सीधे तौर पर ईरान जंग में शामिल नहीं होने के बावजूद मिडिल ईस्ट में सबसे ज्यादा यूएई और सऊदी अरब को नुकसान हुआ है. ताजा आंकड़ों से इसका खुलासा हुआ है. सऊदी के कम से कम 5 बिलियन डॉलर का नुकसान इस जंग की वजह से हुआ है.
वो भी सिर्फ ऊर्जा और पर्यटन राजस्व का. इसी तरह यूएई का भी करीब 5 बिलियन डॉलर का नुकसान अब तक हुआ है. इन दोनों देशों के बाद कतर और इराक का नुकसान हुआ है. हालांकि, इराक खाड़ी का मुल्क नहीं है.
फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक ईरान जंग के कारण खाड़ी देशों को ऊर्जा राजस्व के तौर पर 15.1 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है. इनमें सबसे ज्यादा सऊदी को 4.5 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है. सऊदी की सबसे बड़ी तेल कंपनी अरमाको जंग के कारण ठप पड़ी है.
ईरान जंग से किसे कितना नुकसान?
फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक सऊदी अरब को5 बिलियन डॉलर ऊर्जा राजस्व का नुकसान हुआ है. इसी तरह कतर को 0.5 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है. कुवैत, बहरीन और यूएई को करीब 10 बिलियन डॉलर ऊर्जा राजस्व का नुकसान हुआ है. यह नुकसान होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने की वजह से हुआ है. खाड़ी के देश पूरी दुनिया को ऊर्जा निर्यात करती है.
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन के अनुमान के मुताबिक जंग के शुरुआती 10 दिन में अमेरिका 11 बिलियन डॉलर का गोला-बारूद खर्च कर चुका है. अमेरिका इजराइल के साथ मिलकर ईरान पर हमला कर रहा है. इजराइल ने कितने का गोला-बारूद खर्च किया है. इसकी जानकारी अभी नहीं दी गई है.
अमेरिका और इजराइल के हमले की वजह से ईरान के 2000 से ज्यादा आम नागरिकों की मौत हो गई है. इस जंग में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई समेत 40 टॉप कमांडर मारे जा चुके हैं.



