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NCP-शिवसेना के बीच फंसी BJP, क्या अजित पवार की पार्टी का हो गया गेम ओव ..

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महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनावों के बीच महायुति भी अपने पॉलिटिकल बैकग्राउंड को मजबूत बनाने की सोच रही है. ये चुनाव इस महीने के आखिर में जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों के साथ समाप्त होंगे.

ऐसे में भाजपा में यह सवाल उठ रहा है कि निगम चुनावों में अजीत पवार की NCP के खराब प्रदर्शन को देखते हुए क्या सत्तारूढ़ गठबंधन को उसकी बिल्कुल भी जरूरत है. बता दें कि भाजपा को BMC में सत्ता संभालने के लिए एकनाथ शिंदे की शिवसेना की जरूरत है, पार्टी के कुछ लोगों का मानना है कि उसके प्रयासों का ध्यान ग्राउंड लेवल पर विस्तार करने और लगभग 26 प्रतिशत वोट शेयर के अलावा 10-15 प्रतिशत अधिक वोट हासिल करने पर होना चाहिए.

NCP के साथ गठबंधन बनाएगी भाजपा?

‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक सूत्रों का कहना है कि आगामी चुनावों में भाजपा NCP के साथ कोई प्री पोल पैक्ट नहीं करने वाली है. शिवसेना के साथ गठबंधन जारी रखना है या नहीं, यह फैसला अगले 3.5 सालों में दोनों पक्षों के संबंधों पर निर्भर करेगा. पार्टी के एक सीनियर लीडर ने कहा कि उनका आखिरी टारगेट 51 प्रतिशत वोट शेयर के जितना करीब हो सके उतना हासिल करना है, हालांकि पार्टी का एक सेक्शन NCP से हटकर अपनी अपने संगठन को फैलाने पर ध्यान देने के लिए तैयार है. वहीं सेंट्रल बीजेपी NCP और शरद पवार की NCP के एकीकरण के बाद भी राजनीतिक संबंध खुले रखना चाहती है. स्टेट बीजेपी का एक बड़ा सेक्शन महाराष्ट्र के फ्रैक्चर्ड पॉलिटिकल लैंडस्केप की जटिलता का हवाला देते हुए इस बात से सहमत है.

शिवसेना-NCP के बीच फंसी भाजपा

‘भाजपा के एक नेता ने कहा,’ गठबंधन की राजनीति से इनकार नहीं किया जा सकता. और अगर शरद पवार की NCP अजीत पवार की NCP के साथ सुलह के बाद भाजपा के साथ संबंध सुधार लेती है तो इसका स्वागत किया जाना चाहिए. शरद पवार की पार्टी के 8 लोकसभा सांसद हैं. अगर हम उनका समर्थन हासिल कर सकते हैं तो शिंदे पर भाजपा की निर्भरता कम हो जाएगी.’ वहीं एक अन्य नेता ने कहा कि पार्टी विचारधारा के तौर पर NCP के मुकाबले शिवसेना के साथ ज्यादा एकजुट है, हालांकि सरकार के सत्ता में आने और शिंदे को पद से इस्तीफा देकर उपमुख्यमंत्री बनने के लिए मजबूर किए जाने के बाद से दोनों पार्टियों के बीच अक्सर टकराव होते रहे हैं. स्थानीय चुनावों के नजदीक आने के साथ ही तनाव और बढ़ गया और भाजपा ने इसे ही पार्टी के अधिक स्वतंत्र होने के प्रयास का कारण बताया. एक अन्य नेता ने कहा,’ चूंकि शिवसेना वैचारिक रूप से भाजपा के हिंदुत्व के साथ जुड़ी हुई है, इसलिए हमें उनसे कोई समस्या नहीं दिखती, लेकिन बहुत कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि अगले चुनाव मल्टीडाइमेंशनल होंगे या महायुति बनाम महा विकास अघाड़ी के आधार पर होंगे.’

NCP-भाजपा के बीच बयानबाजी

NCP भी फिलहाल किसी बड़े बदलाव को लेकर चिंता में नहीं है. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे का कहना है कि उनकी पार्टी NCP (SP) के साथ गठबंधन की बातचीत कर सकती है, लेकिन वह राज्य और केंद्र में NDA का हिस्सा रहेगी. नगर निगम चुनावों से पहले NCP-भाजपा के बीच हुई तीखी बयानबाजी को लेकर तटकरे ने कहा,’ यह मुद्दा अब खत्म हो चुका है. चुनाव के दौरान कभी-कभी ऐसी बातें हो जाती हैं. हम भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति का हिस्सा हैं और रहेंगे.’