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गणतंत्र दिवस की परेड में यूपी की झांकी ने सभी को चौंकाया, कालिंजर किले…

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उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ आधुनिकता के संगम ने आज गणतंत्र दिवस के मौके पर नई दिल्ली में कर्तव्य पथ पर प्रदेश की झांकी ने सभी को मंत्र-मुग्ध कर दिया. बुंदेलखंड की प्राचीन विरासत और आधुनिक उत्तर प्रदेश का अनूठा संगम देख लोग तालियां बजाते हुए अपने स्थानों से खड़े होने पर मजबूर हो गए.

प्रदेश की झांकी की थीम ‘बुंदेलखंड की शाश्वत भव्यता’ पर आधारित थी.

प्रदेश की झांकी के सामने वाले हिस्से में एकमुखी शिवलिंग (कालिंजर की प्रसिद्ध मूर्तियों में से एक) का भव्य चित्रण नजर आ रहा था. यह बुंदेलखंड की गहरी आध्यात्मिकता और असाधारण वास्तुकला विरासत का उदहारण है. बीच का हिस्सा इस क्षेत्र की जीवित शिल्प परंपराओं को उजागर करता है, मिट्टी के बर्तन (मृद्भांड कला), मनके का काम (मनका शिल्प) और जीवंत स्थानीय हाट. ये सभी वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) योजना के अंतर्गत आते हैं, जो बुंदेलखंड की सांस्कृतिक पहचान और आर्थिक आत्मनिर्भरता की रीढ़ हैं.

कालिंजर किले का शानदार चित्रण

झांकी में मुख्य आकर्षण का केंद्रकालिंजर किले का शानदार जीवंत चित्रण था, जिसके अन्दर नक्काशीदार पत्थर के खंभे, द्वार और ऐतिहासिक भव्यता को जीवंत किया गया था. ट्रेलर के पिछले हिस्से में नीलकंठ महादेव मंदिर का पूजनीय दृश्य था, जो क्षेत्र के आध्यात्मिक और ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करता है.

बुन्देली लोक नृत्य ने झांकी को जीवंत बनाया

झांकी में पारंपरिक बुंदेली लोक नर्तकों ने रंग-बिरंगे परिधानों, लय और गति से जीवंत बनाय दिया. यह बुन्देलखंड की सांस्कृतिक पहचान को बिलकुल सजीव दर्शा रही थी. इसके बाद झांकी आधुनिक उत्तर प्रदेश के शक्तिशाली चित्रण में बदल गई, कालिंजर किले से प्रेरित वास्तुकला के मुखौटे के अंदर एक्सप्रेसवे, औद्योगिक विकास, विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचा और नए जमाने के विनिर्माण के दृश्य आकर्षित कर रहे थे.

कुल मिलकर उत्तर प्रदेश की झांकी ने इस बार कर्तव्य पथ पर इतिहास रच दिया. इस झांकी के जरिये प्रदेश के विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश के संकल्प को प्रस्तुत किया कि किस प्रकार उत्तर प्रदेश आज अपनी संस्कृति के साथ आधुनिकता से कदम मिला रहा है.