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Organic Farming: खीरे की ऑर्गेनिक खेती से पलटी किस्मत, युवाओं के लिए मिसाल बनी यह मॉडर्न तकनीक…

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ITI ग्रेजुएट युवा द्वारा नौकरी का ऑफर ठुकराकर ऑर्गेनिक फार्मिंग चुनने की पूरी सक्सेस स्टोरी. महज 23 दिनों में की 1.5 लाख की बंपर कमाई.

डिग्री पूरी करने के बाद जहां ज्यादातर युवा सरकारी या प्राइवेट नौकरी के पीछे भागते हैं वहीं उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के एक आईटीआई (ITI) ग्रेजुएट ने कुछ अलग करने की ठानी. उन्होंने पारंपरिक नौकरी को बाय-बाय बोलकर अपने खेतों में ऑर्गेनिक फार्मिंग शुरू की और सफलता का एक नया रिकॉर्ड बना दिया. इस होनहार युवा किसान ने महज 23 दिनों के अंदर जैविक खेती के जरिए पूरे 1.5 लाख रुपये का बंपर मुनाफा कमाया है.

आज के समय में जब लोग खेती को घाटे का सौदा मानते हैं, तब इस युवा ने अपनी सूझबूझ और मॉडर्न तकनीकों का इस्तेमाल करके यह साबित कर दिया कि अगर सही प्लानिंग और मेहनत के साथ जमीन से जुड़ा जाए, तो मिट्टी भी सोना उगल सकती है. चलिए आपको बताते हैं कैसे इस शख्स ने ऑर्गेनिक खेती से किया कमाल.

खीरे की ऑर्गेनिक खेती से पलटी किस्मत

मऊ के इस युवा किसान ने अपने खेतों में हाइब्रिड और एडवांस वैरायटी के खीरे की खेती शुरू की. उन्होंने केमिकल वाले फर्टिलाइजर्स को पूरी तरह छोड़कर गोबर की खाद और जैविक खाद का इस्तेमाल किया. जिससे फसल की क्वालिटी लाजवाब हो गई. इस ऑर्गेनिक खीरे की डिमांड मार्केट में इतनी तेजी से बढ़ी कि महज 23 दिनों के अंदर ही उनकी पहली कमर्शियल लॉट पूरी तरह बिक गई.

अपनी फसल को सीधे मंडियों और लोकल वेंडर्स तक पहुंचाकर उन्होंने बीच के दलालों को खत्म किया. जिससे उन्हें अपनी उपज का सबसे बेस्ट रेट मिला. सिर्फ तीन हफ्तों के थोड़े से समय में डेढ़ लाख रुपये की यह कमाई यह साफ दिखाती है कि कम समय वाली फसलों में कितना शानदार प्रॉफिट छिपा हुआ है.

युवाओं के लिए मिसाल बनी यह मॉडर्न तकनीक

इस आईटीआई पास-आउट युवा की कामयाबी आज के उन सभी पढ़े-लिखे युवाओं के लिए एक बड़ी मिसाल है. जो रोजगार के लिए सिर्फ शहरों का रुख करते हैं. उन्होंने मल्चिंग फिल्म और ड्रिप इरिगेशन जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाकर पानी और पैसे दोनों की भारी बचत की जिससे उनकी लागत बेहद कम हो गई. ऑर्गेनिक होने के कारण उनके खीरे की चमक और स्वाद आम खीरों से काफी बेहतर था.

जिसने ग्राहकों को खूब आकर्षित किया. नौकरी के सीमित वेतन से आगे बढ़कर खुद का एग्री-बिजनेस खड़ा करने का उनका यह फैसला रंग लाया. आज वे न सिर्फ खुद एक आत्मनिर्भर उद्यमी बन चुके हैं बल्कि अपने इलाके के दूसरे किसानों और युवाओं को भी इस स्मार्ट फार्मिंग को अपनाने के लिए लगातार इंस्पायर कर रहे हैं.