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दिल्ली नहीं इस खूबसूरत शहर में है भारत का राष्ट्रपति निवास, गर्मियों में क्यों होना पड़ता है यहां शिफ्ट?

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दिल्ली की गर्मी से बचने के लिए भारत की राष्ट्रपति हर साल खूबसूरत वादियों में बसे ऑफिशियल भवन में शिफ्ट होती हैं. यह ब्रिटिश काल से चली आ रही है. आइए इस जगह के बारे में जान लेते हैं.

भारत के राष्ट्रपति का आधिकारिक निवास दिल्ली में स्थित ‘राष्ट्रपति भवन’ है, यह तो सभी जानते हैं. लेकिन बहुत कम लोगों को पता है कि देश में एक और राष्ट्रपति निवास भी है, जो दिल्ली की भीषण गर्मी से दूर पहाड़ों की खूबसूरत वादियों में स्थित है. हर साल गर्मियों के मौसम में देश के प्रथम नागरिक का पूरा अमला कुछ दिनों के लिए इस खूबसूरत हिल स्टेशन पर शिफ्ट हो जाता है. पहाड़ों के बीच स्थित इस ऐतिहासिक इमारत का इतिहास बेहद दिलचस्प है और यह परंपरा ब्रिटिश काल से जुड़ी हुई है.

शिमला के मशोबरा में समर रिट्रीट

भारत की राष्ट्रपति हर साल गर्मियों में हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला से करीब 13 किलोमीटर दूर मशोबरा में स्थित राष्ट्रपति निवास में रहने के लिए आती हैं. इसे आधिकारिक तौर पर ‘द रिट्रीट’ (The Retreat) के नाम से जाना जाता है. यह राष्ट्रपति का ऑफिशियल ग्रीष्मकालीन आवास है, जहां वह मैदानी इलाकों की जानलेवा गर्मी से बचने और प्रकृति के बीच समय बिताने के लिए आती हैं. यहां प्रवास के दौरान राष्ट्रपति आराम करने के साथ-साथ देश के प्रशासनिक और सांस्कृतिक कार्यों का संचालन भी यहीं से करती हैं.

ब्रिटिश काल से जुड़ी पुरानी परंपरा

शिमला में गर्मियों के दौरान राष्ट्रपति के ठहरने की यह रीत कोई नई नहीं है, बल्कि इसकी शुरुआत ब्रिटिश शासन के दौरान हुई थी. साल 1863 में जॉन लॉरेंस (John Lawrence) ने शिमला को आधिकारिक रूप से भारत की समर कैपिटल यानी ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया था. इसके बाद साल 1864 से अंग्रेजों का पूरा सरकारी अमला और प्रशासन दिल्ली व कोलकाता की गर्मी से बचने के लिए शिमला शिफ्ट होने लगा. यहां का ठंडा मौसम और शांत पहाड़ी माहौल अंग्रेजों को शासन चलाने के लिए सबसे आदर्श लगता था.

आजादी के बाद हुए बड़े बदलाव

साल 1947 में जब देश आजाद हुआ, तो अंग्रेजों की बनाई कई ऐतिहासिक इमारतें भारत सरकार के अधिकार क्षेत्र में आ गईं. आजादी के शुरुआती सालों में देश के राष्ट्रपतियों का शिमला आना नियमित नहीं था. साल 1951 में देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद इस एस्टेट पर आने वाले पहले भारतीय राष्ट्रपति बने. इसके बाद धीरे-धीरे यह जगह देश के सर्वोच्च पद पर बैठे व्यक्तियों के लिए खास बनती चली गई और यहां हर साल आने का सिलसिला शुरू हो गया.

ऑफिशियल समर रिट्रीट का मिला दर्जा

इस ऐतिहासिक परंपरा को असली और मजबूत पहचान साल 1965 में मिली. तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने मशोबरा में मौजूद इस आलीशान और खूबसूरत भवन को राष्ट्रपति का ऑफिशियल समर रिट्रीट घोषित कर दिया. इसके बाद से हर साल देश के राष्ट्रपति का कुछ दिनों के लिए शिमला आना एक तय और अनिवार्य परंपरा का हिस्सा बन गया. साल 1965 के बाद से देश के लगभग सभी राष्ट्रपतियों ने इस खास परंपरा को बखूबी निभाया है.

देवदार के जंगलों के बीच ऐतिहासिक धरोहर

मशोबरा का यह राष्ट्रपति निवास लगभग 175 साल पुरानी एक भव्य हेरिटेज इमारत है. यह पूरी तरह से घने देवदार के जंगलों और ऊंचे पहाड़ों के बीच स्थित है. इस भवन की सबसे बड़ी खासियत इसकी वास्तुकला है, जिसे पारंपरिक ‘धज्जी’ शैली (लकड़ी और मिट्टी का मिश्रण) से तैयार किया गया है. लकड़ी और मिट्टी से बने होने के कारण यह पूरी इमारत पूरी तरह से भूकंपरोधी है और आज भी पूरी मजबूती के साथ खड़ी है.

आम जनता के लिए खुला महल

हालांकि कुछ सालों में सुरक्षा कारणों, स्वास्थ्य समस्याओं या बेहद व्यस्त शेड्यूल की वजह से राष्ट्रपति का दौरा टल भी गया, लेकिन यह परंपरा कभी बंद नहीं हुई. इस ऐतिहासिक भवन से जुड़ी एक और बड़ी बात यह है कि अब इस राष्ट्रपति निवास को आम जनता और देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए भी पूरी तरह खोल दिया गया है. अब कोई भी पर्यटक ऑनलाइन या ऑफलाइन टिकट बुक करके इस बेहद खूबसूरत और सुरक्षित परिसर को करीब से देख सकता है.