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Special FASTag: स्पेशल FASTag लाने पर किया जा रहा विचार;ऐसी गाड़ियों के लिए खास सावधानी….

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Special FASTag: इसे लेने की प्रक्रिया सामान्य FASTag से अलग होगी. इसे किसी बैंक या दुकान से नहीं खरीदा जा सकेगा. इसके लिए वाहन मालिक को इंडियन हाईवे मैनेजमेंट कंपनी के पोर्टल पर आवेदन करना होगा.

भारत में हाईवे पर सफर को तेज और बिना रुकावट वाला बनाने के लिए सरकार अब नया AI बेस्ड टोल सिस्टम लागू करने जा रही है. इस सिस्टम में पुराने टोल प्लाजा और बैरियर धीरे-धीरे हटाए जाएंगे और उनकी जगह कैमरे, सेंसर और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट पहचान (ANPR)  तकनीक काम करेगी, यानी गाड़ियों को टोल देने के लिए रुकना नहीं पड़ेगा, बल्कि सिस्टम खुद वाहन की पहचान करके सीधे टोल काट लेगा. इसी नई व्यवस्था को मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) टोलिंग सिस्टम कहा जा रहा है.

स्पेशल FASTag लाने पर किया जा रहा विचार

इस नई तकनीक के सामने एक बड़ी समस्या भी आ रही है. भारत में कुछ वाहन ऐसे हैं जिन्हें टोल टैक्स से छूट मिली हुई है, जिसमें राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों की गाड़ियां, सेना और कई इमरजेंसी सेवाओं वाली गाड़ियां शामिल हैं. AI सिस्टम कई बार इन गाड़ियों को नॉर्मल गाड़ी समझ सकता है और गलती से उन पर जुर्माना या ई-नोटिस जारी हो सकता है. इसी परेशानी को रोकने के लिए केंद्र सरकार अब स्पेशल FASTag लाने पर विचार कर रही है.

सरकार की योजना है कि इन विशेष गाड़ियों के लिए अलग कैटेगरी का FASTag जारी किया जाए. यह FASTag नॉर्मल FASTag की तरह काम करेगा, लेकिन इसमें टोल नहीं कटेगा. जैसे ही कोई गाड़ी हाईवे के AI टोल सिस्टम से गुजरेगी, सिस्टम उसे पहचान लेगा और बिना किसी रुकावट के आगे जाने देगा. इससे गलत चालान या पेनल्टी से बचाव होगा और सुरक्षा एजेंसियों को परेशानी नहीं होगी.

इस समस्या के समाधान के लिए सरकार दो विकल्पों पर काम कर रही है. पहला विकल्प यह है कि सड़क परिवहन मंत्रालय के पास सभी टोल-फ्री गाड़ियों का एक बड़ा केंद्रीय डेटाबेस बनाया जाए, जो सीधे AI टोल सिस्टम से जुड़ा हो. दूसरा विकल्प यह है कि ऐसे विभागों और एजेंसियों को खास अनलिमिटेड फ्री मूवमेंट FASTag दिए जाएं.

ऐसी गाड़ियों के लिए खास सावधानी

सेना और रक्षा से जुड़ी गाड़ियों की सुरक्षा को देखते हुए सरकार खास सावधानी बरत रही है. सैन्य वाहनों की पहचान उनकी खास डिफेंस नंबर प्लेट से की जा सकती है. जैसे ही ऐसा वाहन टोल कॉरिडोर पार करेगा, सिस्टम उसकी पहचान कर लेगा और सुरक्षा कारणों से उसका डेटा तुरंत डिलीट भी कर दिया जाएगा, ताकि किसी तरह की संवेदनशील जानकारी सुरक्षित रहे.

सरकार ने यह भी साफ किया है कि यह सुविधा हर सरकारी कर्मचारी को नहीं मिलेगी. सांसद, विधायक या अन्य अधिकारियों के निजी वाहन तभी टोल छूट के दायरे में आएंगे जब वे पूरी तरह अधिकृत सरकारी कार्य पर हों. यानी सामान्य निजी इस्तेमाल के लिए यह विशेष सुविधा उपलब्ध नहीं होगी.

स्पेशल FASTag लेने की प्रक्रिया भी सामान्य FASTag से अलग होगी. इसे किसी बैंक या दुकान से नहीं खरीदा जा सकेगा. इसके लिए वाहन मालिक को इंडियन हाईवे मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (IHMCL) के पोर्टल पर आवेदन करना होगा. वहां वाहन की RC, विभाग का अधिकृत पत्र और अन्य जरूरी दस्तावेज जमा करने होंगे. जांच पूरी होने के बाद वाहन के लिए जीरो बैलेंस स्पेशल FASTag जारी किया जाएगा.