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Delhi: NCRB रिपोर्ट पर कांग्रेस का केंद्र सरकार पर हमला…

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दिल्ली अपराध के मामलों में देश के 19 महानगरों में सबसे ऊपर पहुंच गई है. जिसे लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने NCRB की रिपोर्ट को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला है.

देश की राजधानी दिल्ली में बढ़ते अपराधों को लेकर सियासत तेज हो गई है. दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की 2024 रिपोर्ट को आधार बनाते हुए केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर तीखा हमला बोला है.

उन्होंने कहा कि NCRB की रिपोर्ट तो एक साल पुरानी है, जबकि मौजूदा समय में राजधानी की कानून व्यवस्था उससे भी ज्यादा भयावह स्थिति में पहुंच चुकी है. उन्होंने आरोप लगाया कि अपराध रोकने वाली पुलिस ही अब खुलेआम गोली मारकर हत्याएं कर रही है और केंद्रीय गृह मंत्रालय की निष्क्रियता के कारण दिल्ली अपराध के मामलों में देश के 19 महानगरों में सबसे ऊपर पहुंच गई है.

महिलाओं के खिलाफ आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

देवेंद्र यादव ने कहा कि NCRB रिपोर्ट में महिलाओं के खिलाफ अपराधों के आंकड़े बेहद डराने वाले हैं. रिपोर्ट के अनुसार साल 2024 में दहेज हत्या के 109 मामले, रेप के 1058 मामले, घरेलू हिंसा और क्रूरता के 4646 मामले, अपहरण के 3974 मामले और यौन उत्पीड़न के 316 मामले दर्ज किए गए. प्रति एक लाख आबादी पर महिलाओं के खिलाफ अपराध की दर 176.8 दर्ज की गई.

उन्होंने कहा कि दहेज हत्या के मामलों में लगातार भयावह तस्वीर सामने आ रही है. साल 2023 में 114 और 2022 में 129 महिलाओं की दहेज के कारण हत्या हुई थी. कांग्रेस का आरोप है कि सरकार महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने में पूरी तरह विफल रही है.

देश में सबसे ज्यादा संगीन अपराध दिल्ली में

दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया कि राजधानी में प्रति लाख आबादी पर संगीन अपराधों की दर 1688 है, जो देश के सभी महानगरों में सबसे अधिक है. उन्होंने कहा कि साल 2024 में दिल्ली में 2 लाख 75 हजार 402 गंभीर आपराधिक मामले दर्ज किए गए, लेकिन दिल्ली पुलिस केवल 31.9 प्रतिशत मामलों में ही आरोप पत्र दाखिल कर सकी, जो देश के सभी महानगरों में सबसे कम है.

उन्होंने सवाल उठाया कि जब पुलिस अपराधियों के खिलाफ समय पर चार्जशीट ही दाखिल नहीं कर पा रही, तो पीड़ितों को न्याय कैसे मिलेगा. यादव ने आरोप लगाया कि पुलिस की लापरवाही और पक्षपातपूर्ण रवैये के कारण अपराधियों के हौसले बुलंद हो चुके हैं और दिल्ली अपराध में नंबर वन बनती जा रही है.

अदालतों में लंबित मामलों का बढ़ता पहाड़

देवेंद्र यादव ने कहा कि राजधानी में हत्या, रेप, लूट, साइबर क्राइम, आर्थिक अपराध और नशे के कारोबार जैसे मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. इसके साथ ही अदालतों में लंबित मामलों का बोझ भी तेजी से बढ़ रहा है. उन्होंने बताया कि आईपीसी और बीएनएस के तहत न्याय के लिए साल 2024 में 4 लाख 34 हजार 981 मामले लंबित रहे.

उन्होंने कहा कि पूरे साल में केवल 50 हजार 305 मामलों का ट्रायल पूरा हो सका, जबकि 88.3 प्रतिशत मामले अब भी अदालतों में अटके हुए हैं. ट्रायल पूरे होने वाले मामलों में कुल सजा दर 74.1 प्रतिशत रही, लेकिन रेप मामलों में सजा दर सिर्फ 24.1 प्रतिशत दर्ज की गई. वहीं यौन उत्पीड़न के मामलों में किसी को भी सजा नहीं मिलना बेहद चिंताजनक बताया गया.

आर्थिक और साइबर अपराधों पर भी उठे सवाल

कांग्रेस नेता ने कहा कि आर्थिक अपराधों के 25 हजार 532 लंबित मामलों में केवल 4524 मामलों की सुनवाई हो सकी और इनमें सजा की दर 27.3 प्रतिशत रही. वहीं साइबर अपराध के 1152 मामलों में से केवल 52 मामलों का ट्रायल पूरा हुआ. उन्होंने आरोप लगाया कि बढ़ते डिजिटल अपराधों से निपटने में भी एजेंसियां पूरी तरह नाकाम साबित हो रही हैं.

अदालतों में जजों की कमी पर बीजेपी सरकार घिरी

देवेंद्र यादव ने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट और जिला अदालतों में जजों की भारी कमी के कारण मामलों का बैकलॉग लगातार बढ़ रहा है. उन्होंने दावा किया कि दिल्ली हाईकोर्ट में 60 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 44 जज कार्यरत हैं, जबकि 16 पद खाली पड़े हैं.

उन्होंने कहा कि जिला अदालतों की स्थिति भी गंभीर है. यहां 897 स्वीकृत पदों में से केवल 736 जज कार्यरत हैं और 161 पद खाली हैं. यादव के मुताबिक जजों की कमी के कारण हर न्यायाधीश पर औसतन 2170 मामलों का बोझ है, जिससे लोगों को समय पर न्याय नहीं मिल पा रहा है.