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26% से 50% और फिर 15%. एक साल कैसे चला अमेरिका और भारत के बीच टैरिफ का खेल? ये है पूरी टाइमलाइन…

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अमेरिका और भारत के बीच चल रहे ‘टैरिफ युद्ध’ में एक ऐसा मोड़ आया है जिसने पूरी दुनिया के बाजार को चौंका दिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त व्यापारिक नीतियों को वहां की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है.

इस कानूनी उथल-पुथल के बीच भारत के लिए राहत और चिंता की खबरें एक साथ आई हैं. शनिवार, 21 फरवरी 2026 को ट्रंप ने घोषणा की कि वे भारत सहित वैश्विक आयात पर अब 15% शुल्क लगाएंगे. यह फैसला उस वक्त आया जब सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति की असीमित शक्तियों पर लगाम कस दी. एक समय पर 50% तक पहुंच चुका यह शुल्क अब 15% के स्तर पर आकर टिक गया है, लेकिन इसके पीछे की कहानी किसी थ्रिलर फिल्म से कम नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट ने बदल दिया पूरा खेल

इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का फैसला रहा, जिसमें 63 के बहुमत से राष्ट्रपति के अधिकारों को सीमित कर दिया गया. अदालत ने स्पष्ट किया कि ‘इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट’ (IEEPA) राष्ट्रपति को आपातकालीन शक्तियों के तहत मनमाने ढंग से वैश्विक टैरिफ थोपने की अनुमति नहीं देता. कोर्ट के इस फैसले ने ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए देश-विशिष्ट करों को अवैध घोषित कर दिया.

हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप ने भी हार नहीं मानी. कोर्ट के फैसले के कुछ ही घंटों बाद उन्होंने ‘ट्रेड एक्ट 1974’ की धारा 122 (Section 122) का सहारा लिया. इसके तहत वे बिना कांग्रेस की मंजूरी के 150 दिनों के लिए वैश्विक टैरिफ लागू कर सकते हैं. पहले उन्होंने इसे 10% रखने की बात कही थी, लेकिन कुछ ही समय बाद इसे बढ़ाकर 15% कर दिया गया.

26% से 50% और फिर 15%…. टैरिफ का ‘रोलर कोस्टर’

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार को लेकर साल 2025 से 2026 तक काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला. कभी टैरिफ बढ़ा, कभी घटा, कभी बातचीत तेज हुई तो कभी तनाव बढ़ गया.

13 फरवरी 2025- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तय किया कि दोनों देश मिलकर 2030 तक आपसी व्यापार को 500 अरब डॉलर से ज्यादा तक पहुंचाएंगे. इरादा साफ था, व्यापार बढ़ाना है. लेकिन जमीन पर हालात इतने आसान नहीं थे. दोनों देशों के बीच टैरिफ को लेकर मतभेद बने रहे.

46 मार्च 2025- तनाव कम करने के लिए केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल वॉशिंगटन डीसी पहुंचे. वहां उन्होंने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीयर और अन्य अधिकारियों से मुलाकात की. मकसद था – व्यापारिक मुद्दों को बातचीत से सुलझाना और टकराव से बचना.

2 अप्रैल 2025- अमेरिका ने भारतीय सामान पर कुल 26% टैरिफ लगा दिया. इसमें 10% सामान्य (बेसलाइन) ड्यूटी थी और 16% अतिरिक्त रेसिप्रोकल यानी जवाबी टैरिफ. यह फैसला सिर्फ भारत के लिए नहीं, बल्कि कई देशों पर लागू व्यापक टैरिफ नीति का हिस्सा था. लेकिन भारत के लिए यह बड़ा झटका माना गया.

9 अप्रैल 2025- सिर्फ एक हफ्ते बाद 16% वाला अतिरिक्त टैरिफ 90 दिनों के लिए रोक दिया गया. इससे भारत पर असर घटकर सिर्फ 10% रह गया. यह संकेत था कि बातचीत के दरवाजे अभी बंद नहीं हुए हैं.

26 जून 2025- समयसीमा नजदीक आते ही भारत का एक प्रतिनिधिमंडल फिर अमेरिका पहुंचा. कोशिश यही थी कि मामला और न बिगड़े और किसी समझौते की जमीन तैयार हो सके.

31 जुलाई 2025- अमेरिका ने घोषणा की कि भारतीय वस्तुओं पर 25% टैरिफ लगाया जाएगा, जो 7 अगस्त से लागू होना था. यह साफ इशारा था कि अमेरिका सख्त रुख अपनाए हुए है.

6 अगस्त 2025- इसके बाद हालात और गंभीर हो गए. अमेरिका ने भारत की रूसी तेल खरीद का हवाला देते हुए 25% अतिरिक्त टैरिफ और जोड़ दिया. कुल मिलाकर टैरिफ 50% तक पहुंच गया. यह 27 अगस्त 2025 से लागू हुआ और पूरे विवाद के दौरान यह सबसे ऊंचा स्तर था.

1517 अक्टूबर 2025- वॉशिंगटन में फिर कई दौर की बातचीत हुई. इस समय तक छह औपचारिक वार्ता दौर पूरे हो चुके थे. दोनों देश समाधान की कोशिश में थे, लेकिन सहमति तुरंत बनती नहीं दिख रही थी.

31 जनवरी 2026- वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काम कर रहा है. इस बयान से संकेत मिला कि टैरिफ में कुछ राहत मिल सकती है.

2 फरवरी 2026- आखिरकार एक अंतरिम व्यापार समझौता हुआ. अमेरिका ने टैरिफ 25% से घटाकर 18% कर दिया. बदले में भारत ने कुछ चुनिंदा अमेरिकी सामान पर टैरिफ शून्य कर दिया. इसे दोनों देशों के बीच एक संतुलित कदम माना गया.

2021 फरवरी 2026- सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 122 के तहत पहले 10% का वैश्विक टैरिफ लागू किया. 21 फरवरी को उन्होंने घोषणा की कि यह दर बढ़ाकर 15% की जाएगी. हालांकि यह 150 दिन की कानूनी सीमा के अधीन रहेगा.