बसंत ऋतु का आगमन बारिश की बूंदों से हुआ है.
सुबह-सुबह 6 बजे उत्तर भारत के कई इलाकों में लोगों ने आंखें ही खोली थीं तभी बारिश की आवाज ने मन प्रसन्न कर दिया. 8 बजते-बजते कई राज्यों में झमाझम बारिश हुई. दो महीने से जो प्रदूषण धूल बनकर छत पर जमा था, वह बहने लगा.
सड़कों पर गाड़ी में दौड़ रहे लोगों को विंडशील्ड साफ करनी पड़ी. पेड़ों की पत्तियां धुलकर हरी हो गईं. प्रयागराज में उसी समय संगम किनारे श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगा रहे थे और इधर राजधानी दिल्ली, नोएडा, यूपी, हरियाणा के कुछ हिस्सों में टप-टप बरसी बूंदों ने माहौल को खुशनुमा बना दिया. हालांकि ठंड फिर से लौट आई है. दो दिन से ऐसा लग रहा था जैसे ठंड की विदाई शुरू हो गई है. शुक्रवार तड़के से ही हवा चलने लगी. मौसम विभाग ने आंधी के साथ आगे बारिश का अलर्ट दिया है.
जी हां, एक दो नहीं, कुल 9 राज्यों में बारिश और तूफान का अलर्ट है. पश्चिमी विक्षोभ के चलते मौसम ने यह अचानक करवट ली है. IMD के साइंटिस्ट डॉ. सुप्रित कुमार ने बताया है कि तीव्र पश्चिमी विक्षोभ के कारण आज यानी 23 जनवरी को पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में कुछ जगहों पर भारी वर्षा, बर्फबारी के साथ ओलावृष्टि, बिजली कड़कने और तेज हवाएं चलने की संभावना है. इसी दौरान उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में भी कुछ जगहों पर हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना है.
सुबह-सुबह कश्मीर और हिमाचल में बर्फबारी
वेस्टर्न डिस्टरबेंस की दस्तक से मनाली में सीजन की पहली भारी बर्फबारी हुई है. कश्मीर में भी बर्फबारी हो रही है. सुबह-सुबह शुरू हुई बर्फबारी के चलते मनाली और आसपास के क्षेत्र सफेद चादर में लिपट गए हैं. लंबे इंतजार के बाद हुई इस बर्फबारी से किसानों, बागवानों और पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों में राहत की उम्मीद जगी है.
26 जनवरी पर भी बारिश!
मौसम विभाग का कहना है कि एक और पश्चिमी विक्षोभ 26 से 28 जनवरी तक उत्तर पश्चिम भारत को प्रभावित कर सकता है.
ठंड बढ़ेगी या नहीं?
IMD के साइंटिस्ट सुप्रित कुमार ने बताया है कि उत्तर पश्चिम भारत में न्यूनतम तापमान अगले दो दिनों में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस घट सकता है. उसके बाद अगले चार दिनों में 2-4 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी होने की संभावना है. मध्य भारत में अगले दो दिनों में धीरे-धीरे 3-4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट और उसके बाद अगले दो दिनों में 2-3 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हो सकती है. महाराष्ट्र और गुजरात में कुछ ऐसा ही रहने वाला है.
मौसम हुआ बसंती
बसंत पंचमी की महत्ता बताते हुए सेवानिवृत कार्यक्रम अधिकारी आकाशवाणी, लेखक एवं सनातन संस्कृति संपोषक पार्थसारथि थपलियाल कहते हैं कि बसंत पंचमी ऐसा पर्व है जब प्रकृति, विद्या, लोक और संस्कार चारों का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है. इसे यूं ही नहीं कहा गया कि “ऋतुनाम कूष्माकर”, ऋतुओं में बसंत सृजन, उल्लास और नवजीवन का कारण है. शिशिर की कठोरता टूटती है, धरती पीले रंग में सजती है और मनुष्य के भीतर भी नई ऊर्जा का संचार होता है. बसंत पंचमी केवल मंदिरों और विद्यालयों तक सीमित पर्व नहीं, यह लोक उत्सव है. गांवों में खेतों में लहलहाती सरसों, आम की मंजरियां और पीले फूल बसंत के आगमन की घोषणा करते हैं. किसान के लिए यह आशा का पर्व है. नई फसल की उम्मीद, प्रकृति की अनुकूलता और परिश्रम के फल का संकेत. पीले वस्त्र, पीले पकवान, पतंगबाजी और सामूहिक उल्लास ये सब लोक-जीवन में बसंत की पहचान हैं. यह पर्व प्रकृति और मनुष्य के बीच सहजीवन का उत्सव है, जहां मनुष्य प्रकृति का उपभोक्ता नहीं, सहभागी बनता है.



