होली का पर्व बुराई पर अच्छाई का प्रतीक है. इसकी अग्नि घर की दरिद्रता, बाधाओं और कष्टों को दूर करने के लिए पवित्र मानी जाती है. होलिका की अग्नि में लोग कई सामग्री डालते हैं क्यों ये हमारे जीवन की नकारात्मकत ऊर्जा को भस्म कर देती है.
संतान संबंधी समस्याओं के निवारण के लिए होलिका की अग्नि में सूखे नारियल, चन्दन की लकड़ी, काले तिल, सरसों के दाने, लौंग, कपूर और हल्दी की गांठें अर्पित करना चाहिए.
संतान को रोगों ने घेर रखा है, वो आए दिन बीमार रहता है या फिर बच्चों को बुरी नजर लगती है तो संतान के सिर से 7 बार नारियल वारकर होलिका की अग्नि में डाल दें. मान्यता है इससे सेहत में लाभ मिलता है.
संतान प्राप्ति के लिए होलिका की अग्नि में साबुत हल्दी की गांठ अर्पित करना चाहिए. इसके बाद दंपत्ति को सात बार परिक्रमा करनी चाहिए. मान्यता है इससे सूनी गोद जल्द भर जाती है.
आपका बच्चा आर्थिक परेशानी से जूझ रहा है तो एक सूखा नारियल लेकर उसमें चीनी और चावल भर लें फिर इसेहोलिका दहन में अर्पित करने से देवी लक्ष्मी की कृपा हमेशा बनी रहती है.
होलिका की आग में ये सभी सामग्री डालते समय इस मंत्र का जाप करें – “अहकूटा भयत्रस्तै: कृता त्वं होलि बालिशै: अतस्वां पूजयिष्यामि भूति-भूति प्रदायिनीम”



