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दिल्ली शराब केस में 4 साल बाद कैसे बरी हो गए केजरीवाल-सिसोदिया, 6 पॉइंट्स में समझें…

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दिल्ली के कथित शराब घोटाले मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने

अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत 23 आरोपियों को बरी कर दिया है. फैसला सुनाते हुए जज जितेंद्र सिंह ने सीबीआई की ओर से पेश सबूतों को स्वीकार योग्य नहीं माना.

जज ने कहा कि आपने जो भी सबूत पेश किए हैं, वे केवल बयानों पर आधारित हैं. आपके (सीबीआई के) पास इस मामले में कोई ठोस प्रमाण है ही नहीं. हम इंतजार करते रहे, लेकिन सीबीआई इस मामले में ठोस सबूत पेश नहीं कर पाई.

2022 में दिल्ली कथित शराब घोटाला सामने आने के बाद से अब तक सीबीआई इस मामले में 5 चार्जशीट दाखिल कर चुकी थी. केस में 300 से ज्यादा गवाह पेश किए गए थे, लेकिन कोर्ट ने उन्हें पर्याप्त नहीं माना. उलटे कोर्ट ने सीबीआई के जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दे दिए. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर सीबीआई के एक-एक आरोप कोर्ट में कैसे ध्वस्त हो गए?

दिल्ली शराब केस में कुल 5 चार्जशीट दाखिल

दिल्ली शराब केस में सीबीआई ने कुल 5 चार्जशीट दाखिल की. इनमें एक मुख्य और 4 पूरक चार्जशीट दाखिल कीग गई. सीबीआई ने सबसे पहला चार्जशीट 25 नवंबर 2022 को दाखिल की गई. इसके बाद सीबीआई ने अप्रैल 2023, और जुलाई 2023 में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की. 2024 में इस केस में सीबीआई ने 2 चार्जशीट दाखिल की. कुल मिलाकर इस केस में केंद्रीय जांच एजेंसी ने 1000 से ज्यादा पन्नों का चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की. केस में पहले 17 आरोपी बनाए गए थे, बाद में 23 आरोपी बनाए गए.

इस केस में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, के कविता और दुर्गेश पाठक जैसे बड़े राजनेताओं को भी आरोपी बनाया गया था. दिल्ली शराब केस की जांच प्रवर्तन निदेशालय और केंद्रीय जांच एजेंसी के पास थी. मनीष सिसोदिया को आरोपी नंबर-8 और अरविंद केजरीवाल को आरोपी नंबर-18 बनाया गया था.

सीबीआई के दावे और कोर्ट का फैसला

सीबीआई ने चार्जशीट में सबसे बड़ा आरोप यह लगाया था कि दिल्ली में जब नई शराब नीति तैयार की जा रही थी, उस वक्त थोक विक्रेताओं को लाभ पहुंचाने के लिए 5 प्रतिशत के लाभ को 12 प्रतिशत कर दिया गया. चार्जशीट में कहा गया कि पॉलिसी बनाते वक्त यह तय किया गया कि इस 12 प्रतिशत में से 6 प्रतिशत का कमीशन सत्ताधारी पार्टी को मिलेगा.

कोर्ट ने सीबीआई की इस आरोप को नहीं माना. कोर्ट ने कहा कि सीबीआई इसको लेकर ठोस सबूत पेश नहीं कर पाई है. यह आरोप सिर्फ बयानों के आधार पर लगाया गया है.

सीबीआई के चार्जशीट के मुताबिक मई 2021 में विजय नायर के कहने पर दिल्ली के गौरी अपार्टमेंट में एक बैठक आयोजित की गई. इस बैठक में दिनेश अरोड़ा, अरुण पिल्लई और अभिषेक बोनिपल्ली शामिल थे. सीबीआई ने यह आरोप दिनेश अरोड़ा के हवाले से चार्जशीट में फाइल किया.

कोर्ट ने कहा कि किसी आरोपित को गवाह बनाकर केस फाइल करना सही नहीं है. सीबीआई अलग से इसको लेकर कोई सबूत नहीं ला पाई है.

सीबीआई ने अपने पहले पूरक चार्जशीट में लिखा- मनीष सिसोदिया ने अपने पद का दुरुपयोग किया. आबकारी नीति में इस तरह बदलाव किया, जिससे नीति का फायदा सिर्फ कुछ खास कंपनियों को मिल सके. इसके लिए मनीष सिसोदिया को रिश्वत दी गई. आरोप में कहा गया कि मनीष सिसोदिया ने प्राइवेट कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए रवि धवन कमेटी की सिफारिश भी नहीं मानी थी.