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मानसून की रफ्तार पर क्यों लगा ब्रेक! 28 फीसदी कम बारिश, झुलसा रही गर्मी, जान लीजिए क्या है वजह…

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जून के दूसरे सप्ताह तक देशभर में बारिश का जो दौर तेज होना चाहिए था, वह फिलहाल धीमा पड़ता दिखाई दे रहा है. आईएमडी के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 4 जून से 14 जून के बीच देश में सामान्य से 28 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है. यही वजह है कि मौसम वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ गई है और किसान भी आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं.

आईएमडी के अनुसार, इस अवधि में देश में औसतन 47.7 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन वास्तविक वर्षा केवल 34.3 मिमी दर्ज की गई. आंकड़े साफ संकेत दे रहे हैं कि मानसून की रफ्तार फिलहाल कमजोर पड़ गई है और इसका असर देश के बड़े हिस्से में दिखाई दे रहा है.

कारण है जेट स्ट्रीम

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि समस्या नमी की कमी नहीं है. असली कारण ऊपरी वायुमंडल में बन रही एक असामान्य स्थिति है, जिसने मानसून की सामान्य प्रक्रिया को प्रभावित कर दिया है.

इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में पश्चिमी जेट स्ट्रीम है. यह ऊपरी वायुमंडल में बहने वाली तेज गति की वायु धारा होती है. इस बार यह सामान्य स्थिति से अधिक दक्षिण की ओर खिसक गई है. इसके कारण ऊपरी स्तर की पूर्वी जेट वायु धारा दब गई है, जो भारतीय मानसून को गति देने में अहम भूमिका निभाती है.

नतीजा यह हुआ कि बंगाल की खाड़ी में बनने वाली मौसम प्रणालियां देश के अंदरूनी हिस्सों तक प्रभावी ढंग से आगे नहीं बढ़ पा रही हैं. बारिश लाने वाले सिस्टम या तो कमजोर पड़ रहे हैं या फिर सीमित क्षेत्रों तक सिमटकर रह जा रहे हैं. इससे नमी का वितरण प्रभावित हो रहा है और कई राज्यों में अपेक्षित बारिश नहीं हो पा रही है.

यहां आकर 5 दिनों से थम गया है मानसून
मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून पिछले पांच दिनों से कोंकण के हरने और मध्य महाराष्ट्र के सोलापुर क्षेत्र से आगे नहीं बढ़ पाया है. आमतौर पर जून के मध्य तक मानसून राज्य के बड़े हिस्से को कवर कर लेता है, लेकिन इस बार इसकी रफ्तार रुक गई है.

हालांकि मौसम विभाग ने 18 जून के बाद हालात में बदलाव की संभावना जताई है पूर्वानुमान के मुताबिक 18 जून से 2 जुलाई के बीच महाराष्ट्र के कई हिस्सों में मानसून दोबारा सक्रिय हो सकता है और आगे बढ़ने की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है इससे राज्य के उन क्षेत्रों को राहत मिल सकती है, जहां किसान बारिश का इंतजार कर रहे हैं.

अगले 4-5 दिनों में मानसून को मिल सकती है नई ताकत

मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान में उम्मीद की किरण भी दिखाई दे रही है. विभाग का कहना है कि अगले 4 से 5 दिनों के दौरान दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बन रही हैं.

इन परिस्थितियों के चलते महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड, बिहार और दक्षिण छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में मानसून आगे बढ़ सकता है. यदि यह अनुमान सही साबित होता है तो देश के बड़े हिस्से में बारिश की गतिविधियां तेज हो सकती हैं और मौजूदा वर्षा घाटा कुछ हद तक कम हो सकता है.

पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

जहां देश के कई हिस्से बारिश की कमी से जूझ रहे हैं, वहीं पूर्वोत्तर भारत और पूर्वी हिमालयी क्षेत्र में भारी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है. मौसम विभाग ने अगले 6 से 7 दिनों के दौरान उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है.

इस तरह एक ओर देश का बड़ा हिस्सा मानसून की धीमी रफ्तार से परेशान है, तो दूसरी ओर पूर्वोत्तर राज्यों में बारिश अपनी पूरी ताकत दिखा रही है.  मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि 18 से 20 जून के बीच बनने वाली नई मौसम परिस्थितियां ही तय करेंगी कि मानसून देशभर में अपनी खोई हुई रफ्तार कितनी जल्दी वापस हासिल कर पाता है.