प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ‘विकसित भारत के लिए प्रौद्योगिकी, सुधार और वित्त’ विषय पर बजट के बाद आयोजित वेबिनार को संबोधित किया।
उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में बजट के बाद वेबिनार आयोजित करने की एक मजबूत परंपरा विकसित हुई है, जो बजट को प्रभावी ढंग से लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
बजट का दीर्घकालिक दृष्टिकोण
मोदी ने कहा कि बजट का मूल्यांकन विभिन्न मानकों पर किया जाता है, जैसे शेयर बाजार की स्थिति या आयकर प्रस्ताव। लेकिन असल में, राष्ट्रीय बजट एक दीर्घकालिक नीति रोडमैप है। उन्होंने बताया कि जो नीतियां इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार करती हैं और शासन में पारदर्शिता लाती हैं, वही अर्थव्यवस्था को स्थायी मजबूती प्रदान करती हैं।
राष्ट्र निर्माण की निरंतर प्रक्रिया
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि किसी भी बजट को अलग-थलग नहीं देखा जाना चाहिए। राष्ट्र निर्माण एक निरंतर प्रक्रिया है, और हर बजट उस लक्ष्य की ओर बढ़ने का एक चरण है, जो 2047 तक ‘विकसित भारत’ के निर्माण का संकल्प है।
विचारों का आदान-प्रदान
उन्होंने उम्मीद जताई कि वेबिनार केवल विचारों के आदान-प्रदान तक सीमित न रहें, बल्कि एक प्रभावी ब्रेनस्टॉर्मिंग अभ्यास बनें। उद्योग, अकादमिक जगत, और नीति निर्माताओं के सामूहिक विचार-विमर्श से योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन संभव होगा।
21वीं सदी में भारत की विकास यात्रा
मोदी ने कहा कि 21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है और भारत की विकास यात्रा एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है। पिछले एक दशक में भारत ने असाधारण लचीलापन दिखाया है, जो सुधारों का परिणाम है।
सरकारी निवेश का महत्व
प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले एक दशक में सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष ध्यान दिया है। उन्होंने कहा कि 11 वर्ष पहले सार्वजनिक पूंजीगत व्यय के लिए बजट में लगभग 2 लाख करोड़ रुपए का प्रावधान था, जो अब बढ़कर 12 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो गया है।
निवेश के लिए अनुकूल वातावरण
मोदी ने कहा कि सरकार विदेशी निवेश ढांचे को सरल बना रही है और दीर्घकालिक वित्त को मजबूत करने के लिए बॉंड बाजार को सक्रिय बनाने की दिशा में कदम उठा रही है।
साझा संकल्प की आवश्यकता
प्रधानमंत्री ने उद्योग जगत और विशेषज्ञों से आग्रह किया कि वे वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं से सीखकर ठोस सुझाव दें। उन्होंने कहा कि सरकार, उद्योग, वित्तीय संस्थानों और अकादमिक जगत के बीच एक स्पष्ट ‘रिफॉर्म पार्टनरशिप चार्टर’ तैयार किया जाना चाहिए।
सभी की भागीदारी आवश्यक
अपने संबोधन के अंत में, मोदी ने सभी हितधारकों से अपील की कि वे बजट में दिए गए नए अवसरों का पूरा लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि अब बजट पर चर्चा का समय नहीं है, बल्कि इसे तेजी से लागू करने का समय है।



