आईपीएल की टीम रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (आरसीबी) के शुरुआती मालिक और भगोड़े कारोबारी विजय माल्या ने इस क्रिकेट टीम के लगभग 18,776 करोड़ रुपये (करीब 2 अरब डॉलर) में बिकने पर उन आलोचकों पर तंज कसा है, जिन्होंने कभी इस निवेश को महज एक दिखावा या ‘अहंकार की संतुष्टि के लिए किया गया सौदा’ बताया था.
यूनाइटेड स्पिरिट्स लिमिटेड (यूएसएल) ने आरसीबी को आदित्य बिड़ला ग्रुप, द टाइम्स ऑफ इंडिया, बोल्ट वेंचर्स और ब्लैकस्टोन जैसे खरीदारों के एक ग्रुप को करीब 16,660 करोड़ रुपए की कैश डील में बेचा है. महिला प्रीमियर लीग के पेमेंट और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के कमीशन को मिलाकर इस डील की कुल कीमत लगभग 18,776 करोड़ रुपए (2 अरब डॉलर) तक पहुंच जाती है.
माल्या ने दिया जवाब
सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपनी एक पोस्ट में माल्या ने दावा किया कि जब साल 2008 में इस टीम को 450 करोड़ रुपये में खरीदा गया था, तब लोग उस पर हंसते थे. कारोबारी ने अपनी सफाई में कहा कि इस कथित ‘सनक’ के पीछे का असली मकसद ‘रॉयल चैलेंज’ ब्रांड को खड़ा करना था, इसीलिए टीम का नाम आरसीबी रखा गया था. माल्या ने कहा कि आज इस निवेश की कीमत 16,660 करोड़ रुपए से भी अधिक हो गई है. कारोबारी ने नए मालिकों को ‘शुभकामनाएं’ देते हुए याद दिलाया कि विराट कोहली जैसे खिलाड़ी को चुनने का फैसला भी उसी का था, जो आज दुनिया के सबसे बेहतरीन खिलाड़ियों में गिने जाते हैं. माल्या भारतीय बैंकों का 9,000 करोड़ रुपये का कर्ज न चुकाने के मामले में भारत में वांछित है और भारत ब्रिटेन से माल्या के प्रत्यर्पण का प्रयास कर रहा है.
इस कंसोर्टियम ने खरीदी टीम
RCB के लिए जीतने वाली बोली आदित्य बिड़ला ग्रुप ने लगाई थी, जिसकी अगुवाई कुमार मंगलम बिड़ला कर रहे थे और इसमें ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप’ भी उनका पार्टनर था. इस कंसोर्टियम में अमेरिकी स्पोर्ट्स इन्वेस्टर डेविड ब्लिट्ज़र की अगुवाई वाली ‘बोल्ट वेंचर्स’ और ग्लोबल प्राइवेट इक्विटी की दिग्गज कंपनी ‘ब्लैकस्टोन इंक.’ भी शामिल हैं. यह अधिग्रहण IPL के लिए एक ऐतिहासिक ‘डबल-हेडर’ दिन का हिस्सा था, जिसमें राजस्थान रॉयल्स को भी 1.63 अरब डॉलर में एक अमेरिकी कंसोर्टियम को बेच दिया गया. इस कंसोर्टियम की अगुवाई बिजनेसमैन काल सोमानी कर रहे थे, और बताया जा रहा है कि इसे वॉल्टन और फोर्ड परिवारों का भी समर्थन हासिल था.
यूएसएल ने बताया नॉन कोर असेट
हालांकि, RCB की यह डील अभी भी ‘भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड’ (BCCI) और ‘भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग’ (CCI) से मिलने वाली रेगुलेटरी मंजूरी पर निर्भर है. यह डील पिछले मालिकों-‘यूनाइटेड स्पिरिट्स लिमिटेड’ (जो ‘डियाजियो’ की एक सब्सिडियरी है)-से मालिकाना हक में एक बड़ा बदलाव है. ‘यूनाइटेड स्पिरिट्स लिमिटेड’ ने पहले इस फ्रेंचाइजी को एक ‘नॉन-कोर एसेट’ (मुख्य कारोबार से अलग संपत्ति) करार दिया था. यह बिक्री IPL के लगातार बढ़ते फाइनेंशियल इकोसिस्टम को दर्शाती है. हाल ही में, लीग का कुल वैल्यूएशन 18.5 अरब डॉलर आंका गया है, जिसकी मुख्य वजह बढ़ती हुई कमाई, स्पॉन्सरशिप और मीडिया राइट्स हैं.



