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साल 2015 पड़ा था सबसे घातक नौतपा, सड़कें सूनी, अस्पताल भरे, इस बार क्या होगा….

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आमतौर पर मई के आखिर में जब सूर्य कर्क रेखा में आता है तो भारत में नौ दिनों के लिए जबरदस्त गर्मी और लू का प्रकोप बढ़ जाता है. इसका समय हर साल 25 मई से 2 जून के बीच होता है. वर्ष 2015 के नौतपा को उसकी घातक प्रवृत्ति के लिए जाना जाता है. जिसमें काफी लोग मारे गए थे.

कहा जाता है कि उस साल देश में सबसे घातक नौतपा पड़ा था. हाहाकार मच गया था. दोपहर में सड़कें सूनी. अस्पताल भर गए. पानी और बिजली की किल्लत. आमतौर पर माना जाता है कि जिस साल नौतपा जितना जबरदस्त होता है, मानसून उतना बेहतर आता है, वैसा भी नहीं हुआ. इस साल का नौतपा भी भीषण लू के साथ शुरू हुआ है.

वास्तव में नौतपा के दौरान सबसे ज्यादा तपिश कर्क रेखा और उसके आस-पास के क्षेत्रों यानी मुख्य रूप से भारत और उपमहाद्वीप के इलाकों में होती है.

मई 2015 के आखिरी हफ्ते में नौतपा के दौरान पूरे उत्तर और मध्य भारत सहित दक्षिण भारत के कुछ हिस्से विशेषकर आंध्र प्रदेश और तेलंगाना भयंकर लू की चपेट में थे. देश के कई हिस्सों में पारा 47°C से 48°C को पार कर गया. ये भारत के इतिहास का सबसे दर्दनाक ग्रीष्म कहर बन गया. भीषण लू चल रही थी. जिससे देश भर में लगभग 2,500 से अधिक लोगों की जान चली गई. अस्पतालों में हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन के मरीजों की बाढ़ आ गई.

आमतौर पर नौतपा 25 मई से शुरू होता है. सूर्य की किरणें सीधे तीव्रता से पृथ्वी की ओर आती हैं. वर्ष 2015 में इसी दौरान दक्षिण और मध्य भारत में तापमान 45-48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया.

– हैदराबाद में तापमान 47°C से ऊपर गया
– तेलंगाना के खम्मम में 48°C दर्ज किया गया
– इलाहाबाद में 47.7°C तक तापमान पहुंचा
– दिल्ली में 46°C के आसपास गर्मी रही।

नासा ने बाद में अपनी रिपोर्ट में लिखा कि मई 2015 में भारत के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से 5.5°C तक अधिक था, जो असामान्य स्थिति थी.

जीवन मुश्किल हो गया

उस समय के अखबारों और टीवी रिपोर्टों में जो तस्वीरें आईं, वे बेहद चिंताजनक थीं. दोपहर में सड़कें खाली हो जाती थीं. आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के कई शहरों में दोपहर के समय बाजार करीब बंद जैसे दिखते थे. लोग सुबह जल्दी और शाम को ही बाहर निकलते थे. हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और बेहोशी के मामलों की बाढ़ आ गई थी. सरकारी अस्पतालों में अतिरिक्त बेड लगाने पड़े.

नासा और अन्य रिपोर्टों के अनुसार सबसे अधिक मौतें निर्माण मजदूरों, रिक्शा चालकों, खेतिहर मजदूरों, बुजुर्गों और बेघरों की हुईं. दिनभर खुले आसमान के नीचे काम करना जानलेवा हो गया.

बिजली और पानी पर दबाव

कई शहरों में बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई. कूलर, पंखे और एयर-कंडीशनर लगातार चल रहे थे. कुछ इलाकों में पानी की कमी की खबरें भी आईं.

मौतों का आंकड़ा

भारत में 2,500 से अधिक लोगों की मौत हुई. सबसे ज्यादा मौतें आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में हुईं. अकेले आंध्र प्रदेश में 1,700 से अधिक और तेलंगाना में लगभग 600 मौतें दर्ज की गईं. उस समय अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने इसे दुनिया की सबसे घातक हीटवेव घटनाओं में एक बताया. अखबारों ने लिखा,

– दोपहर में शहर भूतिया लग रहे हैं
– सड़कों पर लोग गिरकर बेहोश हो रहे हैं
– श्मशानों और कब्रिस्तानों में भीड़ बढ़ गई है
– अस्पतालों में ORS और ड्रिप की मांग बढ़ी

24-25 मई 2015 की रिपोर्टों में बताया गया कि कई जिलों में लोग 47°C तापमान में अचानक गिरकर मर रहे हैं. प्रशासन लोगों को दोपहर में घरों से न निकलने की सलाह दे रहा था.

क्या उस साल मानसून अच्छा रहा

ये माना जाता रहा है कि जिस तरह नौतपा जितना जबरस्त होता है. उस साल मानसून अच्छा होता है लेकिन भयंकर गर्मी के बावजूद 2015 का मानसून अच्छा नहीं माना जाता.

भारत में 2015 का दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से लगभग 14% कम रहा. ये लगातार दूसरा कमजोर मानसून वर्ष था. 2014 भी कमजोर रहा. जून में अंत तक मानसून आने से दक्षिण भारत को गर्मी से राहत मिली. हालांकि पूरे सीजन में बारिश की कमी बनी रही. कई राज्यों में सूखे जैसी स्थितियां बनीं.

क्या 2015 का नौतपा सबसे गर्म था?

रिकॉर्ड के हिसाब से “सबसे गर्म” कहना तो कठिन है लेकिन सबसे घातक नौतपा का साल तो ये जरूर था. मौतों की संख्या, गर्मी की अवधि, प्रभावित आबादी और सामाजिक असर को देखें तो 2015 का नौतपा भारत के इतिहास के सबसे कठिन और त्रासद नौतपों में एक था.

इस बार क्या होगा

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के ताजा अनुमानों और अलर्ट के मुताबिक, इस साल का नौतपा दो बिल्कुल अलग-अलग मौसम प्रणालियों का मिलाजुला रूप रह सकता है.

नौतपा की शुरुआत भीषण और रिकॉर्ड तोड़ हीटवेव के साथ हुई है लेकिन कुछ ही दिनों में धूल भरी आंधी और बारिश से आंशिक राहत मिलने की भी उम्मीद है. मैदानी इलाकों में तापमान 44°C से 47°C के बीच बना हुआ है. यूपी और राजस्थान के हॉटस्पॉट इलाकों में तापमान 48°सेंटीग्रेड के स्तर को भी छू चुका है.

मौसम विभाग के अनुसार, पाकिस्तान और राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों से आने वाली बेहद शुष्क पश्चिमी हवाएं मैदानी राज्यों में सीधी धूप के साथ मिलकर हवा को भट्टी की तरह तपा रही हैं. हालांकि उत्तर भारत में एक स्थानीय चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र सक्रिय हो रहा है, जिसके कारण देश के करीब 20 राज्यों में मौसम बदलेगा.

दिल्ली-NCR, उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब और हरियाणा में 26 और 27 मई को आसमान में बादल छाने और 50 किमी/घंटे की रफ्तार से धूल भरी आंधी चलने का अनुमान है.

मौसम विभाग ने 29 मई को उत्तर भारत के कई हिस्सों में तेज आंधी के साथ भारी बारिश की चेतावनी जारी की है. इससे तापमान में 2 से 3 डिग्री की गिरावट आ सकती है, जो तपते हुए नौतपा के बीच कुछ समय के लिए राहत देगी. हालांकि उमस बढ़ सकती है.