कोलकाता में मार्को रुबियो ने मिशनरीज ऑफ चैरिटी की सेवाओं की तारीफ की. हालांकि, इस दौरे के बाद केंद्र सरकार और FCRA नियमों को लेकर बहस तेज हो गई.
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कोलकाता स्थित मिशनरीज ऑफ चैरिटी के ‘मदर हाउस’ का दौरा किया और संस्था की दुनियाभर में की जाने वाली मानवीय सेवाओं की सराहना की. उन्होंने गरीबों, बीमारों और जरूरतमंदों के लिए संस्था के काम को सम्मान दिया.
मार्को रुबियो के इस दौरे के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में केंद्र सरकार को लेकर बहस भी तेज हो गई है. इस मामले पर TMC की नेता सागरिका घोष ने एक्स पर आरोप लगाते हुए लिखा कि सरकार एक तरफ ईसाई संस्थाओं पर सख्ती दिखाती है, जबकि दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के सामने मदर टेरेसा की संस्था को पेश कर रही है.
आलोचकों का कहना है कि केंद्र सरकार की ओर से प्रस्तावित FCRA नियमों और दूसरे फैसलों के कारण मिशनरीज ऑफ चैरिटी जैसी संस्थाओं को विदेशी फंड लेने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा. साथ ही यह भी आरोप लगाए गए कि चर्च से जुड़ी संपत्तियों और ईसाई संस्थाओं को लेकर सरकार का रवैया सख्त रहा है. इन आरोपों में कहा गया कि ऐसी नीतियों से शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सेवा से जुड़े काम प्रभावित हो सकते हैं, जिनके लिए मिशनरीज ऑफ चैरिटी जैसी संस्थाएं लंबे समय से जानी जाती हैं.
मिशनरीज ऑफ चैरिटी की स्थापना किसने की थी?
हालांकि सरकार की ओर से पहले भी यह कहा जाता रहा है कि FCRA से जुड़े नियम सभी संस्थाओं के लिए समान रूप से लागू होते हैं और इनका उद्देश्य विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता बनाए रखना है. मिशनरीज ऑफ चैरिटी की स्थापना मदर टेरेसा ने की थी. यह संस्था दुनिया भर में गरीबों और जरूरतमंदों की सेवा के लिए काम करती है और कोलकाता स्थित ‘मदर हाउस’ इसका मुख्य केंद्र है.



