बदलते मौसम का सीधा असर अब किसानों की फसलों पर साफ दिखाई दे रहा है, जिससे उत्पादन और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो रहे हैं. ऐसे में विशेषज्ञों ने क्या सलाह दी आइए जानते है.
मौसम अब पहले जैसा स्थिर नहीं रहा. हर दिन बदलते तापमान, अचानक बारिश और तेज धूप का सीधा असर किसानों की फसलों पर पड़ रहा है. खासकर इस समय गेहूं की फसल सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ती ही जा रही है. इस साल गेहूं की फसल पर मौसम की मार साफ तौर पर देखी जा सकती है. जहां एक ओर समय से पहले तेज गर्मी पड़ रही है, वहीं कई जगहों पर अचानक बारिश भी हो रही है. तेज धूप और बढ़ते तापमान की वजह से गेहूं के दानों का सही तरीके से विकास नहीं हो पा रहा है. दाने सिकुड़ रहे हैं और उनका वजन भी कम हो रहा है, जिससे उत्पादन में गिरावट की आशंका बढ़ गई है. वही पिछले साल की तुलना में इस बार नुकसान ज्यादा देखने को मिल रहा है, क्योंकि मौसम का संतुलन लगातार बिगड़ रहा है.
मौसम अब पहले जैसा स्थिर नहीं रहा. हर दिन बदलते तापमान, अचानक बारिश और तेज धूप का सीधा असर किसानों की फसलों पर पड़ रहा है. खासकर इस समय गेहूं की फसल सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ती ही जा रही है. इस साल गेहूं की फसल पर मौसम की मार साफ तौर पर देखी जा सकती है. जहां एक ओर समय से पहले तेज गर्मी पड़ रही है, वहीं कई जगहों पर अचानक बारिश भी हो रही है. तेज धूप और बढ़ते तापमान की वजह से गेहूं के दानों का सही तरीके से विकास नहीं हो पा रहा है. दाने सिकुड़ रहे हैं और उनका वजन भी कम हो रहा है, जिससे उत्पादन में गिरावट की आशंका बढ़ गई है. वही पिछले साल की तुलना में इस बार नुकसान ज्यादा देखने को मिल रहा है, क्योंकि मौसम का संतुलन लगातार बिगड़ रहा है.
बदलते मौसम का फसलों पर बढ़ता असर
सिर्फ गेहूं ही नहीं, बल्कि चना, सरसों और सब्जियों की फसलें भी इस बदलते मौसम से प्रभावित हो रही हैं. चना और सरसों में जहां फूल और दाने झड़ने की समस्या सामने आ रही है, वहीं सब्जियों में गुणवत्ता भी खराब हो रही है. तेज धूप पौधों को झुलसा रही है और अचानक बारिश से फसलों में रोग लगने का खतरा भी बढ़ रहा है.
किसानों के लिए विशेषज्ञों की जरूरी सलाह
ऐसे में कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों को अब पहले से ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है. उनकी सलाह है कि खेतों में नमी बनाए रखने के लिए हल्की सिंचाई करते रहें, लेकिन जरूरत से ज्यादा पानी न दें इससे भी फसल खराब हो सकती है. जहां तापमान बहुत ज्यादा हो रहा है, वहां फसलों को बचाने के लिए मल्चिंग का इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे मिट्टी की नमी बरकरार रहती है और पौधों को गर्मी से राहत मिलती है. विशेषज्ञ यह भी सुझाव देते हैं कि किसान फसलों की नियमित निगरानी करें और किसी भी रोग या कीट का संकेत मिलते ही तुरंत उसका उपचार करें.
कटाई के समय बरतें सावधानी
इसके अलावा, अगर बात कटाई की करें तो विशेषज्ञों के अनुसार गेहूं की कटाई सही समय पर करना बेहद जरूरी है. अगर फसल पूरी तरह पक जाए तो देर नहीं करनी चाहिए. इस समय तेज धूप के बाद अचानक बारिश होने का खतरा रहता है, जिससे खड़ी फसल गिर सकती है और दाने खराब हो सकते हैं. इसलिए मौसम का पूर्वानुमान देखकर ही कटाई का निर्णय लेना बेहतर माना गया है.
रबी के बाद हरी खाद से बढ़ाएं मिट्टी की उर्वरता
साथ ही विशेषज्ञों का मानना है कि, यदि रबी फसल की कटाई पूरी हो चुकी है, तो खेत को खाली छोड़ने के बजाय उसका सही उपयोग करना जरूरी है. वही मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के लिए हरी खाद का इस्तेमाल एक बेहतर विकल्प माना जाता है. इसके लिए आप ढैंचा, सनई और लोबिया जैसी फसलें बो सकते हैं, जो मिट्टी में पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ाने में मदद करती हैं. हालांकि, बुवाई करते समय इस बात का खास ध्यान रखें कि खेत में पर्याप्त नमी हो, ताकि बीजों का अंकुरण अच्छा हो सके और फसल बेहतर तरीके से विकसित हो.
बदलते दौर में खेती के लिए नई रणनीति जरूरी
बदलते मौसम के इस दौर में खेती करना पहले से कई ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गया है. इसलिए जरूरी है कि किसान नई तकनीकों और विशेषज्ञों की सलाह को अपनाएं. साथ ही समय रहते सही कदम उठाकर ही फसलों को नुकसान से बचाया जा सकता है और बेहतर उत्पादन हासिल किया जा सकता है.



