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TMC Political Crisis : भाजपा के ‘ग्रीन सिग्नल’ के इंतजार में 20 से ज्यादा सांसद!

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टीएमसी के भीतर एक बहुत बड़ा राजनीतिक विस्फोट होने की आहट सुनाई दे रहा है. बंगाल की सत्ता हाथ से जाने के बाद ममता बनर्जी की ‘महा-मुश्किल’ का दौर शुरू हो चुका है.

टीएमसी को जल्द ही बड़ा झटका लग सकता है. विधानसभा चुनाव में भाजपा से परास्त हुईं ममता के अच्छे दिन कभी लौट भी पाएंगे, इसमें संदेह का बीजारोपण हो गया है. सत्ता की हनक गई, समर्थक साथ छोड़ रहे, पार्षद भाग रहे और अब सांसदों-विधायकों के भागने की सुगबुगाहट शुरू हो गई है. कौन है टीएमसी सांसद काकोली घोष, जिसने ममता की नींद उड़ा रखी है.

बंगाल में बदलाव हो गया. अब बदलाव के दायरे का विस्तार हो रहा है. बंगाल में 206 सीटों के साथ भाजपा ने सरकार बना ली. ममता बनर्जी की टीएमसी 80 पर ही अटक गई. ममता अब भी मानने को तैयार नहीं कि उनकी हार स्वाभाविक है. यह 15 साल से जनता के भीतर पनप रहे असंतोष और आक्रोश की स्वाभाविक परिणति है. पर, ममता टीएमसी की हार को भाजपा और चुनाव आयोग की साजिश मानती हैं. वे अपनी हार पर रोज ही विलाप के अंदाज में दोनों को खरी-खोटी सुनाती हैं. अब तो हालत यह हो गई है कि टीएमसी के उनके साथी भी भरोसेमंद नहीं रहे. नगर निकायों के पार्षद थोक में इस्तीफा दे रहे हैं. टीएमसी के ज्यादातर सांसद और विधायक भाजपा के संपर्क में हैं. पार्टी की बैठकों-कार्यक्रमों में उनकी गैरहाजिरी इसका संकेत है. ममता को भी अब लगने लगा है कि उनके लोग जान-बूझ कर दूरी बना रहे हैं. तभी तो उन्हें कहना पड़ रहा है कि जिन्हें जाना है, वे चले जाएं. बचे-खुचे लोगों से वे टीएमसी को पुनर्जीवित कर लेंगी.

पार्षदों के थोक में इस्तीफे

विधानसभा चुनावों में हार के बाद नगरपालिकाओं में टीएमसी पार्षदों के सामूहिक इस्तीफे का सिलसिला शुरू हो गया है. आधा दर्जन से अधिक नगरपालिकाओं में थोक के भाव टीएमसी पार्षदों के इस्तीफे हुए हैं. यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा. फालता सीट पर आए नतीजे के बाद डायमंड हार्बर में भी पार्षदों के इस्तीफे का दौर शुरू हो गया है. पार्षदों के इस्तीफे की शुरुआत उत्तर 24 परगना जिले के भाटपाड़ा से हुई थी. कुल 35 में 30 पार्षदों ने एक साथ इस्तीफे सौंप दिए. इसी तरह हालीशहर के 23 पार्षदों में 16 ने एक साथ इस्तीफा दे दिया. उत्तर बैरकपुर, गारुलिया और डायमंड हार्बर में इस्तीफों का सिलसिला जारी है. कई और नगरपालिकाओं और निगमों में भी टीएमसी पार्षदों ने इस्तीफे दिए हैं. कोलकाता नगर निगम में भी टीएमसी के पार्षद पाला बदलने को बेताब दिखते हैं.

बैठकों व कार्यक्रमों से दूरी

ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद से अब तक जितनी बैठकें की हैं, उनमें पार्टी के सभी विधायक नहीं शामिल हुए. शामिल न होने की कोई वजह बताना भी विधायकों ने मुनासिब नहीं समझा. चूंकि बैठकें टीएमसी चीफ ममता ने बुलाई थीं, इसलिए सबकी उपस्थिति जरूरी थी. खासकर तब, जब पार्टी के सामने अस्तित्व का खतरा पैदा हो गया है. टीएमसी के सांसद भी ममता से दूरी बनाने लगे हैं. चुनाव परिणाम आने के बाद ममता की बुलाई पहली ही बैठक से 10-12 नवनिर्वाचित विधायक नदारद रहे. विरोध प्रदर्शनों में सभी विधायकों की भागीदारी ममता बनर्जी सुनिश्चित नहीं कर पाईं.

अभिषेक के नेतृत्व पर प्रश्न

इतना ही नहीं, अब तो ममता बनर्जी और उनके भतीजे सांसद अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व पर भी सांसद-विधायक खुल कर सवाल उठाने लगे हैं. टीएमसी के सामने 2021 के बाद यह दूसरा बड़ा संकट है. कालीघाट में हुई समीक्षा बैठकों में कुणाल घोष, रितुव्रत बनर्जी जैसे वरिष्ठ विधायकों ने ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के फैसलों पर सीधे सवाल उठाए. विधायकों का मानना है कि बंद कमरों में रणनीति बनाने से पार्टी फिर से मजबूत नहीं होगी. इसके लिए कार्यकर्ताओं को सड़क पर उतरना होगा. बागी नेताओं का आरोप है कि बंद कमरे में आलाकमान द्वारा लिए गए फैसले जबरदस्ती नेताओं पर थोपे गए, जिससे जमीनी स्तर के नेताओं और पार्षदों ने पार्टी से दूरी बनाना शुरू कर दिया है

MP काकोली के तल्ख तेवर

टीएमसी के संकट को इससे भी समझा जा सकता है. ममता ने 4 बार की सांसद काकोली घोष दस्तीदार से लोकसभा में मुख्य सचेतक का पद छीन कर कल्याण बनर्जी को दे दिया. इससे काकोली की नाराज हुईं. ममता का यह फैसला उन्हें पार्टी के भीतर अपना अपमान लगा. भाजपा ने उनकी नाराजगी को भुना लिया. केंद्र सरकार ने काकोली को केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की ‘Y’ श्रेणी की सशस्त्र सुरक्षा मुहैया कराई है. इंटेलिजेंस ब्यूरो की थ्रेट असेसमेंट रिपोर्ट के आधार पर उन्हें यह सुरक्षा दी गई है. सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने अब टीएमसी के लिए राजनीतिक रणनीति बनाने वाली आई-पैक (I-PAC) के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए जिला अध्यक्ष पद से इस्तीफा भी दे दिया है. काकोली की नाराजगी सामान्य बात इसलिए नहीं है कि यह सांसदों में भगदड़ का संकेत हो सकता है. उनकी तरह और भी कई सांसद हैं, जो पार्टी नेतृत्व से नाराज हैं.

सांसदविधायक साथ छोड़ेंगे?

टीएमसी के एक सांसद की बातों पर भरोसा करें तो आने वाले कुछ दिनों में ममता बनर्जी को जोर का झटका लगने वाला है. लोकसभा में टीएमसी के अभी 29 सांसद हैं. लोकसभा में सर्वाधक सांसदों वाली विपक्ष की यह दूसरी पार्टी है. पर, अब यह स्थिति बदलने वाली है. भाजपा से ग्रीन सिग्नल मिला तो झटके में 20-25 लोग पाला बदल सकते हैं. कल्याण बनर्जी, अभिषेक बनर्जी और अन्य एक-दो सांसदों को छोड़ कर बाकी को साथ लेने के लिए भाजपा तैयार है. चर्चा है कि अगले ही महीने भाजपा इसे मूर्त रूप दे सकती है. लोकसभा में अभी भाजपा के 240 सांसद हैं. बहुमत का आंकड़ा 272 का है. अगर टीएमसी के सांसद टूट कर भाजपा के साथ जाते हैं तो भाजपा सांसदों की लोकसभा में संख्या बहमत के आंकड़े के करीब हो सकती है. अभी केंद्र में भाजपा के ही नेतृत्व में सरकार है, लेकिन अकेले बहुमत न रहने के कारण उसे एनडीए के साथी दलों के सहारे सरकार बनानी पड़ी है.