ईरान में दुनिया भर के शिया समुदाय के सबसे बड़े धार्मिक नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर से राजस्थान समेत भारत के कई हिस्सों में शिया मुसलमान भी गमजदा हैं. उनमें गहरा गम और जबरदस्त गुस्सा देखने को मिल रहा है.
राजस्थान में भी शिया मुसलमान के घरों में मातम पसरा हुआ है.
शिया मुसलमानों के तमाम संगठनों ने खामेनेई की मौत के चलते इस साल ईद नहीं मानने का फैसला किया है. तय किया गया है कि ईद के त्योहार पर ना तो नए कपड़े पहने जाएंगे और ना ही घरों में सिवइयां बनेंगी. किसी तरह की खुशियां भी नहीं मनाई जाएंगी. रस्म अदा करने के लिए प्रतीकात्मक तौर पर ईद की नमाज पढ़ी जाएगी, वह भी काली पट्टी बांधकर. अलविदा जुमे की नमाज भी काली पट्टी में ही पढ़ी जाएगी.
रमजान के महीने में मोहर्रम की तरह मातम
राजस्थान के तकरीबन सभी शहरों के शिया मुसलमानों में शोक की लहर है. सबसे बड़े धार्मिक नेता को रमजान के पाक महीने में मारे जाने को लेकर लोगों में ज्यादा गुस्सा है. राजधानी जयपुर, अजमेर, कोटा, बीकानेर, झालावाड़, जोधपुर और बूंदी समेत तमाम शहरों में लोग गहरे गम और गुस्से में हैं. रमजान के महीने में भी मोहर्रम की तरह मातम पसरा हुआ है.
तकरीबन सभी शहरों के स्थानीय शिया संगठनों ने फैसला लिया है कि ईद का त्योहार इस बार नहीं मनाया जाएगा. हालांकि, ईद की नमाज प्रतीकात्मक रूप से पढ़ी जाएगी, लेकिन नमाज के दौरान सभी लोग काली पट्टी बांधेंगे, जो शोक और संवेदना का प्रतीक है.
शिया समुदाय की आस्था पर गहरा संकट
शिया समुदाय का मानना है कि खामेनेई सिर्फ एक धार्मिक नेता नहीं थे, बल्कि वे 12वें इमाम के प्रतिनिधि यानी नायब इमाम भी माने जाते थे. 12वें इमाम की वापसी का इंतजार शिया समुदाय में एक महत्वपूर्ण धार्मिक विश्वास है और ऐसे में खामेनेई की मौजूदगी साधारण धार्मिक नेतृत्व से कहीं आगे की मान्यता रखती थी. उनके निधन से शिया समुदाय में एक आस्था और भावना का गहरा संकट उत्पन्न हुआ है, जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है.
राजस्थान के बड़े शिया भवनों, इमामबाड़ों और मोहल्लों में आज मातम का माहौल दिखाई दे रहा है. सोशल मीडिया पर भी लोग खामेनेई की तस्वीरों के साथ अपना दुख जता रहे हैं, और टेक्स्ट पोस्ट, वीडियो व श्रद्धांजलि संदेश साझा कर रहे हैं. कई लोगों ने यह भी लिखा है कि खामनेई के विचारों और नेतृत्व ने शिया समुदाय की पहचान और भावनाओं को मजबूती से स्थापित किया है.
स्कूल, कॉलेजों में जारी किए गए शोक संदेश
शिया समुदाय के लोगों के मुताबिक, यह घटना केवल धार्मिक स्तर पर ही नहीं, बल्कि सामाजिक और भावनात्मक रूप से भी समुदाय को प्रभावित कर रही है. स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक समूहों में शोक संदेश जारी किए जा रहे हैं. कई स्थानीय शिया संगठनों ने आज के दिन श्रद्धांजलि सभा और दुआओं का आयोजन किया है. राजधानी जयपुर समेत तमाम शहरों में विरोध प्रदर्शन भी किए जा रहे हैं. समुदाय के लोग सरकारी और निजी तौर पर प्रार्थना सभा आयोजित कर रहे हैं, जिसमें वे खामेनेई की आत्मा की शांति के लिए दुआ कर रहे हैं.
राजस्थान के शिया समुदाय के युवा और छात्र भी इस घटना से काफी प्रभावित हैं. कई लोगों ने कहा है कि खामेनेई की मौत को खबर पर यकीन करना मुश्किल था. युवा वर्ग ने सोशल मीडिया पर खामेनेई के विचारों और उनके धर्म के प्रति समर्पण को याद करते हुए भावनात्मक पोस्ट किए हैं.
कहा जा सकता है कि खामेनेई के निधन की खबर ने राजस्थान में शिया समुदाय को भावनात्मक रूप से झकझोर दिया है. उनके लिए यह एक ऐसा समय है जिसमें आस्था, श्रद्धा और यादों को अपने दिलों में संजोकर रखना जरूरी है. वहीं पूरे समुदाय में यह विश्वास भी दिख रहा है कि उनके नेता की शिक्षाएं और मार्गदर्शन आने वाले समय तक लोगों के दिलों में जीवित रहेंगे.



