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ट्रंप के ट्रेड डील पर बयान से झूमा शेयर बाजार;  577 अंक चढ़ा सेंसेक्स

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भारतीय शेयर मार्केट में सप्ताह के चौथे कारोबारी सेशन 22 जनवरी, गुरुवार के कारोबारी दिन की शुरुआत पॉजिटिव रही. प्रमुख बेंचमॉर्क इंडेक्स बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी 50 हरे निशान पर ट्रेड करते हुए ओपन हुए.

30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स इंडेक्स 550.03 अंक या 0.67 प्रतिशत की तेजी के साथ 82,459.66 अंक तो वहीं, एनएसई निफ्टी 50 186.65 अंक या 0.74 फीसदी उछलकर 25,344.15 के लेवल पर ओपन हुआ था.

सुबह करीब 9:27 बजे तक, सेंसेक्स 577 अंक की तेजी के साथ 82,486 अंक पर कारोबार कर रहा था. वहीं निफ्टी 50 210 अंक उछलकर 25,368 के लेवल पर ट्रेड कर रही थी.

बीएसई के टॉप गेनर

एटरनल, एशियन पेंट, अडानी पोर्ट, टाटा स्टील और कोटक बैंक

बुधवार को कैसा रहा था मार्केट?

बुधवार 21 जनवरी को भारतीय शेयर मार्केट में गिरावट देखने को मिली थी और दोनों ही प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स लाल निशान पर ट्रेड करते हुए बंद हुए थे. सेंसेक्स 270.84 अंक या 0.33 प्रतिशत की गिरावट के साथ 81,909.63 अंक तो वहीं, एनएसई निफ्टी 50 75.00 अंक या 0.30 प्रतिशत फिसलकर 25,157.50 के लेवल पर कारोबारी दिन की समाप्ति की थी.

बीएसई बास्केट से एटरनल, इंडिगो, रिलायंस, अडानी पोर्ट और पावरग्रिड टॉप गेनर थे. टॉप लूजर की बात करें तो आईसीआईसीआई बैंक, ट्रेंट, एचडीएफसी बैंक और मारूति रहे थे. निफ्टी मिडकैप 100, निफ्टी 100, निफ्टी बैंक, निफ्टी आईटी, निफ्टी स्मॉलकैप 100, निफ्टी ऑटो और निफ्टी एफएमसीजी के शेयरों में गिरावट थी.

बुधवार के कारोबारी दिन बीएसई बास्केट से 14 शेयर हरे निशान पर बंद हुए थे और 16 शेयरों में गिरावट दर्ज गई थी.

Gold Price Today: रिकॉर्ड तेजी के बाद फिसला सोना-चांदी, जानें!

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Gold Price Today: घरेलू फ्यूचर मार्केट में सोने की कीमतों में गुरुवार, 22 जनवरी को जबरदस्त गिरावट देखने को मिल रही है. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 5 फरवरी, 2026 का एक्सपायरी वाला गोल्ड फ्यूचर वायदा गुरुवार को 1,51,557 रुपये (प्रति 10 ग्राम) पर ओपन हुआ.

इसके आखिरी कारोबारी दिन एमसीएक्स पर सोना 1,52,862 रुपये पर ट्रेड करते हुए बंद हुआ था.

22 जनवरी की सुबह 10:00 बजे, एमसीएक्स पर 5 फरवरी का एक्सपायरी वाला गोल्ड 1,50,170 रुपए पर ट्रेड कर रहा था. जो कि पिछले दिन की बंद कीमत से लगभग 2700 रुपये की गिरावट दिखाता है. एमसीएक्स गोल्ड शुरुआती कारोबार में 1,53,784 रुपए के हाई लेवल पर पहुंचा था.

एमसीएक्स पर 5 मार्च 2026 का एक्सपायरी वाला सिल्वर 3,05,753 रुपये (प्रति किलो) पर ट्रेड कर रहा था. जो कि पिछले दिन की बंद कीमत से लगभग 12800 रुपये की कमी दिखाता है. एमसीएक्स सिल्वर शुरुआती कारोबार में 3,25,602 रुपये के हाई लेवल पर पहुंचा था. आइए जानते हैं कि आज आपके शहर में सोने और चांदी का ताजा भाव…..

आपके शहर में सोने का भाव (गुड रिटर्न के अनुसार)

दिल्ली में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम)

24 कैरेट – 1,54,460 रुपए

22 कैरेट – 1,41,600 रुपए

18 कैरेट – 1,15,880 रुपए

मुंबई में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम)

24 कैरेट – 1,54,310 रुपए

22 कैरेट – 1,41,450 रुपए

18 कैरेट – 1,15,730 रुपए

चेन्नई में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम)

24 कैरेट – 1,54,910 रुपए

22 कैरेट – 1,42,000 रुपए

18 कैरेट – 1,18,500 रुपए

कोलकाता में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम)

अहमदाबाद में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम)

24 कैरेट – 1,54,360 रुपए

22 कैरेट – 1,41,500 रुपए

18 कैरेट – 1,15,780 रुपए

लखनऊ में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम)

पटना में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम)

हैदराबाद में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम)

सोना और चांदी के भाव रोज बदलते रहते हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के टैरिफ बयान के बाद आज इनके रेट में गिरावट देखने को मिल रही है. ऐसे में अगर आज आप इन बहुमूल्य धातुओं की खरीदारी का प्लान बना रहे हैं, तो अपने शहर के ताजा रेट जरूर पता करना चाहिए. ताकि आपको किसी तरह का आर्थिक नुकसान न हो.

26 जनवरी से पहले CM योगी ने प्रदेशवासियों को लिखा पत्र, मथुरा से संभल…

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को प्रदेश की जनता के नाम एक पत्र लिखकर राज्य में हुए व्यापक बदलावों, विकास की दिशा और भविष्य के संकल्पों को साझा किया. सीएम योगी ने ‘योगी की पाती’ शीर्षक से लिखे गए इस पत्र में उत्तर प्रदेश को बीमारू राज्य की छवि से निकालकर देश के विकास का ग्रोथ इंजन बनाने की यात्रा का उल्लेख किया.

मुख्यमंत्री ने पत्र की शुरुआत प्रदेशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि असीम संभावनाओं वाला हमारा प्रदेश संघर्ष और नीतिगत उदासीनता की बेड़ियों को तोड़ते हुए बीमारू राज्य से भारत के विकास का ग्रोथ इंजन बन गया है. दृढ़ संकल्प के साथ हमने कानून एवं सुशासन का राज स्थापित किया है. सत्ता के संरक्षण में पनप रहे माफिया के भय के साम्राज्य का अंत करते हुए विकास को गति दी है. निवेशक जो कभी लचर कानून व्यवस्था के नाम पर दूर भागते थे, उनमें निवेश की होड़ लगी है.

उद्योगों का अभूतपूर्व विस्तार हुआ- सीएम योगी

सीएम योगी ने कहा कि कृषि क्षेत्र में उत्तर प्रदेश देश की आद्य सुरक्षा की रीढ़ बनकर उभरा है. ‘बीन से बाजार तक’ की व्यवस्था और रिकॉर्ड डीबीटी भुगतान से अन्नदाताओं की आय में वृद्धि हुई है. उद्योगों का अभूतपूर्व विस्तार हुआ है. पलायन की पीड़ा और बेरोजगारी का दंश समाप्ति की ओर है. लेबर रिफॉर्म, डी-रेगुलेशन, एमएसएमई, कौशल विकास, स्टार्टअप और ओडीओपी ने प्रदेश को लोकल से ग्लोबल की दिशा में अग्रसर करते हुए बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित किए हैं.

अयोध्या-काशी-मथुरा से संभल तक सांस्कृतिक पुनर्जागरण की स्वर्णिम गाथा लिखी जा रही

महिलाओं की श्रमबल भागीदारी में ऐतिहासिक वृद्धि का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बेटियों के जन्म से विवाह तक सरकार आर्थिक सहायता सुनिश्चित कर रही है. निराश्रित महिलाओं, वृद्धों एवं दिव्यांगजन के लिए पेंशन की व्यवस्था है. मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार और हेल्थ-टेक के माध्यम से सेवाएं अधिक सुलभ हुई हैं. जल-थल-नभ की अद्भुत कनेक्टिविटी ने व्यापार, पर्यटन और निवेश को नई गति दी है. अयोध्या-काशी-मथुरा से संभल तक सांस्कृतिक पुनर्जागरण की स्वर्णिम गाथा लिखी जा रही है. आज हमारे त्योहारों में स्वदेशी की चमक स्पष्ट दिखाई देती है.

सीएम योगी ने आगे कहा कि हमने जीरो पॉवर्टी लक्ष्य के साथ 6 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है. डबल इंजन सरकार ने प्रदेश को ‘बॉटलनेक से ब्रेकथ्रू’, ‘रेवेन्यू डेफिसिट से रेवेन्यू सरप्लस’ एवं ‘उपद्रव से उत्सव’ की ओर अग्रसर किया है.

24 जनवरी को हम उत्तर प्रदेश दिवस बनाएंगे

पत्र के अंत में सीएम योगी ने कहा कि 24 जनवरी को हम उत्तर प्रदेश दिवस मना रहे हैं. यह विकसित उत्तर प्रदेश के संकल्प को दोहराने का समय है. हम सबके संयुक्त प्रयासों से संकल्प से सिद्धि की यह मात्रा ऐसे ही गतिशील बनी रहेगी. सभी प्रदेशवासियों को उत्तर प्रदेश दिवस की अग्रिम शुभकामनाएं.

Vande Bharat Sleeper Train: राजस्थान को मिलेगी वंदे भारत स्लीपर, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात के रास्ते चलेगी…

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भारतीय रेलवे एक और रूट पर वंदे भारत स्लीपर ट्रेन शुरू करने की तैयारी कर रहा है. यह स्लीपर सेवा दिल्ली-अहमदाबाद कॉरिडोरपर चलने की संभावना है, जिसमें जयपुर मुख्य स्टॉप होगा. इससे राजस्थान को बड़ा फायदा होगा.

अगर प्रस्तावित रूट को मंजूरी मिलती है तो यह ट्रेन दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात के रास्ते चलेगी. गुजरात में इस ट्रेन का स्टॉपेज अहमदाबाद में हो सकता है.

अगर इसके किराए की बात करें तो जयपुर-अहमदाबाद रूट पर फिलहाल कोई नियमित वंदे भारत स्लीपर ट्रेन नहीं चल रही है. प्रस्तावित स्लीपर ट्रेन के लिए अनुमानित किराया लगभग 3AC में 2,300-2,800 रुपये, 2AC में 3,000-3,800 रुपये और 1AC में 4,000-5,000 रुपये के बीच हो सकता है, जबकि आरएसी या वेटिंग टिकट नहीं मिलेगा.

टिकट कैंसल कराया तो क्या होगा?

बता दें वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस के यात्री यदि निर्धारित प्रस्थान समय से आठ घंटे से पहले, अपने ‘कंफर्म’ टिकट रद्द करते हैं तो एक भी पैसा वापस नहीं मिलेगा. रेल मंत्रालय द्वारा 16 जनवरी को जारी एक अधिसूचना के अनुसार, टिकट रद्द करने का शुल्क किराये का 25 प्रतिशत होगा, बशर्ते कि ‘कंफर्म’ टिकट 72 घंटे से पहले रद्द किए जाएं. मंत्रालय ने रेल यात्री (टिकट रद्द करना और किराया वापसी) नियम, 2015 में संशोधन किया है और वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस के लिए सख्त नियमों को अधिसूचित किया है. अधिसूचना के अनुसार, ‘यदि ट्रेन के निर्धारित प्रस्थान समय से आठ घंटे से कम समय पहले टिकट रद्द किया जाता है, तो कोई रकम वापस नहीं दी जाएगी.’

अन्य ट्रेनों के मामले में, यदि ‘कंफर्म’ टिकट निर्धारित प्रस्थान समय से चार घंटे से कम समय पहले रद्द किए जाते हैं, तो धनवापसी के लिए पात्र नहीं होंगे. अधिसूचना के अनुसार, ‘यदि ट्रेन के निर्धारित प्रस्थान समय से 72 घंटे से पहले टिकट रद्द किया जाता है, तो रद्द करने का शुल्क किराये का 25 प्रतिशत होगा. वहीं, यदि ट्रेन के निर्धारित प्रस्थान समय से 72 घंटे से लेकर आठ घंटे पहले तक टिकट रद्द किया जाता है तो इसका शुल्क किराये का 50 प्रतिशत होगा.’

‘जमीन आवंटन रद्द करना है तो…’, माघ मेला प्रशासन के नोटिस पर शंकराचार्य’

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प्रयागराज माघ मेला प्राधिकरण ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को एक और नोटिस भेजकर उनकी संस्था के भूमि आवंटन को रद्द करने की बात कही है, जिसके बाद ये विवाद और गहरा गया है. इस नोटिस पर शंकराचार्य ने तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा कि अगर उन्हें आवंटन रद्द करना है तो वो कर दें लेकिन ये बताएं कि पहले क्या सोचकर भूमि दी थी.

शंकराचार्य ने एबीपी न्यूज से बात करते हुए मेला प्रशासन द्वारा भेजे गए दो-दो नोटिस पर कहा कि “नोटिस दो हैं लेकिन बात एक ही कही गई है. अगर उन्हें भूमि आवंटन रद्द करना है तो वो कर दें..ये उनका विशेषाधिकार है लेकिन, उन्हें ये बताना पड़ेगा कि क्या समझकर पहले ये दी गईं थी और क्या समझकर वापस कर रहे हैं. देते समय तुम्हारी अक्ल कहां गई थी या लेते समय कहां चली गई हैं? उनकी तो दोनों बातों में तो अंतर है.

मेला प्रशासन के नोटिस पर बोले शंकराचार्य

इस पूरे विवाद में पीछे हटने के सवाल पर उन्होंने कहा कि वो अपने स्टैंड पर आज भी क़ायम है उनके पीछे हटने की कोई बात नहीं है. उन्होंने कहा कि सौ करोड़ सनातन धर्मियों के सम्मान से हम कैसे पीछे हट जाएं? जो भी नोटिस आया है उसका जवाब दे दिया गया है दूसरा भी आया है उसका जवाब भी दे दिया गया है.

‘सीएम योगी आदित्यनाथ लिखित आश्वासन दें’

शंकराचार्य ने कड़ा रुख़ अपनाते हुए कहा कि हमारा अगला या पिछला कदम कुछ नहीं है. सौ करोड़ सनातन धर्मियों के आचार्य का अपमान किया गया है. उस तरह सौ करोड़ सनातन धर्मियों को अपमानित करने की चेष्टा की गई है. जब तक सम्मान वापस नहीं मिलता है. हम अड़े रहेंगे.

उन्होंने कहा कि अगर हम फिर से गंगा स्नान करने चले जाएं और वो फिर से हमें और हमारे समर्थकों को मारने लगे तो? हमें अपमानित करने लगे. इसलिए जब तक मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ये आश्वासन न दे दें कि ये नहीं होगा. लिखित रूप से साफ-साफ वचन न दें, उसी के बाद बात आगे बढ़ेगी.

‘नोटिस पर नोटिस भेजकर हो रहा अपमान’

शंकराचार्य ने कहा कि जिन अधिकारियों ने मारा पीटा, जिन अधिकारियों ने ये व्यवहार किया है अब उन अधिकारियों का क्या मतलब है? उन अधिकारियों पर कोई कार्रवाई भी नहीं हुआ बल्कि उन्हें और बढ़ावा दिया जा रहा है वो नोटिस पर नोटिस भेजकर और अपमानित करने का काम कर रहे हैं. हमारी छवि को जनता के बीच में ख़राब कर रहे हैं. जो प्रशासन गलती के बाद भी नहीं झुका है वो प्रशासन गिर गया है. ये इतिहास उठाकर देख लीजिए.

रवींद्र जडेजा की जगह फिट बैठेंगे अक्षर पटेल? फॉर्म और आंकड़े…

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भारतीय क्रिकेट में इन दिनों रवींद्र जडेजा का नाम चर्चा का विषय बना हुआ है. खराब फॉर्म के बाद जडेजा के रिप्लेसमेंट को लेकर चर्चा तेज हो चुकी है. जड्डू को रिप्लेस करने में सबसे बड़ा नाम अक्षर पटेल का सामने आ रहा है.

हालांकि अक्षर खुद लंबे वक्त से टीम इंडिया के लिए खेल रहे हैं, लेकिन देखा जाए तो जडेजा टीम इंडिया के स्थायी खिलाड़ियों में से एक हैं, वहीं अक्षर का टीम में अंदर-बाहर होना लगा रहता है.

यहां हम जानेंगे कि आंकड़ों और फॉर्म के लिहाज से कैसे अक्षर टीम इंडिया में जडेजा की जगह फिट बैठ सकते हैं. बता दें कि 37 साल के जडेजा टी20 इंटरनेशनल से संन्यास ले चुके हैं. वह मौजूदा वक्त में टेस्ट और वनडे फॉर्मेट के लिए उपलब्ध हैं. दूसरी तरफ अक्षर तीनों फॉर्मेट में टीम इंडिया का हिस्सा हैं.

जडेजा vs अक्षर के आंकड़े

वनडे में दोनों के रिकॉर्ड पर नजर डाली जाए, तो अब तक जडेजा ने 210 वनडे खेल लिए हैं. दूसरी तरफ अक्षर 71 वनडे तक पहुंच चुके हैं. जड्डू ने 2905 रन बनाए और 232 विकेट लिए. वहीं अक्षर ने 858 रन बनाए और 75 विकेट चटकाए.

दोनों के टेस्ट रिकॉर्ड पर एक नजर डाली जाए, तो अब तक जडेजा ने 89 मुकाबले खेल लिए हैं, जिसमें 4095 रन बनाए और 348 विकेट लिए. वहीं अक्षर ने अब तक सिर्फ 15 टेस्ट खेले हैं, जिसमें 688 रन बनाए और 57 विकेट लिए.

बाकी टी20 इंटरनेशनल में जडेजा ने 74 मैच खेले, जिसमें 515 रन बनाए और 54 विकेट लिए. वहीं अक्षर ने 86 मुकाबले खेल लिए हैं, जिसमें उन्होंने 686 रन बना लिए हैं और 83 विकेट अपने नाम किए हैं.

खराब फॉर्म में जडेजा

जडेजा हाल ही में न्यूजीलैंड के खिलाफ खेली गई वनडे सीरीज में पूरी तरह से फ्लॉप दिखाई दिए थे. तीन मैचों में बैटिंग करते हुए उन्होंने क्रमश: 04, 27 और 12 रन बनाए थे. वहीं गेंदबाजी करते हुए उन्हें तीनों मैचों में कोई विकेट नहीं मिला था.

पिछले एक साल में अक्षर की फॉर्म में आया उच्छाल

देखा जाए तो पिछले एक साल में अक्षर पटेल की फॉर्म में उच्छाल देखने को मिला है, जबकि जडेजा की फॉर्म नीचे गिरी है. अक्षर ने 2025 में 11 मैचों के अंदर 290 रन स्कोर किए थे. वहीं जडेजा ने 10 मैचों में सिर्फ 106 रन बनाए थे.

उत्तर प्रदेश को अलग-अलग राज्यों में बांटने की मांग, इसके लिए किससे लेन…

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उत्तर प्रदेश… देश का सबसे बड़ा राज्य, सबसे ज्यादा सांसद, सबसे ज्यादा आबादी और उतनी ही ज्यादा चुनौतियां हैं. लंबे समय से यह सवाल उठता रहा है कि क्या इतना बड़ा राज्य एक साथ संभल पा रहा है?

अब एक बार फिर राज्य को अलग-अलग हिस्सों में बांटने की मांग तेज हो गई है. पश्चिमी यूपी के बाद अब पूर्वांचल से भी बुलंद आवाज उठी है. सवाल साफ है कि क्या वाकई यूपी का बंटवारा मुमकिन है और इसके लिए आखिर परमिशन किससे लेनी होती है?

यूपी बंटवारे की मांग फिर क्यों उठी?

उत्तर प्रदेश को अलग राज्यों में बांटने की मांग कोई नई नहीं है. समय-समय पर अलग-अलग क्षेत्रों से यह आवाज उठती रही है. बीते कुछ महीनों में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के कुछ नेताओं ने छोटे राज्य की जरूरत पर बात की. अब अमेठी से पूर्वांचल राज्य की मांग खुलकर सामने आई है. एक कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजय सिंह और पूर्व प्राविधिक शिक्षा मंत्री डॉ. अमीता सिंह ने साफ कहा कि पूर्वांचल का विकास तभी संभव है, जब उसे अलग राज्य का दर्जा मिले. इस कार्यक्रम में हजारों लोग मौजूद रहे, जिससे यह साफ हो गया कि यह मुद्दा सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि जनभावनाओं से भी जुड़ा है.

पूर्वांचल अलग राज्य की दलील क्या है?

पूर्वांचल को लेकर यह तर्क दिया जाता है कि यहां विकास की रफ्तार पश्चिमी यूपी और मध्य यूपी की तुलना में धीमी रही है. शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और रोजगार के मामले में यह क्षेत्र आज भी पिछड़ा माना जाता है. समर्थकों का कहना है कि अगर पूर्वांचल अलग राज्य बने, तो प्रशासन ज्यादा फोकस के साथ काम कर पाएगा, योजनाएं जमीन पर तेजी से उतरेंगी और स्थानीय समस्याओं का समाधान बेहतर तरीके से होगा.

क्या राज्य को बांटना आसान है?

किसी भी राज्य को बांटना आसान नहीं होता है. यह एक संवैधानिक प्रक्रिया है, जिसमें कई स्तरों पर सहमति और औपचारिकताएं पूरी करनी होती हैं. भारत के संविधान में इसके लिए साफ व्यवस्था दी गई है, ताकि फैसले भावनाओं में नहीं, बल्कि कानून के दायरे में हों.

संविधान क्या कहता है?

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 3 संसद को यह अधिकार देता है कि वह कानून बनाकर किसी राज्य का क्षेत्र घटा-बढ़ा सके, दो या दो से अधिक राज्यों को मिला सके या नया राज्य बना सके. यानी अंतिम फैसला संसद के हाथ में होता है. हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि राज्य सरकार या जनता की भूमिका नहीं होती है.

राज्य विधानसभा की भूमिका क्या है?

जब किसी राज्य को बांटने का प्रस्ताव आता है, तो राष्ट्रपति उस प्रस्ताव को संबंधित राज्य की विधानसभा के पास राय के लिए भेजते हैं. विधानसभा इस पर चर्चा करती है और अपनी राय राष्ट्रपति को देती है. ध्यान देने वाली बात यह है कि विधानसभा की राय बाध्यकारी नहीं होती. यानी अगर विधानसभा सहमत न भी हो, तब भी संसद कानून बना सकती है, लेकिन व्यवहारिक रूप से विधानसभा की राय को काफी महत्व दिया जाता है.

जनता से परामर्श क्यों जरूरी है?

राज्य बंटवारे का सीधा असर वहां रहने वाले लोगों पर पड़ता है. इसलिए इस प्रक्रिया में जनता, सामाजिक संगठनों और अन्य हितधारकों से भी विचार-विमर्श किया जाता है. इससे यह समझने में मदद मिलती है कि अलग राज्य की मांग सिर्फ राजनीतिक है या इसके पीछे वास्तविक जरूरत और जनसमर्थन भी है.

संसद में कैसे पास होता है कानून?

राज्य बंटवारे से जुड़ा विधेयक संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा में पेश किया जाता है. इसे पारित करने के लिए साधारण बहुमत की जरूरत होती है. यानी संविधान संशोधन जैसा भारी बहुमत यहां जरूरी नहीं होता है. यह बात राज्य गठन की प्रक्रिया को अपेक्षाकृत सरल बनाती है.

राष्ट्रपति की मंजूरी क्यों अहम है?

जब संसद से कानून पास हो जाता है, तो उसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाता है. राष्ट्रपति की सहमति मिलने के बाद अधिसूचना जारी होती है और नया राज्य कानूनी रूप से अस्तित्व में आ जाता है. इसी के साथ प्रशासनिक ढांचा, सरकार और अन्य व्यवस्थाएं लागू की जाती हैं.

पहले भी बन चुके हैं नए राज्य

भारत में इससे पहले भी कई नए राज्य बने हैं. साल 2000 में उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड, मध्य प्रदेश से छत्तीसगढ़ और बिहार से झारखंड का गठन हुआ था. 2014 में आंध्र प्रदेश से अलग होकर तेलंगाना बना. इन उदाहरणों से साफ है कि अगर राजनीतिक इच्छाशक्ति और संवैधानिक प्रक्रिया पूरी हो, तो नया राज्य बनना संभव है.

“‘भारत के बिना अधूरे हैं हम’; बोला EU, कब होगी मेगा डील? सामने आई तारीख”

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विश्व की राजनीति में भारत इस समय मजबूत और निर्णायक स्थिति में नजर आ रहा है. एक ओर जहां अमेरिका भारत के साथ डील को लेकर सक्रिय दिख रहा है, वहीं यूरोप खुलकर यह मान रहा है कि भारत के बिना उसकी रणनीति अधूरी है.

यही वजह है कि इस वर्ष 26 जनवरी के गणतंत्र दिवस समारोह में यूरोपीय यूनियन के शीर्ष नेता मुख्य अतिथि के तौर पर भारत आ रहे हैं.

यूरोपीय मेहमान भारत सिर्फ औपचारिक यात्रा पर नहीं आ रहे, बल्कि अपने साथ अहम रणनीतिक और आर्थिक प्रस्ताव भी लेकर आ रहे हैं. भारत आने से पहले ही यूरोपीय यूनियन के नेता यह स्वीकार कर चुके हैं कि भारत अब केवल एक उभरती शक्ति नहीं, बल्कि उनकी रणनीतिक मजबूरी बन चुका है. ‘भारत के बिना हम अधूरे हैं’ जैसे शब्द बदलते वैश्विक समीकरणों की साफ झलक देते हैं.

भारत नजर आ रहा है भरोसेमंद साझेदार के रूप में

जब दुनिया युद्ध, राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक दबावों से गुजर रही है, तब यूरोपीय यूनियन को भारत एक भरोसेमंद और स्थिर साझेदार के रूप में दिख रहा है. देश की राजधानी दिल्ली में प्रस्तावित यूरोपीय यूनियन-भारत शिखर सम्मेलन इसी बदले हुए वैश्विक संतुलन का बड़ा संकेत माना जा रहा है. गणतंत्र दिवस के आसपास होने वाला यह घटनाक्रम केवल एक कूटनीतिक बैठक नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव का ऐलान माना जा रहा है.

इस संभावित डील के असर दिल्ली से लेकर बीजिंग और इस्लामाबाद तक महसूस किए जाएंगे. एक तरफ भारत को वैश्विक सुरक्षा ढांचे का अहम स्तंभ माना जा रहा है, तो दूसरी ओर पाकिस्तान और चीन के लिए यह स्पष्ट संदेश है कि पश्चिम अब केवल बयान नहीं देता, बल्कि भारत के साथ खड़ा भी होता है. रक्षा, आतंकवाद-रोधी रणनीति और साइबर सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर यूरोपीय यूनियन का भारत के साथ आना पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के संतुलन को बदलने वाला कदम माना जा रहा है.

क्यों खास है EU-India समिट?

दिल्ली में होने वाला EU-India समिट केवल औपचारिक मुलाकात तक सीमित नहीं है. इस दौरान सुरक्षा, रक्षा और आतंकवाद-रोधी सहयोग से जुड़े अहम समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना है, जो भारत-यूरोप संबंधों को नई ऊंचाई तक ले जाएंगे. यूरोपीय यूनियन की विदेश नीति प्रमुख काजा कैलास पहले ही स्पष्ट कर चुकी हैं कि भारत यूरोप की आर्थिक मजबूती और रणनीतिक स्थिरता के लिए अनिवार्य बन चुका है.

नई सुरक्षा और रक्षा साझेदारी के तहत समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद से मुकाबला और साइबर डिफेंस में सहयोग को मजबूत किया जाएगा. हिंद महासागर में खुले समुद्री मार्गों की सुरक्षा, मैरिटाइम डोमेन अवेयरनेस और जबरदस्ती की राजनीति के खिलाफ साझा रणनीति तैयार होगी. इसे चीन की आक्रामक समुद्री नीति पर लगाम लगाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है.

पाकिस्तान के लिए क्यों बढ़ेगी बेचैनी?

आतंकवाद के मुद्दे पर भारत और यूरोपीय यूनियन का एक मंच पर आना पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है. काउंटर टेररिज्म सहयोग के मजबूत होने से आतंकी नेटवर्क पर वैश्विक दबाव बढ़ेगा. यूरोप का भारत के रुख को स्वीकार करना पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय लॉबिंग को कमजोर करने वाला कदम माना जा रहा है.

चीन को क्यों हो रही है चिंता?

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता, खुले समुद्री रास्तों और नियम आधारित व्यवस्था की बात सीधे तौर पर चीन की विस्तारवादी नीति को चुनौती देती है. EU-India साझेदारी के जरिए टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर और साइबर सिक्योरिटी में भरोसेमंद मानक विकसित होंगे, जो चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.

सिर्फ सुरक्षा नहीं, आर्थिक खेल भी बड़ा

भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच लंबे समय से अटकी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर भी अब रफ्तार के संकेत मिल रहे हैं. स्वच्छ तकनीक, फार्मा और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में सहयोग से भारत को बड़ा आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है. साथ ही मोबिलिटी फ्रेमवर्क के जरिए छात्रों, कुशल पेशेवरों और शोधकर्ताओं के लिए नए अवसर खुलने की संभावना है.

शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय पेण्ड्री में नि:शुल्क कैंसर जांच शिविर, 25 जनवरी तक

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राजनांदगांव। जिला स्वास्थ्य समिति राजनांदगांव और बालको मेडिकल सेंटर नया रायपुर के सहयोग से सुरक्षा चक्र के तहत 19 से 25 जनवरी 2026 तक शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय पेण्ड्री में नि:शुल्क कैंसर जांच और परामर्श शिविर चल रहा है। शिविर का समय सुबह 10:30 बजे से शाम 4 बजे तक है।

तीसरे दिन शिविर में 375 व्यक्तियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया और उन्हें स्वास्थ्य परामर्श दिया गया। इसके अलावा, 109 मरीजों की पेप स्मीयर टेस्ट और 60 मरीजों की मेमोग्राफी स्क्रीनिंग की गई। अब तक 941 व्यक्तियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जा चुका है।

शिविर में मेमोग्राफी मशीन, मुख कैंसर परीक्षण (ब्रश साइटोलॉजी), स्त्री रोग संबंधी पेप स्मीयर परीक्षण और अन्य सुविधाएं उपलब्ध हैं। कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेन्द्र प्रसाद पटेल, डॉ. पलक अग्रवाल, डॉ. दिवाकर पाण्डेय, डॉ. मीना आर्मो, डॉ. सुनिता मेश्राम और अन्य चिकित्सकों द्वारा स्वास्थ्य जांच की जा रही है।

स्वास्थ्य विभाग ने कैंसर के लक्षणों के बारे में जागरूकता फैलाई है, जैसे स्तन में गांठ, मुंह में बदलाव, निगलने में कठिनाई, खांसी, वजन में कमी, मासिक धर्म चक्र में बदलाव, और पेट के निचले हिस्से में दर्द आदि।

नागरिक शिविर में उपस्थित होकर कैंसर जांच करा सकते हैं। शिविर के संबंध में अधिक जानकारी के लिए 9098118682 और 8282824444 पर संपर्क किया जा सकता है।

11.52 लाख का डाक जीवन बीमा भुगतान, पत्नी को मिला चेक

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राजनांदगांव। डाक जीवन बीमा की पालिसी धारक ईश्वर लाल पड़ोती की आकस्मिक मृत्यु के बाद उनकी पत्नी श्रीमती अनामिका पड़ोती को 11 लाख 52 हजार 329 रुपए का बीमा भुगतान किया गया। राशि का चेक सीधे उनके घर ग्राम शिकारी महका पहुंचकर राजनांदगांव संभाग के डाक अधीक्षक महेन्द्र कुमार शर्मा द्वारा प्रदान किया गया।

इस दौरान डाक अधीक्षक ने ग्रामीणों को डाक जीवन बीमा, अन्य डाकघर योजनाओं और शासकीय सेवाओं के बारे में जानकारी दी और उन्हें इन योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया।

जानकारी के अनुसार, ईश्वर लाल पड़ोती पाटनवाड़वी में शिक्षक पद पर कार्यरत थे। उन्होंने डाक जीवन बीमा के तहत 10 लाख रुपए का बीमा करवाया था और 3550 रुपए प्रति किस्त के हिसाब से कुल 33 किस्तें जमा की थीं। उनका आकस्मिक निधन 4 सितंबर 2024 को हुआ था। बीमा राशि के लिए दावा सितंबर 2025 में किया गया था।