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संसद के बजट सत्र में सियासी हंगामा: नड्डा और खरगे के बीच तीखी बहस…

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संसद का बजट सत्र

संसद के बजट सत्र में राजनीतिक विवाद जारी है। लोकसभा के बाद अब राज्यसभा में भी सत्तारूढ़ पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। सदन के नेता जेपी नड्डा और विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे के बीच लोकतंत्र और अहंकार जैसे मुद्दों पर गरमागरम चर्चा हुई।

इस दौरान नड्डा ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी का नाम लिए बिना उन पर कटाक्ष करते हुए उन्हें ‘अबोध बालक’ कहा। इस बहस के बीच सभापति ने भी अपनी टिप्पणी की। जानिए किसने क्या कहा?

नड्डा ने विपक्ष के व्यवहार पर उठाए सवाल

राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होने पर सभापति की अनुमति से जेपी नड्डा ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार हर विषय पर चर्चा के लिए तत्पर है। उन्होंने यह भी कहा कि लोकसभा में पीएम मोदी जवाब देने के लिए तैयार थे, लेकिन विपक्ष ने सदन को चलने नहीं दिया। राज्यसभा में विपक्ष ने सरकार से भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बयान देने की मांग की, जिसके बाद पीयूष गोयल ने बयान दिया। सरकार ने कहा कि विवरण जल्द ही साझा किया जाएगा।

‘पार्टी को अबोध बालक का बंधक मत बनाइए’

राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान नड्डा ने विपक्षी दलों के रवैये पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता ने निर्धारित समय से 20 मिनट अधिक भाषण दिया, लेकिन हमने कोई आपत्ति नहीं की। नड्डा ने कहा कि आप हमसे सीनियर हैं, लेकिन अपनी पार्टी को अबोध बालक का बंधक मत बनाइए। आपको पार्टी के अंदर यह समझाना चाहिए कि लोकतांत्रिक तरीके से काम करना आवश्यक है। अबोध और अहंकार का संयोजन खतरनाक होता है।

‘आपको तो मोदी जी ने बंधक बना लिया’

जेपी नड्डा की टिप्पणी पर मल्लिकार्जुन खरगे ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि आपकी पार्टी में कोई बोलता नहीं है और आपको मोदी जी ने बंधक बना लिया है। खरगे ने कहा कि आप बिना उनकी अनुमति के कोई बात नहीं कर सकते। उन्होंने सत्ता पक्ष के लिए ‘बंधुआ मजदूर’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया, जिसे बाद में सभापति ने सदन की कार्यवाही से हटाने का निर्देश दिया।

लोकसभा की बातें राज्यसभा में क्यों?

खरगे ने यह भी कहा कि यदि विपक्ष के नेता को लोकसभा में बोलने नहीं दिया जाएगा, तो यह मुद्दा राज्यसभा में उठेगा। उन्होंने कहा कि हम स्वतंत्र नहीं हैं और लोकसभा-राज्यसभा मिलकर ही देश की संसद बनाते हैं। इस बहस के दौरान सभापति सीपी राधाकृष्णन ने दोनों पक्षों को शांत करने का प्रयास किया।