“छत्तीसगढ़, ओडिशा और महाराष्ट्र में क्वालिटी केयर इंडिया का बड़ा कदम, सोलर पावर समझौते से अस्पताल होंगे ग्रीन – केयर हॉस्पिटल्स और किम्स हेल्थ नेटवर्क में 30 मेगावाट रिन्यूएबल क्षमता का लक्ष्य, करीब 80% ग्रीन एनर्जी उपयोग और बिजली खर्च में 20% तक कमी का अनुमान.”
छत्तीसगढ़, ओडिशा और महाराष्ट्र में क्वालिटी केयर इंडिया का बड़ा कदम, सोलर पावर समझौते से अस्पताल होंगे ग्रीन
केयर हॉस्पिटल्स और किम्स हेल्थ नेटवर्क में 30 मेगावाट रिन्यूएबल क्षमता का लक्ष्य, करीब 80% ग्रीन एनर्जी उपयोग और बिजली खर्च में 20% तक कमी का अनुमान
भारत के प्रमुख हेल्थकेयर प्लेटफॉर्म क्वालिटी केयर इंडिया लिमिटेड (QCIL) ने अपने ग्रुप कैप्टिव सोलर इनिशिएटिव के तहत एम्पिन एनर्जी (AMPIN Energy) और रेडियंस रिन्यूएबल्स (Radiance Renewables) के साथ समझौते करने की घोषणा की है। इस समझौते के जरिए ओडिशा, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में स्थित पांच अस्पतालों के लिए सौर ऊर्जा की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। यह क्वालिटी केयर इंडिया के सतत ऊर्जा की दिशा में संरचित बदलाव का पहला चरण है।
यह पहल क्वालिटी केयर इंडिया की उस व्यापक योजना का हिस्सा है, जिसके तहत केयर हॉस्पिटल्स और किम्स हेल्थ के 19 अस्पतालों को चरणबद्ध तरीके से रिन्यूएबल एनर्जी पर लाया जाएगा। पहले चरण में ओडिशा, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र शामिल हैं। इसके बाद दूसरे चरण में आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु, तीसरे चरण में केरल और चौथे चरण में मध्य प्रदेश व तेलंगाना शामिल होंगे। यह चरणबद्ध विस्तार अस्पतालों के संचालन को बिना प्रभावित किए रिन्यूएबल एनर्जी को बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है।
अस्पतालों में 24×7 सेवाएं चलती हैं, जहां ऊर्जा की निरंतर उपलब्धता मरीजों की देखभाल के लिए बेहद जरूरी होती है। ऐसे में रिन्यूएबल एनर्जी की ओर बढ़ना न सिर्फ रणनीतिक बल्कि संचालन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण कदम है। इससे लागत नियंत्रण, ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरणीय जिम्मेदारी को मजबूती मिलेगी। बढ़ती बिजली लागत के बीच यह बदलाव हेल्थकेयर सेक्टर के लिए एक अहम रणनीतिक पहल बनकर उभर रहा है।
क्वालिटी केयर इंडिया अपने नेटवर्क में कुल लगभग 30 मेगावाट रिन्यूएबल क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखता है, जिसमें पहले चरण में करीब 6 मेगावाट क्षमता जोड़ी जाएगी। लंबे समय में कंपनी का लक्ष्य अपनी कुल ऊर्जा जरूरतों का लगभग 80% हिस्सा रिन्यूएबल स्रोतों से पूरा करना है। इसके लिए सोलर, विंड और बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) का हाइब्रिड मॉडल अपनाया जाएगा।
इस बदलाव से सालाना बिजली खर्च में लगभग 20% तक कमी आने की उम्मीद है। साथ ही बिजली दरों में उतार-चढ़ाव से भी सुरक्षा मिलेगी, जो ऊर्जा पर निर्भर हेल्थकेयर सेवाओं के लिए बेहद जरूरी है।
पर्यावरण के लिहाज से, पहले चरण में हर साल करीब 8,000 टन कार्बन उत्सर्जन कम होने का अनुमान है, जबकि पूरे प्रोजेक्ट के लागू होने के बाद यह कमी लगभग 40,000 टन प्रति वर्ष तक पहुंच सकती है।
यह प्रोजेक्ट ग्रुप कैप्टिव मॉडल के तहत लागू किया जा रहा है, जिसमें लंबी अवधि की बिजली खरीद और इक्विटी भागीदारी शामिल है। इससे क्वालिटी केयर इंडिया को सस्ती और स्थिर स्वच्छ ऊर्जा मिल सकेगी, साथ ही नियामकीय अनुपालन भी सुनिश्चित होगा।
एम्पिन एनर्जी ओडिशा और छत्तीसगढ़ के प्रोजेक्ट्स को संभालेगी, जबकि रेडियंस रिन्यूएबल्स महाराष्ट्र में प्रोजेक्ट्स को लागू करेगी। दोनों कंपनियों के पास बड़े स्तर पर रिन्यूएबल एनर्जी समाधान देने का अनुभव है।
वरुण खन्ना, ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर, क्वालिटी केयर इंडिया लिमिटेड, ने कहा,
“जैसे-जैसे हम अपने नेटवर्क का विस्तार कर रहे हैं, सस्टेनेबिलिटी अब विकल्प नहीं, बल्कि हमारी मजबूती और दक्षता की नींव बन चुकी है। ग्रुप कैप्टिव सोलर मॉडल हमें ऊर्जा के उपभोक्ता से आगे बढ़ाकर एक सक्रिय भागीदार बनाता है, जहां लागत, विश्वसनीयता और पर्यावरणीय प्रभाव पर हमारा बेहतर नियंत्रण होता है। यह हमारे हेल्थकेयर संचालन में सस्टेनेबिलिटी को मूल रूप से शामिल करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।”
यह पहल क्वालिटी केयर इंडिया के व्यापक रिन्यूएबल एनर्जी विस्तार कार्यक्रम की शुरुआत है। आगे के चरणों में इस मॉडल को और अस्पतालों तक बढ़ाने की योजना पर काम किया जा रहा है।



