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इस बार समय से पहले ही आ रहा है मॉनसून, मौसम विभाग ने बता दी तारीख

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मौसम विभाग ने खुशखबरी दी है कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून इस बार 27 मई को केरल तट पर समय से पहले दस्तक दे सकता है, जो किसानों और अर्थव्यवस्था के लिए राहत की बात है।

नई दिल्ली: मौसम विभाग ने मॉनसून को लेकर बड़ा अपडेट दिया है। आईएमडी ने रविवार को कहा कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून इस बार समय से पहले, यानी 27 मई को केरल के तटों पर दस्तक दे सकता है। आमतौर पर मॉनसून एक जून को केरल पहुंचता है, लेकिन इस बार यह 2009 के बाद सबसे जल्दी आगमन होगा, जब मॉनसून 23 मई को आया था। यह खबर किसानों और आम लोगों के लिए राहत भरी हो सकती है, क्योंकि मॉनसून भारतीय अर्थव्यवस्था और कृषि के लिए लाइफ लाइन है।

कब से कब तक रहेगा मॉनसून?

आईएमडी के अनुसार, मॉनसून केरल से शुरू होकर 8 जुलाई तक पूरे देश को कवर कर लेता है। इसके बाद यह 17 सितंबर से उत्तर-पश्चिम भारत से पीछे हटना शुरू करता है और 15 अक्टूबर तक पूरी तरह वापस चला जाता है। पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो मॉनसून 2024 में 30 मई, 2023 में 8 जून, 2022 में 29 मई, और 2021 में 3 जून को केरल पहुंचा था।

जल्दी आगमन का मतलब ज्यादा बारिश नहीं

आईएमडी के एक अधिकारी ने स्पष्ट किया कि मॉनसून के जल्दी पहुंचने का यह मतलब नहीं कि पूरे देश में बारिश का पैटर्न एकसमान होगा। उन्होंने कहा, ‘केरल में मॉनसून का जल्दी या देर से आना देश के अन्य हिस्सों में इसके व्यवहार को निर्धारित नहीं करता। यह वैश्विक और स्थानीय मौसमी परिस्थितियों पर निर्भर करता है।’ इसका मतलब है कि मॉनसून की प्रगति और बारिश की मात्रा क्षेत्रीय कारकों पर निर्भर करेगी।

सामान्य से अधिक बारिश की उम्मीद

आईएमडी ने अप्रैल में अपने पूर्वानुमान में कहा था कि 2025 के मॉनसून सीजन (जून से सितंबर) में सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव एम रविचंद्रन ने बताया, ‘इस साल चार महीने के मॉनसून में अच्छी बारिश की उम्मीद है।’ इसके अलावा, अल नीनो की संभावना को खारिज किया गया है, जो आमतौर पर कम बारिश का कारण बनता है। यह अनुमान खेती-किसानी और जल संसाधनों के लिए सकारात्मक संकेत देता है।

क्यों खास है यह मॉनसून?

मॉनसून का समय से पहले आगमन न केवल मौसम वैज्ञानिकों के लिए उत्साहजनक है, बल्कि यह कृषि क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण है। समय पर और अच्छी बारिश फसलों की बुआई और उत्पादन को बढ़ावा दे सकती है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि मॉनसून की प्रगति पर नजर रखना जरूरी है, क्योंकि मौसम की अनिश्चितताएं हमेशा बनी रहती हैं।

कितनी है तुर्की के एक सोंगर ड्रोन की कीमत, कंगाल पाकिस्तान को कैसे हुआ हासिल?

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भारत पाकिस्तान के टकराव के बीच तुर्की के सोंगर ड्रोन की काफी चर्चा हो रही है. ये वही ड्रोन है जिसके इस्तेमाल की आशंका भारत द्वारा की जा रही है. भारत की पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान की ओर से किए गए ड्रोन हमलों में सोंगर ड्रोन के इस्तेमाल होने की आशंका है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर सोंगर ड्रोन कितना शक्तिशाली है? इसे कौन सी कंपनी बनाती है? साथ ही एक ड्रोन की कितनी कीमत है?

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत और पाकिस्तान एक बार फिर सैन्य तनाव के केंद्र में हैं. इस बार ड्रोन अहम भूमिका निभा रहे हैं. भारतीय सैन्य अधिकारियों के अनुसार, पाकिस्तान ने 7-8 मई, 2025 की रात को जम्मू, पंजाब, राजस्थान और गुजरात में 36 भारतीय सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए. भारत ने इन हमलों को रोकने के लिए S-400 जैसी अपनी शक्तिशाली वायु रक्षा प्रणाली का इस्तेमाल किया. लेकिन चर्चा है कि पाकिस्तान ने तुर्की में बने सोंगर ड्रोन का इस्तेमाल किया हो सकता है. हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि इन ड्रोन का इस्तेमाल सभी 36 हमलों में किया गया था या नहीं, लेकिन इनकी बारीकी से जांच की जा रही है. क्या आपको पता है कि तुर्की के इस सोंगर ड्रोन की कीमत कितनी है?

कैसा है सोंगर ड्रोन?

तुर्की की कंपनी एसिसगार्ड द्वारा बनाया गया सोंगर ड्रोन हल्का लेकिन घातक हथियार है. इसमें आठ रोटर हैं और इसका वजन करीब 25 किलोग्राम है. यह छोटा है (145 सेमी चौड़ा, 70 सेमी लंबा), इसलिए सैनिक इसे आसानी से ले जा सकते हैं या ट्रांसपोर्ट कर सकते हैं. इसे 4×4 सैन्य वाहनों पर भी लगाया जा सकता है.

सोंगर ड्रोन की सबसे बड़ी ताकत इसके हथियार हैं. इसमें 5.56×45 मिमी नाटो-स्टैंडर्ड मशीन गन है, जिसमें 200 गोलियां हैं. यह एक बार में एक या 15 के ग्रुप में गोली चला सकता है. ड्रोन में OASIS नामक एक स्पेशन स्टेबलाइजेशन सिस्टम और रोबोटिक आर्म्स भी हैं, जो इसे सटीक रूप से शूट करने में मदद करते हैं. मेकर्स का कहना है कि यह 200 मीटर की दूरी से सिर्फ़ 15 सेमी चौड़े छोटे लक्ष्य को मार सकता है.

सोंगर ड्रोन की खासियत?

  • एक 40 मिमी ग्रेनेड लांचर
  • एक टोगन 81 मिमी मोर्टार, जो 35 मीटर के विस्फोट रेडियस के साथ विस्फोट करता है
  • एक लेजर-गाइडिड मिनी-मिसाइल जो 2 किमी दूर तक पहुंच सकती है
  • 2024 में, ड्रोन में छह बैरल वाला 40 मिमी रोटरी ग्रेनेड लांचर भी जोड़ा गया. इससे इसकी मारक क्षमता बहुत बढ़ गई, जिससे यह युद्ध में और भी ज़्यादा ख़तरनाक हो गया.

कितनी है एक सोंगर की कीमत?

हालांकि इसकी कोई आधिकारिक कीमत नहीं है, लेकिन सोशल मीडिया पर रिपोर्ट बताती है कि 400 ड्रोन की कीमत लगभग 80 करोड़ रुपए है. एक ड्रोन की कीमत लगभग 24,000 डॉलर बताई जा रही है. यह सस्ता और शक्तिशाली है. भारत की वायु सेना ने तेजी से जवाब दिया. L-70 गन से लेकर शिल्का सिस्टम (ZSU-23-4 “शिल्का”, एक स्व-चालित एंटी-एयरक्राफ्ट हथियार प्रणाली) तक, उन्होंने ड्रोन के झुंड को मार गिराया. भारतीय प्रणालियों ने उनके GPS सिग्नल को भी जाम कर दिया, जिस पर सोंगर निर्भर हैं.

भारत ने कथित तौर पर लाहौर के पास पाकिस्तान की ​एयर डिफेंस को नष्ट करने के लिए हारोप ड्रोन का भी इस्तेमाल किया. तुर्की के साथ पाकिस्तान के घनिष्ठ संबंधों से यह संभावना बनती है कि उनके पास सोंगर ड्रोन तक पहुंच थी. लेकिन सभी 36 हमलों में केवल सोंगर का उपयोग करना असंभव है. उनकी सीमित सीमा और उड़ान समय के लिए बहुत जटिल योजना की आवश्यकता होगी.

अमेरिका की मध्यस्थता से भारत-पाकिस्तान में सीजफायर, ओवैसी ने पीएम मोदी से पूछे ये 4 सवाल

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पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव के बीच, अमेरिका की मध्यस्थता से हुए युद्धविराम का असदुद्दीन ओवैसी ने स्वागत किया है. हालांकि, उन्होंने पीएम मोदी से अमेरिकी मध्यस्थता और पाकिस्तान के भविष्य के आतंकवादी हमलों को रोकने की रणनीति पर सवाल उठाए हैं.

पहलगाम आतंकी हमले के दो पिछले दो हफ्तों से भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहे तनाव का शनिवार की शाम को पटाक्षेप लग गया. अमेरिका की मध्यस्थता में भारत और पाकिस्तान ने सीजफायर पर सहमति जताई. AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने दोनों देशों के बीच युद्धविराम का स्वागत किया है, लेकिन उन्होंने अमेरिका की मध्यक्षता को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी से सवाल पूछे हैं.

असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल साइट एक्स पर ट्वीट कर कहा कि जब तक पाकिस्तान भारत के खिलाफ आतंकवाद के लिए अपने क्षेत्र का उपयोग करता रहेगा, तब तक स्थायी शांति नहीं हो सकती. युद्धविराम हो या न हो, हमें पहलगाम हमले के लिए जिम्मेदार आतंकवादियों का पीछा करना चाहिए.

बाहरी आक्रमण के खिलाफ सरकार के साथ खड़ा हूं

उन्होंने कहा कि मैं हमेशा बाहरी आक्रमण के खिलाफ सरकार और सशस्त्र बलों के साथ खड़ा रहा हूं. यह जारी रहेगा. उन्होंने कहा कि मैं सशस्त्र बलों को उनकी बहादुरी और उनके सराहनीय कौशल के लिए धन्यवाद देता हूं. मैं सेना के जवान एम मुरली नाइक, एडीडीसी राज कुमार थापा को श्रद्धांजलि देता हूं और संघर्ष के दौरान मारे गए या घायल हुए सभी नागरिकों के लिए प्रार्थना करता हूं. उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है कि यह युद्धविराम सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को राहत देगा.

उन्होंने कहा कि मेरे कुछ सवाल हैं, और मुझे उम्मीद है कि सरकार स्पष्ट करेगी. आइए जानें ओवैसी ने क्या पूछे सवाल-

  1. मैं चाहता हूं कि हमारे पीएम नरेंद्र मोदी ने किसी विदेशी देश के राष्ट्रपति के बजाय युद्धविराम की घोषणा की होती. हम शिमला (1972) से हमेशा तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप का विरोध करते रहे हैं. हमने अब इसे क्यों स्वीकार कर लिया है? मुझे उम्मीद है कि कश्मीर मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण नहीं किया जाएगा, क्योंकि यह हमारा आंतरिक मामला है.
  2. हम तटस्थ क्षेत्र पर बातचीत करने के लिए क्यों सहमत हो रहे हैं? इन वार्ताओं का एजेंडा क्या होगा? क्या संयुक्त राज्य अमेरिका यह गारंटी देता है कि पाकिस्तान अपने क्षेत्र का उपयोग आतंकवाद के लिए नहीं करेगा?
  3. क्या हमने पाकिस्तान को भविष्य में आतंकी हमले करने से रोकने का अपना लक्ष्य हासिल कर लिया है? क्या हमारा लक्ष्य ट्रम्प की मध्यस्थता से युद्ध विराम करवाना था या पाकिस्तान को ऐसी स्थिति में लाना था कि वह किसी और आतंकी हमले के बारे में सपने में भी न सोचे?
  4. हमें पाकिस्तान को FATF की ग्रे सूची में डालने के लिए अंतरराष्ट्रीय अभियान जारी रखना चाहिए.

आखिर क्यों दुनिया भर में केले का आकार होता है टेढ़ा, वजह जान चक्कर खा जाएगा दिमाग

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Banana Facts: आपने आज तक ना जाने कितने ही केले खाए होंगे. केला ही वो फल है, जो साल के 12 महीने मिलता है. इस फल को खाने के बहुत से फायदे हैं. इसमें आपको प्रचुर मात्रा में फाइबर मिल जाता है. इसके अलावा केला खाने से आपका डायजेस्टिव सिस्टम भी ठीक रहता है. आज कल जिम जाने वाले लोग जिम से आने के बाद सबसे पहले केले का ही सेवन करते हैं, क्योंकि यह वजह बढ़ाने में भी मदद करता है. इसके अलावा लोग इसका शेक बनाकर पीना भी पसंद करते हैं.

क्यों है केले का आकार टेढ़ा
आपने पूरी जिंदगी में ना जाने कितनी बार ही केले को देखा होगा, लेकिन क्या आपने कभी यह जानने की कोशिश करी है कि आखिर केले का आकार टेढ़ा क्यों होता है? क्यों आज तक कभी आपको सीधे केले देखने को नहीं मिले? अगर आप इसका जवाब नहीं जानते, तो कोई बात नहीं. आज हम आपको इसके केले के टेढ़े होने की असली वजह बताएंगे.

इस कारण होता हैं दुनिया भर के सभी केले टेढ़े
आप इतना तो जरूर जानते होंगे कि जब भी केला अपना पेड़ में उगता है, तो वह गुच्छों में उगता है. लोकल भाषा में इसके पूरे गुच्छे को खानी कहते हैं और यह जमीन की तरफ लटक रहा होता है. अब आप जब केले को उस समय देखेंगे, तो पाएंगे कि इसका आकार उस समय सीधा होता है. लेकिन साइंस में एक प्रवृत्ति का उल्लेक किया गया है, जिसे नेगेटिव जियोट्रोपिजम (Negative Geotropism) कहा जाता है. इसके कारण कुछ पेड़ के पत्ते व फल बड़े होने पर सूरज की तरफ मुड़ने लगते हैं. नेगेटिव जियोट्रोपिजम का असर केले के पेड़ों पर भी होता है और इसी प्रवृत्ति के कारण वे धीरे-धीरे घूमते हुए सूरज की तरफ बढ़ने लगते हैं और इसी के कारण उसना आकार टेढ़ा या हल्के C टाइप का हो जाता है.

पहली बार यहां दिखा असर
बता दें कि पहले केले के पेड़ बरसाती वनों में उगा करते थे. लेकिन केले की पैदावार उतनी अच्छी नहीं हुआ करती थी. इसका सबसे अहम कारण था कि बरसाती वनों में केलों को सही मात्रा में धूप नहीं मिल पाती थी. इसलिए किसान ऊपरी क्षेत्रों में आए और उन्होंने वहां केले के पेड़ उगाए, लेकिन नेगेटिव जियोट्रोपिजम प्रवृत्ति का असर यहां सबसे पहले देखने को मिला, जिस कारण केले का आकार टेढ़ा हो गया और इसी लिए आज आपको केले टेढ़े आकार के नजर आते हैं.

‘ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी’, पाकिस्तान से सीजफायर के बीच भारतीय वायुसेना का बड़ा बयान

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ऑपरेशन सिंदूर को लेकर भारतीय वायु सेना (IAF) ने बड़ा बयान दिया है. सेना ने कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर अभी जारी है और आगे इसके बारे में डिटेल में जानकारी दी जाएगी.

India Pakistan Ceasefire: पाकिस्तान से सीजफायर के बाद भारतीय वायु सेना (IAF) ने बड़ी जानकारी दी है. सेना ने कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर अभी जारी है. IAF ने कहा कि हमने इस ऑपरेशन के लक्ष्य को पूरा किया है और इसके बारे में डिटेल में जानकारी दी जाएगी.

बयान में कहा गया है, “भारतीय वायुसेना (IAF) ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत सौंपे गए सभी काम सटीकता और जिम्मेदारी के साथ सफलतापूर्वक पूरे किए हैं. यह अभियान सोच-समझकर और सावधानी से चलाया गया, जो देश के हितों के अनुसार था. चूंकि यह अभियान अभी जारी है, इसलिए इसकी पूरी जानकारी जल्द ही दी जाएगी.” वायुसेना ने लोगों से अपील की है कि अफवाहों से बचें

नवा रायपुर में खुलेगा देश का पहला AI डेटा सेंटर पार्क, CM विष्णुदेव साय बोले- ये छत्तीसगढ़ के भविष्य की नींव

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने संबोधन में कहा कि यह सिर्फ एक तकनीकी परियोजना नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के भविष्य की नींव है.

Raipur News: देश के पहले आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित डेटा सेंटर पार्क की नींव शनिवार (3 मई) को छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर के सेक्टर-22 में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रखी. यह डेटा सेंटर पार्क 13.5 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जा रहा है, जिसमें 2.7 हेक्टेयर हिस्सा विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) के रूप में विकसित होगा.

रैक बैंक डेटा सेंटर्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा संचालित यह परियोजना पूरी तरह एआई सेवाओं को समर्पित होगी. पहले चरण में 5 मेगावाट क्षमता से शुरू होकर इसे 150 मेगावाट तक विस्तारित किया जाएगा. भविष्य में इस परियोजना में लगभग 2000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त निवेश संभावित है. पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए इस डेटा सेंटर को हरित और ऊर्जा दक्ष तकनीक के अनुरूप डिजाइन किया गया है.

यहां से न केवल स्टोरेज और प्रोसेसिंग की सुविधा उपलब्ध होगी, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), हेल्थटेक, डिफेंस, फिनटेक और डेटा एनालिटिक्स जैसे क्षेत्रों में अत्याधुनिक सेवाएं भी दी जाएंगी. पार्क में जीपीयू आधारित हाई-एंड कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, रिकॉर्डिंग, लाइव डेटा स्ट्रीमिंग, और AI प्रॉसेसिंग जैसी विश्व स्तरीय सुविधाएं होंगी.

इस प्रोजेक्ट के जरिए लगभग 500 प्रत्यक्ष और 1500 अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर तैयार होंगे. खास बात यह है कि इसमें स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे छत्तीसगढ़ न केवल तकनीकी क्षेत्र में अग्रणी बनेगा बल्कि युवाओं के लिए नई संभावनाएं भी खुलेगीं. इस सेंटर के जरिए जीपीयू आधारित हाई-एंड कंप्यूटिंग, लाइव डेटा स्ट्रीमिंग, एआई प्रोसेसिंग और डेटा एनालिटिक्स जैसी वैश्विक स्तर की सेवाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगी. इसका असर हेल्थटेक, फिनटेक, स्मार्ट एग्रीकल्चर और रक्षा क्षेत्र में बड़े बदलावों के रूप में दिखाई देगा.

मुख्यमंत्री साय ने अपने संबोधन में कहा कि यह सिर्फ एक तकनीकी परियोजना नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के भविष्य की नींव है. उन्होंने इसे राज्य के युवाओं, किसानों और आदिवासी समुदाय के लिए परिवर्तनकारी बताया. उन्होंने विश्वास जताया कि छत्तीसगढ़ अब डिजिटल भारत की धड़कन बनेगा.

छत्तीसगढ़ के लिए क्या बदलेगा?

रोजगार की नई राहें: यह डाटा सेंटर पार्क आईटी, डाटा एनालिटिक्स, और तकनीकी रखरखाव जैसे क्षेत्रों में हजारों नौकरियां पैदा करेगा. छत्तीसगढ़ के युवा अब दिल्ली-मुंबई जाए बिना अपने घर पर ही तकनीकी करियर बना सकेंगे.
किसानों की मदद: AI तकनीक से किसानों को स्मार्ट खेती, मौसम की सटीक जानकारी, और फसल प्रबंधन में मदद मिलेगी. इससे उनकी मेहनत का ज्यादा फल मिलेगा.
आदिवासियों को डिजिटल ताकत: दूरदराज के आदिवासी इलाकों में शिक्षा, स्वास्थ्य, और सरकारी सेवाएं डिजिटल रूप से आसानी से पहुंचेंगी.
आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़: यह पार्क राष्ट्रीय और वैश्विक डाटा ट्रैफिक को संभालेगा, जिससे सरकारी सेवाएं तेज होंगी और राज्य डिजिटल रूप से आत्मनिर्भर बनेगा.

उत्तराखंड में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 25 IAS समेत 38 अफसरों के प्रभार बदले

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उत्तराखंड की धामी सरकार ने एक बार फिर से बड़े स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल किया है. इसमें 25 आईएएस आधिकारियों समेत करीब 38 अधिकारियों के प्रभारों में बदलाव किए गए हैं.

Uttarakhand Administrative Reshuffle: उत्तराखंड सरकार ने एक बार फिर व्यापक स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 25 आईएएस अधिकारियों समेत कुल 38 अधिकारियों के प्रभारों में बड़ा बदलाव किया है. शनिवार देर रात जारी किए गए तबादला आदेशों के मुताबिक कई वरिष्ठ अफसरों को अहम जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, जबकि कुछ अधिकारियों को वर्तमान पदों से हटाकर नए दायित्व दिए गए हैं. इस फेरबदल का उद्देश्य प्रशासनिक कार्यप्रणाली को और अधिक सशक्त एवं प्रभावी बनाना बताया जा रहा है.

इस फेरबदल के तहत अभिषेक रूहेला को शिक्षा महानिदेशक की जिम्मेदारी सौंपी गई है. इससे पहले यह जिम्मेदारी झरना कमठान के पास थी, जिन्हें अब अपर सचिव वित्त बनाया गया है. समाज कल्याण विभाग में भी बदलाव किए गए हैं, जहां चंद्र सिंह धर्मशक्तू को निदेशक समाज कल्याण नियुक्त किया गया है. वहीं, पीसीएस अधिकारी विप्रा त्रिवेदी को अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की नई सचिव बनाया गया है.

सीएम धामी ने अपने सचिव को कौन सा विभाग सौंपा?
प्रमुख फेरबदल मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन के कार्यक्षेत्र में किया गया है. उन्हें वित्त, कार्मिक, सतर्कता और कृषि उत्पादन आयुक्त के पदों से मुक्त कर दिया गया है. अब वे मुख्य स्थानिक आयुक्त, मुख्य निवेश आयुक्त दिल्ली और तीनों ऊर्जा निगमों के अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभालेंगे. प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु को उनके वर्तमान दायित्वों के साथ वित्त, कृषि उत्पादन आयुक्त तथा निदेशक एवं अध्यक्ष उत्तराखंड बीज एवं तराई विकास निगम की जिम्मेदारी दी गई है.

मुख्यमंत्री के सचिव शैलेश बगौली को गृह विभाग के साथ अब कार्मिक एवं सतर्कता विभाग की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है. सचिव दीपेंद्र कुमार चौधरी को आयुष एवं आयुष शिक्षा विभाग का नया सचिव बनाया गया है, जबकि यह जिम्मेदारी पहले सचिव रविनाथ रमन के पास थी. सचिव विनोद कुमार सुमन को आपदा प्रबंधन के अतिरिक्त निदेशक ऑडिट की जिम्मेदारी भी दी गई है.

डीएम कर्मेंद सिंह से कुंभ का दायित्व हटा
राज्य संपत्ति विभाग का कार्यभार अब रणवीर सिंह चौहान के पास होगा. सचिव श्रीधर बाबू अद्दांकी, जो अब तक बाध्य प्रतीक्षा में थे, को नियोजन विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है. सचिव सी. रविशंकर को कौशल विकास के साथ वन विभाग का दायित्व सौंपा गया है.

इस व्यापक फेरबदल में जिलों के प्रशासनिक ढांचे में भी बदलाव किए गए हैं. नैनीताल की संयुक्त मजिस्ट्रेट वरुणा अग्रवाल को मुख्य विकास अधिकारी टिहरी बनाया गया है, जबकि मसूरी की संयुक्त मजिस्ट्रेट अनामिका को सीडीओ नैनीताल की जिम्मेदारी सौंपी गई है. टिहरी के डीएम मयूर दीक्षित को उपाध्यक्ष, जिला विकास प्राधिकरण बनाया गया है. हरिद्वार के डीएम कर्मेंद्र सिंह से मेलाधिकारी कुंभ का दायित्व हटा दिया गया है. प्रकाश चंद दुम्का को उपाध्यक्ष, जिला विकास प्राधिकरण टिहरी से हटाकर आयुक्त गन्ना एवं चीनी, काशीपुर नियुक्त किया गया है.

कुंभ की जिम्मेदारी सोनिका को सौंपी गई
डॉ. अहमद इकबाल को महानिदेशक निबंधन आयुक्त कर के पद से मुक्त किया गया है. सोनिका को आयुक्त कर, महानिरीक्षक निबंधक तथा मेलाधिकारी कुंभ की जिम्मेदारी सौंपी गई है. डॉ. प्रकाश चंद को निदेशक समाज कल्याण पद से हटाया गया है. गौरव कुमार से समाज कल्याण और आयुक्त दिव्यांगजन का प्रभार लेकर यह जिम्मेदारी रवनीत चीमा को दी गई है.

तीर्थपाल सिंह को संयुक्त मुख्य प्रशासक, उत्तराखंड आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण के पद से मुक्त कर दिया गया है. वहीं, सिटी मजिस्ट्रेट देहरादून प्रत्यूष सिंह को जीएमवीएन (गढ़वाल मंडल विकास निगम) का सामान्य प्रबंधक बनाया गया है.

प्रशासन की फेरबदल में युवाओं को भी मिला मौका
पीसीएस अधिकारी बंशीलाल राणा को संभागीय खाद्य नियंत्रक गढ़वाल के पद से हटाकर अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी पर्यटन बनाया गया है. पीसीएस अशोक कुमार पांडेय को सीडीओ नैनीताल से मुक्त कर उत्तराखंड लोकसेवा आयोग का परीक्षा नियंत्रक नियुक्त किया गया है. अवधेश कुमार सिंह को उत्तराखंड लोकसेवा आयोग से स्थानांतरित कर एडीएम टिहरी बनाया गया है. अधिशासी निदेशक, चीनी मिल डोईवाला को संयुक्त मुख्य प्रशासक, आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण की जिम्मेदारी भी दी गई है

उत्तराखंड सरकार के इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल ने प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे में एक नई ऊर्जा का संचार किया है. जहां कुछ अधिकारी वर्षों बाद फिर से सक्रिय जिम्मेदारियों में लौटे हैं, वहीं कई युवा और अनुभवी अफसरों को नई जिम्मेदारियां सौंपकर प्रशासन को अधिक कुशल बनाने का प्रयास किया गया है. यह फेरबदल आने वाले समय में प्रदेश के शासन-प्रशासन में कितनी प्रभावशीलता लाता है, यह देखना अहम होगा.

पाकिस्तान ने किया सीजफायर का ‘घोर उल्लंघन’, सेना कर रही जवाबी कार्रवाई: विदेश मंत्रालय

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विदेश सचिव ने कहा कि हम पाकिस्तान से अपेक्षा करते हैं कि वह स्थिति की गंभीरता को समझे और तत्काल प्रभाव से इस अतिक्रमण को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए.

भारत-पाकिस्तान के बीच हुए युद्धविराम के उल्लंघन को लेकर विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने शनिवार (10 मई,2025) की देर रात कहा कि सेना को सख्त कदम उठाने के आदेश दिए गए हैं. उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान के डीजीएमओ के बीच सैन्य कार्रवाई रोकने को लेकर आज शाम हुए समझौते का पाकिस्तान ने कुछ ही घंटों में “घोर उल्लंघन” किया है.

विक्रम मिसरी ने मीडिया को बताया कि भारतीय सेना पूरी दृढ़ता से जवाबी कार्रवाई कर रही है और सीमा पर हो रहे अतिक्रमण को रोकने में जुटी है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की ओर से यह कार्रवाई “अत्यंत निंदनीय है और इसकी पूरी जिम्मेदारी पाकिस्तान पर है”.

उन्होंने कहा, “सशस्त्र बल हालात पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं और उन्हें अंतर्राष्ट्रीय सीमा तथा नियंत्रण रेखा पर किसी भी तरह के उल्लंघन की पुनरावृत्ति होने पर सख्ती से कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं.”

विदेश सचिव ने कहा कि हम पाकिस्तान से अपेक्षा करते हैं कि वह स्थिति की गंभीरता को समझे और तत्काल प्रभाव से इस अतिक्रमण को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए. भारतीय सेना इस स्थिति पर लगातार निगरानी बनाए हुए है और किसी भी प्रकार के उल्लंघन का कड़ा और निर्णायक उत्तर देने के लिए पूरी तरह तैयार है.

उल्लेखनीय है कि तीन दिनों तक चले संघर्ष के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध विराम हुआ था. भारतीय विदेश मंत्रालय ने बताया कि शनिवार शाम पांच बजे से सीजफायर लागू हो गया है, लेकिन महज चार घंटे के अंदर ही पाकिस्तान ने सीजफायर का उल्लंघन किया और सीमा पार से गोलीबारी शुरू की. साथ ही कई शहरों को ड्रोन के जरिए निशाना बनाया.

इससे पहले भारत सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ जारी लड़ाई को लेकर बड़ा फैसला लिया. सरकार ने सख्त संदेश देते हुए कहा था कि भविष्य में कोई भी आतंकी घटना भारत के खिलाफ युद्ध की कार्रवाई मानी जाएगी.

भारत सरकार के शीर्ष सूत्रों ने कहा था कि भारत ने निर्णय लिया है कि भविष्य में किसी भी आतंकी कार्रवाई को भारत के खिलाफ युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा और उसी के अंदाज में जवाब भी दिया जाएगा.

एमएस धोनी समेत ये खिलाड़ी आर्मी का देंगे साथ, पाकिस्तान को देंगे मुंहतोड़ जवाब

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भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए भारत सरकार ने सेना प्रमुख को टेरिटोरियल आर्मी के सदस्यों को बुलाने का अधिकार दे दिया है. टेरिटोरियल आर्मी में एमएस धोनी समेत कई खिलाड़ी शामिल हैं

भारत और पाकिस्तान के बीच लगातार तनाव बढ़ रहा है. पहलगाम में हुए आतंकी हमले का बदला लेने के लिए भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर चलाया था. इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान के 9 आतंकी ठिकानों को नष्ट कर दिया था. इसके बाद पाकिस्तान भी भारत पर हमला कर रहा है. इस बीच भारत सरकार ने सेना प्रमुख को टेरिटोरियल आर्मी के सदस्यों को बुलाने का अधिकार दिया है.

टेरिटोरियल आर्मी एक सहायक आर्मी संगठन है, जो भारतीय सेना को सहायता सेवांए देती है. इसे देश की सेकेंड लाइन डिफेंस कहा जाता है. यह रेगुलर आर्मी को सहायदा प्रदान करता है.

टेरिटोरियल आर्मी के सदस्य आम नागरिक की तरह जीवन जीते हैं. लेकिन जरुरत पड़ने पर वो देश की सेवा के लिए तैयार रहते हैं. एमएस धोनी, अभिनव बिंद्रा, कपिल देव और सचिन तेंदुलकर टेरिटोरियल आर्मी का हिस्सा हैं.

धोनी टेरिटोरियल आर्मी का हिस्सा हैं. 2019 वर्ल्ड कप के बाद धोनी ने 2 हफ्ते की ट्रेनिंग भी ली थी. धोनी ने कश्मीर 106 टेरिटोरियल आर्मी बटालियन के साथ समय बिताया था.

कपिल देव भी टेरिटोरियल आर्मी का हिस्सा हैं. कपिल आर्मा में कर्नल के पद पर हैं. इसके अलावा ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट और शूटर अभिनव बिंद्रा भी टेरिटोरियल आर्मी में शामिल हैं. बिंद्रा मेजर के पद पर हैं.

सचिन तेंदुलकर को साल 2010 में भारतीय वायु सेना की तरफ ग्रुप कैप्टन के पद पर नियुक्त किया गया था. उन्हें क्रिकेट में बहुमूल्य योगदान देने के लिए ये सम्मान मिला था. भारतीय सेना अगर चाहेगी की तो इन सब खिलाड़ियों को भी पाकिस्तान को मुहंतोड़ जवाब देने के लिए बुला सकती है.

पाकिस्तान को 1 अरब डॉलर का कर्ज देना IMF को पड़ा भारी, अब हो रही है कड़ी आलोचना

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IMF: भारत ने शुक्रवार को आईएमएफ की बैठक में पाकिस्तान के लिए बेलआउट पैकेज और प्रोग्राम के तहत दी जाने वाली फंडिंग पर चिंता जाहिर की और वोटिंग करने से खुद को दूर रखा.

IMF: कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर है. इस बीच, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने एक्सटेंडेड फंड फैसिलिटी (EFF) के तहत पाकिस्तान के लिए 1 अरब डॉलर की रकम जारी करने की मंजूरी दी है. इसके चलते आईएमएफ को अब कड़ी आलोचनाओं का शिकार होना पड़ रहा है.

इसी के साथ इस प्रोग्राम के तहत अब तक पाकिस्तान को आईएमएफ की तरफ से किया गया कुल भुगतान अब 2.1 बिलियन डॉलर हो जाएगा. इसके अलावा, IMF ने जलवायु लचीलापन और स्थिरता सुविधा (RSF) के तहत पाकिस्तान के लिए 1.3 अरब डॉलर की राशि भी मंजूर की है. इससे पाकिस्तान को जलवायु परिवर्तन और आर्थिक स्थिरता को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी.

IMF की हो रही कड़ी आलोचना

इस फैसले के लिए आईएमएफ को न केवल भारत से बल्कि दुनिया के कई और हिस्सों से भी तीखी प्रतिक्रियाओं का सामना करना पड़ रहा है. लोगों का ऐसा कहना है कि इससे तनाव कम होने के प्रयास कमजोर पड़ सकते हैं.

यह ध्यान देने वाली बात है कि भारत ने आईएमएफ की बैठक में वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया, जब पाकिस्तान के लिए नए बेलआउट पैकेज पर विचार करना था. यूनाइटेड नेशन में जैसे किसी देश को ‘No’वोटिंग करने का अधिकार है. वैसा आईएमएफ में नहीं है. यहां या तो आपको पक्ष में वोट करना होगा या मतदान से खुद को दूर रखना होगा और पाकिस्तान की फंडिंग को लेकर मतदान में भारत ने खुद को दूर रखा.

फंड का हो सकता है दुरुपयोग

मतदान दूर रहने का फैसला यह दिखाता है कि भारत पाकिस्तान को दी जाने वाली आर्थिक मदद के सख्त खिलाफ है. भारत ने इस मौके का इस्तेमाल पाकिस्तान की पोल खोलने के लिए भी की. वोटिंग के बाद वित्त मंत्रालय की तरफ से एक बयान में कहा गया, इसमें “नैतिक सुरक्षा उपायों का अभाव” है. साथ ही चेतावनी भी दी कि आईएमएफ जैसी दूसरी संस्थाओं पाकिस्तान को मिलने वाले फंड का इस्तेमाल आतंकवाद को सपोर्ट करने में खर्च हो सकता है.

IMF की फंडिंग पर उठ रहे सवाल

भारतीय राजनयिकों और विदेश नीति के जानकारों का मानना है कि एक ऐसी घड़ी में पाकिस्तान को लोन के लिए मंजूरी मिलना गलत संकेत भेजती है. पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने इस फैसले को ‘भयंकर दृश्य’ कहा. उन्होंने आईएमएफ की कार्यनीति पश्चिमी शासन के पक्ष में है और उनमें जिम्मेदारी का अभाव है.

जाने-माने चुनाव विश्लेषक यशवंत देशमुख ने कहा कि आईएमएफ के ‘हाथ खून से सने हैं.’ इसी तरह से, ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के सुशांत सरीन ने कहा कि यह फंड पाकिस्तान के सैन्य प्रतिष्ठान के प्रभाव को कम करने या सुधार को प्रोत्साहित करने के बजाय उसे ‘साहस प्रदान’ कर रहा है.

जम्मू एवं कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जब आईएमएफ भारत पर हमले के लिए पाकिस्तान को ‘अनिवार्य रूप से प्रतिपूर्ति’ कर रहा है, तो तनाव में कमी की उम्मीद कैसे की जा सकती है. इस बीच, निर्वासित अफगानिस्तान की पूर्व सांसद मरियम सोलायमानखिल ने आईएमएफ पर ‘खून-खराबे’ को बढ़ावा देने का आरोप लगाया. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, ”आईएमएफ ने इकोनॉमी को नहीं बचाया, इसने खून-खराबे को बढ़ावा दिया. दुनिया कब तक पाकिस्तान को हत्या करने के लिए पैसे देगी?’