Idian Foreign Secretary US visit: मिडल ईस्ट में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध जैसे हालात के बीच भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी अमेरिका के तीन दिवसीय दौरे पर जा रहे हैं।
8 से 10 अप्रैल 2026 तक होने वाली इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार, सुरक्षा और तकनीक के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करना है।
वैश्विक अस्थिरता के इस दौर में भारत का रुख शांति की स्थापना और अपने रणनीतिक हितों की रक्षा के लिए अहम है। यह दौरा न केवल व्यापार, रक्षा और उच्च तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करेगा, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम साबित होगा।
Iran America War: क्या रुकने वाली है विश्व तबाही?
ईरान और अमेरिका के बीच गहराते संघर्ष ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। भारत के लिए यह स्थिति काफी संवेदनशील है क्योंकि खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय रहते हैं और वहां से भारत की ऊर्जा जरूरतें (तेल और गैस) जुड़ी हैं। विदेश सचिव विक्रम मिसरी अमेरिकी अधिकारियों के साथ इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे ताकि क्षेत्र में स्थिरता बनी रहे। भारत इस संकट में एक संतुलन बनाने वाले देश के रूप में उभरा है, जो शांति और कूटनीति पर जोर देता है।
डिफेंस और बिजनेस से जुड़े समझौतों पर बातचीत
विक्रम मिसरी की इस यात्रा के दौरान डिफेंस और बिजनेस से जुड़े कई बड़े समझौतों पर बातचीत आगे बढ़ेगी। इससे पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संकेत दिया था कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अपने अंतिम चरण में है। इस दौरे पर उसे अंतिम रूप दिया जा सकता है। इसके अलावा, दोनों देश रक्षा उपकरणों के साझा उत्पादन और उच्च तकनीक के हस्तांतरण पर भी चर्चा करेंगे, जिससे भारत की सुरक्षा व्यवस्था और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को काफी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
विज्ञान और तकनीक पर विशेष फोकस
भारत और अमेरिका के बीच ‘कंपैक्ट’ (COMPACT) समझौते के तहत सेना, व्यापार और टेक्नोलॉजी में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। विक्रम मिसरी अमेरिकी प्रशासन के साथ मिलकर सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और अंतरिक्ष अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को विस्तार देंगे। 21वीं सदी की चुनौतियों से निपटने के लिए दोनों देश एक-दूसरे के तकनीकी अनुभव का लाभ उठाना चाहते हैं। यह सहयोग आने वाले समय में भारतीय स्टार्टअप्स और इंजीनियरिंग क्षेत्र के लिए नए दरवाजे खोलेगा।
द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा
मिसरी का यह दौरा पिछले दौरों की प्रगति को जांचने का भी एक मौका है। मई 2025 में हुए उनके पिछले दौरे और फरवरी 2026 में एस जयशंकर की यात्रा के दौरान जो लक्ष्य तय किए गए थे, उनकी समीक्षा की जाएगी। वॉशिंगटन डीसी में ‘फॉरेन ऑफिस कंसल्टेशन’ की मीटिंग में दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि रणनीतिक और ऊर्जा से जुड़े मुद्दों पर काम सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। यह निरंतर संवाद दोनों लोकतंत्रों के बीच भरोसे को और गहरा करता है।



