Home Blog Page 8

राष्ट्रीय छात्र पर्यावरण प्रतियोगिता – पंजीयन एवं प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन 15 जुलाई से 15 सितम्बर तक…

0

राजनांदगांव। भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तथा शिक्षा मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय छात्र पर्यावरण प्रतियोगिता 2026 (एनएसपीसी) का आयोजन किया जा रहा है।

इसके तहत पंजीयन एवं प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन 15 जुलाई से 15 सितम्बर 2026 तक किया जा रहा है तथा परिणाम की घोषणा 20 सितम्बर 2026 को की जाएगी। पंजीयन शुल्क के रूप में वृक्षारोपण करते समय अपनी एक सेल्फी अपलोड करनी होगी।

प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी विद्यालय, महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों तथा अन्य प्रतिभागियों को ई-प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा। प्रतियोगिता के लिए पांच समूह बनाएं गए हैं।

जिसमें प्रथम समूह में कक्षा पहली से पांचवीं तक, द्वितीय समूह में कक्षा छठवीं से आठवीं तक, तृतीय समूह में कक्षा नवमीं से बारहवीं तक, चतुर्थ समूह में स्नातक, स्नातकोत्तर व शोधार्थी के विद्यार्थी तथा पंचम समूह में अन्य प्रतिभागियों को रखा गया है।

प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए इच्छुक अभ्यर्थी वेबसाईट www.paryavaransanrakshan.org के माध्यम से पंजीयन करा सकते है।

प्रतियोगिता के संबंध में अन्य जानकारी मोबाईल नंबर 9827153440, 9039790805, 9827175274 से प्राप्त की जा सकती है।

ई-केवाईसी से होगी हर बिजली कनेक्शन की पहचान, 1 सितंबर से शुरू होगी प्रक्रिया…

0

चारों जिलों के 6.83 लाख कनेक्शनों का होगा सत्यापन; वैध उपभोक्ताओं के साथ मृत एवं अनधिकृत कनेक्शनों की भी होगी पहचान**

राजनांदगांव – विद्युत उपभोक्ताओं के कनेक्शनों एवं उनके रिकॉर्ड को अधिक प्रमाणिक, अद्यतन और पारदर्शी बनाने के उद्देष्य से छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड द्वारा विद्युत उपभोक्ताओं का ई-केवाईसी (e-KYC) कराया जाएगा। यह प्रक्रिया 1 सितंबर 2026 से प्रारंभ होगी।

राजनांदगांव, मोहला-मानपुर-चौकी तथा खैरागढ़-छुईखदान-गंडई एवं कबीरधाम जिलों में कुल लगभग 6.83 लाख बिजली कनेक्शन हैं। इनमें राजनांदगांव जिले के 2,94,638, मोहला-मानपुर-चौकी के 76,037 ,खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के 108733 तथा कबीरधाम जिले के 2,03,931 बिजली कनेक्शन शामिल हैं। इतने बड़े उपभोक्ता आधार के लिए ई-केवाईसी प्रक्रिया उपभोक्ता डेटा को प्रमाणिक एवं अद्यतन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

वैध उपभोक्ता की पहचान होगी सुनिश्चित

ई-केवाईसी के माध्यम से विद्युत कनेक्शन से संबंधित उपभोक्ता की पहचान का सत्यापन किया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी कि विद्युत कनेक्शन जिस व्यक्ति के नाम पर दर्ज है, वह वास्तविक एवं वैध उपभोक्ता है तथा वर्तमान में कनेक्शन का उपयोग कौन कर रहा है। इस प्रक्रिया से विद्युत कंपनी को अपने उपभोक्ता रिकॉर्ड को व्यवस्थित एवं अद्यतन करने के साथ वास्तविक उपभोक्ताओं का प्रमाणिक डेटाबेस तैयार करने में मदद मिलेगी।

मृत उपभोक्ताओं के नाम पर दर्ज कनेक्शनों की भी होगी पहचान

कई बार उपभोक्ता की मृत्यु हो जाने के बाद भी विद्युत कनेक्शन उसके नाम पर दर्ज रह जाता है। ऐसे मामलों की पहचान ई-केवाईसी के माध्यम से की जा सकेगी। इससे वर्तमान उपयोगकर्ता की पहचान कर नियमानुसार उपभोक्ता के नाम में आवश्यक परिवर्तन एवं रिकॉर्ड को अद्यतन करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकेगा। इसी तरह ऐसे विद्युत कनेक्शनों की भी पहचान करने में सहायता मिलेगी, जिनका उपयोग अनधिकृत अथवा अवैध रूप से किया जा रहा है या जिनमें उपभोक्ता की जानकारी लंबे समय से अद्यतन नहीं है। इससे विद्युत कंपनी को अनियमितताओं को चिन्हित कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।

उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए तीन विकल्प

उपभोक्ताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए ई-केवाईसी के लिए तीन विकल्प उपलब्ध कराए जाएंगे। उपभोक्ता “मोर बिजली मोबाइल ऐप” के माध्यम से स्वयं ऑनलाइन ई-केवाईसी कर सकते हैं। इसके अलावा नजदीकी वितरण केंद्र अथवा जोन कार्यालय में उपस्थित होकर अधिकृत कर्मचारियों के माध्यम से ई-केवाईसी कराया जा सकता है। तीसरे विकल्प के तहत मीटर रीडर उपभोक्ता के घर पहुंचकर मोबाइल एप के माध्यम से ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी करेगा। ई-केवाईसी के दौरान उपभोक्ता की पहचान का सत्यापन आधार ऑथेंटिकेशन के माध्यम से ओटीपी, फिंगरप्रिंट अथवा फेस ऑथेंटिकेशन से किया जा सकेगा।

ई-केवाईसी के लिए कोई शुल्क नहीं

विद्युत कंपनी ने स्पष्ट किया है कि ई-केवाईसी की पूरी प्रक्रिया निःशुल्क होगी। इसके लिए उपभोक्ता से किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा। उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि ई-केवाईसी के नाम पर किसी अनधिकृत व्यक्ति को राशि न दें। यदि कोई व्यक्ति ई-केवाईसी के नाम पर पैसे की मांग करता है तो इसकी सूचना संबंधित विद्युत कार्यालय को दें। उपभोक्ता केवल अधिकृत माध्यमों से ही ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी करें और किसी संदिग्ध लिंक या अनधिकृत ऑनलाइन माध्यम का उपयोग न करें।

पारदर्शी एवं प्रमाणिक विद्युत व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

ई-केवाईसी केवल पहचान सत्यापन की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह विद्युत कंपनी के उपभोक्ता डेटाबेस को सटीक, प्रमाणिक एवं अद्यतन बनाने की महत्वपूर्ण पहल है। इससे वैध उपभोक्ताओं की पहचान सुनिश्चित होने के साथ-साथ मृत उपभोक्ताओं के नाम पर दर्ज कनेक्शनों, अनधिकृत उपयोग और अवैध विद्युत कनेक्शनों की पहचान करने में भी सहायता मिलेगी। विद्युत वितरण कंपनी ने सभी उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे 1 सितंबर 2026 से प्रारंभ होने वाली ई-केवाईसी प्रक्रिया में सक्रिय सहयोग प्रदान करें और अपने विद्युत कनेक्शन का ई-केवाईसी अवश्य कराएं।

उपभोक्ताओं के सहयोग से विद्युत व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित, व्यवस्थित एवं उपभोक्ता-केंद्रित बनाने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी।

अरविंद केजरीवाल ने गन्ने से इथेनॉल बनाने और चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना…

0

आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गन्ने से इथेनॉल बनाने और चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा।

केजरीवाल ने आरोप लगाया कि पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की नीति – जिसका मकसद विदेशी मुद्रा बचाना है – ने गन्ने की उपलब्धता पर असर डाला है, जिससे चीनी के उत्पादन और कीमतों पर भी असर पड़ा है।

उन्होंने कहा कि त्योहारों के मौसम में सिर्फ़ 17 दिनों में चीनी की कीमत ₹20 बढ़ गई है, जिससे ‘आम आदमी’ की जेब पर बोझ पड़ा है। उन्होंने पूछा, “क्या यह मोदी सरकार है या अनपढ़ों की सरकार?”

केजरीवाल ने दावा किया कि हाल ही में चीनी की कीमतों में तेज़ी से बढ़ोतरी हुई है।

उन्होंने कहा कि लगभग 17 दिन पहले कीमत ₹46 प्रति किलो थी, लेकिन अब यह ₹65 प्रति किलो तक पहुँच गई है। केजरीवाल ने बताया कि जहाँ पहले भारत चीनी निर्यात करने वाला देश था, वहीं अब हालात ऐसे हो रहे हैं कि आयात की ज़रूरत पड़ सकती है।

केंद्र की इथेनॉल नीति पर सवाल उठाते हुए उन्होंने तर्क दिया कि अगर पेट्रोल आयात पर खर्च होने वाली विदेशी मुद्रा बचाने के लिए गन्ने का इस्तेमाल इथेनॉल बनाने में किया जा रहा है, तो अधिकारियों को यह भी सोचना चाहिए कि देश में चीनी की ज़रूरत कैसे पूरी होगी।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार को किसी भी फ़ैसले के व्यापक नतीजों पर पहले ही विचार कर लेना चाहिए। केजरीवाल के अनुसार, इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल का गाड़ियों के माइलेज और इंजन पर असर पड़ने की शिकायतें आई हैं, जबकि चीनी की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला है।

केजरीवाल ने अपने बयान में नोटबंदी और कोविड-19 महामारी के दौरान केंद्र के फ़ैसलों का भी ज़िक्र किया।

नोटबंदी के कदम पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि देश को इससे उम्मीद के मुताबिक फ़ायदा नहीं मिला। वहीं, महामारी के दौरान हेल्थकेयर सिस्टम को मज़बूत करने के बजाय ताली बजाने और थाली पीटने पर ध्यान दिया गया। नतीजतन, ऐसा लगता है कि प्रशासन के हर स्तर पर अनपढ़ों की फ़ौज तैनात कर दी गई है।

भारत की विकास यात्रा में राजीव गांधी का भी अहम योगदान…

0

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती की अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उनको श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए बड़ा बयान दिया। रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत की विकास यात्रा में राजीव गांधी का भी अहम योगदान रहा है।

राजनाथ सिंह के बयान के बाद सियासी पारा बढ़ सकता है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती पर मैं उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। भारत की विकास यात्रा में उनका भी अहम योगदान रहा है।

पूर्व पीएम राजीव गांधी की भूमिका भारत को आधुनिक, समृद्ध और सशक्त राष्ट्र बनाने में अहम रही। उन्होंने सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत को विश्व में वर्तमान स्थान दिलाया और इसीलिए उन्हें भारत में ‘सूचना प्रौद्योगिकी का जनक’ कहा जाता है। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती को हर साल ‘सद्भावना दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी और राहुल गांधी समेत कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने राजीव गांधी की समाधि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

वहीं, कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने सोशल मीडिया पर लिखा, “पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी जी ने भारत के निर्माण और तरक्की के लिए आधुनिक तकनीक और नए विचारों को अपनाने में विश्वास जताया। इसके लिए यह बेहद जरूरी था कि युवाओं की भागीदारी और उनकी प्रतिभा को विकसित करने के लिए समुचित व्यवस्था और अवसर प्रदान किए जाए।”

पायलट ने लिखा, “अपनी दूरदर्शिता से उन्होंने देश में आधुनिकरण की नई परिभाषा गढ़ी। कंप्यूटर और दूरसंचार क्रांति के विस्तार जैसे महत्वपूर्ण फैसलों ने देश को नई ऊंचाई तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। आज उनकी जयंती पर उन्हें हृदय की गहराइयों से नमन करता हूं।”

कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने ‘एक्स’ पर पोस्ट में लिखा, “राजीव गांधी न केवल भारत के प्रधानमंत्री थे बल्कि युवाओं के सबसे बड़े समर्थकों में से एक थे, एक ऐसे नेता जिनका मानना ​​था कि युवा भारतीय न केवल भविष्य हैं बल्कि वे शक्ति हैं जो एक आधुनिक राष्ट्र का निर्माण करेंगे। आधुनिक, तकनीकी रूप से उन्नत और आर्थिक रूप से सशक्त भारत का उनका विजन कांग्रेस पार्टी के लिए प्रेरणा और जिम्मेदारी है। राजीव जी को उनकी 82वीं जयंती पर भावभीनी श्रद्धांजलि।”

मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता विपक्ष उमंग सिघार ने सोशल मीडिया पर लिखा, “भारत के पूर्व प्रधानमंत्री, आधुनिक भारत के निर्माण के अग्रदूत एवं दूरदर्शी नेता पूर्व पीएम राजीव गांधी की जयंती पर सादर नमन। भारत को 21वीं सदी की ओर अग्रसर करने, सूचना एवं संचार क्रांति की नींव रखने, पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाने तथा युवाओं को नई दिशा देने में उनका योगदान अविस्मरणीय है। उनके प्रगतिशील विचार, लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता और राष्ट्र निर्माण का संकल्प सदैव प्रेरणास्रोत बने रहेंगे।”

बैटरी स्टोरेज द्वारा समर्थित नवीकरणीय ऊर्जा भारत में नए कोयला-आधारित बिजली संयंत्रों तुलना में कम लागत…

0

एक नए अध्ययन में दावा किया गया है कि बैटरी स्टोरेज द्वारा समर्थित नवीकरणीय ऊर्जा भारत में नए कोयला-आधारित बिजली संयंत्रों की तुलना में कम लागत पर चौबीसों घंटे विश्वसनीय बिजली उपलब्ध करा सकती है।

अमेरिका के कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले के स्टडी के अनुसार, यह मॉडल भारत के ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकता है और स्वच्छ ऊर्जा को प्रतिस्पर्धी विकल्प के रूप में स्थापित कर सकता है।

अध्ययन में भारतीय सौर ऊर्जा निगम यानी सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एसईसीआई) द्वारा आयोजित 1,000 मेगावाट क्षमता की एक महत्वपूर्ण नीलामी का विश्लेषण किया गया, जिसके परिणामस्वरूप 25 वर्षों के लिए नाममात्र शर्तों में 5.25 रुपए प्रति किलोवाट-घंटे का टैरिफ तय किया गया।

शोधकर्ताओं ने कहा कि इस परिणाम ने साबित किया है कि बैटरी स्टोरेज के साथ नवीकरणीय ऊर्जा संयोजन कोयला-आधारित बिजलीघरों जैसी निरंतर और भरोसेमंद बिजली आपूर्ति देने में सक्षम है, जो ईंधन की कीमतों में भविष्य में होने वाली वृद्धि के जोखिम के बिना भारत के मौजूदा कोयला संयंत्रों के प्रदर्शन से काफी हद तक मेल खाती है।

“इंडियाज रिन्यूएबल एनर्जी ब्रेकथ्रू: कोल-लाइक रिलायबिलिटी ऐट अ लोअर, फिक्स्ड प्राइस” शीर्षक से प्रकाशित यह अध्ययन विश्वविद्यालय के इंडिया एनर्जी एंड क्लाइमेट सेंटर द्वारा तैयार किया गया है।

नीलामी की संरचना इस प्रकार बनाई गई थी कि शाम, रात और सुबह के समय अधिकतम बिजली उपलब्ध कराई जाए, जबकि दिन में जब सौर ऊर्जा प्रचुर मात्रा में उपलब्ध रहती है, तब आपूर्ति की आवश्यकता अपेक्षाकृत कम रखी जाए। उत्पादकों के लिए यह अनिवार्य किया गया कि वे खरीदार द्वारा चुने गए छह पीक घंटों में कम से कम 90 प्रतिशत अनुबंधित क्षमता उपलब्ध कराएं। अन्य गैर-सौर घंटों में यह सीमा 70 प्रतिशत और सौर घंटों के दौरान 50 से 60 प्रतिशत निर्धारित की गई।

अनुबंध की शर्तों के अनुसार, हर 15 मिनट के ब्लॉक में प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाएगा। यदि निर्धारित आपूर्ति में कमी रहती है, तो अनुबंध मूल्य के डेढ़ गुना के बराबर जुर्माना लगाया जाएगा।

शोधकर्ताओं ने 10 भारतीय राज्यों के 10 वर्षों के प्रति घंटा मौसम आंकड़ों का उपयोग करते हुए यह जांचा कि क्या सौर ऊर्जा और बैटरी भंडारण इस व्यवस्था की आवश्यकताओं को आर्थिक रूप से पूरा कर सकते हैं।

अध्ययन में पाया गया कि प्रत्येक 1,000 मेगावाट अनुबंधित क्षमता के लिए राजस्थान जैसे उच्च सौर क्षमता वाले राज्यों में लगभग 3 गीगावाट सौर ऊर्जा क्षमता और 12 गीगावाट-घंटे बैटरी भंडारण की आवश्यकता होगी। जिन राज्यों में मानसून या सौर संसाधनों की स्थिति अलग है, वहां करीब 15 से 20 प्रतिशत अधिक सौर क्षमता की जरूरत हो सकती है, लेकिन बैटरी भंडारण की आवश्यकता लगभग समान रहेगी।

अध्ययन के प्रमुख लेखक और केंद्र में मॉडलिंग एवं विश्लेषण निदेशक उमेद पालीवाल ने कहा कि भारत की भौगोलिक स्थिति इस मॉडल के लिए बहुत अनुकूल है।

उन्होंने कहा, “भारत की भूमध्य रेखा के निकट स्थिति के कारण यहां साल भर सौर ऊर्जा उत्पादन में मौसमी उतार-चढ़ाव अपेक्षाकृत कम रहता है। यूरोप जैसे उच्च अक्षांश वाले देशों में सर्दियों के दौरान उत्पादन में बड़ी गिरावट आती है, जबकि भारत की मुख्य चुनौती दिन में मिलने वाली प्रचुर सौर ऊर्जा को शाम और रात के समय के लिए संरक्षित करना है, जो आधुनिक और कम लागत वाली बैटरियों के माध्यम से संभव है।”

इस नीलामी में 16 कंपनियों ने भाग लिया था और सात डेवलपर्स को क्षमता आवंटित की गई। उल्लेखनीय बात यह रही कि सभी सफल बोलियां 5.25 से 5.26 रुपए प्रति यूनिट के बेहद संकीर्ण दायरे में रहीं।

अध्ययन के सह-लेखक निकित अभ्यंकर ने कहा कि यह मूल्य भारत में सौर और बैटरी प्रौद्योगिकी की लागत में आई भारी गिरावट को दर्शाता है। उन्होंने कहा, “यह किसी एक आक्रामक बोलीदाता का मामला नहीं है। सात विजेता केवल एक पैसे के अंतर में रहे, जिससे स्पष्ट होता है कि 5.25 रुपए प्रति यूनिट अब स्थिर और विश्वसनीय नवीकरणीय ऊर्जा की बाजार-आधारित कीमत बनती जा रही है।”

शोधकर्ताओं का मानना है कि यह मॉडल भारत की बिजली वितरण कंपनियों की भविष्य की योजना निर्माण प्रक्रिया को बदल सकता है। साथ ही डेटा सेंटर, इस्पात, एल्यूमीनियम और अन्य विनिर्माण उद्योगों के लिए भी यह आकर्षक विकल्प बन सकता है, क्योंकि उन्हें लगातार और निर्बाध बिजली आपूर्ति की आवश्यकता होती है।

अध्ययन के सह-लेखक अमोल फड़के ने कहा, “यदि भारत इस मॉडल को बड़े पैमाने पर अपनाता है, तो उपभोक्ताओं और उद्योगों को 25 वर्षों तक निश्चित कीमत पर विश्वसनीय और स्वच्छ बिजली मिल सकती है। कम लागत, स्थिर कीमत और भरोसेमंद आपूर्ति का यह संयोजन भारतीय विनिर्माण क्षेत्र के लिए एक बड़ा प्रतिस्पर्धात्मक लाभ साबित हो सकता है।”

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती के अवसर पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने उनकी समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित…

0

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती के अवसर पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने उनकी समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित की।**

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “भारतीयों के बीच सद्भावना, हर दिल में करुणा और हर नागरिक को न्याय और लोकतंत्र में समान अधिकार।**

पापा, आपकी ये सीख मेरी शक्ति है और आपकी यादें मेरी हिम्मत। आपके सपनों का भारत बनाने का संकल्प हमेशा मेरा मार्गदर्शन करता रहेगा।”

वहीं, कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “भारत रत्न राजीव गांधी जी को उनकी जयंती पर गहरे स्नेह और सम्मान के साथ याद कर रहे हैं। वे एक दूरदर्शी और गतिशील नेता थे, जिन्होंने लाखों लोगों को प्रेरित किया और हमारे देश को 21वीं सदी के लिए तैयार करने के लिए उसमें बदलाव लाए।”

केसी वेणुगोपाल ने लिखा, “आज, लाखों कांग्रेस कार्यकर्ता और नेता उनके दिखाए रास्ते पर चल रहे हैं। उनका मकसद देश के लिए राजीव जी के विजन को पूरा करना और उसी ऊर्जा व उत्साह के साथ पार्टी को आगे बढ़ाना है, जो वे लेकर आए थे। उनका जीवन-सफर बहुत जल्द समाप्त हो गया और भारत की एकता के लिए दी गई उनकी सर्वोच्च कुर्बानी को कभी नहीं भुलाया जा सकता। राजीव जी, हम आपको बहुत याद करते हैं! इस अवसर पर वीर भूमि पर राजीव गांधी जी को श्रद्धांजलि अर्पित की।”

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “आज जब हम राजीव गांधी की 82वीं जयंती मना रहे हैं और देशभर में युवाओं के बीच बढ़ती बेचैनी और हलचल को देख रहे हैं, तब यह याद करना महत्वपूर्ण है कि प्रधानमंत्री राजीव गांधी ही थे जिन्होंने संविधान में संशोधन कर मतदान की न्यूनतम आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष की और 18 साल के युवाओं को वोट देने का अधिकार दिया।”

जयराम रमेश ने लिखा,”जिन्होंने स्वामी विवेकानंद की जयंती 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस घोषित किया। 1988 की नई शिक्षा नीति लेकर आए, जिसने कई अन्य नए प्रयासों के साथ देशभर में नवोदय विद्यालयों का नेटवर्क स्थापित किया। देश के सभी जिलों को कवर करने वाले नेहरू युवा केंद्र संगठन की स्थापना की (जिसका नाम अब बदलकर माई भारत कर दिया गया है) और भारत को निर्णायक रूप से आईटी युग में लेकर गए, जिससे रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा हुए।”

कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “राजीव गांधी! सबसे युवा प्रधानमंत्री, डिजिटल इंडिया के वास्तुकार, आधुनिक भारत के स्वप्नदृष्टा, भारत की सूचना प्रौद्योगिकी और दूरसंचार क्रांति के जनक जिनकी दूरदर्शिता के फलस्वरुप ही देश कंप्यूटर-युग में प्रवेश कर सका। भारत माता के सपूत, भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी जी की जयंती पर उन्हें शत शत नमन।”

एलआईसी को एचडीएफसी बैंक में हिस्सेदारी बढ़ाकर 9.99 प्रतिशत तक करने की आरबीआई से मिली मंजूरी…

0

देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) को एचडीएफसी बैंक में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से मंजूरी मिल गई है।

इस खबर के बाद गुरुवार के कारोबारी सत्र में घरेलू बाजार में एलआईसी और एचडीएफसी बैंक, दोनों के शेयरों में बढ़त देखने को मिली।

एचडीएफसी बैंक के एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, आरबीआई ने एलआईसी के उस आवेदन को मंजूरी दे दी है जिसके तहत वह बैंक की चुकता शेयर पूंजी अथवा मतदान अधिकारों में 9.99 प्रतिशत तक हिस्सेदारी हासिल कर सकती है।

वर्तमान में एलआईसी के पास 14 अगस्त तक एचडीएफसी बैंक की कुल शेयर पूंजी का 4.11 प्रतिशत हिस्सा है। आरबीआई की मंजूरी के बाद अब सरकारी बीमा कंपनी के पास अपनी हिस्सेदारी को दोगुने से अधिक स्तर तक बढ़ाने का विकल्प उपलब्ध हो गया है।

हालांकि, इस मंजूरी का यह अर्थ नहीं है कि एलआईसी तुरंत अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 9.99 प्रतिशत कर देगी। किसी भी अतिरिक्त खरीदारी को आरबीआई द्वारा निर्धारित शर्तों, सेबी के नियमों और अन्य नियामकीय प्रावधानों के अनुसार ही किया जाएगा।

एचडीएफसी बैंक ने अपने विवरण में कहा कि यह मंजूरी केंद्रीय बैंक द्वारा निर्धारित शर्तों और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के लागू नियमों के अनुपालन के अधीन है।

एलआईसी देश के सबसे बड़े संस्थागत निवेशकों में से एक है, जबकि एचडीएफसी बैंक भारत के प्रमुख निजी क्षेत्र के बैंकों में शामिल है। ऐसे में इस मंजूरी को वित्तीय क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

बाजार में इस खबर का सकारात्मक असर भी देखने को मिला। गुरुवार के शुरुआती कारोबार में एनएसई पर एलआईसी का शेयर 1.7 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त के साथ 420.15 रुपए के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। दिन के सत्र में स्टॉक ने 421 रुपए का हाई छुआ। वहीं, कंपनी का पिछले 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर 468.48 रुपए और निम्नतम स्तर 360.75 रुपए है।

वहीं एचडीएफसी बैंक का शेयर भी करीब 1 प्रतिशत चढ़कर 725.8 रुपए के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। दिन के कारोबारी सत्र में बैंकिंग शेयर ने 728.30 रुपए का हाई टच किया। इसके साथ ही स्टॉक ने पिछले 52 सप्ताह के दौरान 1,020.50 रुपए का उच्चतम स्तर और 722 रुपए का न्यूनतम स्तर छुआ।

वित्त वर्ष 2027 में लंबे समय तक ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा आरबीआई…

0

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) चालू वित्त वर्ष 2026-27 में नीतिगत ब्याज दरों को लंबे समय तक स्थिर रख सकता है। एसबीआई रिसर्च की एक रिपोर्ट के अनुसार, देश में आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं और महंगाई भी नियंत्रण के दायरे में है।

ऐसे में केंद्रीय बैंक के पास फिलहाल ब्याज दरों में कोई त्वरित बदलाव करने का दबाव नहीं है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि आरबीआई की हालिया मौद्रिक नीति टिप्पणियों से यह संकेत मिलता है कि केंद्रीय बैंक संभावित जोखिमों को लेकर सतर्क है और नीति समिति के कुछ सदस्यों का रुख अपेक्षाकृत सख्त हुआ है। हालांकि मौजूदा आर्थिक आंकड़े ऐसी स्थिति नहीं दिखाते, जहां तुरंत ब्याज दर बढ़ाने की आवश्यकता हो।

एसबीआई रिसर्च के अनुसार, देश की आर्थिक वृद्धि दर आगे भी मजबूत बनी रहने की संभावना है। विभिन्न प्रमुख आर्थिक संकेतक इस बात की पुष्टि कर रहे हैं कि घरेलू मांग और आर्थिक गतिविधियों में मजबूती बनी हुई है। इसी आधार पर संस्थान ने वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान ब्याज दरों में लंबे समय तक विराम रहने का अपना अनुमान बरकरार रखा है।

महंगाई के मोर्चे पर रिपोर्ट में कहा गया कि जुलाई में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति 4.45 प्रतिशत रही, जो बाजार के अनुमानों के अनुरूप थी। वहीं आयातित महंगाई में भी नरमी दर्ज की गई और यह जून 2026 के 8.1 प्रतिशत से घटकर जुलाई में 7.3 प्रतिशत पर आ गई।

हालांकि रिपोर्ट का अनुमान है कि अगस्त में महंगाई बढ़कर करीब 4.7 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। इसके अलावा अक्टूबर और नवंबर के दौरान यह कुछ समय के लिए 6 प्रतिशत के ऊपर भी जा सकती है। इसके बाद वित्त वर्ष 2026-27 की चौथी तिमाही में महंगाई फिर घटकर लगभग 5 प्रतिशत के आसपास आने की संभावना है।

रिपोर्ट में मानसून की स्थिति को भी सकारात्मक बताया गया है। जून में लगभग 40 प्रतिशत वर्षा की कमी दर्ज होने के बावजूद जुलाई में अच्छी बारिश और अगस्त में सामान्य वर्षा के कारण देशव्यापी वर्षा घाटा घटकर करीब 13 प्रतिशत रह गया है।

एसबीआई रिसर्च ने कहा कि सकारात्मक हिंद महासागर द्विध्रुव (आईओडी) की स्थिति भी चल रहे अल नीनो प्रभाव के कुछ नकारात्मक असर को कम करने में मदद कर सकती है। इससे कृषि उत्पादन और खाद्य आपूर्ति को समर्थन मिलने की उम्मीद है।

रिपोर्ट के अनुसार, कुछ प्रमुख खाद्यान्न उत्पादक राज्यों में वर्षा की कमी के बावजूद खरीफ बुआई पिछले वर्ष के स्तर से केवल लगभग 2 प्रतिशत कम है। इससे संकेत मिलता है कि राज्यों में सिंचाई सुविधाओं में सुधार हुआ है, जिससे खेती पर मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों का असर सीमित रहा।

विश्लेषकों का मानना है कि इन परिस्थितियों में बाजार को आरबीआई की व्यावहारिक और संतुलित नीति रणनीति को सकारात्मक रूप से देखना चाहिए। केंद्रीय बैंक फिलहाल वृद्धि और महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखने पर ध्यान दे सकता है।

वैश्विक स्तर पर भी केंद्रीय बैंकों के सामने नीति संकेतों को लेकर चुनौतियां बनी हुई हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा दीर्घकालिक सरकारी बॉन्ड प्रतिफलों को नियंत्रित करने और सरकारी ऋण प्रतिभूतियों की पुनर्खरीद बढ़ाने के कदमों से लॉन्ग टर्म यील्ड में कमी आई है।

राजीव गांधी जयंती पर कर्नाटक के सीएम डीके शिवकुमार ने दी श्रद्धांजलि…

0

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने गुरुवार को पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न स्वर्गीय राजीव गांधी को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की और अपने राजनीतिक जीवन के प्रारंभिक वर्षों के दौरान दिवंगत नेता द्वारा उन पर रखे गए विश्वास को याद किया।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि जब भी उन्हें राजीव गांधी और युवा नेताओं को उनके द्वारा दिए गए प्रोत्साहन की याद आती है, तो उन्हें गहरी कृतज्ञता का अनुभव होता है।

शिवकुमार ने कहा, “उन्होंने केवल भविष्य के बारे में बात नहीं की, उनमें एक नए भारत की कल्पना करने और एक पीढ़ी को यह विश्वास दिलाने का साहस था कि यह संभव है।”

मुख्यमंत्री ने राजीव गांधी के योगदानों को याद करते हुए मतदान की उम्र 21 से घटाकर 18 करने, पंचायती राज संस्थाओं को मजबूत करने और शासन को जनता के करीब लाने के प्रयासों और स्थानीय शासन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की पहलों के बारे में बताया।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने भारत में सूचना प्रौद्योगिकी और दूरसंचार क्रांति की नींव रखने, शिक्षा का आधुनिकीकरण करने और प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ावा देने का श्रेय राजीव गांधी को भी दिया।

उन्होंने कहा कि राजीव गांधी ने नेताओं की एक नई पीढ़ी को देश के भविष्य की जिम्मेदारी लेने के लिए प्रोत्साहित किया था और विज्ञान, प्रौद्योगिकी और लोकतांत्रिक मूल्यों से संचालित एक आधुनिक और प्रगतिशील भारत का समर्थन किया था।

शिवकुमार ने कहा, “कर्नाटक और यहां के लोगों के लिए काम करते हुए, मैं उनसे प्राप्त मूल्यों और प्रोत्साहन को अपने साथ रखता हूं।”

उन्होंने कहा कि राजीव गांधी की स्मृति केवल उनकी राजनीतिक यात्रा का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह एक आधुनिक, प्रगतिशील और समावेशी भारत की दिशा में काम जारी रखने की जिम्मेदारी भी है, जिसकी कल्पना पूर्व प्रधानमंत्री ने की थी।

कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद ने राजीव गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए विज्ञान, प्रौद्योगिकी और दूरसंचार के माध्यम से भारत के आधुनिकीकरण में उनके योगदान को याद किया।

हरिप्रसाद ने कहा, “भारत की एकता, सुरक्षा और तकनीकी प्रगति के लिए राजीव गांधी की दूरदर्शी पहलें हमेशा याद रहेंगी।”

उन्होंने कहा, “मैं राजीव जी के साथ अपने जुड़ाव को बहुत सम्मान के साथ याद करता हूं, जिन्होंने सामाजिक परिवर्तन के संघर्ष के दौरान मुझमें राजनीतिक प्रतिबद्धता पैदा की।”

हरिप्रसाद ने देश के तकनीकी विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा में राजीव गांधी के योगदान को एक अमिट विरासत के रूप में वर्णित किया। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि राजीव गांधी की दूरदृष्टि और योगदान प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे।

चीनी की कीमतों में उछाल: सरकार ने थोक उपभोक्ताओं पर लागू की 15 दिन की स्टॉक सीमा…

0

त्योहारी सीजन से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने और बाजार में पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है।**

सरकार ने चीनी के बड़े खरीदारों और औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक रखने की सीमा घटाकर 15 दिन कर दी है।**

उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, नया आदेश 1 सितंबर से लागू होगा और 30 नवंबर तक प्रभावी रहेगा, जिसका उद्देश्य जमाखोरी पर रोक लगाना और बाजार में चीनी की आपूर्ति बनाए रखना है।

नए नियम के तहत, जो भी औद्योगिक या संस्थागत उपभोक्ता हर महीने 10 मीट्रिक टन से अधिक चीनी का उपयोग कच्चे माल, उत्पादन या उपभोग के लिए करता है, वह अपनी 15 दिनों की आवश्यकता से अधिक चीनी का भंडारण नहीं कर सकेगा।

सरकार ने मिठाई निर्माता, कन्फेक्शनरी उद्योग, शीतल पेय निर्माता, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों, हलवाई व्यवसायों और अन्य संस्थागत खरीदारों को इस श्रेणी में शामिल किया है। ऐसे उपभोक्ताओं की पहचान पिछले एक वर्ष की औसत मासिक खपत के आधार पर की जाएगी।

हालांकि, केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन और स्थानीय निकायों से संबंधित संस्थाओं को इस आदेश से छूट दी गई है।

सरकार ने यह भी कहा है कि प्रत्येक चीनी मिल द्वारा बड़े उपभोक्ताओं को सीधे या डीलरों के माध्यम से बेची गई चीनी की मात्रा का सत्यापन किया जाएगा। इसके लिए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) रिटर्न और चीनी से संबंधित एचएसएन कोड का उपयोग किया जाएगा, ताकि वास्तविक खपत और खरीदारी का पता लगाया जा सके।

यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब सरकार पहले ही डीलरों के लिए चीनी भंडारण सीमा को 30 दिनों तक सीमित कर चुकी है। इसके बावजूद बाजार में चीनी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 18 अगस्त को चीनी का औसत खुदरा मूल्य बढ़कर 52.30 रुपए प्रति किलोग्राम हो गया, जबकि एक वर्ष पहले इसी अवधि में यह 46.34 रुपए प्रति किलोग्राम था। यानी चीनी की कीमतों में सालाना आधार पर लगभग 13 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।