पीएम किसान योजना के तहत पात्र किसानों को हर चार महीने में 2000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है. अब तक इस योजना की 21 किस्तें जारी हो चुकी है. देश भर के करोड़ों किसान 22वीं किस्त का इंतजार कर रहे हैं.
किसानों के लिए 22वीं किस्त से पहले बड़ा अपडेट सामने आया है.
योजना में लाभ ले रहे लाभार्थियों की दोबारा जांच में लाखों नाम लिस्ट से हटाए गए हैं. ऐसे में जरूरी है कि आप भी अपना स्टेटस समय रहते चेक कर लें. और जान लें किस वजह से हटाए जा रहे हैं किसानों के नाम और कहीं आपका नाम भी तो नहीं इस लिस्ट में शामिल.
क्यों हटाए जा रहे हैं नाम?
सरकार इस बात को लगातार सुनिश्चिच कर रही है कि योजना में सिर्फ पात्र किसानों को ही लाभ मिले. इसके लिए वेरिफिकेशन ड्राइव शुरू की है. और जांच में दो बड़ी वजहें सामने आई हैं. पहला, जमीन के रिकॉर्ड में बदलाव. जिन किसानों के नाम पर 1 फरवरी 2019 के बाद जमीन दर्ज हुई है. नउनके दस्तावेजों की दोबारा जांच हो रही है. अगर तय तारीख से पहले मालिकाना हक साफ नहीं होता है. तो पात्रता पर सवाल उठ सकता है.
दूसरी वजह है परिवार से जुड़े नियम हैं. योजना के मुताबिक एक परिवार में सिर्फ एक सदस्य को ही लाभ मिल सकता है. कुछ मामलों में पति और पत्नी दोनों किस्त ले रहे थे. ऐसे केस में भुगतान रोक दिया गया है. अगर जांच में आप सही पाए जाते हैं तो रकम जारी हो सकती है. वरना रिकवरी भी हो सकती है.
कैसे चेक करें आपका नाम लिस्ट में है या नहीं?
पीएम किसान योजना स्टेटस जानने के लिए आप घर बैठे ऑनलाइन जांच कर सकते हैं. सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट pmkisan.gov.in पर जाएं. होमपेज पर Farmers Corner में Know Your Status ऑप्शन चुनें. अपना रजिस्ट्रेशन नंबर या मोबाइल नंबर दर्ज करें, कैप्चा भरें और Get Data पर क्लिक करें.
स्क्रीन पर आपकी पूरी डिटेल दिखाई देगी. यहां e-KYC और Land Seeding जरूर देखें. अगर इनमें से कोई चीड पेंडिंग है. तो किस्त अटक सकती है. जरूरत हो तो नजदीकी CSC सेंटर या मोबाइल ऐप के जरिए फेस ऑथेंटिकेशन से प्रोसेस पूरी करें.
22वीं किस्त कब आ सकती है?
सरकार ने अभी आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की है, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक किस्त जल्द जारी हो सकती है. अनुमान लगाया जा रहा है कि मार्च 2026 के पहले हफ्ते या होली से पहले 2000 रुपये खातों में ट्रांसफर किए जा सकते हैं. इसलिए अपनी जानकारी अपडेट रखें. आधार लिंक, बैंक डिटेल और e-KYC पूरी करें.



