भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते की घोषणा
भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच लंबे समय से प्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौता (FTA) अब आधिकारिक रूप से हो गया है। यह ऐतिहासिक घोषणा 27 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन में की गई, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन, और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा शामिल थे।
इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा जा रहा है, क्योंकि यह वैश्विक GDP का लगभग 25% और वैश्विक व्यापार का एक-तिहाई हिस्सा कवर करता है, जिसमें लगभग 2 अरब लोगों का बाजार शामिल है।
समझौते की प्रमुख विशेषताएँ
भारत के 99% से अधिक निर्यात को EU बाजार में शून्य या न्यूनतम टैरिफ पर पहुंच मिलेगी।
EU से आयात होने वाले 97% उत्पादों पर टैरिफ में कमी या समाप्ति, जिससे EU को हर साल 4 अरब यूरो की बचत होगी।
टेक्सटाइल, लेदर, जेम्स एंड ज्वेलरी, फार्मास्यूटिकल्स, केमिकल्स, ऑटोमोबाइल, मशीनरी, एयरोस्पेस, चाय, कॉफी, मसाले, फल-सब्जियां और प्रोसेस्ड फूड जैसे क्षेत्रों को महत्वपूर्ण लाभ मिलेगा।
संवेदनशील क्षेत्रों जैसे डेयरी, अनाज, पोल्ट्री और कुछ फल-सब्जियों को सुरक्षित रखा गया है।
सेवाओं, निवेश, बौद्धिक संपदा और भौगोलिक संकेतकों (GI) पर मजबूत प्रावधान किए गए हैं।
सुरक्षा और रक्षा साझेदारी तथा भारतीय प्रतिभा की मोबिलिटी पर अलग समझौतों का प्रावधान है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे ‘भारत के इतिहास का सबसे बड़ा FTA’ बताया और कहा कि यह साझा समृद्धि का एक ब्लूप्रिंट है, जो वैश्विक अस्थिरता के समय दुनिया को स्थिरता प्रदान करेगा। उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसे ‘सभी सौदों की जननी’ कहा और जोर दिया कि यह 2 अरब लोगों के लिए नए अवसर पैदा करेगा।
शेयर बाजार पर प्रभाव
इस समझौते की घोषणा के बाद भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त उछाल आया। कई सेक्टर्स के शेयरों में तेजी देखी गई:
टेक्सटाइल कंपनियों (जैसे अरविंद, वेलस्पन, ट्रेंट) में 10-20% तक की वृद्धि।
फार्मा (सन फार्मा, डॉ. रेड्डीज, सिप्ला) और केमिकल्स (उल्ट्राटेक, टाटा केमिकल्स) में मजबूत खरीदारी।
ऑटो (टाटा मोटर्स, महिंद्रा) और आईटी-सर्विसेज में भी सकारात्मक रुख।
निर्यात-उन्मुख कंपनियों जैसे जेम्स एंड ज्वेलरी (टाइटन) और लेदर (बाटा, मिरजा) के शेयरों में रिकॉर्ड वृद्धि।
विश्लेषकों का मानना है कि यह समझौता भारत के निर्यात को बढ़ावा देगा, रोजगार सृजन (विशेषकर टेक्सटाइल में 60-70 लाख नौकरियां) करेगा और ‘मेक इन इंडिया’ को मजबूत बनाएगा। इसके अलावा, अमेरिकी टैरिफ नीतियों और वैश्विक तनावों के बीच यह भारत-EU के लिए एक रणनीतिक कदम है।



