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फाल्टा उपचुनाव में BJP की प्रचंड जीत, देबांग्शु पांड्या को विधानसभा भेजने के लिए जोरदार जनादेश…

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डायमंड हार्बर मॉडल अब तृणमूल के नुकसान का मॉडल बन गया है. यह बयान फाल्टा में बीजेपी की प्रचंड जीत लगभग तय हो जाने के बीच मुख्यमंत्री शुवेंदु अधिकारी ने दी है.

यहां से बीजेपी उम्मीदवार देबांग्शु पांडा उपचुनाव में एक लाख से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की है. उनके अलावा सीपीएम दूसरे स्थान पर और कांग्रेस उम्मीदवार चौथे स्थान पर रहा. तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार जहांगीर खान चौथे स्थान पर खिसक गए.

इसी को लेकर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि सबसे पहले और जरूरी बात, फाल्टा के लोगों के सामने नतमस्तक होकर उन्हें प्रणाम करता हूं. इन्हें फाल्टा विधानसभा उपचुनाव में बीजेपी के उम्मीदवार देबांग्शु पांड्या को विधानसभा भेजने के लिए जोरदार जनादेश दिया है. फाल्टा के वोटर्स का विशेष आभारी हूं.

शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि अपील की थी कि वे भाजपा उम्मीदवार को लाखों वोटों के अंतर से जिताएं, और जीत का अंतर एक लाख के आंकड़े को पार कर गया है. हम विकास के जरिए इस कर्ज को चुकाएंगे. हम एक स्वर्णिम फाल्टा के लिए प्रतिबद्ध हैं.

टीएमसी का असली कंकाल रूप सबके सामने गया है

शुवेंदु अधिकारी ने कहा कि ऐसी पार्टी जो सिद्धांतों और विचारधारा से पूरी तरह खाली थी. जो एक माफिया कंपनी में बदल चुकी थी. सत्ता गंवाने के बाद उसका असली कंकाल जैसा रूप सबके सामने आ गया है. सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करके इस पार्टी ने जनता का पैसा लूटा. लोगों की गाड़ी कमाई को जबरदस्ती लूटा है. सिंडिकेट और धमकियों के माहौल के जरिए उस पर कब्जा कर लिया है. इसके नेता तो पूरे राज्यों को अपनी निजी जागीर समझने लगे थे.

एक ऐसा धोखेबाज जो कहीं से टपक पड़ा और खुद को कमांडर कहने लगा. ऐसा कोई अपराध नहीं, जिसे इस ठग ने अंजान न दिया हो. अपना खुद का आपराधिक सिंडिकेट खड़ा करने के लिए शेर की खाल ओढे़ इस बिल्ली ने लोकतंत्र का गला घोंटने में भी जरा भी हिचकिचाट महसूस नहीं की. पिछले चुनाव को एक मजाक बनाकर तृणमूल ने इस इलाके में डेढ़ लाख वोटों की बढ़त बना ली थी. पंद्रह साल बाद जब लोगों को अपने मन से वोट डालने की आजादी वापस मिली, तब जाकर असली सच्चाई सामने आई.

शुवेंदु ने कहा कि अभी तो बस शुरुआत है. अस्वीकृति की एक लंबी यात्रा तय करनी है. आने वाले दिनों में टीएमसी को चुनाव में NOTA के खिलाफ एक कड़े मुकाबले का सामना करना पड़ेगा. टीएमसी त्रिपुरा चुनाव में NOTA से हार चुकी है.