33% महिला आरक्षण से छत्तीसगढ में चुनाव पर असर पड़ेगा. अगर छत्तीसगढ़ विधानसभा में सीटें नहीं भी बढ़ी तों महिला आरक्षित सीटें 30 हो जाएंगी.
33% महिला आरक्षण को 2029 लोकसभा चुनाव से पहले लागू करने की केंद्र सरकार की तैयारी अब छत्तीसगढ़ की राजनीति पर भी सीधा असर डालती दिख रही है. 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन, लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव और विधानसभाओं में भी आनुपातिक बढ़ोतरी इन तीन फैसलों से छत्तीसगढ़ में 11 लोकसभा और 90 विधानसभा सीटों का भी चुनावी नक्शा बदल सकता है.
महिला आरक्षण के साथ तैयारी में जुटे दल
राजनीतिक जानकार एवं वरिष्ठ पत्रकार अनिरुद्ध दुबे की माने तो इस बदलाव को लेकर अभी से ही राजनीतिक दल अपनी रणनीति बनाने में जुट चुके हैं. यदि छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की बात की जाए तो यहां वर्तमान में चार विधानसभा सीट है जिसके बढ़कर 6 होने की संभावना है. जानकारी के मुताबिक भाजपा हो या कांग्रेस दोनों ही राजनीतिक दलों ने इन बढ़ी हुई सीटों को टारगेट करते हुए अभी से ही अपनी तैयारी शुरू कर दी है.
क्या है राष्ट्रीय बैकग्राउंड और छत्तीसगढ़ से इसका क्या कनेक्शन?
हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विभिन्न दलों के सांसदों के साथ बैठक की. इससे साफ है कि सरकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम को 2029 से लागू करने के लिए 2011 जनगणना आधारित परिसीमन का रास्ता अपनाना चाहती है. इसके तहत लोकसभा सीटें 543 से बढ़कर 816 हो सकती है, साथ ही महिलाओं के लिए 273 सीटें आरक्षित हो सकती हैं.
छत्तीसगढ़ में असर
इसका सीधा असर छत्तीसगढ़ पर इसलिए होगा क्योंकि अगर राज्यों का मौजूदा अनुपात लगभग बरकरार रखा गया, तो राज्य की 11 लोकसभा सीटें बढ़कर 16–17 तक जा सकती हैं. उसी फॉर्मूले पर विधानसभा सीटों में भी बढ़ोतरी संभव है.
अगर लोकसभा की बात की जाए तो अभी छत्तीसगढ़ में 11 लोकसभा सीटें हैं. इसमें रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, कोरबा, बस्तर और सरगुजा जैसे बड़े संसदीय क्षेत्र हैं. जनसंख्या और भौगोलिक विस्तार के हिसाब से ये सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं. अगर राष्ट्रीय स्तर पर 50% के आसपास विस्तार मॉडल लागू हुआ, तो छत्तीसगढ़ में संभावित नई लोकसभा सीटें इन क्षेत्रों से निकल सकती है.
विधानसभा सीटों का गणित
राज्य में फिलहाल 90 विधानसभा सीटें हैं. अगर लोकसभा की तरह यहां भी आनुपातिक सीट विस्तार हुआ, तो यह संख्या 110–120 या उससे अधिक जा सकती है. हालांकि अगर अगर सीटें 90 ही रहती हैं तो फिर महिला आरक्षित सीटें 30 हो जाएंगी. वहीं अगर सीटें 120 तक होती हैं तो महिला आरक्षित सीटें 40 हो जाएंगी. यानी यहां फिर वही बात साफ है आरक्षण 33% रहेगा, सीटों की संख्या बढ़ने पर महिलाओं के हिस्से की सीटें बढ़ेंगी.
राजनीतिक असर: छत्तीसगढ़ में किसकी बढ़ेगी चिंता?
इस फैसले का सबसे बड़ा असर भाजपा और कांग्रेस दोनों के टिकट वितरण पर पड़ेगा. करीब 30 से 40 सीटें महिला आरक्षित हो सकती हैं. इसका इम्पैक्ट समझिए-
- कई मौजूदा दिग्गज नेताओं की सीट बदल सकती है.
- शहरी महिला चेहरे तेजी से उभरेंगे.
- आदिवासी महिला नेतृत्व को बड़ा अवसर मिलेगा.
- रायपुर, बस्तर, सरगुजा और दुर्ग में नए समीकरण बनेंगे.
दिल्ली में 33% महिला आरक्षण और 2011 आधारित परिसीमन पर बन रही सहमति का सबसे बड़ा चुनावी असर छत्तीसगढ़ में दिख सकता है. 11 से 16–17 लोकसभा सीटें, 90 से 110+ विधानसभा सीटें और 33% महिला आरक्षण यह पूरा फॉर्मूला राज्य की राजनीति का चेहरा बदल सकता है. यानी यह सिर्फ संसद का फैसला नहीं, बल्कि रायपुर से बस्तर तक नए चुनावी नक्शे की शुरुआत हो सकती है.
नोट- यह खबर 33% महिला आरक्षण, 2011 जनगणना आधारित परिसीमन की संभावनाओं और राजनीतिक विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर तैयार एक अनुमानित विश्लेषण है. इसमें दिए गए सीटों के आंकड़े और संभावित नाम सिर्फ संभावित परिदृश्य को समझाने के लिए हैं. विधेयक लागू होने और परिसीमन आयोग की अंतिम रिपोर्ट के बाद सीटों की संख्या, नाम और सीमाएं बदल सकती हैं.



