भारत सरकार के 8वें वेतन आयोग ने साफ कर दिया है कि ऑफिशियल वेबसाइट के जरिए मेमोरेंडम जमा करने की आखिरी तारीख 30 अप्रैल तक खुली है. यह जानकारी 20 अप्रैल की प्रेस रिलीज में दी गई, जिससे लोगों का कन्फ्यूजन दूर हो गया और पूरी प्रक्रिया अब क्लियर है.
20 अप्रैल की जो डेडलाइन थी, वो सिर्फ उन यूनियनों और एसोसिएशनों के लिए थी जो शुरुआती मीटिंग्स में जल्दी बातचीत करना चाहते थे. बाकी सभी लोग जैसे सरकारी कर्मचारी, पेंशनर्स और अन्य जुड़े हुए लोग अभी भी अपने सुझाव और विचार दे सकते हैं. यानी अप्रैल के बाकी दिन इस प्रक्रिया में हिस्सा लेने का अच्छा मौका हैं.
8वां वेतन आयोग क्यों बनाया गया?
सरकार ने 8वां वेतन आयोग इसलिए बनाया है ताकि सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स की सैलरी, भत्ते और पेंशन सिस्टम की समीक्षा की जा सके और जरूरत के हिसाब से उसमें बदलाव सुझाए जा सकें. सरकार हर 10 साल में ऐसा आयोग बनाती है, ताकि सैलरी और भत्ते महंगाई और बदलती जिम्मेदारियों के हिसाब से अपडेट रह सकें.
प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की 28 अक्टूबर 2025 की एक प्रेस रिलीज के अनुसार, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के Terms of Reference को मंज़ूरी दे दी है. इसका मुख्य उद्देश्य निष्पक्षता बनाए रखना, मनोबल बढ़ाना और प्राइवेट सेक्टर में मिल रहे वेतन के साथ प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करना था.
अभी का लेटेस्ट अपडेट क्या है?
20 अप्रैल को जारी स्पष्टीकरण में दो अहम डेडलाइन बताई गईं. जो यूनियन और एसोसिएशन आयोग के साथ शुरुआती दौर में जल्दी बातचीत करना चाहते थे, उन्हें 20 अप्रैल तक अपना मेमोरेंडम जमा करना था, लेकिन यह समय सीमा अब खत्म हो चुकी है. हालांकि, वेबसाइट के जरिए मेमोरेंडम जमा करने की बड़ी और अहम डेडलाइन अभी भी 30 अप्रैल तक खुली हुई है. इसका मतलब है कि जो लोग पहले अपनी बात नहीं रख पाए थे, उनके पास अब भी मौका है कि वे अपने सुझाव, मांगें और विचार आयोग तक पहुंचा सकें.



