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दहेज उत्पीड़न के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी’

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– शादी का मतलब लड़की और उसके परिवार को अपमानित करने का अधिकार मिल जाना नहीं’

लड़की के परिवार को अपमानित करने की प्रवृत्ति पर सख्त नाराजगी जताते हुए जस्टिस नागरत्ना ने कहा, ‘समाज में यह संदेश जाना चाहिए कि बहू और उसके परिवार का इस तरह अपमान करना अब नहीं चलेगा.’

सुप्रीम कोर्ट ने पति की तरफ से पत्नी के परिवार को अपमानित किए जाने को लेकर कड़ी टिप्पणी की है. महिला की संदिग्ध मौत से जुड़े छत्तीसगढ़ के एक मामले में दोषी ठहराए गए देवर की याचिका को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने समाज को आइना दिखाया. जजों ने लड़की के परिवार से पैसों और उपहार की उम्मीद को बहुओं को ‘निचोड़ने’ की कोशिश करार दिया.

मामला 2010 का है. छत्तीसगढ़ में शादी के सिर्फ तीन साल के भीतर एक महिला ने फांसी लगाकर जान दे दी थी. महिला के परिवार ने आरोप लगाया कि कार और कैश की मांग को लेकर बेटी को प्रताड़ित किया जा रहा था. मौत शादी के सात साल के भीतर अप्राकृतिक रूप से हुई थी इसलिए, कोर्ट ने इसे कानूनन ‘दहेज मृत्यु’ की श्रेणी में माना.

मामले में पति के परिवार के कई सदस्यों को आईपीसी की धारा 304B (दहेज मृत्यु), धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और धारा 498A (दहेज उत्पीड़न) के तहत दोषी ठहराया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने जिस याचिका पर शुक्रवार (29 मई, 2026) को सुनवाई की उसे मृतक महिला के देवर ने दाखिल किया था. उसे निचली अदालत ने दहेज उत्पीड़न का दोषी माना था.

मामले की सुनवाई के दौरान केस के तथ्यों का हवाला देते हुए जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने कहा, ‘लड़के के परिवार ने लड़की के परिवार को कहा कि तुम लोग भिखारी हो. तुम पैसे नहीं दे सकते. लड़की का परिवार अपनी बेटी को बचाने की भीख मांग रहा था और उन्हें भिखारी कहा जा रहा था. दुल्हन के पिता ने कहा था कि वह 60 हजार रुपए दे सकते हैं और आप उन्हें भिखारी कहते हैं?’

लड़की के परिवार को अपमानित करने की प्रवृत्ति पर सख्त नाराजगी जताते हुए जस्टिस नागरत्ना ने कहा, ‘लड़के, लड़कियों से शादी करके उन्हें और उनके परिवार को अपमानित क्यों करते हैं? समाज में यह संदेश जाना चाहिए कि बहू और उसके परिवार का इस तरह अपमान करना अब नहीं चलेगा.’

याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि उनके मुवक्किल पर केवल धारा 498A (उत्पीड़न) का आरोप है. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, ‘आपको खुश होना चाहिए कि उन्हें सिर्फ 3 साल की सजा मिली है.’ बेंच के सदस्य जस्टिस भुइयां ने शिक्षित परिवारों में ऐसी बुरी प्रथा के बने रहने पर चिंता जताई.

दिल्ली एयरपोर्ट पर लगा देश का पहला स्मार्ट मौसम सिस्टम, उड़ान से पहले मिलेगी खतरे की चेतावनी….

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अब तक पायलट और एयर ट्रैफिक कंट्रोलर को मौसम की जानकारी थोड़ी देर बाद मिलती थी. SKYCAST यह काम रियल टाइम में करेगा यानी हर पांच मिनट पर ताजा अपडेट मिलेगा.

दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (IGI) एयरपोर्ट पर भारत का पहला स्मार्ट मौसम सिस्टम लगा है, जो आसमान में मौसम की हर हरकत पर नजर रखेगा. इसका नाम स्काईकास्ट (SkyCast) है. केंद्र सरकार के विज्ञान मंत्रालय और एयरपोर्ट चलाने वाली कंपनी DIAL ने मिलकर शुक्रवार (29 मई 2026) को इसे शुरू किया.

क्या करेगा यह सिस्टम

अब तक पायलट और एयर ट्रैफिक कंट्रोलर को मौसम की जानकारी थोड़ी देर बाद मिलती थी. SKYCAST यह काम रियल टाइम में करेगा यानी हर पांच मिनट पर ताजा अपडेट मिलेगा. यह सिस्टम जमीन से करीब दस किलोमीटर ऊपर तक हवा की रफ्तार, तापमान, नमी और कोहरे जैसी हर चीज को लगातार देखता रहता है.

उड़ान से पहले मिलेगी खतरे की चेतावनी

अगर रनवे के पास अचानक तेज हवा चलने लगे, कोहरा आ जाए या बिजली गिरने का खतरा हो तो SKYCAST तुरंत अलर्ट भेजेगा. इससे पायलट और कंट्रोल रूम दोनों को पहले से पता चल जाएगा और वो सही फैसला ले सकेंगे. इससे उड़ानें कैंसिल होने या दूसरे शहर डायवर्ट होने के मामले कम होंगे.

दुनिया के टॉप एयरपोर्ट भी करते हैं यही काम

सीधा मतलब यह है कि खराब मौसम में भी फ्लाइट समय पर उड़ेगी और लैंड करेगी. कोहरे की वजह से जो घंटों की देरी होती थी वो अब कम होगी. यात्रियों को एयरपोर्ट पर बैठकर इंतजार नहीं करना पड़ेगा. लंदन का हीथ्रो, सिंगापुर का चांगी और न्यूयॉर्क का JFK एयरपोर्ट पहले से ऐसे सिस्टम इस्तेमाल कर रहे हैं. अब दिल्ली भी उस लिस्ट में आ गया है. पूरे भारत में अभी सिर्फ दिल्ली एयरपोर्ट के पास यह सुविधा है.

दिल्ली में मौसम कभी भी बदल सकता है और सही वक्त पर सही जानकारी मिलना बहुत जरूरी है. SKYCAST से यात्रियों का सफर और ज्यादा सुरक्षित और आसान होगा. दिल्ली में गुरुवार (28 मई 2026) शाम को हुई बारिश के कारण लोगों को भीषण गर्मी से शुक्रवार सुबह कुछ राहत मिली और न्यूनतम तापमान एक दिन पहले दर्ज 28.4 डिग्री सेल्सियस से घटकर 25.3 डिग्री सेल्सियस रह गया.

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने शुक्रवार के लिए ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है. मौसम विभाग ने दोपहर और शाम के समय बारिश होने, बिजली चमकने और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान जताया है.

छत्तीसगढ़ के मेधावी सिक्ख विद्यार्थियों को राज्य स्तरीय सम्मान मिला…

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सिक्ख विद्यार्थियों का राज्य स्तरीय सम्मान, गोल् व सिल्वर मैडल से सम्मानित हुए विद्यार्थी सम्मानित

छत्तीसगढ़ सिक्ख ऑफिसर्स वेलफेयर एसोसियेशन

गुरुव्दारा परिसर, महावीर नगर, रायपुर

कक्षा 12वीं में रायपुर की हरलीन, अवनीत और इशप्रीत सिंह को मिला गोल्ड

दिलप्रीत सिंह,प्रथम सिंह और करनदीप को मिला सिल्वर मैडल

10वीं में रायपुर की गुनतास घुम्मन,य़शराज,अस्तुज और हरगुन कौर  को गोल्ड हरगुन छाबड़ाजसलीन कौर और नवनीत सिंह अजमानी के मिला सिल्वर मेडल

छत्तीसगढ़ सिक्ख ऑफिसर्स वेलफेयर एसोसियेशन ने आज प्रदेश के मेधावी सिक्ख विद्यार्थियों का राज्य स्तरीय सम्मान किया । इसमें  85 प्रतिशत या उससे अधिक अंक लाने वाले विद्यार्थियों को 7 गोल्ड मैडल, 6 सिल्वर मैडल, मोमेन्टों और और सर्टिफिकेट ऑफ एक्सीलेंस  प्रदान किया गया। कक्षा 10वीं में 4 गोल्ड मैडल और 3 सिल्वर मेडल और 12वीं में 3 गोल्ड मेडल, 3 सिल्वर मेडल प्रदान किया गया।

गोल्डमैडलः– 10वीं में रायपुर की गुनतास घुम्मन, यशराज चावला, अस्तुज सिंह ओबेराय, हरगुन कौर चावला को गोल्ड मैडल, 12 वीं में रायपुर की हरलीन कौर बेदी, अवनीत कौर सलूजा, इशप्रीत कौर होरा को गोल्ड मैडल और सर्टिफिकेट ऑफ एक्सीलेंस प्रदान किया गया।

सिल्वर मैडलः 10वीं में रायपुर की हरगुन छाबड़ा, जसलीन कौर, महासमुन्द के नवनीत आजमानी को तथा 12वीं में रायपुर के दिलप्रीत सिंह सैनी, प्रथम सिंह भाटिया, भिलाई के करणदीप सिंह भाटिया को सिल्वर मेडल और सर्टिफिकेट ऑफ एक्सीलेंस प्रदान किया गया।

अन्य मेधावी विद्यार्थियों में कक्षा 10वीं में, बिलासपुर की गुनदीप कौर लाल, धमतरी के तृषराज तलूजा, गुरलीन कौर बग्गा, निहाल सिंह सलूजा, नवल सिंह सलूजा, हर्षलीन कौर टुटेजा, रायपुर के गुरनेक सिंह खनूजा, दिलजीत कौर नोटे, इशक्रीत कौर छाबड़ा, हरदीप कौर चावला, हरलीन कौर कलसी, जसकीरत कौर, एकलीन कौर सलूजा, मनस्वी कुकरेजा, करमन कौर चावला, अंबिकापुर की जपजी कौर छाबड़ा और युविका कौर बाबरा, सूरजपुर की हरनीत कौर,कुम्हारी दुर्ग की बानी बग्गा, राजनांदगांव के  गुरनाम सिंह भाटिया, डोंगरगढ़ से रितराज कौर व लक्षित बग्गा को मोमेन्टो और सर्टिफिकेट ऑफ एक्सीलेंस दे कर सम्मानित किया गया।

कक्षा 12वीं में रायपुर के इशमीत सिंह सोखी, दर्शलीन कौर चावला, दिव्यदीप सिंह चावला, नवनीत कौर छाबड़ा, इकलीन कौर सलूजा, कोरबा से जसदीप कौर, अशप्रीत कौर मलोहत्रा, अंबिकापुर से उन्मीत कौर चावला, डोंगरगढ़ से साहेबप्रीत सिंह भाटिया, चनप्रीत कौर भाटिया, मुंगेली से शौर्यदीप सिंह, बेमेतरा से तनिष कौर खुराना, जपजीत कौर खुराना, भिलाई से बिमलजोत सिंह भाटिया, करणदीप सिंह भाटिया, सनमीत सिंह विरदी, राजनांदगांव से इशनूर कौर भाटिया को मोमेन्ट और सर्टिफिकेट ऑफ एक्सीलेंस प्रदान किया गया।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रुप में उपस्थित कोलंबिया प्रोफेशल यूनिर्सिटी के कुलपति डॉ. रमन झा ने विद्यार्थियों को जीवन में सीखने की ललक और अपनी रुचि के अनुसार भविष्य बनाने के लिए जीवन के कई उदाहरण दिए। उन्होंने कहा कि समय का ध्यान रखते हुए कार्य करें तथा खेल और संगीत को भी समय दें। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत सिंह छाबड़ा ने कहा कि अमरीकी राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन का उदाहरण दिया कि वे 8 बार फेल हुए उसके बाद भी लगातार सकारत्मक रुप से संघर्ष करते हुए अमरीका के राष्ट्रपति बने। उन्होंने कहा कि मोबाईल फोन की रील विद्यार्थियों को भटकाव की दिशा में ले जा रही है इससे बचने की जरूरत है। कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रुप में गुरुचरण सिंह होरा, गुरप्रीत सिंह बाबरा, एच.एस.हुरा, जसबीर सिंह घुम्मन उपस्थित थे।

कार्यक्रम में कैरियर कौंसिलर और मोटीवेशनल स्पीकर डॉ. अजीत वरवंडकर ने विद्यार्थियों व उनके पालकों को कहा कि वे हर महीने उन लोगों से जरूर मुलाकात करें जिन्होंने अपनी जिन्दगी में अच्छा मुकाम हासिल किया है और वे उनसे उनकी उपलब्धियों के संबंध में प्रश्न भी पूछें। इससे विद्यार्थियों को अपने कैरियर के चयन में आसानी होगी। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ सिक्ख ऑफिसर्स वेलफेयर एसोसियेशन के संयोजक जी.एस. बाम्बरा ने एसोसियेशन की गतिविधियों और उद्देश्यों की जानकारी दी। वहीं एसोसियेशन के एजुकेशन कमेटी के चेयरमैन प्रो. (ड़ॉ) बी.एस. छाबड़ा ने मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित करने की अवधारणआ पर प्रकाश डला। कार्यक्रम का संचालन डॉ. बी.एस. छाबड़ा और तेजपाल सिंह हंसपाल ने किया। धन्यवाद ज्ञापन एसोसियेशन के अध्यक्ष एच.एस. धींगरा ने किया ।

इस अवसर पर एसोसियेशन के सचिव बी.एस.सलूजा, दीपसिंह जब्बल, के.एस. झास, लखिन्दर सिंह चावला, टी.एस.जब्बल टी.पी.एस भाटिया, डॉ. कुलदीप सिंह छाबड़ा, चतर सिंह सलूजा, एम.एस.सलूजा, नरेन्द्र सिंह चावला, अजीत सिंह राजपाल, जे.एस.जब्बल, जे.एस. खोखर, अमरजीत सिंह विरदी, सुखबीर सिंह सिंगोत्रा, भूपिन्दर सिंह, डॉ. रविन्दर बाम्बरा, श्रीमती हरप्रीत कौर धींगरा , श्रीमती हरमिन्दर सलूजा, श्रीमती पिंकी जब्बल, श्रीमती संतोष झास, गुरुशरण कौर भाटिया व खालसा स्कूल शिक्षण समिति के जगपाल सिंह धालीवाल, रघुबीर सिंह भट्टी, रामगढिंया सेवक सभा के अध्यक्ष बलदेव सिंह भुई, सचिव ओंकार सिंह, मनमोहन सिंह चावला पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी जी.आर. चन्द्राकार उपस्थित थे।

अब सिर्फ राजधानी नहीं, मध्य भारत का उभरता वेडिंग डेस्टिनेशन…

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अब सिर्फ राजधानी नहीं, मध्य भारत का उभरता वेडिंग डेस्टिनेशन शादियों का सीजन हैडेस्टिनेशन वेडिंग करनी है, लेकिन शहर से बहुत दूर नहीं जाना चाहते? चिंता मत करिएनवा रायपुर है ना!

शादियों का सीजन हैडेस्टिनेशन वेडिंग करनी है, लेकिन शहर से बहुत दूर नहीं जाना चाहते?

चिंता मत करिएनवा रायपुर है ना!

देश केओवरबुक्डवेडिंग शहरों के बीच, नवा रायपुर बन रहा है मध्य भारत का पसंदीदा वेडिंग डेस्टिनेशन

शादी की तारीख तय होते ही सबसे पहला सवाल आता है– “लोकेशन क्या होगी?” और यही सवाल धीरे-धीरे सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है। विकल्प तो कई हैं, लेकिन हर विकल्प के साथ कोई न कोई समझौता जुड़ा होता है।

देश के चर्चित वेडिंग डेस्टिनेशन्स की बात करें तो उदयपुर बेहद खूबसूरत है, लेकिन वहां शादी के लिए महीनों नहीं, कई बार सालों पहले बुकिंग करनी पड़ती है। गोवा में समुद्र और शानदार माहौल है, लेकिन भीड़भाड़ के कारण निजीपन का एहसास कम हो सकता है। पहाड़ों में दृश्य आकर्षक होते हैं, लेकिन वहां हर छोटी व्यवस्था संभालना थका देने वाला हो जाता है। केरल अपनी हरियाली के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन मौसम को लेकर असमंजस बना रहता है। और विदेशों में शादी… वहां पहुंचने से पहले ही आधी ऊर्जा कागजी प्रक्रियाओं में खत्म हो जाती है। यानी अक्सर भव्यता और सुविधा में से किसी एक को चुनना पड़ता है। दोनों का संतुलन अब भी दुर्लभ माना जाता है।

लेकिन अब एक ऐसा शहर सामने आ रहा है, जो इस सोच को बदलता नजर आ रहा है वह है नवा रायपुर। अब तक इसे योजनाबद्ध विकास, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और हरित वातावरण के लिए जाना जाता था। लेकिन पिछले कुछ समय में यह एक नई वजह से चर्चा में आने लगा है, डेस्टिनेशन वेडिंग्स।

और यह चर्चा किसी बड़े प्रचार अभियान से नहीं, बल्कि लोगों के अनुभवों से फैली है। उन परिवारों के अनुभवों से, जिन्होंने यहां शादियां आयोजित कीं। उन फोटोग्राफरों की सलाह से, जिन्होंने यहां शूट किए। और उन तस्वीरों से, जो सोशल मीडिया पर बिना किसी प्रयास के लोगों का ध्यान खींच लेती हैं।

नेवी ऑफिसर श्री साई राम कहते हैं कि “हम शहर से बहुत दूर नहीं जाना चाहते थे, लेकिन प्रकृति के बीच शूट करना चाहते थे। इसलिए हमने नवा रायपुर चुना, क्योंकि यह रायपुर के पास भी है और बेहद खूबसूरत भी।” इसी तरह वित्त प्रबंधक श्री अरिजीत बनर्जी का कहना है कि “नवा रायपुर बहुत खूबसूरत शहर है। हमने यहां कुछ शानदार तस्वीरें लीं और अब मेरे रिश्तेदार बार-बार उस लोकेशन के बारे में पूछते रहते हैं।”

जहां शादीमैनेजनहीं करनी पड़तीबस जी जाती है

डेस्टिनेशन वेडिंग का असली दबाव सजावट या मेन्यू में नहीं, बल्कि व्यवस्थाओं में होता है। और यहीं नवा रायपुर बाकी शहरों से अलग नजर आता है। यहां बारात ट्रैफिक में नहीं फंसती, समय पर पहुंचती है। मेहमान कार्यक्रम मिस नहीं करते, बल्कि हर रस्म का हिस्सा बनते हैं। एक जगह से दूसरी जगह जाना भागदौड़ नहीं, बल्कि सहज अनुभव लगता है। यहां चीजों को संभालना नहीं पड़ता, वे पहले से व्यवस्थित महसूस होती हैं।

मेहमानों के अनुभव में भी यही फर्क दिखाई देता है। नवा रायपुर तक पहुंचना आसान है। स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट पास है, सड़कें चौड़ी और सुगम हैं, और सफर थकाने के बजाय आरामदायक महसूस होता है। लोग यहां पहुंचते ही कार्यक्रम का हिस्सा बन जाते हैं, उन्हें पहले यात्रा की थकान से उबरने की जरूरत नहीं पड़ती। और यही छोटा-सा बदलाव पूरे आयोजन का अनुभव बदल देता है।

हर रस्म का अलग दृश्य, हर पल का अलग एहसास

नवा रायपुर के रिसॉर्ट्स और वेडिंग वेन्यू अब सिर्फ आयोजन स्थल नहीं, बल्कि अनुभव बन चुके हैं। सुबह की हल्दी झील किनारे हल्की धूप में हो… शाम को वही जगह संगीत और रोशनी से जीवंत हो जाए… और रात में खुले आसमान के नीचे वही स्थल एक भव्य उत्सव में बदल जाए, यही अनुभव यहां की शादियों को अलग बनाता है। यहां शादी सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं रहती, बल्कि एक ऐसी कहानी बन जाती है, जिसे लोग वर्षों तक याद रखते हैं।

खास बात यह भी है कि बड़े आयोजनों के लिए यहां व्यवस्थाएं बेहद मजबूत हैं। भोजन, आतिथ्य, लॉजिस्टिक्स और मेहमानों की सुविधाएं हर स्तर पर सहजता का अनुभव कराती हैं। यही कारण है कि यहां आयोजन करने वाले परिवार अपेक्षाकृत कम तनाव में दिखाई देते हैं।

हर शादी भव्य होयह जरूरी नहीं

आज की नई पीढ़ी की शादियों में एक बदलाव साफ दिखाई देता है। लोग अब सिर्फ बड़े आयोजन नहीं, बल्कि अर्थपूर्ण और व्यक्तिगत अनुभव चाहते हैं।

नवा रायपुर में ऐसे आयोजन भी बेहद सहज महसूस होते हैं। यहां खुले हरे मैदान, झीलों के किनारे शांत लोकेशन और सीमित मेहमानों के साथ निजी समारोहों के लिए आदर्श वातावरण मिलता है। आज के समय में शोर से ज्यादा सुकून चुनना भी एक नई तरह की विलासिता बन चुका है।

तस्वीरें यहांखींचीनहीं जातींबन जाती हैं

नवा रायपुर में एक दिलचस्प दृश्य अक्सर देखने को मिलता है। चौड़ी सड़कों के किनारे, झीलों के पास या हरियाली के बीच कहीं न कहीं कैमरे और कपल्स अपने खास पलों को कैद करते नजर आ जाते हैं। यह कोई कृत्रिम ट्रेंड नहीं है। शहर की प्राकृतिक बनावट, साफ-सुथरी लोकेशन्स और शांत वातावरण तस्वीरों को अपने आप खूबसूरत बना देते हैं। यहां हर फ्रेम सिनेमाई महसूस होता है।

शादी के बीच का समय भी बन जाता है यादगार

डेस्टिनेशन वेडिंग्स में अक्सर मेहमानों के पास खाली समय में करने के लिए बहुत कुछ नहीं होता। लेकिन नवा रायपुर में शादी के बीच का समय भी अनुभव का हिस्सा बन जाता है। कोई जंगल सफारी चला जाता है, कोई झील किनारे शाम बिताता है, तो कोई बस शहर की सुकूनभरी सड़कों पर टहलना पसंद करता है। यहां शादी के बीच के पल भी याद बन जाते हैं, सिर्फ इंतजार नहीं।

नवा रायपुर : एक उभरती पहचान

क्या नवा रायपुर अभी देश का सबसे बड़ा वेडिंग डेस्टिनेशन बन चुका है? शायद नहीं। और शायद यही इसकी सबसे बड़ी खूबी भी है। यह अभी भीड़ से दूर है, लेकिन सुविधाओं में पीछे नहीं। यहां दिखावा कम है, लेकिन अनुभव पूरा है। और शायद इसी वजह से अब वे परिवार, जो कुछ अलग, सुकूनभरा और यादगार चाहते हैं, नवा रायपुर की ओर देखने लगे हैं।

वित्त, पर्यावरण एवं आवास मंत्री श्री ओपी चौधरी ने कहा कि नवा रायपुर हर क्षेत्र में तेजी से अपनी पहचान बना रहा है चाहे वह एआई डेटा सेंटर हो, सेमीकंडक्टर यूनिट, मेडिसिटी या पर्यटन। उन्होंने कहा कि अब नवा रायपुर मध्य भारत के उभरते वेडिंग हब के रूप में भी पहचान बना रहा है। यहां की प्राकृतिक लोकेशन्स, 40 से अधिक झीलें, लगभग 26 प्रतिशत हरियाली और मजबूत रोड, रेल एवं एयर कनेक्टिविटी इसे विशेष बनाती हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य नवा रायपुर को देश के प्रमुख वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करना है। आने वाले वर्षों में इस दिशा में लगातार काम किया जा रहा है।

और शायद यही वजह है कि नवा रायपुर अब सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि यादगार शादियों का नया पता बनता जा रहा है।

घूमका  नगर पंचायत चुनाव में भाजपा मीडिया टीम निभा रही सशक्त भूमिका…

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घूमका  नगर पंचायत चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी की मीडिया टीम लगातार सक्रिय रहकर पार्टी की गतिविधियों, जनसंपर्क अभियान, बैठकों एवं चुनावी कार्यक्रमों को आम जनता तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है।

भाजपा की मीडिया टीम के सदस्य योगेश दत्त मिश्रा, अमर लालवानी एवं रवि सिन्हा प्रतिदिन चुनावी गतिविधियों को समाचार, फोटो, वीडियो एवं सोशल मीडिया के माध्यम से जनता तक पहुंचा रहे हैं। इनके प्रयासों से पार्टी का पक्ष मजबूती के साथ आम नागरिकों तक पहुंच रहा है तथा चुनावी माहौल में भाजपा की सक्रियता और जनसमर्थन भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

भाजपा नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने मीडिया टीम के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि वर्तमान समय में मीडिया जनसंपर्क का सबसे प्रभावी माध्यम बन चुका है। जनता तक सही, तथ्यात्मक एवं सकारात्मक जानकारी पहुंचाने में मीडिया टीम की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

नगर पंचायत चुनाव के दौरान पार्टी की नीतियों, विकास कार्यों एवं जनहित से जुड़े विषयों को लगातार जनता तक पहुंचाने का कार्य मीडिया टीम पूरी जिम्मेदारी एवं समर्पण के साथ कर रही है। प्रतिदिन विभिन्न वार्डों में हो रहे जनसंपर्क, सभाओं एवं बैठकों की जानकारी आम लोगों तक पहुंचने से कार्यकर्ताओं में भी उत्साह का वातावरण बना हुआ है।

भाजपा ने मीडिया टीम के तीनों सदस्यों — योगेश दत्त मिश्रा, अमर लालवानी एवं रवि सिन्हा — के कार्यों की प्रशंसा करते हुए विश्वास जताया है कि वे आगे भी इसी ऊर्जा एवं प्रतिबद्धता के साथ संगठन के लिए कार्य करते रहेंगे।

घूमका में चल रही कमल की आंधी, ऐतिहासिक जीत की ओर बढ़ रही भाजपा…

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भाजपा की ऐतिहासिक जीत निश्चित

घूमका नगर पंचायत चुनाव अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है और पूरे क्षेत्र में भाजपा के पक्ष में जबरदस्त जनसमर्थन का माहौल दिखाई दे रहा है। घर-घर पहुंच रही भाजपा की नीतियों, केंद्र एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं तथा विकास कार्यों के प्रति जनता का विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है।

भाजपा प्रत्याशी किरण वर्मा एवं सभी वार्डों के भाजपा पार्षद प्रत्याशियों को आम जनता, युवाओं, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों का भरपूर आशीर्वाद मिल रहा है। जनसंपर्क के दौरान हर वर्ग के लोगों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि घूमका के विकास, सुशासन और पारदर्शी प्रशासन के लिए भाजपा ही सबसे बेहतर विकल्प है।

भाजपा कार्यकर्ताओं का उत्साह चरम पर है और नगर में “अबकी बार विकास की सरकार” का वातावरण साफ दिखाई दे रहा है। पिछले वर्षों में भाजपा सरकार द्वारा किए गए विकास कार्यों, सड़क, पेयजल, स्वच्छता एवं जनहित योजनाओं का लाभ जनता तक पहुंचा है, जिसके कारण मतदाताओं में भाजपा के प्रति विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है।

जनता यह समझ चुकी है कि केवल भाजपा ही नगर के समग्र विकास, युवाओं को अवसर, महिलाओं को सम्मान और आम नागरिकों को बेहतर सुविधाएं देने का कार्य कर सकती है। दूसरी ओर विपक्ष केवल भ्रम फैलाने और नकारात्मक राजनीति करने में लगा हुआ है, जबकि भाजपा सकारात्मक सोच और विकास के एजेंडे के साथ जनता के बीच पहुंच रही है।

नगर पंचायत घूमका में इस बार ऐतिहासिक जीत के साथ भाजपा का परचम लहराना तय माना जा रहा है। जनता का उत्साह और समर्थन यह संकेत दे रहा है कि आने वाले परिणाम भाजपा के पक्ष में होंगे और घूमका विकास की नई दिशा में आगे बढ़ेगा।

JNU Admission 2026: PG और डिप्लोमा कोर्स के लिए शुरू हुई आवेदन प्रक्रिया…

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JNU Admission 2026: JNU ने 2026-27 सत्र के लिए PG और ADOP कोर्स में एडमिशन प्रक्रिया शुरू कर दी है. CUET PG 2026 देने वाले छात्र 15 जून तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं.

देश के लाखों छात्रों का सपना होता है कि वे देश की सबसे टॉप यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करें. जब बात बेहतरीन शिक्षा, शानदार कैंपस और बड़े अवसरों की आती है, तो जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी यानी JNU का नाम सबसे पहले लिया जाता है. दिल्ली में स्थित यह यूनिवर्सिटी लंबे समय से छात्रों की पहली पसंद बनी हुई है. अब उन छात्रों के लिए बड़ी खबर सामने आई है जो JNU में दाखिला लेना चाहते हैं.

JNU प्रशासन ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए पोस्ट ग्रेजुएट यानी PG और एडवांस डिप्लोमा इन प्रोफिशिएंसी (ADOP) कोर्स में एडमिशन प्रक्रिया शुरू कर दी है. CUET PG 2026 का रिजल्ट जारी होने के बाद यूनिवर्सिटी ने अपना ऑनलाइन पोर्टल भी खोल दिया है. अब छात्र घर बैठे ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं.

25 मई से शुरू हुई आवेदन प्रक्रिया

JNU की तरफ से 25 मई 2026 से आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. ऐसे छात्र जिन्होंने CUET PG 2026 की परीक्षा दी है, वे यूनिवर्सिटी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं. आवेदन की आखिरी तारीख 15 जून 2026 तय की गई है.

कौन छात्र कर सकते हैं आवेदन?

JNU में वही छात्र आवेदन कर सकते हैं जिन्होंने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA द्वारा आयोजित CUET PG 2026 परीक्षा दी हो. बिना CUET PG स्कोर के आवेदन मान्य नहीं होगा. एक जरूरी नियम यह भी है कि छात्र ने CUET PG में जिस विषय की परीक्षा दी है, वह उसी विषय से जुड़े कोर्स के लिए आवेदन कर सकता है. यानी विषय बदलकर फॉर्म भरने की अनुमति नहीं दी जाएगी.

आवेदन के समय छात्रों को अपना रजिस्ट्रेशन नंबर और जन्म तिथि डालकर लॉगिन करना होगा. इसके बाद पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन पूरी की जा सकेगी. हालांकि कुछ खास कोर्स और विदेशी छात्रों के लिए अलग चयन प्रक्रिया रखी गई है. ऐसे मामलों में मेरिट या अलग परीक्षा के आधार पर दाखिला दिया जाएगा.

इन तारीखों को जरूर रखें याद

JNU में एडमिशन प्रक्रिया 25 मई 2026 से शुरू हो चुकी है, जबकि आवेदन करने की आखिरी तारीख 15 जून 2026 तय की गई है. इसके बाद यूनिवर्सिटी की पहली मेरिट सूची 23 जून 2026 को जारी होने की संभावना है. पहली सूची में चयनित छात्रों को 23 से 25 जून 2026 के बीच सीट ब्लॉकिंग और फीस जमा करनी होगी.

वहीं दूसरी मेरिट सूची 1 जुलाई 2026 तक जारी की जा सकती है, जिसके बाद दूसरी सूची में शामिल छात्रों को 1 से 3 जुलाई 2026 तक फीस भुगतान और सीट कन्फर्म करनी होगी. दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया 6 जुलाई से 14 जुलाई 2026 के बीच पूरी की जाएगी. इसके अलावा खाली बची सीटों के लिए अंतिम एडमिशन प्रक्रिया 20 से 22 जुलाई 2026 तक चलेगी, जबकि यूनिवर्सिटी में दाखिले की अंतिम तारीख 7 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है.

आवेदन कैसे करें?

सबसे पहले छात्रों को JNU की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा. वहां एडमिशन लिंक पर क्लिक करके रजिस्ट्रेशन करना होगा. इसके बाद लॉगिन कर आवेदन फॉर्म भरना होगा. फॉर्म में मांगी गई जानकारी ध्यान से भरनी होगी. साथ ही जरूरी दस्तावेज तय साइज में अपलोड करने होंगे. इसके बाद आवेदन फीस जमा करके फॉर्म सबमिट करना होगा. अंत में आवेदन पत्र का प्रिंट आउट निकालकर अपने पास रखना जरूरी होगा.

कर्नाटक की सियासत पर BJP सांसद राजीव प्रताप रूडी का बड़ा दावा…

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CM of Karnataka: बीजेपी सांसद राजीव प्रताप रूडी ने कर्नाटक के सियासी उठापटक पर कांग्रेस को घेरा. उन्होंने कहा कि कांग्रेस में नेतृत्व का अभाव है.

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने गुरुवार (28 मई) को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. इस बीच बीजेपी सांसद राजीव प्रताप रूडी की प्रतिक्रिया सामने आई है. उन्होंने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी में नेतृत्व का अभाव है. इसकी साथ ही उन्होंने भविष्य में कांग्रेस की मौजूदगी पर भी सवाल खड़े किए.

राजीव प्रताप रूडी से जब सिद्धारमैया को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, ”ये कांग्रेस का मामला है. वैसे भी हर जगह पर कांग्रेस की सरकार अस्थिर हो चुकी है. नेतृत्व का अभाव है. आने वाले दिनों में शायद देश में कांग्रेस की उपस्थिति रहे ना रहे, ये कहना बड़ा कठिन है.”

SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर क्या बोले रूडी?

एसआईआर को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भी बीजेपी सांसद राजीव प्रताप रूडी ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा, “बिहार का जो अनुभव है, बिहार और बंगाल में जो एसआईआर पर जो विरोध था उस सरकार के निर्णय पर सुप्रीम कोर्ट ने मुहर लगा दी है.

प्रधानमंत्री के निर्णय देशहित में होते हैं- रूडी

उन्होंने आगे कहा, ”सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्णय अच्छे होते हैं और देशहित में होते हैं. स्वाभाविक तौर से अगर एक जगह कामयाबी मिल गई और सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया तो मुझे लगता है कि इसे पूरे देश में लागू करने में कोई संवैधानिक कठिनाई नहीं होनी चाहिए.”

सीएम पद से इस्तीफे के बाद क्या बोले सिद्धारमैया?

कर्नाटक के सीएम पद से इस्तीफा सौंपने के बाद सिद्धारमैया ने कहा, ”मैंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है. चूंकि राज्यपाल थावरचंद गहलोत शहर में नहीं हैं, इसलिए मैंने अपना त्यागपत्र उनके विशेष सचिव को सौंप दिया. मैंने बार-बार कहा था कि जब भी आलाकमान मुझे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने को कहेगा, मैं इस्तीफा दे दूंगा. आलाकमान ने मुझे दो दिन पहले पद छोड़ने का निर्देश दिया था, जिसके अनुसार मैंने आज अपना इस्तीफा सौंप दिया.”

 

Right to Cooling: गर्मी अब वैश्विक असमानता का संकट बनती जा रही है. इसी बीच आइए जानते हैं राइट टू कूलिंग के बारे में….

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Right to Cooling: काफी ज्यादा गर्मी अब सिर्फ एक मौसमी परेशानी नहीं रही. यह एक वैश्विक असमानता का संकट बनती जा रही है. भारत से लेकर यूरोप और मिडिल ईस्ट रिकॉर्ड तोड़ तापमान उन लोगों के बीच बढ़ती खाई को दिखा रहा है जो खुद को जानलेवा गर्मी से बचा सकते हैं और जो नहीं बचा सकते. जिस तरफ अमीर परिवार एयर कंडीशन्ड घरों और दफ्तर में आराम करते हैं वहीं लाखों मजदूर, झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले और बेघर नागरिक बिना किसी बुनियादी कूलिंग सुविधा के झुलसा देने वाले तापमान को झेलने को मजबूर है. इसी बीच‌ आइए जानते हैं कि क्या है राइट टू कूलिंग.

राइट टू कूलिंग उस बढ़ती मांग को दर्शा रहा है कि हर व्यक्ति को खतरनाक लू से न्यूनतम सुरक्षा मिलनी चाहिए. इसमें पंखे, साफ पीने का पानी, छाया, हवादार जगह और कूलिंग शेल्टर शामिल हैं.

काफी ज्यादा गर्मी लोगों पर इस आधार पर काफी अलग-अलग तरह से असर डालती है कि वह कहां और कैसे रहते हैं. अमीर लोग ऐसे घरों में रहते हैं जो गर्मी रोधी होते हैं और उनमें एयर कंडीशनर लगे होते हैं. वहीं गरीब समुदाय तंग, टिन की छतों वाली बस्ती या फिर खराब हवादार कमरों में रहने को मजबूर हैं.

रोजाना मजदूरी करने वाले मजदूर, किसान और रिक्शा खींचने वाले लोग लंबे समय तक सीधे सूरज की रोशनी के संपर्क में रहते हैं. दफ्तरों में काम करने वालों के उलट जो घरों के अंदर रह सकते हैं या फिर घर से काम कर सकते हैं इन मजदूरों को पानी की कमी, लू, थकान और लंबे समय तक चलने वाले किडनी से जुड़ी बीमारियों का कहीं ज्यादा खतरा होता है.

भारत में कई विशेषज्ञों का ऐसा मानना है कि कूलिंग का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 से जुड़ा है. यह जीवन और गरिमा के अधिकार की गारंटी देता है. वे तर्क देते हैं कि सरकारों की यह जिम्मेदारी है कि वे नागरिकों को जानलेवा गर्मी की स्थिति से बचाएं.

लोग सरकारों से शहरों में सार्वजनिक कूलिंग केंद्र बनाने का आग्रह कर रहे हैं. यहां बेघर लोग, मजदूर और राहगीर कुछ समय के लिए गर्मी से राहत पा सकते हैं. गर्मी से ज्यादा प्रभावित इलाकों में रियायती बिजली, कूल रूफ हाउसिंग टेक्नोलॉजी, पीने के पानी के पॉइंट और शहरों में ज्यादा हरियाली की भी मांग की जा रही है.

काफी ज्यादा तापमान न सिर्फ स्वास्थ्य से जुड़ी आपात स्थितियों को पैदा कर रहा है बल्कि इसमें मजदूरों के काम करने की क्षमता और रोजाना की कमाई में भी कमी देखने को मिल रही है.

दिल्ली नहीं इस खूबसूरत शहर में है भारत का राष्ट्रपति निवास, गर्मियों में क्यों होना पड़ता है यहां शिफ्ट?

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दिल्ली की गर्मी से बचने के लिए भारत की राष्ट्रपति हर साल खूबसूरत वादियों में बसे ऑफिशियल भवन में शिफ्ट होती हैं. यह ब्रिटिश काल से चली आ रही है. आइए इस जगह के बारे में जान लेते हैं.

भारत के राष्ट्रपति का आधिकारिक निवास दिल्ली में स्थित ‘राष्ट्रपति भवन’ है, यह तो सभी जानते हैं. लेकिन बहुत कम लोगों को पता है कि देश में एक और राष्ट्रपति निवास भी है, जो दिल्ली की भीषण गर्मी से दूर पहाड़ों की खूबसूरत वादियों में स्थित है. हर साल गर्मियों के मौसम में देश के प्रथम नागरिक का पूरा अमला कुछ दिनों के लिए इस खूबसूरत हिल स्टेशन पर शिफ्ट हो जाता है. पहाड़ों के बीच स्थित इस ऐतिहासिक इमारत का इतिहास बेहद दिलचस्प है और यह परंपरा ब्रिटिश काल से जुड़ी हुई है.

शिमला के मशोबरा में समर रिट्रीट

भारत की राष्ट्रपति हर साल गर्मियों में हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला से करीब 13 किलोमीटर दूर मशोबरा में स्थित राष्ट्रपति निवास में रहने के लिए आती हैं. इसे आधिकारिक तौर पर ‘द रिट्रीट’ (The Retreat) के नाम से जाना जाता है. यह राष्ट्रपति का ऑफिशियल ग्रीष्मकालीन आवास है, जहां वह मैदानी इलाकों की जानलेवा गर्मी से बचने और प्रकृति के बीच समय बिताने के लिए आती हैं. यहां प्रवास के दौरान राष्ट्रपति आराम करने के साथ-साथ देश के प्रशासनिक और सांस्कृतिक कार्यों का संचालन भी यहीं से करती हैं.

ब्रिटिश काल से जुड़ी पुरानी परंपरा

शिमला में गर्मियों के दौरान राष्ट्रपति के ठहरने की यह रीत कोई नई नहीं है, बल्कि इसकी शुरुआत ब्रिटिश शासन के दौरान हुई थी. साल 1863 में जॉन लॉरेंस (John Lawrence) ने शिमला को आधिकारिक रूप से भारत की समर कैपिटल यानी ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया था. इसके बाद साल 1864 से अंग्रेजों का पूरा सरकारी अमला और प्रशासन दिल्ली व कोलकाता की गर्मी से बचने के लिए शिमला शिफ्ट होने लगा. यहां का ठंडा मौसम और शांत पहाड़ी माहौल अंग्रेजों को शासन चलाने के लिए सबसे आदर्श लगता था.

आजादी के बाद हुए बड़े बदलाव

साल 1947 में जब देश आजाद हुआ, तो अंग्रेजों की बनाई कई ऐतिहासिक इमारतें भारत सरकार के अधिकार क्षेत्र में आ गईं. आजादी के शुरुआती सालों में देश के राष्ट्रपतियों का शिमला आना नियमित नहीं था. साल 1951 में देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद इस एस्टेट पर आने वाले पहले भारतीय राष्ट्रपति बने. इसके बाद धीरे-धीरे यह जगह देश के सर्वोच्च पद पर बैठे व्यक्तियों के लिए खास बनती चली गई और यहां हर साल आने का सिलसिला शुरू हो गया.

ऑफिशियल समर रिट्रीट का मिला दर्जा

इस ऐतिहासिक परंपरा को असली और मजबूत पहचान साल 1965 में मिली. तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने मशोबरा में मौजूद इस आलीशान और खूबसूरत भवन को राष्ट्रपति का ऑफिशियल समर रिट्रीट घोषित कर दिया. इसके बाद से हर साल देश के राष्ट्रपति का कुछ दिनों के लिए शिमला आना एक तय और अनिवार्य परंपरा का हिस्सा बन गया. साल 1965 के बाद से देश के लगभग सभी राष्ट्रपतियों ने इस खास परंपरा को बखूबी निभाया है.

देवदार के जंगलों के बीच ऐतिहासिक धरोहर

मशोबरा का यह राष्ट्रपति निवास लगभग 175 साल पुरानी एक भव्य हेरिटेज इमारत है. यह पूरी तरह से घने देवदार के जंगलों और ऊंचे पहाड़ों के बीच स्थित है. इस भवन की सबसे बड़ी खासियत इसकी वास्तुकला है, जिसे पारंपरिक ‘धज्जी’ शैली (लकड़ी और मिट्टी का मिश्रण) से तैयार किया गया है. लकड़ी और मिट्टी से बने होने के कारण यह पूरी इमारत पूरी तरह से भूकंपरोधी है और आज भी पूरी मजबूती के साथ खड़ी है.

आम जनता के लिए खुला महल

हालांकि कुछ सालों में सुरक्षा कारणों, स्वास्थ्य समस्याओं या बेहद व्यस्त शेड्यूल की वजह से राष्ट्रपति का दौरा टल भी गया, लेकिन यह परंपरा कभी बंद नहीं हुई. इस ऐतिहासिक भवन से जुड़ी एक और बड़ी बात यह है कि अब इस राष्ट्रपति निवास को आम जनता और देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए भी पूरी तरह खोल दिया गया है. अब कोई भी पर्यटक ऑनलाइन या ऑफलाइन टिकट बुक करके इस बेहद खूबसूरत और सुरक्षित परिसर को करीब से देख सकता है.