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Iran Vs America: जंग खत्म करने के लिए ईरान ने पेश किए 10 नई शर्तें, अगर नहीं बनी बात, मचेगी और तबाही?

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Iran 10 Point Peace Plan: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब एक निर्णायक मोड़ पर है। ईरान ने अमेरिका के 15-सूत्रीय शांति प्रस्ताव को ‘अवास्तविक’ बताते हुए ठुकरा दिया है और बदले में अपना 10-सूत्रीय प्लान पेश किया है। तेहरान का कहना है कि सिर्फ युद्धविराम काफी नहीं है, बल्कि एक स्थायी समाधान जरूरी है। पश्चिम एशिया में जारी इस संघर्ष के बीच ईरान की इन नई शर्तों ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है, क्योंकि इसमें प्रतिबंध हटाने से लेकर समुद्री रास्तों के इस्तेमाल तक की बड़ी मांगें शामिल हैं।

Iran’s 10 point agenda: ईरान की 10 प्रमुख शर्तें

सुरक्षा की पक्की गारंटी: ईरान चाहता है कि अमेरिका और उसके सहयोगी लिखित में यह भरोसा दें कि भविष्य में ईरान की जमीन पर कभी भी दोबारा हमला नहीं किया जाएगा।

युद्ध का परमानेंट अंत: ईरान सिर्फ कुछ दिनों का युद्धविराम नहीं चाहता। उसकी मांग है कि इस जंग को हमेशा के लिए आधिकारिक तौर पर खत्म घोषित किया जाए ताकि शांति बनी रहे।

लेबनान पर हमला बंद हो: तेहरान की बड़ी शर्त है कि इजरायल लेबनान पर हो रहे अपने तमाम सैन्य हमलों को तुरंत रोके और वहां से अपनी सेना को पीछे हटाए।

अमेरिकी प्रतिबंधों की विदाई: ईरान पर जितने भी अंतरराष्ट्रीय और अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंध लगे हैं, उन्हें पूरी तरह हटाया जाए ताकि वह दुनिया के साथ फिर से व्यापार कर सके।

सहयोगियों की सुरक्षा: ईरान ने मांग की है कि क्षेत्र में उसके साथ खड़े देशों और गुटों के खिलाफ चल रहे तमाम सैन्य ऑपरेशनों और संघर्षों को तुरंत बंद किया जाए।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलना: अगर ईरान की शर्तें मानी जाती हैं, तो वह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक रास्ते ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही के लिए फिर से खोल देगा।

हर जहाज पर ट्रांजिट फीस: ईरान ने शर्त रखी है कि इस रास्ते से गुजरने वाले हर एक जहाज को सुरक्षा और सुविधा के बदले 2 मिलियन डॉलर की फीस देनी होगी।

ओमान के साथ कमाई का बंटवारा: जहाजों से मिलने वाली इस भारी-भरकम फीस को ईरान अकेला नहीं रखेगा, बल्कि वह इसे अपने पड़ोसी देश ओमान के साथ साझा (Share) करेगा।

बुनियादी ढांचे का पुनर्निर्माण: ईरान इस समुद्री टैक्स से होने वाली पूरी कमाई का इस्तेमाल युद्ध में तबाह हुए अपने इन्फ्रास्ट्रक्चर और सड़कों-पुलों को फिर से बनाने के लिए करेगा।

क्षेत्रीय संप्रभुता का सम्मान: ईरान की आखिरी शर्त है कि पश्चिम एशिया के मामलों में बाहरी दखल बंद हो और ईरान की सीमाओं और संप्रभुता का पूरा सम्मान किया जाए।

USA vs Iran conflict: ईरान ने क्यों ठुकराया अमेरिकी प्रस्ताव?

ईरान ने अमेरिका की शर्तों को अपनी संप्रभुता के खिलाफ और ‘अत्यधिक मांग वाली’ बताया है। तेहरान का तर्क है कि अमेरिका का प्रस्ताव ईरान को कमजोर करने की कोशिश है। ईरान का मानना है कि केवल कुछ समय के लिए युद्ध रोकना समाधान नहीं है, क्योंकि इससे दुश्मन को फिर से संगठित होने का मौका मिल जाता है। इसी वजह से ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक उसकी बुनियादी शर्तें नहीं मानी जातीं, तब तक कोई समझौता मुमकिन नहीं है।