Home विदेश भारत-अफ्रीका मंच शिखर सम्मेलन: वैश्विक सहयोग की नई दिशा

भारत-अफ्रीका मंच शिखर सम्मेलन: वैश्विक सहयोग की नई दिशा

4
0

भारत का नया कदम: अफ्रीका के साथ सहयोग

दुनिया विभिन्न संघर्षों में उलझी हुई है, लेकिन भारत वैश्विक चुनौतियों का सामना करने और विकासशील देशों की समस्याओं के समाधान के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रहा है।

इसी संदर्भ में, दिल्ली में अफ्रीकी देशों के प्रमुख नेता एकत्रित होंगे, जहां चौथा भारत-अफ्रीका मंच शिखर सम्मेलन 28 से 31 मई 2026 तक आयोजित किया जाएगा। इस सम्मेलन में अफ्रीकी महाद्वीप के विभिन्न राष्ट्राध्यक्ष, अफ्रीकी संघ आयोग और क्षेत्रीय संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसका उद्देश्य भारत और अफ्रीका के बीच बहुआयामी साझेदारी को मजबूत करना और भविष्य के सहयोग के लिए एक ठोस रूपरेखा तैयार करना है.

सम्मेलन का विषय और तैयारी

विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने नई दिल्ली में इस सम्मेलन का प्रतीक चिन्ह, विषय और वेबसाइट का अनावरण किया। इस बार सम्मेलन का विषय ‘भारत-अफ्रीका रणनीतिक साझेदारी: नवाचार, लचीलापन और समावेशी परिवर्तन’ है, जो इस रिश्ते की गहराई को दर्शाता है। सम्मेलन से पहले 28 मई को वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक और 29 मई को विदेश मंत्रियों की बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों पर चर्चा की जाएगी.

भारत-अफ्रीका मंच का महत्व

भारत-अफ्रीका मंच शिखर सम्मेलन आपसी संवाद को मजबूत करने और लाभकारी सहयोग को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। यह साझेदारी समानता, परस्पर सम्मान और साझा समृद्धि के सिद्धांतों पर आधारित है। पिछले सम्मेलनों के परिणामस्वरूप, अफ्रीका में भारत की विकास सहायता और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों का उल्लेखनीय विस्तार हुआ है, जिसने दोनों पक्षों के संबंधों को और मजबूत किया है.

भू-राजनीतिक संदर्भ

यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब विश्व जटिल भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। इस संदर्भ में, अफ्रीका का महत्व बढ़ रहा है और भारत ने अपनी विदेश नीति में अफ्रीका को केंद्रीय स्थान दिया है। भारत ने अफ्रीका में अपने राजनयिक संबंधों का विस्तार किया है और आज वह अफ्रीका के प्रमुख व्यापारिक भागीदारों में से एक है, जो दर्शाता है कि भारत का अफ्रीका के साथ जुड़ाव दीर्घकालिक है.

ऐतिहासिक और सभ्यतागत संबंध

इस साझेदारी की जड़ें ऐतिहासिक और सभ्यतागत संबंधों में निहित हैं। सदियों से सांस्कृतिक आदान-प्रदान और मानवीय संपर्कों ने इस रिश्ते को मजबूत किया है। उपनिवेशवाद के खिलाफ संघर्ष के दौरान भारत ने अफ्रीकी देशों के साथ एकजुटता दिखाई, जिससे यह संबंध और गहरा हुआ.

आर्थिक और सुरक्षा सहयोग

यह सम्मेलन कई स्तरों पर महत्वपूर्ण है। यह ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने का माध्यम है। भारत ने अफ्रीका को वैश्विक शासन व्यवस्था में उचित स्थान दिलाने का समर्थन किया है। 2023 में जी-20 में अफ्रीकी संघ को शामिल करना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था. इसके अलावा, यह सम्मेलन आर्थिक और व्यापारिक सहयोग को नई गति देगा, जिसमें ऊर्जा, आधारभूत संरचना, कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को विस्तार मिलने की संभावना है.

भारत की विदेश नीति में अफ्रीका का स्थान

विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा कि भारत की विदेश नीति में अफ्रीका का महत्वपूर्ण स्थान है। उन्होंने कहा कि भारत-अफ्रीका संबंध ‘हमारे सभ्यतागत संबंधों’ पर आधारित हैं। उन्होंने यह भी बताया कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम की कहानी अफ्रीका से गहराई से जुड़ी हुई है.