छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के समोदा-झेंझरी गांव में अफीम की खेती के मामले में जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। इसमें शामिल तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।
इनमें भाजपा नेता विनायक ताम्रकार भी शामिल हैं, जिन पर आरोप है कि उनकी देखरेख में ही यह खेती हो रही थी।
दरअसल, गांव के सरपंच अरुण गौतम की शिकायत पर पुलिस सक्रिय हुई। पुलिस ने मौके पर जाकर जांच की और जिला प्रशासन को सूचना दी। दुर्ग कलेक्टर सहित चार विभागों की टीम मौके पर पहुंची। जांच में पाया गया कि लगभग 6 एकड़ जमीन पर अफीम की खेती हो रही है। यह जमीन शिवनाथ नदी के किनारे है, जो समोदा गांव के विनायक ताम्रकार और उनके परिवार के नाम पर है। इसी से सटी हुई 11 एकड़ जमीन में से 6 एकड़ भूमि पर अफीम उगाई जा रही थी, जो दो महिलाओं प्रीतिबाला ताम्रकार और मधुबाला ताम्रकार के नाम पर रजिस्टर्ड है। ये महिलाएं विनायक की रिश्तेदार हैं और कई सालों से दूसरे शहर में रहती हैं। उन्होंने अपनी जमीन की देखभाल के लिए विनायक को सौंप रखी थी।
मक्के के बीच की हो रही थी अफीम खेती
मौके पर जांच में पता चला कि आरोपियों ने चालाकी से पहले मक्का बोया था और उसके बीच में अफीम की खेती की थी। अफीम के 10-15 प्रतिशत पौधों पर चीरा लगाने के निशान थे, जिससे पता चलता है कि उनसे मॉर्फिन युक्त नशीला पदार्थ निकाला गया था। बाकी 80 प्रतिशत पौधे अभी फूल आने या बढ़ने की अवस्था में थे।जांच से यह भी सामने आया कि यह खेती विनायक ताम्रकार की निगरानी में हो रही थी। विनायक पूर्व में भाजपा किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष रह चुके हैं और वर्तमान में राइस मिल प्रसंस्करण प्रकल्प के प्रदेश संयोजक हैं।
समोदा पहुंचे थे पूर्व सीएम भूपेश बघेल
मीडिया में खबर आने के बाद राजनीति गर्म हो गई। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ समोदा गांव पहुंचे और अफीम की खेती का निरीक्षण किया। इसी बीच भाजपा ने विनायक ताम्रकार को पार्टी से निलंबित कर दिया। पुलिस जांच में पता चला कि राजस्थान के किसान विकास बिश्नोई, जो सालों से कपास की खेती करता है, उसकी देखरेख में यह अफीम उगाई जा रही थी। वही एक आरोप मनीष ठाकुर इस फार्म हाउस में मुनीम के रूप में काम करता था। वहीं फरार आरोपी अचला राम जाट ने अफीम के बीज लाए थे।
तीन आरोपियों को जेल, चौथे की तलाश जारी
पुलिस ने जांच के आधार पर तीनों आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। चौथे आरोपी को पकड़ने के लिए एक टीम भेजी गई है। इस मामले में अभी कई सवालों के जवाब नहीं मिले हैं, जैसे कि इस अफीम की सप्लाई कहां की जाती थी और यह खेती कब से हो रही थी। हालांकि, गांव वालों का कहना है कि यह लगभग तीन साल से चल रही थी। इस मामले में विनायक ताम्रकार के भाई बृजेश ताम्रकार को भी पुलिस ने हिरासत में लिया था जिसे पूछताछ के बाद आज छोड़ दिया गया है।



