देश की राजनीति में बड़ा बदलाव होने की तैयारी है। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव की दिशातेजी से आगे बढ़ रही है।
इसके लिए संसद के मौजूदा सत्र में दो अहम बिल लाए जा सकते हैं। अगर सब कुछ योजना के मुताबिक हुआ, तो लोकसभा की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी।
सरकार महिला आरक्षण लागू करने की मौजूदा शर्तों में बदलाव करना चाहती है। अभी कानून के मुताबिक नई जनगणना और परिसीमन के बाद ही आरक्षण लागू होना है, लेकिन अब प्रस्ताव है कि 2011 की जनगणना के आधार पर ही प्रक्रिया पूरी कर ली जाए। इससे 2029 से पहले ही महिलाओं को आरक्षण मिल सकेगा।
इस प्रस्ताव के तहत लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 की जा सकती है। इनमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। यानी संसद में महिलाओं की भागीदारी एक झटके में काफी बढ़ जाएगी, जो अब तक सीमित रही है।
सरकार ये दो बिल लाने की कर रही है तैयारी?
सरकार इस बार दो अलग-अलग बिल लाने की तैयारी में है।पहला बिल ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में संशोधन से जुड़ा होगा, जबकि दूसरा परिसीमन कानून में बदलाव करेगा। इन दोनों बिलों को पास कराने के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत जरूरी होगा, इसलिए सरकार विपक्ष का समर्थन जुटाने में लगी है। गृहमंत्री अमित शाह ने इस मुद्दे पर सहमति बनाने के लिए कई दलों से बातचीत शुरू कर दी है। इसमें वाईएसआर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, एनसीपी (एसपी), आरजेडी और एआईएमआईएम जैसे दल शामिल हैं। बीजेडी और शिवसेना (यूबीटी) से भी चर्चा हो चुकी है, जबकि कांग्रेस से बातचीत अभी बाकी है।
आरक्षण का फॉर्मूला क्या होगा? कानून बना, लागू क्यों नहीं हुआ?
प्रस्ताव के मुताबिक 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इसमें एससी और एसटी वर्ग की महिलाओं को उनके कोटे के भीतर हिस्सा मिलेगा। हालांकि ओबीसी महिलाओं के लिए अलग से कोई प्रावधान फिलहाल शामिल नहीं है। यही मॉडल राज्यों की विधानसभाओं में भी लागू करने की योजना है।
महिला आरक्षण कानून 2023 में संविधान के 106वें संशोधन के रूप में पास हो चुका है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इसकी मंजूरी दे चुकी हैं। लोकसभा और राज्यसभा दोनों में इसे लगभग सर्वसम्मति से पारित किया गया था। लेकिन इसकी लागू होने की तारीख अभी तय नहीं हुई है। केंद्र सरकार अधिसूचना के जरिए इसे लागू करेगी और जरूरत पड़ने पर संशोधन भी कर सकती है।



