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‘इसे मेरा या तुम्हारा कश्मीर मत कहिए…’, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन की छात्रों को बड़ी सीख…

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युवाओं में बढ़ते ड्रग्स के इस्तेमाल और सोशल मीडिया के गलत इस्तेमाल के खिलाफ बोलते हुए, भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा है कि मजबूत और एकजुट भारत के लिए सिर्फ शिक्षा ही जरूरी है.

उन्होंने ग्रेजुएट हो रहे स्टूडेंट्स से कहा कि वे कश्मीर को ‘मेरा कश्मीर’, ‘तुम्हारा कश्मीर’ न कहें, बल्कि हमेशा ‘हमारा कश्मीर’ कहें.

वाइस प्रेसिडेंट सीपी राधाकृष्णन आज (गुरुवार, 26 फरवरी) कश्मीर यूनिवर्सिटी के 21वें कॉन्वोकेशन में शामिल हुए और कहा कि कश्मीर एकजुट भारत के दिल में है. उप राष्ट्रपति ने आगे कहा, “मैं आखिर में सिर्फ तीन लाइन कहना चाहता हूं. मेरा कश्मीर नहीं, तुम्हारा कश्मीर नहीं, हमारा कश्मीर, यही मैं आप सभी से चाहता हूं.”

युवाओं के विकास में पीएम स्कॉलरशिप का योगदान

कश्मीर में युवाओं की शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए PM स्कॉलरशिप स्कीम जैसी खास एजुकेशनल स्कीम की तारीफ करते हुए, सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि ऐसी कोशिशें युवाओं को भविष्य के लिए तैयार करती हैं और देश भर के इंस्टीट्यूशन में युवाओं की पढ़ाई को आसान बनाकर नेशनल इंटीग्रेशन को भी बढ़ावा देती हैं, जिससे सोशल इंटीग्रेशन होता है.

सीपी राधाकृष्णन ने याद किए राज्यपाल कार्यकाल के दिन

इस बात पर जोर देते हुए कि देश की एकता उसकी विविधता और एक-दूसरे की भावनाओं के प्रति सहनशीलता में है, सीपी राधाकृष्णन ने झारखंड में कश्मीरी छात्रों के दौरे से जुड़ी एक घटना का जिक्र किया, जब वे गवर्नर के तौर पर काम कर रहे थे.

सीपी राधाकृष्णन ने कहा, “जब मैं झारखंड का गवर्नर था, तो कश्मीरी छात्रों का एक ग्रुप ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ प्रोग्राम के तहत दौरे पर आया था. यह जानते हुए कि उनमें से ज़्यादातर नॉन-वेजिटेरियन थे, मैंने लोक भवन (तब राज भवन) से कश्मीरी छात्रों को नॉन-वेजिटेरियन खाना या उनकी पसंद का खाना परोसने के लिए कहा, भले ही मैं वेजिटेरियन हूं.”

‘हमें दूसरों की भावनाओ का सम्मान करना होगा’

सीपी राधाकृष्णन ने कहा, “हम डेमोक्रेट हैं. हमें दूसरों की भावनाओं को मानना होगा. हमें अपनी भावनाओं पर गर्व होना चाहिए, लेकिन हम दूसरों की भावनाओं को नीचा नहीं दिखा सकते. यह अच्छा नहीं है. कोई भी डेमोक्रेट ऐसा नहीं करेगा.”

186 महिला स्कॉलर्स को मिले मेडल्स

आज के कॉन्वोकेशन में 59558 डिग्रियां, 44910 अंडरग्रेजुएट, 13545 पोस्टग्रेजुएट, 465 MD, M.S.M.Ch, 638 MPhil, 168 PhD डिग्रियां दी गईं. कुल 239 गोल्ड मेडल दिए गए. इनमें से 186 मेडल महिला स्कॉलर्स को मिले हैं, जिसकी वाइस प्रेसिडेंट ने तारीफ की.

इस दौरान उप राष्ट्रपति ने कहा, ‘मैं आज तीन वजहों से सबसे खुश इंसान हूं. हमारे राज्य की एजुकेशन मिनिस्टर एक महिला हैं. दूसरा, यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर एक महिला हैं और तीसरा, ज़्यादातर गोल्ड मेडल जीतने वाली भी महिलाएं हैं. मेरी और खुशी यह है कि देश के वाइस प्रेसिडेंट के तौर पर यह मेरा पहला दौरा है. यूनिवर्सिटी की असली विरासत इसके ग्रेजुएट होने वाले स्टूडेंट्स हैं: वे जो कैरेक्टर देते हैं और समाज में जो योगदान देते हैं.’