Home समाचार Ram Navami 2026 in Ayodhya: कितने बजे होगा सूर्य तिलक? नोट करें...

Ram Navami 2026 in Ayodhya: कितने बजे होगा सूर्य तिलक? नोट करें आरती का टाइम…

3
0

Ram Navami 2026 in Ayodhya: राम नवमी चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाई जाती है। इसी दिन दोपहर 12 बजे भगवान राम का जन्म हुआ था। अयोध्या में राम नवमी 27 मार्च को मनाई जाएगी, रामलला के दर्शन के लिए इस वक्त यहां पर भक्तों का तांता लगा है।

24 घंटे के अंदर यहां पर एक लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किए हैं। कल सूर्य तिलक दोपहर 12 बजे होने वाली आरती के समय ही होगा और लगभग 4 मिनट तक भगवान के माथे पर सूर्य की किरणें रहेंगी। VIP दर्शन बंद किए गए हैं।

Surya Tilak in Ayodhya: क्या होता है सूर्य तिलक?

सूर्य तिलक एक विशेष खगोलीय और धार्मिक घटना है, इसमें सूर्य की किरणें सीधे भगवान राम की मूर्ति के माथे (मस्तक) पर पड़ती हैं, ऐसा लगता है जैसे सूर्य देव स्वयं भगवान राम को तिलक कर रहे हों। मंदिर की संरचना और दिशा इस तरह बनाई गई है कि एक निश्चित समय पर सूर्य की किरणें सीधे गर्भगृह में प्रवेश करती हैं और भगवान राम की प्रतिमा के माथे पर केंद्रित हो जाती हैं।

Ayodhya Aart: रामलला की आरती

आरती कीजै श्री राम लला की ||
आरती कीजै श्री राम लला की,

दशरथ नंदन पूर्ण कला की।
आरती कीजै श्री राम लला की।

नारायण नर बनकर आए, रघुकुल नंदन राम कहाए।
कौशल्या सुत राजीव लोचन, दशरथ सुत हरि भव भय मोचन।

आरती कीजै श्री राम लला की।
रावण वध कर अवध को आए, सियासन सिंहासन को सजाए।

राम राज त्रिभुवन में लाए,
आरती कीजै श्री राम लला की।

जय जय मर्यादा अवतारी, जय जय धनुष बाण के धारी।
जय सीतापति, जय असुरा, जय रघुनायक अवध बिहारी।

आरती कीजै श्री राम लला की।
सो भवसागर से तर जावे, राम नाम जो निशदिन गावे।
राम नाम अंधकार मिटावे, हृदय में ज्ञान की ज्योत जगावे।

आरती कीजै श्री राम लला की।
दशरथ नंदन पूर्ण कला की,
आरती कीजै श्री राम लला की।

जय सिया राम, जय सिया राम, जय जय सिया राम।

Ayodhya mai Ram Navami 2026: अयोध्या नगरी को सप्तपुरी कहते हैं

आपको बता दें कि सरयू नदी के किनारे बसी अयोध्या नगरी को सप्तपुरी कहा जाता है। महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण में अयोध्या का विस्तार से वर्णन मिलता है। यहीं से भगवान राम को 14 वर्ष का वनवास मिला, इसके बाद राम अयोध्या लौटे और राजा बने, यहीं राम का बचपन बीता था इसलिए यहां पर राम बाल रूप में ही विराजमान हैं।