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असम में UCC बिल पास होने के बाद CM हिमंत बिस्वा सरमा का पहला रिएक्शन…

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Assam UCC: सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि असम विधानसभा से यूसीसी बिल पास होना केवल एक कानूनी सुधार नहीं है, बल्कि यह एक अधिक न्यायपूर्ण और एकजुट भविष्य की ओर बढ़ाया गया कदम है.

असम विधानसभा ने बुधवार (27 मई 2026) को समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पास किया. उत्तराखंड और गुजरात के बाद असम अब देश का तीसरा राज्य बन चुका है, जिसने इस कानून को अपनाया है. सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने इस बिल के पास होने के बाद एनडीए के विधायकों को धन्यवाद दिया है.

हर धर्म के लोगों को मिलेगा बराबरी का अधिकारी

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, ‘आज असम विधानसभा में समान नागरिक संहिता बिल पास होने के साथ ही यहां रहने वाले हर धर्म के लोगों को नागरिक मामलों में कानून के सामने बराबरी का अधिकार मिल जाएगा. इस महत्वपूर्ण बिल का पूरा समर्थन करने के लिए मैं एनडीए के सभी विधायकों को दिल से धन्यवाद देता हूं.’

उन्होंने कहा, ‘असम ऐसे सुधारों के साथ आगे बढ़ना जारी रखेगा जो समाज को मजबूत करते हों, महिलाओं को न्याय दिलाते हों, परिवारों की सुरक्षा करते हों और समुदायों के बीच आपसी एकता को बढ़ावा देते हों. असम विधानसभा से यूसीसी बिल पास होना केवल एक कानूनी सुधार नहीं है, बल्कि यह एक अधिक न्यायपूर्ण और एकजुट भविष्य की ओर बढ़ाया गया कदम है. असम के इतिहास में यह एक ऐतिहासिक और बेहद महत्वपूर्ण क्षण है, क्योंकि हम समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने वाले भारत के तीसरे राज्य बन गए हैं. इसके साथ ही हमने हमारे देश के संविधान निर्माताओं की इच्छा को भी पूरा किया है.’

यूसीसी लाने की आवश्यकता क्यों पड़ी: विपक्ष

असम विधानसभा में सोमवार को संसदीय कार्य मंत्री अतुल बोरा ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पेश किया था. सत्ता पक्ष के विधायक और मंत्री यूसीसी को सभी वर्गों के लिए लाभदायक बता रहे हैं. वहीं, विपक्षी दलों के नेता इसका लगातार विरोध कर रहे हैं. कांग्रेस विधायक दल के नेता वाजेद अली चौधरी ने कहा, ‘समान नागरिक संहिता में जिन विषयों का उल्लेख किया गया है, वे पहले से ही अलग-अलग कानूनों के माध्यम से लागू हैं. बाल विवाह, बहुविवाह, विवाह और तलाक का पंजीकरण, गुजारा भत्ता और अन्य मुद्दे विभिन्न कानूनों द्वारा शासित हैं. फिर यूसीसी लाने की आवश्यकता क्यों पड़ी.’