फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों सोमवार रात को तीन दिवसीय यात्रा पर भारत पहुंचेंगे। इस दौरान वे इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में भाग लेंगे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करना है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह दौरा भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी के “आपसी विश्वास और गहराई” को दर्शाता है।
बाइलेटरल सहयोग पर चर्चा
विदेश मंत्रालय ने पिछले सप्ताह एक बयान में कहा, “इस यात्रा के दौरान, दोनों नेता होराइजन 2047 रोडमैप के तहत कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ाने पर चर्चा करेंगे।” इसके अतिरिक्त, वे आपसी हितों के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार करेंगे, जिसमें इंडो-पैसिफिक में सहयोग शामिल है। दोनों नेता मुंबई में इंडिया-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन का उद्घाटन भी करेंगे, जो 2026 में मनाया जाएगा।
रक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण समझौते
डिफेंस सेक्टर: ₹3.25 लाख करोड़ की ‘राफेल’ डील पर नज़र
फ्रांस वर्तमान में भारत का दूसरा सबसे बड़ा रक्षा आपूर्तिकर्ता है। इस दौरे का मुख्य आकर्षण 114 राफेल फाइटर जेट्स की खरीद का समझौता हो सकता है।
मेक इन इंडिया पर जोर: इस डील के तहत 18 जेट ‘फ्लाई-अवे’ स्थिति में फ्रांस से आएंगे, जबकि बाकी 96 विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा।
नौसेना की मजबूती: भारतीय नौसेना पहले ही 26 राफेल-M का ऑर्डर दे चुकी है, और इस नई डील से वायुसेना की मारक क्षमता में वृद्धि होगी।
इंडो-पैसिफिक में सहयोग
इंडो-पैसिफिक: चीन की चुनौती का मिलकर सामना
इंडो-पैसिफिक क्षेत्र दुनिया की कुल GDP का लगभग 60% हिस्सा है। इस क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए भारत और फ्रांस का सहयोग रणनीतिक रूप से आवश्यक हो गया है।
फ्रांस की मौजूदगी: रीयूनियन और न्यू कैलेडोनिया जैसे फ्रांसीसी द्वीपों के कारण फ्रांस इस क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण शक्ति है।
सप्लाई चेन और स्थिरता: दोनों देश मिलकर सप्लाई चेन में विविधता लाने और समुद्री व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर चर्चा करेंगे।
AI और इनोवेशन पर ध्यान
AI और इनोवेशन: 2026 ‘ईयर ऑफ इनोवेशन’
मैक्रों की यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा नई दिल्ली में आयोजित ‘इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026’ है।
तकनीकी सहयोग: प्रधानमंत्री मोदी के साथ मैक्रों इस समिट में भाग लेंगे, जो जिम्मेदार और समावेशी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रति दोनों देशों की प्रतिबद्धता को दर्शाएगा।
ईयर ऑफ इनोवेशन: दोनों नेता मुंबई में ‘इंडिया-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन 2026’ का औपचारिक उद्घाटन करेंगे, जिसका उद्देश्य पूरे वर्ष तकनीकी, अनुसंधान और स्टार्टअप्स के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है।
दीर्घकालिक रणनीति
‘होराइजन 2047’ रोडमैप
यह दौरा प्रधानमंत्री मोदी की फरवरी 2025 में फ्रांस यात्रा के एक वर्ष बाद हो रहा है। बातचीत का मुख्य आधार ‘होराइजन 2047’ रोडमैप होगा, जो भारत और फ्रांस के बीच कूटनीतिक संबंधों के 100 वर्ष पूरे होने (2047 में) तक के लिए एक दीर्घकालिक खाका तैयार करता है।
इंडो-पैसिफिक में सहयोग का महत्व
इंडो-पैसिफिक की उलझन
मैक्रों के भारत दौरे से नई दिल्ली और पेरिस को इंडो-पैसिफिक में अपने सहयोग को बढ़ाने का अवसर मिलेगा, जो एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है जहाँ चीन अपनी भूमिका बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। फ्रांस के समर्थन से, भारत इस क्षेत्र में चीनी प्रभाव का मुकाबला करना चाहता है।
यह ध्यान देने योग्य है कि इंडो-पैसिफिक दुनिया के कुल ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट (GDP) का लगभग 60 प्रतिशत है, और भारत और फ्रांस इस क्षेत्र को सुरक्षित करने और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए सप्लाई चेन में विविधता लाने का प्रयास कर रहे हैं।



