Meen Sankranti 2026: संक्रांति सूर्य देव से जुड़ा पर्व माना जाता है. ये पर्व सूर्य देव को समर्पित किया गया है. संक्रांति के पर्व का संबंध ज्योतिष और धर्म शास्त्र में सूर्य देव के गोचर से बताया गया है.
यानी सूर्य जब भी एक राशि से दूसरी राशि में गोचर करते हैं, तो उस राशि के नाम पर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है. मकर संक्रांति सबसे ज्यादा लोकप्रिय है, लेकिन सूर्य के राशि परिवर्तन के साथ ही सभी राशियों के नाम से ये पर्व मनाया जाता है.
आज मीन संक्रांति मनाई जा रही है. आज से खरमास भी लग गया है. जोकि 14 अप्रैल को सूर्य देव के मेष राशि में जाने पर समाप्त होगा. ज्योतिष शास्त्र में सूर्य देव को आत्मा और पिता का कारक माना गया है. मीन संक्रांति पर और पूरे खरमास के दौरान पूजा-पाठ विशेषकर सूर्य पूजन का महत्व बहुत अधिक होता है, लेकिन धर्म शास्त्रों में मीन संक्रांति पर कुछ सावधानियां रखने के लिए भी कहा गया है. ऐसे में आइए जानते हैं कि इस दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
मीन संक्रांति पर रखें ये सावधानियां
मीन संक्रांति से खरमास या मलमास की शुरुआत हो जाती है, इसलिए खरमास में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन या यज्ञोपवीत जैसे शुभ कार्यों पर रोक लग जाती है. ऐसे में इस दौरान ये सभी काम न करें. इस दौरान किसी बड़े निवेश या नई संपत्ति की खरीदारी से बचें. इस पूरे महीने सात्विक भोजन करें. क्रोध-अहंकार से दूर रहें. खरमास में मंत्र-जप और ध्यान करना न भूलें. इस समय में अपनी क्षमता अनुसार जरूरतमंदों की सेवा अवश्य करें.
मीन संक्रांति का महत्व
धार्मिक दृष्टि से मीन संक्रांति को अत्यंत पुण्य प्रदान करने वाला दिन माना गया है. मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से पापों का नाश हो जाता है और अध्यात्मिक शुद्धि होती है. इसके साथ ही दान-पुण्य का भी विशेष महत्व बताया गया है. जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र, गुड़, तिल और धन का दान बहुत ही शुभ माना गया है.



