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“ममता का आरोप – SIR की पहली ड्राफ्ट लिस्ट से 8 लाख नाम हटाए गए, बोली मेरे रहते NRC का काम नहीं होगा”

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आज यानी बुधवार 25 मार्च को दावा किया कि मतदाता सूचियों की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कवायद के तहत 27 लाख मतदाताओं की मतदान पात्रता का निर्धारण किया गया और उनमें से पहली ड्राफ्ट लिस्ट में आठ लाख नाम हटा दिए गए हैं।

ममता बनर्जी ने दार्जिलिंग जिले के सिलीगुड़ी उपमंडल के नक्सलबाड़ी में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर ‘गलत तरीके से बनाई गई SIR’ नीति को लागू करके लोगों को ‘तकलीफ पहुंचाने’ का आरोप लगाया।

मुख्यमंत्री बनर्जी ने मांग की कि ऑनलाइन प्रकाशित ड्राफ्ट लिस्ट की फिजिकल कॉपियां तुरंत उपलब्ध कराई जाएं, ताकि जानकारी का सत्यापन किया जा सके। उन्होंने कहा, ‘मुझे बताया गया है कि विचाराधीन 27 लाख मतदाताओं में से आठ लाख नाम पहली ड्राफ्ट लिस्ट में हटा दिए गए हैं। लेकिन वह लिस्ट कहां है? उस लिस्ट की फिजिकल कॉपी अभी तक सरकारी दफ्तरों में क्यों नहीं लगाई गई हैं?’

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने कहा, ‘लिस्ट प्रकाशित होने के बाद ही मैं जानकारी का सत्यापन कर सकती हूं।’ न्यायिक पड़ताल के दायरे में आए लगभग 60 लाख मतदाताओं में से पहली ड्राफ्ट लिस्ट सोमवार देर रात निर्वाचन आयोग द्वारा प्रकाशित की गई, लेकिन निर्वाचन आयोग ने अभी तक उस सलिस्ट में शामिल मतदाताओं की कुल संख्या या हटाए गए मतदाताओं की संख्या की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

मुख्यमंत्री ने भाजपा को ‘SIR के दौरान हुई 220 मौतों’ के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए दावा किया कि ‘भाजपा को SIR के असर पर शर्म आनी चाहिए।’ उन्होंने कहा कि मरने वालों में से आधे हिंदू और आधे मुसलमान थे। हालांकि, मतदाता सूची में संशोधन के दौरान हुई मौतों का कोई आधिकारिक आंकड़ा या पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

बनर्जी ने आरोप लगाया कि जब बुजुर्ग नागरिकों को SIR की कतारों में खड़ा किया गया और उनकी नागरिकता पर सवाल उठाए गए, तो ‘भाजपा उन्हीं लोगों से वोट मांगने की हिम्मत कैसे कर सकती है?’ उन्होंने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग ने भाजपा के प्रभाव में आकर आदिवासी और राजबंशी समुदायों के नाम मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर हटा दिए। उन्होंने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस सरकार इन समुदायों के लिए कल्याणकारी योजनाएं लेकर आयी।

उन्होंने घोषणा की, ‘जब तक मैं हूं, बंगाल में राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC) का काम नहीं होगा और न ही कोई डिटेंशन कैंप बनने दिया जाएगा।