Home समाचार ‘देश के मजदूरों एक हो जाओ, वरना अधिकार छिन जाएंगे’, राहुल गांधी

‘देश के मजदूरों एक हो जाओ, वरना अधिकार छिन जाएंगे’, राहुल गांधी

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Rahul Gandhi MGNREGA: कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को केंद्र की मोदी सरकार पर बड़ा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि सरकार जिस तरह से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ रही है, वह बिल्कुल वैसा ही है जैसा पहले तीन काले कृषि कानूनों के साथ किया गया था.

राहुल गांधी ने यह बयान रचनात्मक कांग्रेस द्वारा आयोजित राष्ट्रीय मनरेगा मजदूर सम्मेलन को संबोधित करते हुए दिया. उन्होंने गरीबों और मजदूरों से अपील की कि वे एकजुट होकर सरकार की इस कथित साजिश का विरोध करें और अपने अधिकारों की रक्षा करें.

मनरेगा गरीबों का अधिकार है, योजना नहीं

राहुल गांधी ने कहा कि मनरेगा को किसी योजना की तरह नहीं, बल्कि गरीबों के अधिकार के रूप में तैयार किया गया था. उन्होंने कहा, “मनरेगा का मकसद था कि जिसे काम चाहिए, उसे काम मिले. यह योजना पंचायत स्तर से चलाई जाए और हर गरीब को काम का अधिकार मिले. लेकिन मोदी सरकार इस अधिकार को खत्म करना चाहती है.” राहुल ने आरोप लगाया कि बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी “अधिकार” शब्द से ही परेशान हैं और गरीबों को आत्मनिर्भर बनाने की बजाय उन्हें आश्रित बनाना चाहते हैं.

तीन कृषि कानूनों की याद दिलाई

राहुल गांधी ने किसानों के आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ साल पहले सरकार ने तीन काले कृषि कानून लागू किए थे, लेकिन किसानों की एकता के आगे सरकार को झुकना पड़ा.<br> उन्होंने कहा, “जब किसान एकजुट हुए और दबाव बनाया, तब सरकार को कानून वापस लेने पड़े. आज वही खेल मजदूरों के साथ खेला जा रहा है.”

नए कानून से ठेकेदार-ब्यूरोक्रेसी को फायदा?

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित Viksit Bharat – Guarantee for Rozgar Ajeevika Mission (Gramin) यानी VB-G RAM G Act के तहत काम और फंड का फैसला अब केंद्र सरकार करेगी. उन्होंने दावा किया कि इससे बीजेपी शासित राज्यों को प्राथमिकता मिलेगी और मजदूरों तक पहुंचने वाला पैसा ठेकेदारों और अफसरशाही की जेब में चला जाएगा.

‘अडानी-अंबानी मॉडल ऑफ इंडिया’ का आरोप

राहुल गांधी ने कहा कि बीजेपी ऐसा भारत चाहती है जहां संपत्ति कुछ चुनिंदा लोगों के हाथ में हो. “वे चाहते हैं कि गरीब अडानी-अंबानी पर निर्भर रहें. यह उनका भारत का मॉडल है, जहां राजा तय करता है कि क्या होगा.”

मजदूरों की मिट्टी, संघर्ष का प्रतीक

देशभर से आए मनरेगा मजदूर अपने-अपने कार्यस्थलों की मुट्ठी भर मिट्टी साथ लाए. इस मिट्टी को पौधों में डाला गया, जो मनरेगा से जुड़े श्रम, संघर्ष और अधिकारों का प्रतीक बना. इस मौके पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी मौजूद थे.

45 दिन का ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’

कांग्रेस ने 10 जनवरी से 45 दिन का देशव्यापी ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ शुरू किया है. पार्टी की मांग है कि VB-G RAM G एक्ट वापस लिया जाए. मनरेगा को उसके मूल अधिकार-आधारित स्वरूप में बहाल किया जाए. पंचायतों की भूमिका फिर से मजबूत की जाए.