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ईरान ने अमेरिकी हवाई ताकत को दी चुनौती, नई रक्षा प्रणाली बनी चर्चा का केंद्र…

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पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच ईरान ने पिछले 48 घंटों में ऐसी सैन्य कार्रवाई का दावा किया है, जिसने अमेरिकी हवाई वर्चस्व पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ईरान के मुताबिक, उसने दो अमेरिकी सैन्य विमानों और कम से कम तीन हेलीकॉप्टरों जिनमें दो ब्लैक हॉक शामिल हैं को निशाना बनाया। इस घटनाक्रम ने न केवल क्षेत्रीय तनाव को बढ़ाया है, बल्कि आधुनिक युद्ध तकनीकों को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है।

नई एयर डिफेंस प्रणाली से मिली सफलता

ईरानी सेना ने इन हमलों की सफलता का श्रेय अपनी नई विकसित हवाई रक्षा प्रणाली को दिया है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने संकेत दिया है कि हाल ही में अमेरिकी एफ-15ई स्ट्राइक ईगल को मार गिराने में इसी उन्नत तकनीक का इस्तेमाल किया गया। एफ-15ई के गिरने के बाद जब उसके चालक दल की तलाश के लिए अमेरिकी सेना ने दो ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर भेजे, तो वे भी हमले की चपेट में आ गए। हालांकि ये हेलीकॉप्टर किसी तरह ईरानी हवाई क्षेत्र से बाहर निकलने में सफल रहे। इसी दौरान ईरान ने कुवैत के ऊपर एक अमेरिकी ए-10 वार्थोग विमान को भी मार गिराने का दावा किया है।

पारंपरिक रडार से हटकर नई रणनीति

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान अब पारंपरिक रडार-आधारित प्रणालियों से हटकर इन्फ्रारेड और मोबाइल एयर डिफेंस सिस्टम पर ज्यादा निर्भर हो गया है। ये सिस्टम दुश्मन विमानों को बिना अपनी स्थिति उजागर किए ट्रैक कर सकते हैं, जिससे उन्हें नष्ट करना बेहद कठिन हो जाता है। विशेष रूप से “माजिद” नामक इन्फ्रारेड एयर डिफेंस सिस्टम की चर्चा हो रही है। यह प्रणाली रडार सिग्नल उत्सर्जित नहीं करती, बल्कि निष्क्रिय इन्फ्रारेड सेंसर का उपयोग करती है। इसका मतलब है कि यह दुश्मन विमान से निकलने वाली ऊष्मा (हीट सिग्नेचर) को पकड़कर उसे निशाना बनाती है।

माजिद सिस्टम: कम दृश्यता, ज्यादा घातक क्षमता

माजिद प्रणाली की मारक क्षमता करीब 8 किलोमीटर दूरी और 6 किलोमीटर ऊंचाई तक बताई जाती है, जबकि इसके सेंसर लगभग 15 किलोमीटर तक लक्ष्य को पहचान सकते हैं। इसमें प्रॉक्सिमिटी फ्यूज का उपयोग होता है, जिससे मिसाइल लक्ष्य के पास पहुंचते ही स्वतः विस्फोट कर देती है। सबसे अहम बात यह है कि यह सिस्टम एक साथ आठ मिसाइलों को तैनात कर सकता है और बाहरी “कशेफ-99” फेज्ड ऐरे रडार से जुड़कर 30 किलोमीटर तक लक्ष्य ट्रैक करने में सक्षम है।

स्टेल्थ विमान भी नहीं सुरक्षित?

विश्लेषकों का कहना है कि यही तकनीक मार्च में अमेरिकी एफ-35 स्टेल्थ फाइटर जेट को नुकसान पहुंचाने में भी इस्तेमाल की गई हो सकती है। एफ-35 को दुनिया के सबसे उन्नत स्टेल्थ विमानों में गिना जाता है, लेकिन उसकी इंजन से निकलने वाली गर्मी उसे इन्फ्रारेड मिसाइलों के लिए संवेदनशील बना देती है। इससे यह संकेत मिलता है कि भविष्य के युद्धों में स्टेल्थ तकनीक के साथ-साथ इन्फ्रारेड सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी।

एसीमिट्रिक वॉरफेयर: ईरान की नई रणनीति

ईरान की हालिया सफलता के पीछे उसकी “एसीमिट्रिक वॉरफेयर” यानी असमान युद्ध रणनीति का बड़ा हाथ है। इस रणनीति में पारंपरिक ताकत की बजाय लचीले और अप्रत्याशित तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है। पिछले साल 12 दिन के संघर्ष के बाद ईरान ने अपनी रक्षा नीति में बड़ा बदलाव किया। उसने स्थायी एयर डिफेंस ठिकानों की जगह भूमिगत सुरंगों, मिसाइल शहरों और मोबाइल लॉन्चरों पर जोर देना शुरू किया।

शूट एंड स्कूट” रणनीति से बढ़ी चुनौती

ईरान की मोबाइल सतह से हवा में मार करने वाली प्रणालियां “शूट एंड स्कूट” रणनीति पर काम करती हैं। यानी मिसाइल दागने के तुरंत बाद वे अपनी लोकेशन बदल लेती हैं। इससे दुश्मन के लिए उन्हें ट्रैक कर नष्ट करना बेहद मुश्किल हो जाता है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के अनुसार, लगातार हमलों के बावजूद ईरान के करीब आधे मिसाइल लॉन्चर अब भी सुरक्षित हैं, जो उसकी रणनीति की सफलता को दर्शाता है।

रूस और चीन से संभावित सहयोग

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने रूस से 500 “वेरबा” मैन-पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम (MANPADS) खरीदने का समझौता किया है। ये कंधे पर रखकर दागे जाने वाले आधुनिक मिसाइल सिस्टम हैं, जो कम ऊंचाई पर उड़ने वाले विमानों और हेलीकॉप्टरों के लिए बेहद खतरनाक होते हैं। इसके अलावा, कुछ विश्लेषकों ने चीन की HQ-9B लंबी दूरी की मिसाइल प्रणाली के संभावित उपयोग की भी आशंका जताई है। यह प्रणाली रडार और इन्फ्रारेड दोनों प्रकार के मार्गदर्शन का उपयोग करती है, जिससे इसकी प्रभावशीलता और बढ़ जाती है।

अमेरिकी हवाई वर्चस्व पर सवाल

अमेरिकी सैन्य इतिहास में पिछले 20 वर्षों में पहली बार इतने कम समय में इस स्तर पर विमानों को नुकसान पहुंचने की खबर सामने आई है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन यदि ये सही साबित होते हैं, तो यह अमेरिका की हवाई श्रेष्ठता के लिए बड़ा झटका हो सकता है।