती है, तो छह महीने तक सॉफ्टवेयर की गड़बड़ी पर चुप्पी क्यों? और इस देरी की भरपाई कौन करेगा? धान खरीदी के दौरान शासन-प्रशासन की मशीनरी पूरी तरह सक्रिय रहती है. खाद्य विभाग, विपणन संघ, हर स्तर पर समीक्षा होती है, पर जब उठाव की बात आती है, तो सारी जिम्मेदारी सिर्फ सहकारी समितियों और केंद्र प्रबंधकों पर डाल दी जाती है.

अब जब यह धान पूरी तरह खराब हो जाएगा, तो न इसका लाभ किसान को मिलेगा, न समिति को, और न उपभोक्ता को हानि फिर सार्वजनिक धन की ही होगी. धान खरीदी की सफलता सिर्फ उसके समर्थन मूल्य तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसके प्रबंधन और निष्पादन में भी ईमानदारी और तत्परता करता.

मामूली विवाद ने लिया खूनी रूप! घर में घुसकर सात लोगों ने जमकर बरपाया कहर, बुजुर्ग की हुई मौत व 5 घायल

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विवाद में हत्या का एक और ताजा मामला सामने आया है. छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के कुरूद थाना क्षेत्र अंतर्गत बिरेझर चौकी के कोड़ेबोड गांव से हत्या का ये मामला सामने आया है. सात लोगों ने एक घर में घुसकर मारपीट कर चाकू से हमला कर दिया. इसमें घर में मौजूद बुजुर्ग और उसके दो बेटे पर हमला किया गया है. इसमें बुजुर्ग पिता की मौत हो गई, तो दो बेटे, बहू और पत्नी घायल हो गए हैं. सभी का इलाज कुरूद के अस्पताल में चल रहा है. घटना को अंजाम देने वाले 6 आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है और एक आरोपी अभी फरार बताया जा रहा है.

क्या है दो पक्षों के विवाद का पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, दो पक्षों में कुछ बात को लेकर विवाद हो गया था. बात इतनी ज्यादा बढ़ गई कि मारपीट की नौबत आ गई. विवाद इतना बढ़ गया कि नवरंगे परिवार ने थाने में पहुंचकर विवाद की शिकायत दर्ज कर दी और थाने से वापस लौट रहे थे. इसी बीच दूसरे पक्ष के सत्यम नागरची के आक्रोशित परिवार ने नवरंगे परिवार के घर पहुंचकर दरवाजा तोड़कर लाठी-डंडे और चाकू से घर में मौजूद लोगों के ऊपर हमला बोल दिया.

बीच-बचाव में गई पिता की जान
रमेश नवरंगे और भाई जितेंद्र नवरंगे पर हमला होता देख पिता गोपाल नवरंगे बीच बचाव करने पहुंचे. आरोपियों ने उनपर चाकू से हमला कर दिया. पिता की मौके पर ही मौत हो गई. बताया जा रहा है कि रमेश व जितेंद्र दोनों को घायल हालत में इलाज के लिए कुरूद अस्पताल लाया गया है.

पहले माओवाद बना रोड़ा, फिर टाइगर रिजर्व ने रुकवाया काम… गरियाबंद के इस गांव में 17 साल बाद भी पक्की सड़क नहीं

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छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में कई ऐसे गांव हैं, जहां विकास तो दूर, जीवन की मूलभूत सुविधाएं भी आज तक नहीं पहुंची हैं. ऐसा ही एक मामला गरियाबंद (Gariaband) जिले का है. जिले के पहाड़ों में बसे अमामोरा और ओड़ बस्तियों में रहने वाले विशेष पिछड़ी जनजाति के ग्रामीण झेरिया के पानी से अपनी प्यास बुझाते हैं. इनके आंगनबाड़ी भवन अधूरे हैं. इमरजेंसी के स्वास्थ्य सुविधा मिल नहीं पाती, क्योंकि इन तक पहुंचने के लिए सुगम सड़के नहीं हैं. सड़कों को मंजूरी मिली, लेकिन निर्माण में बार बार रोड़ा आ रहा है. इसलिए स्वीकृत 31.65 किमी में अब तक 12 किमी पक्की बन चुकी,10 किमी में डामर लगाना बाकी था और शेष दूरियों में अर्थ वर्क गति पर था कि काम बंद कर दिया गया. सड़क के अधूरे होने से अब पूरे बरसात ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा.

पुलिया से सड़क तक : सब अधूरा
ओड़ पंचायत तक अधूरी सड़क में किसी तरह मशक्कत कर यहां के लोग आवाजाही कर लेंगे. लेकिन, आमामोरा पंचायत के ठीक पहले बने पुलिया में स्लैब की ढलाई नहीं हुई है. यहां चार पहिया तो दूर, अब दोपहिया सवार भी ठीक से आ जा नहीं सकेंगे. इन्हें ग्रामीणों की बदकिस्मती कहे या फिर सिस्टम की लापरवाही… किसी भी सूरत में विकास की यह बिगड़ी तस्वीर ग्रामीणों को अपने किस्मत पर रोने की लिए मजबूर कर रही है. जन प्रतिनिधि बहुत जल्द ही आंदोलन की रूपरेखा बनाने की तैयारी कर रहे हैं.

क्या है धौलपुर नेशनल हाईवे का पूरा मामला?
धवलपुर नेशनल हाईवे से कूकरार तक 31.65 किमी की लंबी सड़क निर्माण की मंजूरी 2008 में मिली. तब इसकी लागत 10 करोड़ रुपये थी. 2009 में काम शुरू हुआ. पहले फेज में 7 किमी सड़क का निर्माण पूरा किया जा सका था. तभी मई 2011 में माओवादियों ने आमामौरा के आगे पहाड़ों में एडिशन एसपी समेत 9 पुलिस कर्मियों को गोलियों से भून दिया. रुके काम को दोबारा 2022 में नए लागत, 23.34 करोड़ रुपये पर रीटेंडर किया गया. इस बार काम को पांच भागों में बांट दिया गया.

भारत-पाक सीमा के पास मिला युवक और नाबालिग युवती का शव, पाकिस्तानी ID और सिम कार्ड बरामद

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राजस्थान के जैसलमेर में भारत-पाकिस्तान बॉर्डर के पास एक युवक और नाबालिग लड़की का शव मिला है. जिले के एसपी ने इसकी पुष्टि की है. मौके से एक पाकिस्तानी सिम और आईडी कार्ड भी बरामद किया गया है. दरअसल, ये दोनों शव जैसलमेर जिले के साधेवाला क्षेत्र में स्थित भारत-पाकिस्तान सीमा के पास मिले हैं. मृतकों में एक 18 वर्षीय युवक और एक 15 वर्षीय नाबालिग लड़की शामिल हैं. शवों की हालत से अनुमान लगाया जा रहा है कि दोनों की मौत करीब सात दिन पहले हुई होगी. शव भारत-पाक तारबंदी से 10-12 किलोमीटर भीतर भारतीय क्षेत्र में पाए गए हैं.

घटनास्थल पर एक पाकिस्तानी सिम कार्ड और एक आईडी कार्ड मिलने से सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं. आईडी कार्ड के अनुसार, युवक का नाम रवि कुमार (उम्र 18 वर्ष) है. भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास दो शव मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां भी सतर्क हो गईं. मामले की जानकारी मिलने के बाद पुलिस और बीएसएफ के अधिकारी मौके पर पहुंचे और उन्होंने शवों को पोस्टमार्टम के लिए रामगढ़ सीएचसी की मोर्चरी में रख दिया.

पाकिस्तानी सिम कार्ड और आईडी कार्ड मिलने से कई सवाल उठ रहे हैं क्या यह सीमा पार प्रेम प्रसंग का मामला है या घुसपैठ की कोशिश या फिर कोई बड़ी साजिश है? हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि वे दोनों भारतीय सीमा में क्या करने आए थे. फिलहाल मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तनोट पुलिस, जैसलमेर पुलिस और बीएसएफ संयुक्त रूप से जांच कर रहे हैं। खुफिया एजेंसियां भी सक्रिय हो गई हैं.

उत्तराखंड में ‘बादलफोड़’ बारिश उत्तरकाशी में बन रहा होटल बहा

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उत्तराखंड में तेज बारिश और उफनती नदियां लोगों के अंदर डर को बढ़ा रही हैं. देहरादून से केदारनाथ और बद्रीनाथ में शनिवार रात से हो रही बारिश से अलकनंदा और मंदाकिनी नदियां उफान पर हैं. उत्तरकाशी में भी बड़कोट-यमुनोत्री रोड पर बादल फट जाने के कारण निर्माणाधीन होटल पानी में बह गया है. पानी इतनी तेजी से बह रहा था कि साइट का नामोनिशान ही मिट गया है. जानकारी के मुताबिक इस हादसे में 8 से 9 मजदूरों के लापता हो जाने की भी खबर सामने आई है.

उत्तराखंड में बारिश मचा रही तबाही
देहरादून से बद्रीनाथ और केदारनाथ तक घनघोर बारिश
अलकनंदा, मंदाकिनी और अन्य नदियां उफान पर
लोगों से सुरक्षित जगहों पर जाने को कहा जा रहा है
उत्तरकाशी में बादल फटने से नया बन रहा होटल बहा, 8 से 9 मजदूर लापता
रुद्रप्रयाग में संगम घाट पर भगवान शिव की 15 फीट मूर्ति पानी में डूबी
रुद्रप्रयाग में अलकनंदा और मंदाकिनी के संगम पर भयानक नजारा है
नारद शिला भी डूबी
उत्तरकाशी में बादल फटने से तबाही

वहीं दूसरी ओर उत्तराकाशी में भी बारिश के चलते जमकर तबाही मची हुई है. जानकारी के मुताबिक यमुनोत्री मार्ग पर जगह-जगह तबाही का मंजर देखने को मिल रहा है. तहसील बड़कोट के सिलाई बैंड के पास बादल फटने की घटना सामने आई है. इसके बाद एसडीआरएफ पुलिस और राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची. यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग सिलाई बैण्ड के पास दो-तीन स्थानों पर अवरुद्ध भी है. एनएच बड़कोट पर सड़क खोलने का काम चल रहा है.

कुथनौर में भी बादल फटने से कृषि भूमि हुई प्रभावित
इसके अलावा कुथनौर में भी अतिवृष्ट तथा बादल फटने के कारण स्थानीय ग्रामीणों की कृषि भूमि क्षतिग्रस्त होने की सूचना है. वर्तमान समय में कुथनौर में स्थिति सामान्य है. किसी प्रकार की कोई जनहानि नहीं हुई है. वहीं डबरकोट में भी मलबा आने से रोड ब्लॉक हो गई है. स्यानचट्टी में भी यमुना नदी का जलस्तर बढ़ गया है और इस वजह से स्थिति खतरनाक बनी हुई है.

कुमांऊ में उफान पर सरयू नदी

वहीं कुमांऊ मंडल में भी बारिश ने भारी तबाही मचाई है. बागेश्वर में सरयू नदी विकराल रूप ले चुकी है. एक वायरल वीडियो में घाट डूबे हुए दिखाई दे रहे हैं और उफनती लहरें मानो लोहा पुल को छूने को बेताब हैं. शनिवार को सरयू नदी का लेवल 868.60 मीटर पर पहुंच गया था. इस नदी का डेंजर लेवल 870.70 है. कपकोट लेकर बागेश्वर तक आसमानी आफत टूटी है.

चमोली में भारी बारिश से कई रास्ते हुए ब्लॉक

चमोली जिले में भारी बारिश जारी है, जिससे सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है. भूस्खलन के कारण कई संपर्क मार्ग ब्लॉक हो गए हैं. बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग नंदप्रयाग और कामेदा में बाधित है. अधिकारियों ने बढ़ते जलस्तर के कारण नदी के किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क कर दिया है.

रुद्रप्रयाग में भी देर रात से मूसलाधार बारिश जारी
रुद्रप्रयाग जिले में देर रात से मूसलाधार बारिश जारी है. बारिश के कारण जनजीवन अस्त व्यस्त हुआ है. इस वजह से केदारनाथ धाम जाने वाले श्रद्धालुओं को सोनप्रयाग में रोका गया है. केदारनाथ हाईवे पर जगह-जगह भूस्खलन हो रहा है. हाईवे के विजयनगर में मलबा और बोल्डर गिरा है. ऐसे में चार से पांच वाहनों को भारी नुकसान पहुंचा है. साथ ही नदी नालों में भी कोहराम मचा हुआ है. बदरीनाथ हाईवे भी देर रात से सिरोबगड़ बंद है. ऐसे में राजमार्ग पर दोनों ओर सैकड़ों वाहन फंसे हुए हैं.

उत्तराखंड भारी बारिश के चलते 24 घंटों के लिए स्थगित की गई चारधाम यात्रा

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प्रदेश में हो रही लगातार भारी वर्षा और भूस्खलन की आशंकाओं को देखते हुए यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए चारधाम यात्रा को एक दिन के लिए स्थगित किया गया है. गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान मौसम परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है.

उन्होंने कहा कि यात्रियों की जानमाल की सुरक्षा के मद्देनजर यह एहतियाती कदम उठाया गया है, ताकि मार्गों पर फंसे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो और उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा सके. संबंधित जिलों के प्रशासन को अलर्ट पर रखा गया है और राहत एवं बचाव दलों को सक्रिय किया गया है.

आयुक्त पांडेय ने बताया कि आगे की यात्रा को लेकर निर्णय कल मौसम की स्थिति और मार्गों की समीक्षा के पश्चात लिया जाएगा. श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें और मौसम सामान्य होने तक यात्रा स्थलों की ओर प्रस्थान न करें.

उत्तराखंड में बारिश मचा रही तबाही
देहरादून से बद्रीनाथ और केदारनाथ तक घनघोर बारिश
अलकनंदा, मंदाकिनी और अन्य नदियां उफान पर
लोगों से सुरक्षित जगहों पर जाने को कहा जा रहा है
उत्तरकाशी में बादल फटने से नया बन रहा होटल बहा, 8 से 9 मजदूर लापता
रुद्रप्रयाग में संगम घाट पर भगवान शिव की 15 फीट मूर्ति पानी में डूबी
रुद्रप्रयाग में अलकनंदा और मंदाकिनी के संगम पर भयानक नजारा है
नारद शिला भी डूबी
उत्तरकाशी में बादल फटने से तबाही

वहीं दूसरी ओर उत्तराकाशी में भी बारिश के चलते जमकर तबाही मची हुई है. जानकारी के मुताबिक यमुनोत्री मार्ग पर जगह-जगह तबाही का मंजर देखने को मिल रहा है. तहसील बड़कोट के सिलाई बैंड के पास बादल फटने की घटना सामने आई है. इसके बाद एसडीआरएफ पुलिस और राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची. यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग सिलाई बैण्ड के पास दो-तीन स्थानों पर अवरुद्ध भी है. एनएच बड़कोट पर सड़क खोलने का काम चल रहा है.