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AI बना युद्ध का हथियार, अमेरिका और इजरायल पर अटैक के लिए ईरान कर रहा ChatGPT और Gemini का यूज…

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अमेरिका के साथ जारी बातचीत के बीच ईरान साइबर हमलों के लिए चैटजीपीटी और जेमिनी जैसे एआई टूल्स को यूज कर रहा है. वह इनके जरिए अमेरिका और इजरायल को टारगेट कर रहा है.

अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम बढ़ाने के लिए जारी बातचीत को लेकर अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है. इसी बीच एक नई जानकारी आई है, जिसके मुताबिक, अमेरिका और इजरायल पर साइबर अटैक करने के लिए ईरान एआई टूल्स को यूज कर रहा है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान के हैकर्स चैटजीपीटी, जेमिनी आदि मॉडल्स से मालवेयर और फिशिंग मैसेज तैयार कर अमेरिका और इजरायल को टारगेट कर रहे हैं. बता दें कि यह पहली बार नहीं है, जब युद्ध में एआई को इस्तेमाल किया जा रहा है. इससे पहले भी टारगेट डिसाइड करने के लिए एडवांस्ड एआई टूल्स के इस्तेमाल की खबरें सामने आई थीं.

कैसे हो रहा है एआई का यूज?

बतौर रिपोर्ट्स, ईरानी हैकर्स एआई की मदद से अपनी नई पहचान बनाकर संभावित टारगेट के साथ बातचीत शुरू करते हैं. एक बार भरोसा जीतने के बाद वो उन्हें फर्जी लिंक और रिक्वेस्ट्स भेजते हैं. बताया जा रहा है कि इजरायल में इस तरह बड़ी संख्या में लोगों को फिशिंग ईमेल और टेक्स्ट मैसेज भेजकर टारगेट किया गया. इनमें से कई लोगों को ईरान की खुफिया एजेंसियों के साथ सहयोग करने के लिए इन्वाइट किया गया. वहीं यूएई ने भी पिछले महीने बताया था कि रोजाना उस पर करीब 5 लाख साइबर अटैक हो रहे हैं और इनमें से कई चैटजीपीटी जैसे टूल्स की मदद लेकर किए जा रहे हैं.

हमलों में भी ली जा रही एआई की मदद

ईरान एआई को सिर्फ साइबर अटैक्स और ऑनलाइन स्कैम्स के लिए ही यूज नहीं कर रहा है. रिपोर्ट्स बताती हैं कि इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वॉरफेयर, कमांड सेंटर में फैसले लेने, अंडरवाटर टारगेटिंग सिस्टम और ड्रोन गाइडेंस में भी एआई को इस्तेमाल किया जा रहा है. इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने दावा किया है कि उसकी कुछ क्रूज मिसाइलों में एआई-असिस्टेड गाइडेंस सिस्टम लगा है. साथ ही ईरान पश्चिमी देशों की मिलिट्री रिसर्च पढ़ने और समझने में भी एआई टूल्स की मदद ले रहा है.

अपना एआई इकोसिस्टम भी तैयार कर रहा है ईरान

एआई की मदद लेने के साथ-साथ ईरान अपना खुद का एआई इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार कर रहा है. इसमें ओपन-सोर्स और लोकल कंपनियों के बनाए गए मॉडल्स को यूज किया जा रहा है. दरअसल, अमेरिकी कंपनियों को इस बात की जानकारी है कि उनके टूल्स को ईरान यूज कर रहा है. गूगल ने इसे रोकने के लिए कई अकाउंट्स रिमूव किए थे, लेकिन नए अकाउंट्स बड़ी संख्या में क्रिएट किए जा रहे हैं.